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अणुव्रत विश्व भारती द्वारा प्रसिद्ध उद्योगपति श्री रतन टाटा को दिया गया अणुव्रत पुरस्कार…आर.के.जैन,एडिटर इन चीफ, Key Line Times मुंबई 27-8-2024 *अणुव्रत विश्व भारती द्वारा दिये जाने वाले प्रतिष्ठित ‘‘अणुव्रत पुरस्कार’’ वर्ष 2023 के लिए प्रसिद्ध उद्योगपति व समाज सेवी श्री रतन टाटा को मुम्बई स्थित उनके आवास पर भेंट किया गया*। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर के साथ वहां पहुंचे प्रतिनिधि मण्डल ने श्री रतन टाटा को पुरस्कार स्वरूप स्मृति चिन्ह, प्रशिस्त पत्र सहित 1.51 लाख की राशि भेंट की। इस अवसर पर अणुविभा के महामंत्री श्री भीखम सुराणा, मुम्बई कस्टम कमिश्नर श्री अशोक कुमार कोठारी, अणुविभा उपाध्यक्ष श्री विनोद कुमार व सहमंत्री श्री मनोज सिंघवी उपस्थित थे। अणुविभा अध्यक्ष श्री नाहर ने श्री रतन टाटा को अणुव्रत पुरस्कार सौंपते हुए मानव जाति को उनके सकारात्मक योगदान की प्रशंसा की एवं दुनिया में मानवीयता का एक श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए सम्पूर्ण अणुविभा परिवार की ओर से बधाई ज्ञापित की। उन्होंने आगे बताया कि अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण ने श्री रतन टाटा के प्रति अपनी मंगल कामनाएं प्रेषित की हैं तथा उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की है। श्री रतन टाटा ने अणुव्रत अनुशास्ता के प्रति अपना हार्दिक आदर व सम्मान व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि 75वर्षों से गतिमान अणुव्रत आंदोलन मानवीय एकता, नैतिकता, अहिंसा व सद्भावना के क्षेत्र में विशद कार्य कर रहा हैं। आचार्य तुलसी द्वारा प्रणीत यह आंदोलन संयुक्त राष्ट्र तक अपनी विशेष पहचान स्थापित कर चुका है। अणुव्रत पुरस्कार की श्रृंखला में अभी तक देश के गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया है, जिनमें – श्री आत्माराम, श्री जैनेन्द्र कुमार, श्री शिवाजी भावे, श्री शिवराज पाटिल, श्री नीतिश कुमार, डॉ. ए.पी. जे. अब्दुल कलाम, डॉ. मनोहन सिंह, श्री टी.एन. शेषन, श्री प्रकाश आमटे इत्यादि शामिल है। इस अवसर पर अणुविभा प्रतिनिधि मण्डल ने श्री रतन टाटा को अणुव्रत साहित्य, ‘अणुव्रत’ व ‘बच्चों का देश’ पत्रिकाओं के विशेषांक भेंट किये एवं अणुव्रत की प्रवृत्तियों चुनावशुद्धि अभियान, अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स, एलिवेट, पर्यावरण जागरूकता अभियान, नशामुक्ति अभियान, जीवन विज्ञान आदि के बारे में जानकारी प्रदान की। श्री रतन टाटा ने मनाव समाज की भलाई के लिए अणुव्रत आंदोलन द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। समाचार प्रदाता.. कुसुम लुनिया राष्ट्रीय संगठनमंत्री अणुविभा
आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि गृहस्थ हो या साधु, जीवन में रखे समता….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 26.08.2024, सोमवार, वेसु, सूरत (गुजरात) ,सूरत शहर के वेसु क्षेत्र में स्थित भगवान महावीर युनिवर्सिटि परिसर में बने भव्य संयम विहार में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी वर्ष 2024 का चतुर्मास कर रहे हैं। सोमवार को अध्यात्म जगत के पुरोधा आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आयारो आगम के एक सूक्त में समता धर्म का समाचरण करने का संदेश दिया गया है। मनुष्य अपने जीवन में हर्षान्वित हो जाते हैं तो कभी आक्रोश और गुस्से में भी आ जाते हैं। अनुकूल स्थिति होता है तो आदमी प्रसन्न हो जाता है और प्रतिकूल परिस्थिति आ जाए तो आदमी दुःखी हो जाता है, कष्ट की अनुभूति करने लगता है। इसलिए यह बताया गया कि यह जीवन अनेक बार उच्च गोत्र वाला भी बन गया और अनेक बार नीच गोत्र वाला भी बन गया। कोई हीन नहीं और कोई अतिरिक्त नहीं होता। सामान्य व्यवहार में बड़ा और छोटा, हीन और अतिरिक्त, उच्चता और नीचता की बात हो सकती है। कोई उम्र में बहुत ज्यादा तो कोई बहुत उम्र वाला हो सकता है। कोई राजनीति में बहुत ऊंचे पद पर होता है तो कोई नीचे पद भी होता है। कोई धन-धान्य से बहुत उच्च होता है तो कोई धनहीन होता है। यह उच्चता और नीचता इस जीवनकाल की बातें हैं। मनुष्य अपनी आत्मा पर ध्यान दे कि आज कोई धनहीन है वो कभी किसी जन्म में बहुत उच्च कोटि का धनवान हो सकता है। कभी कोई बहुत ज्ञानवान रहा हो सकता है तो कभी कोई अल्पज्ञानी भी रहा हो सकता है। सिद्धों की दृष्टि से देखा जाए तो कोई हीन और कोई अतिरिक्त नहीं होता। इसलिए आयारो में बताया गया कि आत्मा के संदर्भ में कोई हीन नहीं और कोई अतिरिक्त नहीं होता। इसलिए कोई ऊंच और नीच की बात नहीं है। संसारी अवस्था में देखें तो भी जो इस जन्म में पिता है, वह अगले जन्म में अपने पुत्र का पुत्र हो जाए। इसलिए आयारो आगम में यह प्रेरणा दी गई कि कभी जीवन में उच्चता की स्थिति आ जाए अथवा कभी मंदता और नीचता की स्थिति आ जाए तो भी मानव हर्ष और विषाद में जाने से बचने का प्रयास करना चाहिए। जिन्दगी में भौतिक अनुकूलता मिले तो ज्यादा खुशी नहीं मनाना और कभी भौतिक प्रतिकूलता प्राप्त होने से लगी तो बहुत ज्यादा दुःखी नहीं बनना चाहिए। जहां तक संभव हो दोनों ही परिस्थितियों में समता में रहने का प्रयास करना चाहिए। साधु के लिए बताया गया कि साधु को भोजन मिले तो भी ठीक और नहीं मिले तो भी ठीक कहा गया है। अगर भोजन नहीं मिला तो साधु यह सोचे कि मुझे तपस्या का मौका मिल गया और मिल गया तो शरीर को पोषण मिल सकेगा। इस प्रकार का चिंतन कर साधु को समता में रहने का प्रयास करना चाहिए। साधु को तो समता मूर्ति तो होना ही चाहिए, गृहस्थों को भी जहां तक संभव हो सके, समता में रहने का प्रयास करना चाहिए। परिवार में कभी कोई कटु बोल दे तो भी समता और शांति रखने का प्रयास रखना चाहिए। परिवार में कलह की स्थिति न बने, ऐसा प्रयास करना चाहिए। समता रखने वाला बड़ा होता है। इसलिए साधु हो अथवा गृहस्थ उसे अपने जीवन में समता रखने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने गजसुकुमाल मुनि के आख्यान क्रम का वाचन किया। तदुपरान्त आचार्यश्री श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुआ कि आज भाद्रव कृष्णा अष्टमी का प्रसंग है। मैंने आचार्यश्री महाप्रज्ञजी की आज्ञा से श्रीमद्भगवद्गीता व जैन आगम पर कई भाषण दिए थे। श्रीमद्भगवद्गीता में 18 अध्यायों में श्रीकृष्ण व अर्जुन का संवाद है। इन ग्रंथों से अच्छी बातें अपनाकर आगे बढ़ते रहने का प्रयास करें। तेरापंथ किशोर मण्डल-सूरत ने चौबीसी के गीत तथा तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने पुरानी ढाल को प्रस्तुति दी।
— चंडीगढ़ सीनियर सिटिजन्स ऐसोसिएशन ने महिला सशक्तिकरण परियोजना का किया शुभारंभ….सतविंदर कौर,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times चंडीगढ़,चंडीगढ़ सीनियर सिटिज़न्स एसोसिएशन ने आज अपने महिला सशक्तिकरण परियोजना की शुरुआत कम्युनिटी सेंटर रामदरबार में की। इसका उद्घाटन क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती नीना द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया और उन्हें हमारे महिला स्वयंसेवक श्रीमती रीना वालिया, सचिव वेलफेयर और ओशन सोसाइटी सचिव द्वारा सैनिटरी नैपकिन, बिस्कुट और फल वितरित किए गए। श्री सुभाष अग्रवाल, अध्यक्ष और श्री ब्रिगेडियर सप्रा, उपाध्यक्ष ने बताया कि यह परियोजना 4 साल बाद फिर से शुरू की गई है। हर महीने रामदरबार में एक बैठक आयोजित की जाएगी, और परियोजना-23 वेलफेयर सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि क्षेत्र में रहने वाली अधिकतम महिलाएं इसमें भाग लें। पार्षद श्रीमती नीना से एक सिलाई शिक्षा केंद्र की शुरुआत के लिए भी अनुरोध किया गया, और उन्होंने इस परियोजना के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। श्री एस के माहेश्वरी, श्री विकास गोयल, श्रीमती मीनू, श्री विवेक शर्मा, श्रीमती स्वीटी और श्री पी.के. सूरी ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज की। —
गुजरात के सुरत मे आचार्य महाश्रमणजी के सानिध्य में सुप्रसिद्ध लेखिका डा.कुसुम लुनिया द्वारा लिखित “सर्वोत्तम जीवनशैली” का हुआ लोकार्पण… आर.के.जैन, मुख्य संपादक, Key Line Times “सर्वोत्तम जीवनशैली” सत्प्रेरणा और सन्मार्ग दर्शक ग्रन्थ सिद्ध हो* *आचार्य महाश्रमण* सुरत , गुजरात भारत के स्वर्णिम वर्तमान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सानिध्य में सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ. कुसुम लुनिया द्वारा लिखित जैन विश्व भारती -आदर्श साहित्य संघ विभाग द्वारा प्रकाशित जैन जीवनशैली पर आधारित शौध ग्रन्थ “सर्वोत्तम जीवनशैली “का लोकार्पण सुरत ,गुजरात में हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अमृत देशना में फरमाया कि “सर्वोत्तम जीवनशैली “ग्रन्थ पुस्तक आज सामने आया है। मनुष्य की जीवनशैली अच्छी रहे ,उसमें त्याग संयम तप स्वाध्याय ये तत्व भी सन्निहित हों। आदमी का रहन-रहन ,खान -पान ,चिन्तन-मनन , सोना – जागना- उठना* सब क्रियाओं में संयम एवं विवेक हो। आध्यात्मिकता -धार्मिकता जीवनशैली के साथ जुडी हुई हो तो जीवनशैली भी सर्वोत्तम बन सकती है*।यह बहुत ही अच्छी बात है।सर्वोत्तम बहुत ऊंचा शब्द है परन्तु यह असम्भव भी नहीं लगता। आपने आशीर्वचन के साथ उदबोधन फरमाया कि *सर्वोत्तम जीवनशैली” पुस्तक पाठक को सत्प्रेरणा और सन्मार्ग दर्शन देने वाला ग्रन्थ सिद्ध हो।*यह ग्रन्थ सफलता को प्राप्त हो*। लेखिका की प्रतिभा का उपयोग लेखन , भाषण, चिन्तन एवं सलाह देने में भी हो सकता है, कर्मजा शक्ति का, पुरूषार्थ शक्ति का उपयोग होता रहे। खूब अच्छा काम चलता रहे।अणुव्रत का भी काम चलता रहे। मुनि श्री दिनेश कुमार जी के कुशल संचालन में, मुनिश्री कीर्ति कुमार जी के आध्यात्मिक पर्यवेक्षण में श्री जैयन्ति लाल सुराना, डॉ धनपत लुनिया, श्री संजय सुराना, श्री संजय भंसाली अवधेश भाई को लोकार्पण हेतु आंमत्रित किया गया।वतन -विशाल लुनिया एवं अंजु सुराणा की विशेष उपस्थिति रही। इस अवसर पर विदुषी लेखिका ने कृतज्ञ भावों से ह्रदय के उदगार व्यक्त किये।जैन तेरापंथ धर्म के एकादशम अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी से भरपूर आशीर्वाद पाकर जैन विश्व भारती एवं लुनिया तथा बोथरा परिवार कृत्य कृत्य हो गया।
आचार्य महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन मे कहा कि बच्चों के लिए वरदान साबित हो ज्ञानशाला….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 25.08.2024, रविवार, वेसु, सूरत (गुजरात) , युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में डायमण्ड सिटि सूरत में भगवान महावीर युनिवर्सिटि में बने संयम विहार रविवार को ज्ञानशाला दिवस के अवसर पर तेरापंथ ज्ञानशाला के नन्हें ज्ञानार्थियों की विशाल उपस्थिति गुंजायमान हो उठा। विभिन्न वेशों में सजे में नन्हें ज्ञानार्थियों की बटालियन अपने आराध्य के समक्ष अपनी भावात्मक प्रस्तुति देने को आतुर दिखाई दे रहे थे। भगवान महावीर समवसरण में नित्य की भांति जब युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी पावन प्रवचन हेतु उपस्थित हुए तो उपस्थित विशाल जनमेदिनी ने बुलंद जयघोष किया। तदुपरान्त आरम्भ ज्ञानशाला दिवस पर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों की भावपूर्ण प्र्रस्तुति का क्रम। यह इस प्रकार समायोजित था मानों आज महावीर समवसरण भारत का राजपथ बन गया हो। जिस प्रकार 26 जनवरी को भारत की शौर्यगाथा जिस प्रकार भारतीय सेना तथा भारत के लोग प्रस्तुत करते हैं, उसी प्रकार तेरापंथ अनुशास्ता के समक्ष तेरापंथ के वैभवपूर्ण विशालता को ज्ञानशाला के ज्ञानार्थी प्रस्तुत कर रहे थे। अनेकानेक बटालियन के रूप में अपने आराध्य के समक्ष उपस्थित होते ज्ञानार्थी तेरापंथ धर्मसंघ के विभिन्न संगठनों व संस्थाओं के एक-एक आयाम को बखूबी प्रस्तुत कर रहे थे। ज्ञानार्थियों का उपक्रम जन-जन को मंत्रमुग्ध बनाने वाला था। लगभग एक घंटे चला यह उपक्रम जन-जन को मानों सम्मोहित-सा कर लिया था। एक घंटे की अनवरत मोहक प्रस्तुति के उपरान्त साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने उपस्थित जनता को अभिप्रेरित करते हुए ज्ञानशाला और ज्ञानार्थियों के प्रति मंगलकामना अभिव्यक्त की। ज्ञानशाला के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि उदितकुमारजी ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने इस अवसर पर उपस्थित विशाल जनमेदिनी और ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों को आयारो आगम के आधार पर पावन देशना प्रदान करते हुए कहा कि दुनिया में अहिंसा भी जीवित है तो हिंसा भी विद्यमान है। अहिंसा कभी भी पूर्णतया समाप्त नहीं होती और हिंसा भी पूर्णतया समाप्त हो जाए, यह भी संभव नहीं है। कहीं हिंसा ज्यादा दिखाई दे सकता है तो कहीं अहिंसा व शांति का साम्राज्य भी दिखाई दे सकता है। हिंसा है तो अहिंसा का दीप जलाने का प्रयास हो। अंधकार है तो दीपक से प्रकाश फैलाने का प्रयास किया जा सकता है। आदमी को झटपट निराश नहीं होना चाहिए। कोई व्यक्ति अपने विचार से हिंसा में प्रवृत्त हो सकता है तो कोई भय के कारण हिंसा में संलग्न हो सकता है। अपनी रक्षा के संदर्भ में भी आदमी हिंसा में जा सकता है। बच्चों में अच्छे संस्कार कैसे उजागर हों और गलत संस्कार क्षीण हों, इसका प्रयास करना चाहिए। विद्यालयों के माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कार दिए जा सकते हैं। परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी और आचार्यश्री तुलसी द्वारा जीवनविज्ञान की बात बताई गई। विद्या संस्थान विद्यार्थियों व बच्चों में अच्छे संस्कार पुष्पित और पल्लवित करने के लिए सशक्त माध्यम हैं। माता-पिता व परिवार के लोग भी बच्चों को सुन्दर संस्कारों के निर्माण में अच्छे सहायक बनते हैं। दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता व अन्य परिजन बच्चों पर संस्कारों की बरसात करते रहें। जिस प्रकार बरसात से खेत की फसल अच्छी होती है, उसी प्रकार चारों ओर से बच्चों पर संस्कारों की बरसात हो तो बच्चे संस्कारी बन सकते हैं। मीडिया, सोशल मीडिया, अखबार आदि के द्वारा भी अच्छे संस्कार आ सकते हैं तो साधु-साध्वियां व समणियां भी अच्छे संस्कार देने में सहायक बन सकती हैं। ज्ञानशाला एक धर्म-संप्रदाय से जुड़ा हुआ उपक्रम है। गुरुदेव तुलसी के समय से ज्ञानशाला का बीज वपन हुआ था। महासभा के तत्त्वावधान में चलने वाला एक उपक्रम है। इसमें सभा और अन्य संस्थाएं भी सहयोगी के रूप में अपना योगदान देने वाली हो सकती हैं। ज्ञानशाला का उपक्रम बच्चों के लिए बहुत अच्छा विकास किया है। छोटे-छोटे बच्चे भी धार्मिक गतिविधि से जुड़ते हैं, ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों के द्वारा अनेक प्रस्तुतियां होती हैं, अपने प्रदर्शनी आदि के द्वारा अपने अनेक ज्ञानों को प्रदर्शित करते हैं। बच्चे उसकी व्याख्या भी करते हैं। भाद्रव महीने का पहला रविवार ज्ञानशाला दिवस के रूप में 6आज का यह कार्यक्रम हो रहा है। धार्मिक ज्ञान इन्हें मिलता रहे तो बच्चे बुराइयों से बच सकते हैं। ज्ञानशाला एक सुंदर कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से कितने-कितने बच्चों को धर्म से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। पहले बच्चों को स्कूल व बाद में ज्ञानशाला के उपक्रम का अध्ययन करना भी बहुत अच्छी बात है। ज्ञानशाला में सेवा देने वाली प्रशिक्षिकाएं भी अपना कितना अच्छा योगदान देती हैं। बच्चे समाज व देश का भविष्य होते हैं। बच्चों में अच्छे संस्कार मजबूती से आ जाएं और उनका अच्छा विकास हो जाए तो वे आगे जाकर समाज की अच्छी सेवा कर सकते हैं और देश की अच्छी सेवा भी कर सकते हैं और उनमें अच्छी धार्मिक-आध्यात्मिक सेवा भी कर सकते हैं। ये संकल्प बच्चों का अच्छा निर्माण करने में योगदायी बन सकते हैं। गुरुदेव तुलसी के समय इसका क्रम प्रारम्भ हुआ, बाद में इसने अपना बहुत अच्छा विकास किया। एक-एक ज्ञानशाला में कितने-कितने प्रशिक्षण देने वाले और कितने-कितने व्यवस्थातंत्र में अपनी सेवा देने वाले होते हैं। अभिभावकों का भी योगदान होता है और कई चीजें मिलती हैं, तब यह ज्ञानशाला का सुन्दर रूप सामने आता है। माता-पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने का प्रयास करते रहें। ज्ञानशाला के बच्चे संस्थाओं के अध्यक्ष बनें या अथवा न बनें, कोई पद अथवा न पाएं, किन्तु तेरापंथ समाज के अच्छे श्रावक-श्राविका अथवा साधु, साध्वी समण-समणियां अवश्य बनें। हमारे अनेक ज्ञानशाला से जुड़े लोग धर्मसंघ में चारित्रात्माओं के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सूरत जैसे शहर की ज्ञानशाला और ज्ञानशाला के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक भी सूरत में हैं तो फिर कहना ही क्या। ज्ञानशाला के बच्चों का अच्छा रूप सामने आया है। प्रशिक्षण देने वाले अपनी सेवा देते रहें, व्यवस्थातंत्र के लिए तेरापंथी सभाएं ध्यान देती हैं, नियोजन करती रहें, ज्ञानार्थियों की संख्या भी बढ़ती रहे। ज्ञानशाला खूब अच्छा विकास करती रहे और बच्चों के लिए वरदान साबित हो, मंगलकामना। ज्ञानशाला के गुजरात के आंचलिक संयोजक श्री प्रवीण मेड़तवाल, महासभा के ज्ञानशाला प्रकोष्ठ के संयोजक श्री सोहनराज चौपड़ा तथा चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री संजय सुराणा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में शासनपक्ष नेता श्रीमती शशिबेन त्रिपाठी, सूरत के डिप्युटी मेयर श्री नरेन्द्र भाई पाटिल, चेयरमेन श्री विक्रम भाई पटेल, जितो के जेटीएफ के प्रेसिडेंट श्री विनोद दुगड़, श्रमण आरोग्यम् के प्रेसिडेंट श्री प्रकाश संघवी, जितो एपेक्स के वाइस चेयरमेन श्री राजेन्द्र जैन ने आचार्यश्री के दर्शन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किए।
आचार्य महाश्रमणजी ने आज अपने प्रवचनों मे कहा कि मानव के भीतर संतोष की भावना हो पुष्ट ….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 24.08.2024, शनिवार, वेसु, सूरत (गुजरात) , जन-जन के कल्याण के लिए, जन-जन को सन्मार्ग दिखाने के लिए निरंतर अपनी मंगलवाणी प्रदान करने जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता भारत की डायमण्ड सिटि व सिल्क सिटि सूरत में वर्ष 2024 का मंगल चतुर्मास कर रहे हैं। चतुर्मास के दौरान आचार्यश्री की कल्याणवाणी का निरंतर प्रवाहित हो रही है और देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से गुरु सन्निधि में पहुंचने वाले श्रद्धालु इसका पूर्ण लाभ उठा रहे हैं। वर्षा का समय है तो यदा-कदा वर्षा का दौर भी जारी शनिवार को सुबह से ही वर्षा का क्रम जारी था, तो इस कारण महावीर समवसरण में युगप्रधान आचार्यश्री का पदार्पण संभव नहीं हो पाया तो आचार्यश्री ने अपने प्रवास स्थल प्रेक्षा भवन से जनता को पावन पाथेय ही नहीं, आख्यान से भी लाभान्वित किया। आचार्यश्री की कल्याणी वाणी का श्रवण कर श्रद्धालु जनता निहाल थी। मंगल प्रवचन से पूर्व आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में भाजपा के पुरी सांसद श्री संबित पात्रा पहुंचे। उन्होंने आचार्यश्री को वंदन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। तदुपरान्त उनका आचार्यश्री से वार्तालाप का क्रम भी रहा। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के आधार पर पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मानव की चेतना में लोभ भी विद्यमान है तो साथ ही अलोभ की चेतना भी भीतर में स्थित होती है। लोभ की एक भाव है और अलोभ भी चित्त का एक धर्म है। वीतराग बनने के लिए लोभ से मुक्त होना होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति के लिए वीतरागता की प्राप्ति आवश्यक होती है। मोक्ष की प्राप्ति के लिए वीतरागता एक कसौटी है। लोभ की वृत्ति सामान्य मनुष्यों में होती है। यहां तक की साधु में भी लोभ की चेतना विद्यमान होता है। कहा गया है कि दसवें गुणस्थान तक भी लोभ का अंश रहता ही है। भले ही वह कमजोर अवस्था में होता है, किन्तु दसवें गुणस्थान में भी उसकी विद्यमानता होती है। आदमी लोभ को कैसे प्रतनु बनाए, इसका प्रयास करना चाहिए। आयारो आगम में एक निर्देश दिया गया है कि कैसे लोभ की वृत्ति को कम किया जा सकता है। लोभ पर विजय प्राप्त करने के लिए मानव को अलोभ की साधना करने का प्रयास करना चाहिए। अलोभ की भावना को जगाने का प्रयास करना चाहिए। अलोभ की चेतना को जागृत करने के लिए आदमी को संतोष की चेतना का प्रयास करना चाहिए। पदार्थों की प्राप्ति में संतोष की भावना हो। आदमी को नित्य प्रति अलोभ की भावना को जागृत करने का प्रयास करना चाहिए। अलोभ की भावना जितना-जितना पुष्ट होता जाएगा, संतोष की अनुप्रेक्षा जितनी पुष्ट होगी, लोभ उतना प्रतनु हो सकता है। श्रावक के बारह व्रतों में पांचवां व्रत है इच्छा परिमाण। इसमें आदमी ऐसा त्याग करे कि इतने स्थान के अलावा स्थान रखने का त्याग है। पदार्थों के उपभोग में सीमा करना और संतोष रखने का प्रयास हो। गृहस्थ भी अपने जीवन में कभी ज्यादा कमाई नहीं हुई तो भी आदमी को संतोष रखने का प्रयास करना चाहिए। ज्यादा कमाई के लिए आदमी को ठगी, चोरी और बेईमानी से बचने का प्रयास करना चाहिए। मानव के जीवन में संतोष रूपी धन का विकास होना चाहिए। संतोष की भावना पुष्ट बनाने का प्रयास करना चाहिए। गृहस्थ भी अपने जीवन में लोभ को अलोभ से जितने का प्रयास करे। अपने विचारों को संतोष की भावना से भावित करने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री मुनि गजसुकुमाल के जीवन प्रसंगों का सुन्दर रूप में वर्णन किया। पावन प्रवचन व आख्यान के उपरान्त अनेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का आचार्यश्री के श्रीमुख से प्रत्याख्यान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने चौबीसी के गीत का संगान किया। श्री प्रताप सिंह सिंघी ने अपनी पुस्तक ‘सचित्र प्रज्ञावान बनो’ आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में पावन आशीर्वाद प्रदान किया। डॉ. कुसुम लुणिया ने अपनी लिखित पुस्तक ‘सर्वोत्तम जीवनशैली’ को आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया। इस संदर्भ में डॉ. लुणिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।
*फलसुण्ड (जैसलमेर)* *23 अगस्त 2024* *फलसुंड मे आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर किसानों का पुलिस थाना फलसुंड पर धरना प्रदर्शन… गणेश जैन,राज्य संवाददाता राजस्थान, Key Line Times गणेश जैन फलसूड़ जिला जैसलमेर फलसूंड तहसील के सेकड़ो किसानों ने शुक्रवार थाना अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की ग्राम सेवा सहकारी समिति मानासर, फलसुंड, स्वामीजी की ढाणी, पदमपुरा, भुर्जगढ़, दातल सोसायटीयो दी सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक शाखा राजमथाई के अंतर्गत करीब 2021 से 2022 तक 30 करोड़ का घोटाले के मामले में किसानों ने सोसायटी संचालको की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने बताया कि तहसीलदार फलसूंड को ज्ञापन सौंपा था, भणियाणा उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी की रिपार्ट किसानों को उपलब्ध करवाने। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि दी सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक राजमथाई में करोड़ों रुपए के गबन करने के आरोपियों को पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। कोऑपरेटिव मानासर , फलसूंड , स्वामीजी कि ढाणी ,पदमपुरा एंव दातल के व्यवस्थापको एवं सचिवो ने मिलकर फर्जी बटाईदार के दस्तावेजों बनाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के डीसी की राशि के करोड़ों रुपए का घोटाला कर राशि उठाई थी। साथ ही उन्होंने किसानों के रुपए उठाकर अपने चहेतों के खातों में जमा करवाई है। इसमें साफ लिखा कि बटाईदार के जो दस्तावेज ऑन रिकॉर्ड पेश किए हैं, वो फर्जी तैयार किए गए हैं। इसके संबंध में पुलिस थाना फलसूड में 25 अगस्त2023 को मुकदमा दर्ज करवाया गया था। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई , ग्रामीणों ने बताया कि इसकी जाच रिपोर्ट सार्वजनिक हो। सोसायटी संचालक गिरफ्तार हो। सोसायटी भग हो। किसान को हक दो। फर्जी बंटाईदारों को गिरफ्तार किया जाए। समय रहते यदि कोई कार्यवाही नहीं होती है। तो फिर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा तहसील स्तर पर जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेवारी प्रशासन की होगी। किसानों ने फसल बीमा राशि के नाम पर हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की। किसानों का आरोप है कि हम पिछले एक साल से जगह जगह ठोकर खा रहे हैं। कोई हमारी सुनवाई नहीं कर रहे है। जिला प्रशासन राजनेता, आखिरकार परेशान होकर मजबूर जयपुर जाकर धरना प्रदर्शन किया जाएगा मुख्यमंत्री कार्यालय ।
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आचार्य श्री महाश्रमणजी ने आज कहा कि स्वयं के भीतर है साधना की ऊंचाई …सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times *- राग-द्वेष से मुक्त होकर इन्द्रिय संयम की आचार्यश्री ने दी पावन प्रेरणा* *-भाजपा युवामोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या पहुंचे पूज्य सन्निधि में* *-अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के 58वें अधिवेशन का पूज्य सन्निधि में मंगल शुभारम्भ* 23.08.2024, शुक्रवार, वेसु, सूरत (गुजरात),शुक्रवार को महावीर समवसरण से महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के आधार पर पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि शब्द, रूप, रस, गन्ध व स्पर्श ये पांच विषय हैं। इन पांच विषयों के पांच इन्द्रियां भी होती हैं। कान का विषय शब्द, आंख का विषय रूप, जिह्वा का विषय रस, नाक का विषय गन्ध व त्वचा का विषय स्पर्श होता है। इन पांच विषयों के प्रति जिसका मोह हो जाता है, वह आदमी उन विषयों के सेवन में निमग्न हो जाता है और उसमें डूब जाता है। विषयों के प्रति आसक्ति हो जाने आदमी फंस जाता है। अध्यात्म की साधना और आत्मकल्याण के लिए इन्द्रियों का संयम करना आवश्यक होता है। संयम करने के लिए दो प्रकार-इन्द्रियों का निरोध करना अर्थात् इन्द्रियों के विषयों से दूर हो जाना। इन्द्रियां ही आदमी को बाहर के जगत से जोड़ने वाली होती हैं। जो मनुष्य इन्द्रियों का निरोध कर लेता है, मानों इसका बाह्य जगत से सम्पर्क टूट-सा जाता है। बाहर से सम्पर्क तोड़कर मनुष्य जब भीतर की ओर जाता है तो वह साधना की ऊंचाई की ओर बढ़ सकता है। दूसरी विधि बताई गयी है कि इन्द्रिय विषयों में राग-द्वेष नहीं करना। शब्द कान में पड़े, उसके प्रति राग-द्वेष न हो। आंख से देखने के बाद भी राग-द्वेष न हो, भोजन किया, किन्तु उनके प्रति राग-द्वेष न हो। इस प्रकार पांच विषयों के प्रति राग-द्वेष न हो तो संयम की साधना हो सकती है। जितना संभव हो सके इन्द्रियों का निरोध करने का प्रयास हो, और जहां इन्द्रियों का उपयोग हो, वहां राग और द्वेष की भावना से बचने का प्रयास हो। इस प्रकार मानव इन्द्रियों के संयम की साधना कर सकता है। विषयासक्त होकर आदमी जीवन में अनेक कष्ट झेलता है तो उससे आत्मा का भी नुकसान हो सकता है। अपनी आत्मा के कल्याण और जीवन को दुःख से मुक्त बनाने के लिए इन्द्रियों की साधना करने का प्रयास करना चाहिए। साधक लोग भी अपने जीवन में राग-द्वेष से मुक्त होकर साधना करे तो वह साधना निष्पत्तिदायक हो सकती है। चतुर्मास का समय चल रहा है। कितने-कितने लोग तपस्या कर रहे हैं, कितने लोग कर लिए होंगे। तपस्या करने से रसनेन्द्रिय का निरोध हो जाता है। पारणा हो जाए तो भी रसनेन्द्रिय का संयम रखने का प्रयास होना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मुनि गजसुकुमाल के आख्यान का संगान व वाचन किया। गुरुमुख से सुन्दर आख्यान का श्रवण का लाभ प्राप्त कर श्रद्धालु भावविभोर नजर आ रहे थे। मंगल प्रवचन, सुन्दर आख्यान का श्रवण करने के उपरान्त अनेक श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान अपने महातपस्वी गुरु से कर अपने जीवन को धन्य बनाया। तदुपरान्त युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का 58वां वार्षिक अधिवेशन प्रारम्भ हुआ। इस संदर्भ में अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा तथा अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि योगेशकुमारजी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में बेंगलुरु दक्षिण के सांसद व भाजपा युवामोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री तेजस्वी सूर्या ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि मैं परम पूज्य संत आचार्यश्री महाश्रमणजी को वंदन करता हूं। मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपके दर्शन करने व आशीर्वाद प्राप्त करने का सुअवसर मिला है। भारत की आत्मा आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई हैं और इसमें साधु-संतों के आशीर्वाद और गुरु परंपरा का बड़ा महत्त्व है। भारत को हमेशा भारत बनाए रखने की जिम्मेदारी युवाओं की है। मैं पुनः आपके चरणों में प्रणाम अर्पित करता हूं। युवाओं को साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने पावन प्रेरणा प्रदान की। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने युवाओं को प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य को यह ध्यान देना चाहिए अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करे। युवावस्था बहुत उपयोगी हो सकती है। जिनके पास शारीरिक, बौद्धिक क्षमता आदि होती है, इसका बढिया उपयोग करने का प्रयास हो और वैसा पुरुषार्थ किया जाए तो जीवन में कुछ प्राप्त भी हो सकता है। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का अधिवेशन हो रहा है। इसके द्वारा अनेक गतिविधियां संचालित कर जा रही हैं। यह धर्मसंघ से जुड़ी हुई संस्था है। अपने कार्यों के साथ गतिविधियों के समय देना भी बड़ी बात होती है। कितने-कितने युवाओं को हमारी रास्ते की सेवा में युवावाहिनी का अच्छा उपयोग हो सकता है। युवाओं में अच्छा उत्साह बना रहे। अधिवेशन के आलावा भी समीक्षा करते रहने का प्रयास करना चाहिए। परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी के जन्मी संस्था यह अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद है। यह संस्था धार्मिक दृष्टि से सेना के समान है। इसके सभी सदस्यों में अच्छी धार्मिक भावना पुष्ट होती रहे। युवा अपने जीवन में सद्भावना, ईमानदारी और नशामुक्ति की भावना बनी रहे और भी अच्छा कार्य चलता रहे। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्य महाप्रज्ञ प्रतिभा पुरस्कार श्री अनिल बैद (गुडगांव) को अभातेयुप द्वारा प्रदान किया गया। प्रशस्ति पत्र का वाचन अभातेयुप के उपाध्यक्ष श्री पवन माण्डोत ने किया। पुरस्कार प्राप्तकर्ता श्री अनिल बैद ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें शुभाशीर्वाद प्रदान किया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद ने गीत का संगान किया। पूरे कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमारजी ने किया तथा पुरस्कार अलंकरण सम्मान समारोह कार्यक्रम का संचालन अभातेयुप के महामंत्री श्री अमित नाहटा ने किया।