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July 25, 2026

Key line times

Key Line Times राष्ट्रीय हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र है जो राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होता है एंव भारत सरकार के सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आर.एन.आई. से रजिस्ट्रड है। इसका आर.एन.आई.न. DELHIN/2017/72528 है। यह समाचार पत्र 2017 से लगातार प्रकाशित हो रहा है।
रायपुर के सिटीजन स्कूल के शिक्षकों एवं छात्रों का हुआ सम्मान…विनोद जैन सांखला, Key Line Times रायपुर, छत्तीसगढ़ शिक्षा जागृति संघ रायपुर द्वारा 5 सितंबर गुरुवार को मुख्य अतिथि श्री राजेश जी मूणत विधायक रायपुर पश्चिम द्वारा सिटीजन स्कूल के प्राचार्य श्रीमती नवनीत जैन व टीचर श्रीमती पुष्पा साहू एवं श्रीमती अंजनी यादव को छात्रों के प्रति समर्पण भावना एवं उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो द्वारा सम्मान किया गया इसी कड़ी में शाला के गौरवंतित छात्र सर्वश्रेष्ठ अंक प्राप्त करने वाले हुनर निर्मलकर एवं सोनाक्षी प्रधान को मुख्य अतिथि श्री राजेश जी मूणत द्वारा मेडल पहनाकर सम्मान किया गया एवं छात्रों को निरंतर आगे बढ़ने की सिख दी गई इस अवसर पर हमारे शाला के छात्रों द्वारा मनमोहक छत्तीसगढ़ी ग्रुप डांस भी प्रस्तुत किया गया जिसे सभी ने साराहा उक्त जानकारी छत्तीसगढ़ शिक्षा जागृति संघ के प्रचार प्रसार मंत्री श्री विनोद जैन द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में दी

रायपुर के सिटीजन स्कूल के शिक्षकों एवं छात्रों का हुआ सम्मान…विनोद जैन सांखला, Key Line Times रायपुर, छत्तीसगढ़ शिक्षा जागृति संघ रायपुर द्वारा 5 सितंबर गुरुवार को मुख्य अतिथि श्री राजेश जी मूणत विधायक रायपुर पश्चिम द्वारा सिटीजन स्कूल के प्राचार्य श्रीमती नवनीत जैन व टीचर श्रीमती पुष्पा साहू एवं श्रीमती अंजनी यादव को छात्रों के प्रति समर्पण भावना एवं उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो द्वारा सम्मान किया गया इसी कड़ी में शाला के गौरवंतित छात्र सर्वश्रेष्ठ अंक प्राप्त करने वाले हुनर निर्मलकर एवं सोनाक्षी प्रधान को मुख्य अतिथि श्री राजेश जी मूणत द्वारा मेडल पहनाकर सम्मान किया गया एवं छात्रों को निरंतर आगे बढ़ने की सिख दी गई इस अवसर पर हमारे शाला के छात्रों द्वारा मनमोहक छत्तीसगढ़ी ग्रुप डांस भी प्रस्तुत किया गया जिसे सभी ने साराहा उक्त जानकारी छत्तीसगढ़ शिक्षा जागृति संघ के प्रचार प्रसार मंत्री श्री विनोद जैन द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में दी

तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में क्षमापना दिवस का हुआ आयोजन …सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times सोमवार, वेसु, सूरत (गुजरात) आठ दिनों के आध्यात्मिक, साधनात्मक समृद्धि को बढ़ाने वाले और अपनी आत्मा का कल्याण करने वाले महापर्व पर्युषण के शिखर दिवस भगवती संवत्सरी के बाद का सूर्योदय जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में क्षमापना दिवस के रूप में समायोजित हुआ। एक दिवसीय उपवास के बाद संयम विहार परिसर में ही रहने वाले श्रद्धालु जनता के अलवा डायमण्डल सिटि सूरत में रहने वाले श्रद्धालु भी अपनी मन की गांठों को खोलने व क्षमापना पर्व को मनाने के लिए सोमवार को सूर्योदय से पूर्व ही पहुंच गए थे। जनाकीर्ण बने संयम विहार के महावीर समवसरण में सूर्योदय के आसपास मंच पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी पधारे प्रातःकाल का निरव वातावरण भी श्रद्धालुओं के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। शांतिदूत आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को प्रातःकाल बृहद् मंगलपाठ प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री संजय सुराणा ने सभी संस्थाओं आदि की ओर से आचार्यश्री तथा समस्त चारित्रात्माओं से खमतखामणा की। साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी व मुख्यमुनिश्री ने जनता को उद्बोधित किया। तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने क्षमापना दिवस पर उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि प्रश्न किया गया है कि क्षमापना से जीव को क्या मिलता है? उत्तर दिया गया है कि क्षमापना से प्रह्लाद भाव अर्थात् प्रसन्नता प्रकट होता है और सभी जीवों के प्रति मनुष्य मैत्री भाव उत्पन्न कर लेता है। इससे आदमी का भाव शुद्ध हो जाते हैं तथा इससे जीव निर्भय बन जाता है। हमने पर्युषण महापर्व की आराधना की। कल का दिन शिखर दिवस भगवती संवत्सरी के रूप में पदार्पण हुआ, जिसकी भी आराधना हुई। कितने के चौविहार व तिविहार आदि-आदि उपवास का क्रम भी रहा होगा। हम सभी इंसान हैं तो वर्ष में बातचीत करने में, किसी अन्य प्रसंग में भी किसी से कटु व्यवहार हो सकता है। इस दिन से पुराने सभी बातों को धो दिया जाता है। क्षमा का यह पर्व बहुत महत्त्वपूर्ण है। यह विश्वमैत्री की प्रतीक हो सकता है। मेरा संदेश है कि अंतर्राष्ट्रीय मैत्री दिवस भी आयोजित हो जाए तो पूरे विश्व में मैत्री का माहौल बने, ऐसा प्रयास किया जा सकता है। चौरासी लाख जीव योनियों से व्यावहारिक रूप में खमतखामणा का प्रावधान है। मंगल प्रवचन के साथ ही आचार्यश्री ने खमतखामणा का क्रम प्रारम्भ किया तो सर्वप्रथम साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया। आचार्यश्री ने समस्त साध्वीवृंद, समणीवृंद से भी खमतखामणा की तथा मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। देश भर में प्रवासित साध्वियों व देश-विदेश में प्रवासित समणियों से खमतखामणा की। इस प्रकार आचार्यश्री ने मुमुक्षु बहनों, श्राविकाओं से खमतखामणा की। आचार्यश्री ने पुरुष वर्ग में सर्वप्रथम मुख्यमुनिश्री से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमुनिश्री ने अपने सुगुरु के चरणों की वंदना की। आचार्यश्री ने गुरुकुलवास में दीक्षा पर्याय में सबसे बड़े मुनिश्री धर्मरुचिजी, मुनिश्री उदितकुमारजी से खमतखामणा की। इसके बाद समस्त संतों से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। बहिर्विहारी संतों से भी खमतखामणा करने के उपरान्त श्रावक समाज से भी खमतखामणा की। मुमुक्षु भाइयों, उपासक श्रेणी, सम्पूर्ण श्रावक समाज तथा केन्द्रीय संस्थाओं के पदाधिकारियों व उनके कर्मचारियों से खमतखामणा की। जैन शासन के अन्य साधु-साध्वियों, धर्मगुरुओं, राजनेताओं आदि से भी खमतखामणा की। आचार्यश्री ने चारित्रात्माओं को एक-एक उपवास की आलोयणा प्रदान की तथा श्रावक-श्राविकाओं को एक वर्ष में तीन उपवास की आलोयणा बताई। परम पूज्य कालूगणी के महाप्रयाण के अवसर आचार्यश्री ने उनको श्रद्धा के साथ वंदन किया। तदुपरान्त साधु-साध्वियों ने बारी-बारी से आचार्यश्री से खमतखामणा की। तदुपरान्त साधु-साध्वियों ने आपस में खमतखामणा की। श्रावक-श्राविकाओं आचार्यश्री से तथा परस्पर भी खमतखामणा की।

तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में क्षमापना दिवस का हुआ आयोजन …सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times सोमवार, वेसु, सूरत (गुजरात) आठ दिनों के आध्यात्मिक, साधनात्मक समृद्धि को बढ़ाने वाले और अपनी आत्मा का कल्याण करने वाले महापर्व पर्युषण के शिखर दिवस भगवती संवत्सरी के बाद का सूर्योदय जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में क्षमापना दिवस के रूप में समायोजित हुआ। एक दिवसीय उपवास के बाद संयम विहार परिसर में ही रहने वाले श्रद्धालु जनता के अलवा डायमण्डल सिटि सूरत में रहने वाले श्रद्धालु भी अपनी मन की गांठों को खोलने व क्षमापना पर्व को मनाने के लिए सोमवार को सूर्योदय से पूर्व ही पहुंच गए थे। जनाकीर्ण बने संयम विहार के महावीर समवसरण में सूर्योदय के आसपास मंच पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी पधारे प्रातःकाल का निरव वातावरण भी श्रद्धालुओं के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। शांतिदूत आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को प्रातःकाल बृहद् मंगलपाठ प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री संजय सुराणा ने सभी संस्थाओं आदि की ओर से आचार्यश्री तथा समस्त चारित्रात्माओं से खमतखामणा की। साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी व मुख्यमुनिश्री ने जनता को उद्बोधित किया। तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने क्षमापना दिवस पर उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि प्रश्न किया गया है कि क्षमापना से जीव को क्या मिलता है? उत्तर दिया गया है कि क्षमापना से प्रह्लाद भाव अर्थात् प्रसन्नता प्रकट होता है और सभी जीवों के प्रति मनुष्य मैत्री भाव उत्पन्न कर लेता है। इससे आदमी का भाव शुद्ध हो जाते हैं तथा इससे जीव निर्भय बन जाता है। हमने पर्युषण महापर्व की आराधना की। कल का दिन शिखर दिवस भगवती संवत्सरी के रूप में पदार्पण हुआ, जिसकी भी आराधना हुई। कितने के चौविहार व तिविहार आदि-आदि उपवास का क्रम भी रहा होगा। हम सभी इंसान हैं तो वर्ष में बातचीत करने में, किसी अन्य प्रसंग में भी किसी से कटु व्यवहार हो सकता है। इस दिन से पुराने सभी बातों को धो दिया जाता है। क्षमा का यह पर्व बहुत महत्त्वपूर्ण है। यह विश्वमैत्री की प्रतीक हो सकता है। मेरा संदेश है कि अंतर्राष्ट्रीय मैत्री दिवस भी आयोजित हो जाए तो पूरे विश्व में मैत्री का माहौल बने, ऐसा प्रयास किया जा सकता है। चौरासी लाख जीव योनियों से व्यावहारिक रूप में खमतखामणा का प्रावधान है। मंगल प्रवचन के साथ ही आचार्यश्री ने खमतखामणा का क्रम प्रारम्भ किया तो सर्वप्रथम साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया। आचार्यश्री ने समस्त साध्वीवृंद, समणीवृंद से भी खमतखामणा की तथा मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। देश भर में प्रवासित साध्वियों व देश-विदेश में प्रवासित समणियों से खमतखामणा की। इस प्रकार आचार्यश्री ने मुमुक्षु बहनों, श्राविकाओं से खमतखामणा की। आचार्यश्री ने पुरुष वर्ग में सर्वप्रथम मुख्यमुनिश्री से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमुनिश्री ने अपने सुगुरु के चरणों की वंदना की। आचार्यश्री ने गुरुकुलवास में दीक्षा पर्याय में सबसे बड़े मुनिश्री धर्मरुचिजी, मुनिश्री उदितकुमारजी से खमतखामणा की। इसके बाद समस्त संतों से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। बहिर्विहारी संतों से भी खमतखामणा करने के उपरान्त श्रावक समाज से भी खमतखामणा की। मुमुक्षु भाइयों, उपासक श्रेणी, सम्पूर्ण श्रावक समाज तथा केन्द्रीय संस्थाओं के पदाधिकारियों व उनके कर्मचारियों से खमतखामणा की। जैन शासन के अन्य साधु-साध्वियों, धर्मगुरुओं, राजनेताओं आदि से भी खमतखामणा की। आचार्यश्री ने चारित्रात्माओं को एक-एक उपवास की आलोयणा प्रदान की तथा श्रावक-श्राविकाओं को एक वर्ष में तीन उपवास की आलोयणा बताई। परम पूज्य कालूगणी के महाप्रयाण के अवसर आचार्यश्री ने उनको श्रद्धा के साथ वंदन किया। तदुपरान्त साधु-साध्वियों ने बारी-बारी से आचार्यश्री से खमतखामणा की। तदुपरान्त साधु-साध्वियों ने आपस में खमतखामणा की। श्रावक-श्राविकाओं आचार्यश्री से तथा परस्पर भी खमतखामणा की।

तमिलनाडु के मदुरै मे यातायात नियंत्रण के लिए लगाये गये स्वचालित सिग्नल यंत्र…सतीश जैन,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times तमिलनाडु,मदुरै शहर में यातायात को नियंत्रित करने के लिए स्वचालित सिग्नल स्थापित किए गए हैं और अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। इसकी निरंतरता में, 06.09.2024 को आज रुमम्पुचला जंक्शन पर एक नई स्वचालित सिल का उपयोग किया जाएगा। रुमापुचला जंक्शन मदुरै शहर के पश्चिमी प्रवेश द्वार और केरल राज्य के थेनी जिले के राजमार्ग के मुख्य हिस्सों में से एक है और मुख्य बिंदु है जहां मदुरै उपनगरों से शहर में वाहन आते हैं। कन्याकुमारी श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से मदुरै शहर के लिए मुख्य वाहन मार्ग भी है। थेनी रोड, डुवारिमन रोड और कलावासल जंक्शन को जोड़ने वाले तीन-तरफ़ा जंक्शन पर मौजूदा वाहन यातायात को भी कम करें। दुर्घटनाओं को रोकने और क्षेत्र में अपराध की निगरानी के लिए एक यातायात स्वचालित सिग्नल और एक आधुनिक पुलिस सहायता डेस्क स्थापित की गई है। इसके अलावा, यातायात को विनियमित करने में मदद करने, लाउडस्पीकर के माध्यम से जनता और मोटर चालकों को दुर्घटनाओं और सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता प्रदान करने और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से यातायात उल्लंघन की घटनाओं और अपराधों की निगरानी करने के लिए एक स्वचालित सिग्नल पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किया गया है। 1. तीन प्राथमिक सिग्नल पोस्ट और दो द्वितीयक सिग्नल पोस्ट टाइमर सुविधाओं के साथ, 2. आधुनिक पुलिस बूथ जिसमें मॉनिटर और यूपीएस बैटरी के साथ पांच सीसीटीवी आईपी कैमरे हैं, 3. 51 पोल और स्पीकर के साथ पीए सिस्टम, 4. टेबल, कुर्सियाँ और पानी की सुविधा, 5. तीन रंग की एलईडी स्ट्रिप्स की व्यवस्था की गई है ताकि सिग्नल के रंग के अनुसार सिग्नल चमकें। उपरोक्त सुविधाओं के साथ यातायात सुधार उपकरण सी इसमें आधुनिक यातायात स्वचालित सिग्नल और आधुनिक पुलिस सहायता शामिल है मदुरै मेट्रोपॉलिटन पुलिस उपरोक्त उल्लिखित सुविधाओं के साथ एक आधुनिक यातायात स्वचालन और आधुनिक पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किया जाएगा और श्री जे. लोकनाथन, पुलिस आयुक्त के आदेश से 06.09.2024 (शुक्रवार) को जनता और मोटर चालकों के उपयोग के लिए खोला और चालू किया जाएगा। , मदुरै शहर। साथ ही मदुरै मेट्रोपॉलिटन पुलिस की ओर से अनुरोध किया गया है कि यातायात नियमों का पालन करें, शहर में बिना तेज गति के यात्रा करें, दुर्घटनाओं से बचने के लिए वाहन चलाएं और दुर्घटना मुक्त शहर बनाएं।

तमिलनाडु के मदुरै मे यातायात नियंत्रण के लिए लगाये गये स्वचालित सिग्नल यंत्र…सतीश जैन,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times तमिलनाडु,मदुरै शहर में यातायात को नियंत्रित करने के लिए स्वचालित सिग्नल स्थापित किए गए हैं और अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। इसकी निरंतरता में, 06.09.2024 को आज रुमम्पुचला जंक्शन पर एक नई स्वचालित सिल का उपयोग किया जाएगा। रुमापुचला जंक्शन मदुरै शहर के पश्चिमी प्रवेश द्वार और केरल राज्य के थेनी जिले के राजमार्ग के मुख्य हिस्सों में से एक है और मुख्य बिंदु है जहां मदुरै उपनगरों से शहर में वाहन आते हैं। कन्याकुमारी श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से मदुरै शहर के लिए मुख्य वाहन मार्ग भी है। थेनी रोड, डुवारिमन रोड और कलावासल जंक्शन को जोड़ने वाले तीन-तरफ़ा जंक्शन पर मौजूदा वाहन यातायात को भी कम करें। दुर्घटनाओं को रोकने और क्षेत्र में अपराध की निगरानी के लिए एक यातायात स्वचालित सिग्नल और एक आधुनिक पुलिस सहायता डेस्क स्थापित की गई है। इसके अलावा, यातायात को विनियमित करने में मदद करने, लाउडस्पीकर के माध्यम से जनता और मोटर चालकों को दुर्घटनाओं और सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता प्रदान करने और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से यातायात उल्लंघन की घटनाओं और अपराधों की निगरानी करने के लिए एक स्वचालित सिग्नल पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किया गया है। 1. तीन प्राथमिक सिग्नल पोस्ट और दो द्वितीयक सिग्नल पोस्ट टाइमर सुविधाओं के साथ, 2. आधुनिक पुलिस बूथ जिसमें मॉनिटर और यूपीएस बैटरी के साथ पांच सीसीटीवी आईपी कैमरे हैं, 3. 51 पोल और स्पीकर के साथ पीए सिस्टम, 4. टेबल, कुर्सियाँ और पानी की सुविधा, 5. तीन रंग की एलईडी स्ट्रिप्स की व्यवस्था की गई है ताकि सिग्नल के रंग के अनुसार सिग्नल चमकें। उपरोक्त सुविधाओं के साथ यातायात सुधार उपकरण सी इसमें आधुनिक यातायात स्वचालित सिग्नल और आधुनिक पुलिस सहायता शामिल है मदुरै मेट्रोपॉलिटन पुलिस उपरोक्त उल्लिखित सुविधाओं के साथ एक आधुनिक यातायात स्वचालन और आधुनिक पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किया जाएगा और श्री जे. लोकनाथन, पुलिस आयुक्त के आदेश से 06.09.2024 (शुक्रवार) को जनता और मोटर चालकों के उपयोग के लिए खोला और चालू किया जाएगा। , मदुरै शहर। साथ ही मदुरै मेट्रोपॉलिटन पुलिस की ओर से अनुरोध किया गया है कि यातायात नियमों का पालन करें, शहर में बिना तेज गति के यात्रा करें, दुर्घटनाओं से बचने के लिए वाहन चलाएं और दुर्घटना मुक्त शहर बनाएं।

साउथ हावडा मे पर्युषण पर्व का सांतवा दिन ध्यान के रुप में मनाया….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times साउथ हावड़ा, आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में प्रेक्षा विहार में पर्युषण पर्व का सातवां दिन ध्यान दिवस के रूप में साउथ हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुनि श्री जिनेशकुमार जी ने कहा – आत्म शुद्धि के दो उपाय है. स्वाध्याय और ध्यान । ध्यान एक नई स्फूर्ति देता है। ध्यान जीने की कला है और जीवन का मूल्यवान पक्ष है। ध्यान के द्वारा किसी को साधा जा सकता है। ध्यान साधान है।, साध्य नहीं है। साध्य तो मोक्ष है। ध्यान के समान कोई पाप का शोधन करने वाला नहीं है। ध्यान आभ्यन्तर तप है। ध्यान संजीवनी बूटी है। ध्यान से देह की, गेह की, स्नेह की आसक्ति दूर होती है। विचारों में अनाग्रह का भाव आता है। ध्यान से व्यक्ति के जीवन में असंग्रह की भावना पैदा होती है। आचरण में अहिंसा का विकास होता है। ध्यान से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। ध्यान में एक ध्यान है- प्रेक्षा ध्यान। प्रेक्षाध्यान ज्योति है, प्रकाश है। गहराई से से देखना ही प्रेक्षाध्यान है। योगों का स्थिरीकरण ध्यान है। मुनिश्री ने आगे कहा आज की भाषा में ध्यान के पांच हेतु है। तनाव मुक्ति मन: प्रसाद, संवेग नियंत्रण, संतोष, अन्तर्दृष्टि का जागरण है। ध्यान का जन्म कषाय, आसक्ति के त्याग से व्रत नियम धारणा व इन्दिय और मन के विजय से होता है गुरुदेव तुलसी की सन्निधि में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने प्रेक्षाध्यान का शुभारंभ किया। ध्यान दिवस पर इतना ही कहना चाहता हूं सभी भाई बहिन प्रेक्षा ध्यान की साधना के द्वारा जीवन को रुपान्तरित करें। मुनि श्री परमानंदजी ने पौषध व्रत के बारे में बताते हुए पौषध की प्रेरणा दी। इस अवसर पर बाल मुनिश्री कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान करते हुए प्रेक्षा ध्यान की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल उत्तर हावड़ा के मंगलाचरण से हुआ। प्रेक्षा प्रशिक्षक – प्रशिक्षिकाओं ने प्रेक्षा गीत का संगान किया। कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री परमानंदजी ने किया।

साउथ हावडा मे पर्युषण पर्व का सांतवा दिन ध्यान के रुप में मनाया….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times साउथ हावड़ा, आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में प्रेक्षा विहार में पर्युषण पर्व का सातवां दिन ध्यान दिवस के रूप में साउथ हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुनि श्री जिनेशकुमार जी ने कहा – आत्म शुद्धि के दो उपाय है. स्वाध्याय और ध्यान । ध्यान एक नई स्फूर्ति देता है। ध्यान जीने की कला है और जीवन का मूल्यवान पक्ष है। ध्यान के द्वारा किसी को साधा जा सकता है। ध्यान साधान है।, साध्य नहीं है। साध्य तो मोक्ष है। ध्यान के समान कोई पाप का शोधन करने वाला नहीं है। ध्यान आभ्यन्तर तप है। ध्यान संजीवनी बूटी है। ध्यान से देह की, गेह की, स्नेह की आसक्ति दूर होती है। विचारों में अनाग्रह का भाव आता है। ध्यान से व्यक्ति के जीवन में असंग्रह की भावना पैदा होती है। आचरण में अहिंसा का विकास होता है। ध्यान से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। ध्यान में एक ध्यान है- प्रेक्षा ध्यान। प्रेक्षाध्यान ज्योति है, प्रकाश है। गहराई से से देखना ही प्रेक्षाध्यान है। योगों का स्थिरीकरण ध्यान है। मुनिश्री ने आगे कहा आज की भाषा में ध्यान के पांच हेतु है। तनाव मुक्ति मन: प्रसाद, संवेग नियंत्रण, संतोष, अन्तर्दृष्टि का जागरण है। ध्यान का जन्म कषाय, आसक्ति के त्याग से व्रत नियम धारणा व इन्दिय और मन के विजय से होता है गुरुदेव तुलसी की सन्निधि में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने प्रेक्षाध्यान का शुभारंभ किया। ध्यान दिवस पर इतना ही कहना चाहता हूं सभी भाई बहिन प्रेक्षा ध्यान की साधना के द्वारा जीवन को रुपान्तरित करें। मुनि श्री परमानंदजी ने पौषध व्रत के बारे में बताते हुए पौषध की प्रेरणा दी। इस अवसर पर बाल मुनिश्री कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान करते हुए प्रेक्षा ध्यान की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल उत्तर हावड़ा के मंगलाचरण से हुआ। प्रेक्षा प्रशिक्षक – प्रशिक्षिकाओं ने प्रेक्षा गीत का संगान किया। कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री परमानंदजी ने किया।

🌸 *पर्युषण पर्वाधिराज : सातवां दिवस ध्यान दिवस के रूप में समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) ,पर्युषण महापर्व का सातवां दिवस। ध्यान दिवस का समायोजन। महावीर समवसरण में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तीर्थ एवं तीर्थंकरों पर चर्चा के संदर्भ में भगवान पार्श्वनाथ के जीवनवृत्त को मुनि पार्श्वकुमारजी व मुनि केशीकुमारजी ने प्रस्तुति दी। दस धर्मों में एक ब्रह्मचर्य धर्म पर साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। ब्रह्मचर्य धर्म पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने गीत का संगान किया। साध्वी स्तुतिप्रभाजी ने ध्यान दिवस पर गीत का संगान किया। ध्यान दिवस पर साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने ध्यान के महत्त्व को व्याख्यायित किया। जन-जन को मानवता का संदेश प्रदान करने वाले युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ के वर्णन के साथ जोड़ते हुए भगवान महावीर की आत्मा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में गर्भस्थ होती है। भगवान महावीर के पांच प्रसंग एक ही नक्षत्र में सम्पन्न हुए। प्रभु महावीर की आत्मा दशम देवलोक से च्युत हुई तब चौथे अर का अंतिम समय था। उस समय आषाढ़ शुक्ला षष्ठी को वैशाली नगरी के उपनगर ब्राह्मणकुण्ड नामक गांव में ऋषभदत्त नामक ब्राह्मण की पत्नी देवानंदा के गर्भ में गर्भस्थ होती है। पुनः इन्द्र के निर्देश पर देवानंदा के गर्भ को क्षत्रीय सिद्धार्थ की पत्नी त्रिशला की गर्भ में स्थापित किया और त्रिशला के गर्भ को देवानंदा के गर्भ में स्थापित कर दिया गया। शिशु का विकास अब त्रिशला के गर्भ में हो रहा है। गर्भस्थ शिशु मां को कष्ट न हो इसके लिए अपना हलन-चलन बंद कर किया तो मां दुःखी हो गयी। मां को दुःखी देख बालक ने पुनः अपना हलन-चलन प्रारम्भ कर दिया। माता-पिता कितने उपकारी होते हैं। उस शिशु ने गर्भ में ही यह प्रतिज्ञा कर ली कि माता-पिता के संसार में रहते हुए साधु दीक्षा नहीं स्वीकार करूंगा। चैत्र शुक्ला त्रयोदशी को रात्रि में जन्म हुआ। बालक के जन्मोत्सव मनाया गया। आचार्यश्री ने ध्यान दिवस के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि ध्यान अपने आप में साधना है। हमारे यहां प्रेक्षाध्यान की पद्धति प्रचलित है। 30 सितम्बर को प्रेक्षाध्यान दिवस पर प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष का शुभारम्भ होने वाला है। प्रेक्षाध्यान दिवस गुरुदेव तुलसी के शासनकाल में व मुनि नथमलजी (टमकोर) के योगदान से प्रारम्भ हुआ। वह केवल तेरापंथ के लिए नहीं, जैन-अजैन सभी के लिए कारगर बना। प्रेक्षाध्यान साधना का एक उपक्रम है। आज भी कितने लोग ध्यान का प्रयोग करने वाले होंगे। अनेक रूपों में ध्यान हो सकता है। दीर्घश्वास, समताल, शरीर प्रेक्षा, अनुप्रेक्षा, कायोत्सर्ग आदि अनेक विधियां हैं। आदमी अपने जीवन में यथायोग्य ध्यान का भी अभ्यास करें, यह काम्य है। पर्युषण के शिखर दिवस के संदर्भ में प्रेरणा देते हुए आचार्य श्री ने आगे कहा की कल महान दिन है। भगवती संवत्सरी का दिन है। वह पर्युषण का मानों सरताज दिन है। उसे आध्यात्मिक रूप में मनाने का प्रयास होना चाहिए। चारित्रात्माओं को तो उस दिन चौविहार उपवास रखना होता ही है। इसके साथ श्रावक-श्राविकाएं भी उपवास करते हैं। इससे छोटे बालकों को भी संयम के साथ यथासंभव जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने आवश्यक जानकारी भी दी। *भगवती संवत्सरी कल : उपवास, तपस्या, प्रतिक्रमण द्वारा आराधना* आचार्य श्री के सान्निध्य में कल संवत्सरी महापर्व मनाया जायेगा। जिसके तहत धर्मावलाबी चौविहार, तिविहार उपवास करेंगे। साथ ही सैकड़ों तपस्वियों द्वारा अठाई तप का प्रत्याख्यान किया जायेगा। प्रातः 07 बजे से महावीर समवसरण में प्रवचन कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएगा जिसके तहत आचार्यश्री एवं अन्य साधु-साध्वियों जैन इतिहास, दर्शन, तत्व आदि पर वक्तव्य देंगे। हजारों श्रावक–श्राविकाएं पौषध द्वारा भी संयम विहार में रहकर धर्म आराधना करेंगे।

🌸 *पर्युषण पर्वाधिराज : सातवां दिवस ध्यान दिवस के रूप में समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) ,पर्युषण महापर्व का सातवां दिवस। ध्यान दिवस का समायोजन। महावीर समवसरण में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तीर्थ एवं तीर्थंकरों पर चर्चा के संदर्भ में भगवान पार्श्वनाथ के जीवनवृत्त को मुनि पार्श्वकुमारजी व मुनि केशीकुमारजी ने प्रस्तुति दी। दस धर्मों में एक ब्रह्मचर्य धर्म पर साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। ब्रह्मचर्य धर्म पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने गीत का संगान किया। साध्वी स्तुतिप्रभाजी ने ध्यान दिवस पर गीत का संगान किया। ध्यान दिवस पर साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने ध्यान के महत्त्व को व्याख्यायित किया। जन-जन को मानवता का संदेश प्रदान करने वाले युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ के वर्णन के साथ जोड़ते हुए भगवान महावीर की आत्मा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में गर्भस्थ होती है। भगवान महावीर के पांच प्रसंग एक ही नक्षत्र में सम्पन्न हुए। प्रभु महावीर की आत्मा दशम देवलोक से च्युत हुई तब चौथे अर का अंतिम समय था। उस समय आषाढ़ शुक्ला षष्ठी को वैशाली नगरी के उपनगर ब्राह्मणकुण्ड नामक गांव में ऋषभदत्त नामक ब्राह्मण की पत्नी देवानंदा के गर्भ में गर्भस्थ होती है। पुनः इन्द्र के निर्देश पर देवानंदा के गर्भ को क्षत्रीय सिद्धार्थ की पत्नी त्रिशला की गर्भ में स्थापित किया और त्रिशला के गर्भ को देवानंदा के गर्भ में स्थापित कर दिया गया। शिशु का विकास अब त्रिशला के गर्भ में हो रहा है। गर्भस्थ शिशु मां को कष्ट न हो इसके लिए अपना हलन-चलन बंद कर किया तो मां दुःखी हो गयी। मां को दुःखी देख बालक ने पुनः अपना हलन-चलन प्रारम्भ कर दिया। माता-पिता कितने उपकारी होते हैं। उस शिशु ने गर्भ में ही यह प्रतिज्ञा कर ली कि माता-पिता के संसार में रहते हुए साधु दीक्षा नहीं स्वीकार करूंगा। चैत्र शुक्ला त्रयोदशी को रात्रि में जन्म हुआ। बालक के जन्मोत्सव मनाया गया। आचार्यश्री ने ध्यान दिवस के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि ध्यान अपने आप में साधना है। हमारे यहां प्रेक्षाध्यान की पद्धति प्रचलित है। 30 सितम्बर को प्रेक्षाध्यान दिवस पर प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष का शुभारम्भ होने वाला है। प्रेक्षाध्यान दिवस गुरुदेव तुलसी के शासनकाल में व मुनि नथमलजी (टमकोर) के योगदान से प्रारम्भ हुआ। वह केवल तेरापंथ के लिए नहीं, जैन-अजैन सभी के लिए कारगर बना। प्रेक्षाध्यान साधना का एक उपक्रम है। आज भी कितने लोग ध्यान का प्रयोग करने वाले होंगे। अनेक रूपों में ध्यान हो सकता है। दीर्घश्वास, समताल, शरीर प्रेक्षा, अनुप्रेक्षा, कायोत्सर्ग आदि अनेक विधियां हैं। आदमी अपने जीवन में यथायोग्य ध्यान का भी अभ्यास करें, यह काम्य है। पर्युषण के शिखर दिवस के संदर्भ में प्रेरणा देते हुए आचार्य श्री ने आगे कहा की कल महान दिन है। भगवती संवत्सरी का दिन है। वह पर्युषण का मानों सरताज दिन है। उसे आध्यात्मिक रूप में मनाने का प्रयास होना चाहिए। चारित्रात्माओं को तो उस दिन चौविहार उपवास रखना होता ही है। इसके साथ श्रावक-श्राविकाएं भी उपवास करते हैं। इससे छोटे बालकों को भी संयम के साथ यथासंभव जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने आवश्यक जानकारी भी दी। *भगवती संवत्सरी कल : उपवास, तपस्या, प्रतिक्रमण द्वारा आराधना* आचार्य श्री के सान्निध्य में कल संवत्सरी महापर्व मनाया जायेगा। जिसके तहत धर्मावलाबी चौविहार, तिविहार उपवास करेंगे। साथ ही सैकड़ों तपस्वियों द्वारा अठाई तप का प्रत्याख्यान किया जायेगा। प्रातः 07 बजे से महावीर समवसरण में प्रवचन कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएगा जिसके तहत आचार्यश्री एवं अन्य साधु-साध्वियों जैन इतिहास, दर्शन, तत्व आदि पर वक्तव्य देंगे। हजारों श्रावक–श्राविकाएं पौषध द्वारा भी संयम विहार में रहकर धर्म आराधना करेंगे।

सत्य भारती स्कूल जाटी भांडू में संपन्न हुयी अभिभावक-शिक्षक बैठक….मदा राम,जिला संवाददाता जोधपुर, Key Line Times जोधपुर,भारती एयरटेल फाउंडेशन राजस्थान के रीजनल हेड संदीप सारडा और जिला समन्वयक सुभाष यादव और क्षेत्रीय समन्वयक जितेन्द्र सोलंकी के निर्देशानुसार आज सत्य भारती स्कूल जाटी भांडू में अभिभावक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने मीटिंग उपस्थिति सभी अभिभावकों के साथ उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा के बारे में चर्चा की गई, उन्होंने अभिभावको से अपने बच्चों की शिक्षा में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। और माताओं अभिभावकों के मध्य खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की गई, भाग लेने वाली समस्त माताओं अभिभावकों को प्रशंसा पत्र दिए गए। इस दौरान प्रधानाध्यापक प्रेमाराम जवलिया, भोमाराम, हमीर लवारन, मेहराराम,प्रेमाराम मुंडण, संतोष, दल्लाराम, चौथाराम, बागाराम, श्रवण राम, पुखराज चौधरी, तीजो समस्त शिक्षक एवं अभिभावकगण उपस्थित थे।

सत्य भारती स्कूल जाटी भांडू में संपन्न हुयी अभिभावक-शिक्षक बैठक….मदा राम,जिला संवाददाता जोधपुर, Key Line Times जोधपुर,भारती एयरटेल फाउंडेशन राजस्थान के रीजनल हेड संदीप सारडा और जिला समन्वयक सुभाष यादव और क्षेत्रीय समन्वयक जितेन्द्र सोलंकी के निर्देशानुसार आज सत्य भारती स्कूल जाटी भांडू में अभिभावक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने मीटिंग उपस्थिति सभी अभिभावकों के साथ उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा के बारे में चर्चा की गई, उन्होंने अभिभावको से अपने बच्चों की शिक्षा में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। और माताओं अभिभावकों के मध्य खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की गई, भाग लेने वाली समस्त माताओं अभिभावकों को प्रशंसा पत्र दिए गए। इस दौरान प्रधानाध्यापक प्रेमाराम जवलिया, भोमाराम, हमीर लवारन, मेहराराम,प्रेमाराम मुंडण, संतोष, दल्लाराम, चौथाराम, बागाराम, श्रवण राम, पुखराज चौधरी, तीजो समस्त शिक्षक एवं अभिभावकगण उपस्थित थे।

पर्वाधिराज पर्युषण का चतुर्थ दिवस वाणी संयम दिवस के रूप में हुआ समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , बुधवार को प्रातःकाल से संयम विहार में चतुर्मासरत जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में पर्वाधिराज पर्युषण के सभी उपक्रमों का अनवरत समायोजन प्रारम्भ हुआ। अर्हत् वंदना, प्रेक्षाध्यान, तात्त्विक विश्लेषण, आगम वाचन आदि कार्यक्रमों के द्वारा आध्यात्मिक गंगा की विभिन्न धाराएं प्रवाहित होने लगीं। निर्धारित समय पर महावीर समवसरण में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी पधारे तो पूरा परिसर जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तीर्थ और तीर्थंकर के विषय के संदर्भ में मुनि मार्दवकुमारजी ने भगवान शांतिनाथ के विषय में अपनी प्रस्तुति दी। मुनि गौरवकुमारजी ने भगवान ऋषभ के संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। लाघव और सत्य धर्म पर आधारित गीत का साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने संगान किया। मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने लाघव व सत्य धर्म की व्याख्या की। कल के सामायिक दिवस के संदर्भ में साध्वी वैराग्यप्रभाजी व साध्वी समत्वप्रभाजी ने गीत का संगान किया। वाणी संयम दिवस पर साध्वी प्रफुल्लप्रभाजी व साध्वी श्रुतविभाजी ने गीत का संगान किया। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने उपस्थित जनता को वाणी संयम दिवस के संदर्भ में उद्बोधन प्रदान किया। तदुपरान्त भगवान महावीर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि परम आराध्य भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा का प्रसंग है। भगवान महावीर अपने अनंत पूर्व जन्मों में एकबार मनुष्य के रूप में उत्पन्न हुए, जहां उनका नाम नयसार पड़ा। लकड़ी के प्रयोजन से महाअटवी में जाना हुआ। मार्ग भूल जाने के कारण उस महाअटवी में साधु पधारे और उन साधुओं को नयसार ने अन्न का दान किया तो साधुओं ने उन्हें उपदेश दिया। नयसार के भव में उनकी आत्मा को समयकत्व की प्राप्ति हुई थी। इसलिए ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ का शुभारम्भ इसी भव से किया जाता है। सम्यकत्व से बड़ा रत्न नहीं होता है। चारित्र को सम्यकत्व पर निर्धारित रहना होता है, किन्तु सम्यकत्व को चारित्र की अपेक्षा नहीं होती है। इस कारण सम्यकत्व चारित्र से बड़ा होता है। सम्यकत्व स्वतंत्र भी हो सकता है। नयसार में सम्यकत्व का पालन भी किया। अपने जीवन में धर्म का अभ्यास भी किया। अनाग्रह भाव रखकर तत्व को समझने का प्रयास किया जाए तो नए ज्ञान की प्राप्ति भी हो सकती है। आदमी को अनाग्रह भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। प्रथम देवलोक में नयसार की आत्मा उत्पन्न हुई। वहां के बाद पुनः आत्मा च्युत हुई और पुनः मनुष्य जन्म में पहुंची तो नयसार की आत्मा भगवान ऋषभ के पौत्र और चक्रवर्ती भरत के पुत्र मरिचि के रूप में उत्पन्न हुए। एकबार भगवान ऋषभ की प्रेरणा मरिचि को प्राप्त हुई और उसने साधुत्व का जीवन स्वीकार कर लिया। साधु बनने के बाद परिषहों को सहने में कठिनाई होने लगी और मरिचि ने उस साधुपन को छोड़कर अलग से ढंग से साधना प्रारम्भ की। आचार्यश्री ने वाणी संयम दिवस के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को अपनी वाणी का संयम रखने का प्रयास करना चाहिए। बोलना आवश्यक है, किन्तु वाणी का विवेक होना अतिआवश्यक होता है। विवेकपूर्ण वाणी वाणी संयम का ही एक माध्यम हो सकता है। एक दिवस पूर्व ही आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में चतुर्मासरत और तपस्यारत साध्वी धैर्यप्रभाजी का देवलोक गमन हो गया था। इस कारण आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उनकी स्मृतिसभा का भी समायोजन हुआ। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने साध्वी धैर्यप्रभाजी संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के आध्यात्मिक गति करने की कामना की। आचार्यश्री ने उनकी आत्मा की शांति के लिए चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। तदुपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी, साध्वी धैर्यप्रभाजी की संसारपक्षीया पुत्री साध्वी सिद्धार्थप्रभाजी, साध्वी सुमतिप्रभाजी, साध्वी जिनप्रभाजी, साध्वी हिमश्रीजी, साध्वी विशालप्रभाजी, साध्वी प्रांजलयशाजी, साध्वी हेमरेखाजी ने अपनी श्रद्धांजलि समर्पित की। श्री ताराचन्द बोहारा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। साध्वी तेजस्वीप्रभाजी द्वारा रचित गीत को साध्वीवृंद ने प्रस्तुति दी। साध्वी सिद्धार्थप्रभाजी ने मुनि कौशलकुमारजी के भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। साध्वीवृंद ने उनकी स्मृति में एक गीत का संगान किया। श्रीमती मधु बोहरा व श्री रमेशचन्द बोहरा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। सुश्री सेजल चोरड़िया आदि ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में कहा कि पर्युषण पर्व के दौरान साध्वी धैर्यप्रभाजी का प्रयाण हुआ। हमारे धर्मसंघ की एक साध्वी सदस्या अपनी संयम यात्रा को सम्पन्न करते हुए विदा हुई। उनकी आत्मा उत्थान करे और शीघ्र मोक्षश्री का वरण करे।

पर्वाधिराज पर्युषण का चतुर्थ दिवस वाणी संयम दिवस के रूप में हुआ समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , बुधवार को प्रातःकाल से संयम विहार में चतुर्मासरत जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में पर्वाधिराज पर्युषण के सभी उपक्रमों का अनवरत समायोजन प्रारम्भ हुआ। अर्हत् वंदना, प्रेक्षाध्यान, तात्त्विक विश्लेषण, आगम वाचन आदि कार्यक्रमों के द्वारा आध्यात्मिक गंगा की विभिन्न धाराएं प्रवाहित होने लगीं। निर्धारित समय पर महावीर समवसरण में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी पधारे तो पूरा परिसर जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तीर्थ और तीर्थंकर के विषय के संदर्भ में मुनि मार्दवकुमारजी ने भगवान शांतिनाथ के विषय में अपनी प्रस्तुति दी। मुनि गौरवकुमारजी ने भगवान ऋषभ के संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। लाघव और सत्य धर्म पर आधारित गीत का साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने संगान किया। मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने लाघव व सत्य धर्म की व्याख्या की। कल के सामायिक दिवस के संदर्भ में साध्वी वैराग्यप्रभाजी व साध्वी समत्वप्रभाजी ने गीत का संगान किया। वाणी संयम दिवस पर साध्वी प्रफुल्लप्रभाजी व साध्वी श्रुतविभाजी ने गीत का संगान किया। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने उपस्थित जनता को वाणी संयम दिवस के संदर्भ में उद्बोधन प्रदान किया। तदुपरान्त भगवान महावीर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि परम आराध्य भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा का प्रसंग है। भगवान महावीर अपने अनंत पूर्व जन्मों में एकबार मनुष्य के रूप में उत्पन्न हुए, जहां उनका नाम नयसार पड़ा। लकड़ी के प्रयोजन से महाअटवी में जाना हुआ। मार्ग भूल जाने के कारण उस महाअटवी में साधु पधारे और उन साधुओं को नयसार ने अन्न का दान किया तो साधुओं ने उन्हें उपदेश दिया। नयसार के भव में उनकी आत्मा को समयकत्व की प्राप्ति हुई थी। इसलिए ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ का शुभारम्भ इसी भव से किया जाता है। सम्यकत्व से बड़ा रत्न नहीं होता है। चारित्र को सम्यकत्व पर निर्धारित रहना होता है, किन्तु सम्यकत्व को चारित्र की अपेक्षा नहीं होती है। इस कारण सम्यकत्व चारित्र से बड़ा होता है। सम्यकत्व स्वतंत्र भी हो सकता है। नयसार में सम्यकत्व का पालन भी किया। अपने जीवन में धर्म का अभ्यास भी किया। अनाग्रह भाव रखकर तत्व को समझने का प्रयास किया जाए तो नए ज्ञान की प्राप्ति भी हो सकती है। आदमी को अनाग्रह भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। प्रथम देवलोक में नयसार की आत्मा उत्पन्न हुई। वहां के बाद पुनः आत्मा च्युत हुई और पुनः मनुष्य जन्म में पहुंची तो नयसार की आत्मा भगवान ऋषभ के पौत्र और चक्रवर्ती भरत के पुत्र मरिचि के रूप में उत्पन्न हुए। एकबार भगवान ऋषभ की प्रेरणा मरिचि को प्राप्त हुई और उसने साधुत्व का जीवन स्वीकार कर लिया। साधु बनने के बाद परिषहों को सहने में कठिनाई होने लगी और मरिचि ने उस साधुपन को छोड़कर अलग से ढंग से साधना प्रारम्भ की। आचार्यश्री ने वाणी संयम दिवस के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को अपनी वाणी का संयम रखने का प्रयास करना चाहिए। बोलना आवश्यक है, किन्तु वाणी का विवेक होना अतिआवश्यक होता है। विवेकपूर्ण वाणी वाणी संयम का ही एक माध्यम हो सकता है। एक दिवस पूर्व ही आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में चतुर्मासरत और तपस्यारत साध्वी धैर्यप्रभाजी का देवलोक गमन हो गया था। इस कारण आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उनकी स्मृतिसभा का भी समायोजन हुआ। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने साध्वी धैर्यप्रभाजी संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के आध्यात्मिक गति करने की कामना की। आचार्यश्री ने उनकी आत्मा की शांति के लिए चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। तदुपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी, साध्वी धैर्यप्रभाजी की संसारपक्षीया पुत्री साध्वी सिद्धार्थप्रभाजी, साध्वी सुमतिप्रभाजी, साध्वी जिनप्रभाजी, साध्वी हिमश्रीजी, साध्वी विशालप्रभाजी, साध्वी प्रांजलयशाजी, साध्वी हेमरेखाजी ने अपनी श्रद्धांजलि समर्पित की। श्री ताराचन्द बोहारा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। साध्वी तेजस्वीप्रभाजी द्वारा रचित गीत को साध्वीवृंद ने प्रस्तुति दी। साध्वी सिद्धार्थप्रभाजी ने मुनि कौशलकुमारजी के भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। साध्वीवृंद ने उनकी स्मृति में एक गीत का संगान किया। श्रीमती मधु बोहरा व श्री रमेशचन्द बोहरा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। सुश्री सेजल चोरड़िया आदि ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में कहा कि पर्युषण पर्व के दौरान साध्वी धैर्यप्रभाजी का प्रयाण हुआ। हमारे धर्मसंघ की एक साध्वी सदस्या अपनी संयम यात्रा को सम्पन्न करते हुए विदा हुई। उनकी आत्मा उत्थान करे और शीघ्र मोक्षश्री का वरण करे।

सुरत मे वर्षावास के दौरान आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि तन ही नहीं, मन भी रहे स्वस्थ …..सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 31.08.2024, शनिवार, वेसु, सूरत (गुजरात),भगवान महावीर समवसरण से जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शनिवार को आयारो आगमाधारित अपने पावन प्रवचन के माध्यम से जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि गलत खान-पान, रहन-सहन और प्राकृतिक प्रभाव से बीमारी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कोई आदमी स्वस्थ है तो वह उसकी एक उपलब्धि है, किन्तु उसका घमण्ड नहीं करना चाहिए। कब किसको क्या हो जाए। बीमारी कभी हो भी जाए तो उसमें आदमी को अशांत नहीं होना चाहिए, चित्त को शांत बनाए रखने और उसको शांति से सहने का प्रयास करना चाहिए। बीमारी होने के बाद भी मन में शांति और समाधि रखने का प्रयास करना चाहिए साधु–साध्वियों के लिए कहा गया है कि बीमारी हो जाए तो उसमें चित्त की समाधि और शांति बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। कोई साधु-साध्वी रुग्ण हो जाए तो उसकी सेवा करना, उसकी परिचर्या करना, अस्पताल दिखाने आदि में भी मन में भी प्रसन्नता रहनी चाहिए। बीमार साधु-साध्वियों की प्रसन्न मन से की गई सेवा भी जीवन की एक उपलब्धि हो सकती है। सेवा सापेक्ष की सेवा करना चारित्रात्मा का समुदाय का कर्त्तव्य होता है। आयारो आगम में कहा गया है कि कभी रोग उत्पन्न हो जाते हैं। पूर्वार्जित कर्मों के योग से साधु को भी बीमारी हो सकती है। किसी को ज्यादा और किसी को कम भी हो सकता है। साधु को विशेष मनोबल रखने का प्रयास करना चाहिए। जहां तक संभव हो अपने जीवन की गाड़ी को मनोबल के द्वारा चलायमान रखने का प्रयास करना चाहिए। जितनी अपेक्षा हो बीमारी का इलाज कराने का भी प्रयास करना चाहिए, लेकिन डरते रहना, अशांत हो जाना, अधीर नहीं होना चाहिए। जहां तक संभव हो उसे सहन करने का प्रयास करना चाहिए। बाह्य के साथ-साथ आंतरिक शांति का भी प्रभाव पड़ता है। एलोपैथी दवाइयों का प्रयोग डॉक्टर की सलाह लेने का प्रयास होना चाहिए। इस प्रकार बीमारी के संदर्भ में कुछ बातें चिंतन और विवेक की भी हो सकती हैं। बीमारी में भी मनोबल रखने का प्रयास करना चाहिए। बीमारी के आने पर भी चित्त की समाधि, शांति बनी रहे। शरीर की स्वस्थता, चित्त की प्रसन्नता और मनोबल हो। इस प्रकार आदमी का तन और मन दोनों स्वस्थ और मजबूत रहें, यह काम्य है। आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि कल से पर्युषण महापर्व का प्रारम्भ होने जा रहा है। वर्ष में एक बार चतुर्मास के दौरान इसका प्रसंग आता है जो अध्यात्म और साधना की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण समय होता है। कुल मिलाकर नौ दिनों का उपक्रम होता है। यह चतुर्विध धर्मसंघ के लिए अच्छा अवसर है। आचार्यश्री ने इन सात दिनों में साधु-साध्वियों व गृहस्थों के लिए भी आवश्यक पालनीय दिशा-निर्देश भी प्रदान किए। साथ ही आचार्यश्री ने इस दौरान चलने वाले आध्यात्मिक उपक्रमों के समय आदि का भी वर्णन किया। पर्युषण की आराधना अच्छे ढंग से करने की प्रेरणा प्रदान की। मंगल प्रेरणा और पर्युषण महापर्व के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करने के उपरान्त आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में दिवंगत साध्वी रतनश्रीजी (श्रीडूंगरगढ़) की स्मृतिसभा का भी आयोजन हुआ। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने उनके जीवन का संक्षिप्त परिचय वाचन करते हुए उनके प्रति मध्यस्थ भावना अभिव्यक्त करते हुए चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। तत्पश्चात साध्वी रतनश्रीजी (श्रीडूंगरगढ़) स्मृतिसभा ने मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखाजी, मुनि ध्यानमूर्तिजी, साध्वी अखिलयशाजी व साध्वी मुक्तिश्रीजी ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली सभा के अध्यक्ष श्री सुखराज सेठिया ने भी इस संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। जयपुर से समागत नवरत्नमल बाफना ने अपनी पुस्तक ‘कामधेनु मां रतनाश्री’ आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की।

सुरत मे वर्षावास के दौरान आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि तन ही नहीं, मन भी रहे स्वस्थ …..सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 31.08.2024, शनिवार, वेसु, सूरत (गुजरात),भगवान महावीर समवसरण से जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शनिवार को आयारो आगमाधारित अपने पावन प्रवचन के माध्यम से जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि गलत खान-पान, रहन-सहन और प्राकृतिक प्रभाव से बीमारी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कोई आदमी स्वस्थ है तो वह उसकी एक उपलब्धि है, किन्तु उसका घमण्ड नहीं करना चाहिए। कब किसको क्या हो जाए। बीमारी कभी हो भी जाए तो उसमें आदमी को अशांत नहीं होना चाहिए, चित्त को शांत बनाए रखने और उसको शांति से सहने का प्रयास करना चाहिए। बीमारी होने के बाद भी मन में शांति और समाधि रखने का प्रयास करना चाहिए साधु–साध्वियों के लिए कहा गया है कि बीमारी हो जाए तो उसमें चित्त की समाधि और शांति बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। कोई साधु-साध्वी रुग्ण हो जाए तो उसकी सेवा करना, उसकी परिचर्या करना, अस्पताल दिखाने आदि में भी मन में भी प्रसन्नता रहनी चाहिए। बीमार साधु-साध्वियों की प्रसन्न मन से की गई सेवा भी जीवन की एक उपलब्धि हो सकती है। सेवा सापेक्ष की सेवा करना चारित्रात्मा का समुदाय का कर्त्तव्य होता है। आयारो आगम में कहा गया है कि कभी रोग उत्पन्न हो जाते हैं। पूर्वार्जित कर्मों के योग से साधु को भी बीमारी हो सकती है। किसी को ज्यादा और किसी को कम भी हो सकता है। साधु को विशेष मनोबल रखने का प्रयास करना चाहिए। जहां तक संभव हो अपने जीवन की गाड़ी को मनोबल के द्वारा चलायमान रखने का प्रयास करना चाहिए। जितनी अपेक्षा हो बीमारी का इलाज कराने का भी प्रयास करना चाहिए, लेकिन डरते रहना, अशांत हो जाना, अधीर नहीं होना चाहिए। जहां तक संभव हो उसे सहन करने का प्रयास करना चाहिए। बाह्य के साथ-साथ आंतरिक शांति का भी प्रभाव पड़ता है। एलोपैथी दवाइयों का प्रयोग डॉक्टर की सलाह लेने का प्रयास होना चाहिए। इस प्रकार बीमारी के संदर्भ में कुछ बातें चिंतन और विवेक की भी हो सकती हैं। बीमारी में भी मनोबल रखने का प्रयास करना चाहिए। बीमारी के आने पर भी चित्त की समाधि, शांति बनी रहे। शरीर की स्वस्थता, चित्त की प्रसन्नता और मनोबल हो। इस प्रकार आदमी का तन और मन दोनों स्वस्थ और मजबूत रहें, यह काम्य है। आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि कल से पर्युषण महापर्व का प्रारम्भ होने जा रहा है। वर्ष में एक बार चतुर्मास के दौरान इसका प्रसंग आता है जो अध्यात्म और साधना की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण समय होता है। कुल मिलाकर नौ दिनों का उपक्रम होता है। यह चतुर्विध धर्मसंघ के लिए अच्छा अवसर है। आचार्यश्री ने इन सात दिनों में साधु-साध्वियों व गृहस्थों के लिए भी आवश्यक पालनीय दिशा-निर्देश भी प्रदान किए। साथ ही आचार्यश्री ने इस दौरान चलने वाले आध्यात्मिक उपक्रमों के समय आदि का भी वर्णन किया। पर्युषण की आराधना अच्छे ढंग से करने की प्रेरणा प्रदान की। मंगल प्रेरणा और पर्युषण महापर्व के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करने के उपरान्त आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में दिवंगत साध्वी रतनश्रीजी (श्रीडूंगरगढ़) की स्मृतिसभा का भी आयोजन हुआ। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने उनके जीवन का संक्षिप्त परिचय वाचन करते हुए उनके प्रति मध्यस्थ भावना अभिव्यक्त करते हुए चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। तत्पश्चात साध्वी रतनश्रीजी (श्रीडूंगरगढ़) स्मृतिसभा ने मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखाजी, मुनि ध्यानमूर्तिजी, साध्वी अखिलयशाजी व साध्वी मुक्तिश्रीजी ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली सभा के अध्यक्ष श्री सुखराज सेठिया ने भी इस संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। जयपुर से समागत नवरत्नमल बाफना ने अपनी पुस्तक ‘कामधेनु मां रतनाश्री’ आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की।

गुजरात राज्य के डांग गुजरात विधान सभा उपाध्यक्ष दंडक श्री विजयभाई पटेल ने वाघमल गांव में प्रभावित परिवार से मुलाकात की….राजेश एल पवार,गुजरात, Key Line Times अहवा-डांग, पिछले कुछ दिनों में डांग जिले में भारी बारिश के कारण यहां के जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. उस समय, गुजरात विधानसभा के उप दंडक और जिला विधायक श्री विजयभाई पटेल ने वाघई तालुका के वाघमल गांव में प्रभावित परिवार से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, घर की क्षति के बारे में संबंधित अधिकारी को मार्गदर्शन किया और भुगतान के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा। सहायता का वर्षा आपदा के समय जिला प्रशासन एवं जिला पदाधिकारियों ने आपसी समन्वय एवं सहयोग से बचाव एवं राहत कार्य चलाया तथा जनता के साथ रहने का दृष्टिकोण अपनाया। उल्लेखनीय है कि डांग जिले में मानव मृत्यु, पशु मृत्यु एवं क्षति को लेकर सहायता भुगतान का कार्य प्रशासनिक तंत्र द्वारा किया जा रहा है.रिपोर्टर राजेशभाई एल पवार

गुजरात राज्य के डांग गुजरात विधान सभा उपाध्यक्ष दंडक श्री विजयभाई पटेल ने वाघमल गांव में प्रभावित परिवार से मुलाकात की….राजेश एल पवार,गुजरात, Key Line Times अहवा-डांग, पिछले कुछ दिनों में डांग जिले में भारी बारिश के कारण यहां के जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. उस समय, गुजरात विधानसभा के उप दंडक और जिला विधायक श्री विजयभाई पटेल ने वाघई तालुका के वाघमल गांव में प्रभावित परिवार से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, घर की क्षति के बारे में संबंधित अधिकारी को मार्गदर्शन किया और भुगतान के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा। सहायता का वर्षा आपदा के समय जिला प्रशासन एवं जिला पदाधिकारियों ने आपसी समन्वय एवं सहयोग से बचाव एवं राहत कार्य चलाया तथा जनता के साथ रहने का दृष्टिकोण अपनाया। उल्लेखनीय है कि डांग जिले में मानव मृत्यु, पशु मृत्यु एवं क्षति को लेकर सहायता भुगतान का कार्य प्रशासनिक तंत्र द्वारा किया जा रहा है.रिपोर्टर राजेशभाई एल पवार

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