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July 25, 2026

Key line times

Key Line Times राष्ट्रीय हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र है जो राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होता है एंव भारत सरकार के सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आर.एन.आई. से रजिस्ट्रड है। इसका आर.एन.आई.न. DELHIN/2017/72528 है। यह समाचार पत्र 2017 से लगातार प्रकाशित हो रहा है।
जैन भगवती दीक्षा समारोह में दो बहनों ने संयम जीवन किया स्वीकार महातपस्वी महाश्रमण की मंगल सन्निधि में सूरत में आयोजित हुआ दूसरा दीक्षा समारोह….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times तेरापंथ धर्मसंघ के 31वें विकास महोत्सव का हुआ भव्य आयोजन* *-विकास के लिए परिस्कार भी आवश्यक : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* *12.09.2024, गुरुवार, वेसु, सूरत (गुजरात) :* दुनिया में डायमण्ड व सिल्क सिटि के रूप में सुविख्यात सूरत शहर में वर्ष 2024 का चतुर्मास कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, मानवता के मसीहा, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने गुरुवार को तेरापंथ धर्मसंघ के 31वें विकास महोत्सव के अवसर पर सूरत की धरा पर इस चतुर्मास के दौरान दूसरे दीक्षा समारोह में दो दीक्षार्थियों को दीक्षा प्रदान कर संयम पथ पर आगे बढ़ाया तो पूरा संयम विहार मानों जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री की इस कृपा से विकास महोत्सव पर तेरापंथ धर्मसंघ की साधु परंपरा में साध्वियों की संख्या भी वृद्धिंगत हुई। गुरुवार को महावीर समवसरण में दो-दो आयोजन एक साथ हो रहे थे। एक ओर तेरापंथाधिशास्ता की सन्निधि में तेरापंथ धर्मसंघ का 31वें विकास महोत्सव का अवसर था तो दूसरी ओर सूरत की धरा पर इस चतुर्मास के दौरान दूसरी जैन भगवती दीक्षा समारोह का भव्य समायोजन भी हो रहा था। आज का प्रथम कार्यक्रम विकास महोत्सव के रूप में समायोजित हुआ। 31वें विकास महोत्सव का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मुखकमल से उच्चरित महामंत्रोच्चार से हुआ। तेरापंथ महिला मण्डल-सूरत ने गीत का संगान किया। विकास परिषद के संयोजक श्री मांगीलाल सेठिया, सदस्य श्री पदमचन्द पटावरी व श्री बनेचंद मालू ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। साध्वीवृंद ने विकास महोत्सव के संदर्भ में गीत का संगान किया। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी, साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने विकास महोत्सव के संदर्भ में जनता को उद्बोधित किया। तदुपरान्त विकास महोत्सव के साथ महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में सूरत चतुर्मास के दौरान आयोजित दूसरे जैन भगवती दीक्षा समारोह का आयोजन भी था। इस समारोह के अंतर्गत मुमुक्षु अंजलि सिंघवी ने दीक्षार्थी बहनों का परिचय प्रस्तुत किया। तदुपरान्त पारमार्थिक शिक्षण संस्था के अध्यक्ष श्री बजरंगलाल जैन ने दीक्षार्थियों के परिजनों से प्राप्त आज्ञा पत्रों का वाचन किया। दीक्षार्थियों के परिजनों ने आज्ञा पत्र आचार्यश्री के करकमलों में समर्पित किया। दीक्षार्थी ऋजुल मेहता तथा दीक्षार्थी दीप्ति वेदमूथा ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। वर्तमान तेरापंथाधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आज के अवसर पर समुपस्थित जनमेदिनी को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि मैंने अतीत में जो कुछ भी प्रमाद किया है, वह अब नहीं करूंगा। यह वाक्य संन्यास से जुड़ा हुआ उद्घोष है। आज जैन भगवती दीक्षा का अवसर भी है। आचार्यश्री ने दीक्षार्थियों के परिजनों से परिषद के मध्य मौखिक आज्ञा भी लेने के साथ ही दोनों दीक्षार्थियों की भावनाओं का अंतिम परिक्षण किया। तदुपरान्त आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए दीक्षार्थियों को दीक्षा प्रदान की। आचार्यश्री ने तीन करण तीन योग से सर्व सावद्य योग का त्याग कराया। नवदीक्षित साध्वियों को आचार्यश्री को सविधि वंदन किया। आचार्यश्री ने आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए नवदीक्षित साध्वियों को अतीत की आलोचना कराई। नवदीक्षित साध्वियों के केशलोच का संस्कार साध्वीप्रमुखाजी ने पूर्ण किया। तदुपरान्त साध्वीप्रमुखाजी ने नवदीक्षित साध्वियों को रजोहरण प्रदान किया। आचार्यश्री ने दीक्षार्थी ऋजुल को साध्वी धन्यप्रभाजी तथा दीक्षार्थी दीप्ति को साध्वी देवार्यप्रभाजी नवीन नाम प्रदान किया। इस प्रकार आचार्यश्री ने नवदीक्षित साध्वियों को नवीन नाम प्रदान किया। समुपस्थित विशालजनमेदिनी ने नवदीक्षित साध्वियों का अभिवादन किया। आचार्यश्री ने नवदीक्षित साध्वियों को यतनापूर्वक अपना प्रत्येक कार्य करने तथा जीवन में संयम रखने की प्रेरणा प्रदान की। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने विकास महोत्सव के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि भाद्रव शुक्ला नवमी का दिन वर्षों तक हमारे धर्मसंघ में आचार्यश्री तुलसी के पट्टोत्सव के रूप में मनाया जाता था। सन् 1994 में सुजानगढ़ मर्यादा महोत्सव के समारोह में अपने आचार्य पद के विसर्जन की घोषणा की और युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी को आचार्य के रूप में उद्घोषित किया। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा कर दी कि अब मेरा पट्टोत्सव नहीं, वर्तमान आचार्य का पट्टोत्सव मनाया जाएगा। ऐसे में प्रज्ञावान आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने एक बीच का रास्ता निकाला और परम पूज्य गुरुदेव तुलसी के पट्टोत्सव को विकास महोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा कर दी। इस विकास महोत्सव की पृष्ठभूमि में विसर्जन और त्याग से पैदा हुआ महोत्सव है। सभी को अपने जीवन में विकास करने का प्रयास करना चाहिए। अनुशासन विकास का मूल कहा जाता है। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ को प्रारम्भ हुए 264 वर्ष बीत चुके हैं। एक दशक के आचार्य की शृंखला सम्पन्न हो चुकी है और दूसरे दशक के आचार्य परंपरा का प्रथम चरण प्रारम्भ है। जीवन में विकास करने का प्रयास करना चाहिए। अच्छाई को लेने और गलत को छोड़ने की भावना होनी चाहिए। विकास के लिए परिस्कार की अपेक्षा होती है। आचार्यश्री ने विकास महोत्सव के आधारभूत पत्र का वाचन कर जनता को श्रवण कराया। तीन बाइयों को मुमुक्षु रूप में पारमार्थिक शिक्षण संस्था में कार्य करने हेतु मंगलपाठ सुनाया। विकास महोत्सव के संदर्भ में आचार्यश्री ने स्वरचित गीत का संगान किया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने चतुर्मास के उपरान्त अनेक साधु-साध्वियों के आगे के विहार क्षेत्र की घोषणा की। आचार्यश्री ने धर्मसंघ में निरंतर विकास करने और धार्मिक-आध्यात्मिक उन्नति करने की प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने अपने स्थान पर खड़े होकर संघगान किया। आचार्यश्री ने संघगान के उपरान्त जयघोष भी कराया। तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। बाव के राणा श्री गजेन्द्रसिंह ने आचार्यश्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त उन्होंने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।

जैन भगवती दीक्षा समारोह में दो बहनों ने संयम जीवन किया स्वीकार महातपस्वी महाश्रमण की मंगल सन्निधि में सूरत में आयोजित हुआ दूसरा दीक्षा समारोह….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times तेरापंथ धर्मसंघ के 31वें विकास महोत्सव का हुआ भव्य आयोजन* *-विकास के लिए परिस्कार भी आवश्यक : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* *12.09.2024, गुरुवार, वेसु, सूरत (गुजरात) :* दुनिया में डायमण्ड व सिल्क सिटि के रूप में सुविख्यात सूरत शहर में वर्ष 2024 का चतुर्मास कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, मानवता के मसीहा, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने गुरुवार को तेरापंथ धर्मसंघ के 31वें विकास महोत्सव के अवसर पर सूरत की धरा पर इस चतुर्मास के दौरान दूसरे दीक्षा समारोह में दो दीक्षार्थियों को दीक्षा प्रदान कर संयम पथ पर आगे बढ़ाया तो पूरा संयम विहार मानों जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री की इस कृपा से विकास महोत्सव पर तेरापंथ धर्मसंघ की साधु परंपरा में साध्वियों की संख्या भी वृद्धिंगत हुई। गुरुवार को महावीर समवसरण में दो-दो आयोजन एक साथ हो रहे थे। एक ओर तेरापंथाधिशास्ता की सन्निधि में तेरापंथ धर्मसंघ का 31वें विकास महोत्सव का अवसर था तो दूसरी ओर सूरत की धरा पर इस चतुर्मास के दौरान दूसरी जैन भगवती दीक्षा समारोह का भव्य समायोजन भी हो रहा था। आज का प्रथम कार्यक्रम विकास महोत्सव के रूप में समायोजित हुआ। 31वें विकास महोत्सव का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मुखकमल से उच्चरित महामंत्रोच्चार से हुआ। तेरापंथ महिला मण्डल-सूरत ने गीत का संगान किया। विकास परिषद के संयोजक श्री मांगीलाल सेठिया, सदस्य श्री पदमचन्द पटावरी व श्री बनेचंद मालू ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। साध्वीवृंद ने विकास महोत्सव के संदर्भ में गीत का संगान किया। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी, साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने विकास महोत्सव के संदर्भ में जनता को उद्बोधित किया। तदुपरान्त विकास महोत्सव के साथ महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में सूरत चतुर्मास के दौरान आयोजित दूसरे जैन भगवती दीक्षा समारोह का आयोजन भी था। इस समारोह के अंतर्गत मुमुक्षु अंजलि सिंघवी ने दीक्षार्थी बहनों का परिचय प्रस्तुत किया। तदुपरान्त पारमार्थिक शिक्षण संस्था के अध्यक्ष श्री बजरंगलाल जैन ने दीक्षार्थियों के परिजनों से प्राप्त आज्ञा पत्रों का वाचन किया। दीक्षार्थियों के परिजनों ने आज्ञा पत्र आचार्यश्री के करकमलों में समर्पित किया। दीक्षार्थी ऋजुल मेहता तथा दीक्षार्थी दीप्ति वेदमूथा ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। वर्तमान तेरापंथाधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आज के अवसर पर समुपस्थित जनमेदिनी को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि मैंने अतीत में जो कुछ भी प्रमाद किया है, वह अब नहीं करूंगा। यह वाक्य संन्यास से जुड़ा हुआ उद्घोष है। आज जैन भगवती दीक्षा का अवसर भी है। आचार्यश्री ने दीक्षार्थियों के परिजनों से परिषद के मध्य मौखिक आज्ञा भी लेने के साथ ही दोनों दीक्षार्थियों की भावनाओं का अंतिम परिक्षण किया। तदुपरान्त आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए दीक्षार्थियों को दीक्षा प्रदान की। आचार्यश्री ने तीन करण तीन योग से सर्व सावद्य योग का त्याग कराया। नवदीक्षित साध्वियों को आचार्यश्री को सविधि वंदन किया। आचार्यश्री ने आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए नवदीक्षित साध्वियों को अतीत की आलोचना कराई। नवदीक्षित साध्वियों के केशलोच का संस्कार साध्वीप्रमुखाजी ने पूर्ण किया। तदुपरान्त साध्वीप्रमुखाजी ने नवदीक्षित साध्वियों को रजोहरण प्रदान किया। आचार्यश्री ने दीक्षार्थी ऋजुल को साध्वी धन्यप्रभाजी तथा दीक्षार्थी दीप्ति को साध्वी देवार्यप्रभाजी नवीन नाम प्रदान किया। इस प्रकार आचार्यश्री ने नवदीक्षित साध्वियों को नवीन नाम प्रदान किया। समुपस्थित विशालजनमेदिनी ने नवदीक्षित साध्वियों का अभिवादन किया। आचार्यश्री ने नवदीक्षित साध्वियों को यतनापूर्वक अपना प्रत्येक कार्य करने तथा जीवन में संयम रखने की प्रेरणा प्रदान की। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने विकास महोत्सव के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि भाद्रव शुक्ला नवमी का दिन वर्षों तक हमारे धर्मसंघ में आचार्यश्री तुलसी के पट्टोत्सव के रूप में मनाया जाता था। सन् 1994 में सुजानगढ़ मर्यादा महोत्सव के समारोह में अपने आचार्य पद के विसर्जन की घोषणा की और युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी को आचार्य के रूप में उद्घोषित किया। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा कर दी कि अब मेरा पट्टोत्सव नहीं, वर्तमान आचार्य का पट्टोत्सव मनाया जाएगा। ऐसे में प्रज्ञावान आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने एक बीच का रास्ता निकाला और परम पूज्य गुरुदेव तुलसी के पट्टोत्सव को विकास महोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा कर दी। इस विकास महोत्सव की पृष्ठभूमि में विसर्जन और त्याग से पैदा हुआ महोत्सव है। सभी को अपने जीवन में विकास करने का प्रयास करना चाहिए। अनुशासन विकास का मूल कहा जाता है। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ को प्रारम्भ हुए 264 वर्ष बीत चुके हैं। एक दशक के आचार्य की शृंखला सम्पन्न हो चुकी है और दूसरे दशक के आचार्य परंपरा का प्रथम चरण प्रारम्भ है। जीवन में विकास करने का प्रयास करना चाहिए। अच्छाई को लेने और गलत को छोड़ने की भावना होनी चाहिए। विकास के लिए परिस्कार की अपेक्षा होती है। आचार्यश्री ने विकास महोत्सव के आधारभूत पत्र का वाचन कर जनता को श्रवण कराया। तीन बाइयों को मुमुक्षु रूप में पारमार्थिक शिक्षण संस्था में कार्य करने हेतु मंगलपाठ सुनाया। विकास महोत्सव के संदर्भ में आचार्यश्री ने स्वरचित गीत का संगान किया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने चतुर्मास के उपरान्त अनेक साधु-साध्वियों के आगे के विहार क्षेत्र की घोषणा की। आचार्यश्री ने धर्मसंघ में निरंतर विकास करने और धार्मिक-आध्यात्मिक उन्नति करने की प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने अपने स्थान पर खड़े होकर संघगान किया। आचार्यश्री ने संघगान के उपरान्त जयघोष भी कराया। तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। बाव के राणा श्री गजेन्द्रसिंह ने आचार्यश्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त उन्होंने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।

पुलिस मित्र सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया सर्प शिक्षाअभियान से सर्पदंश मृत्यु विहीन भारत बने…सतीशचन्द लुणावत। बिजयनगर सतीशचन्द लुणावत राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान गुलाबपुरा भीलवाड़ा राजस्थान में आज रेट स्नेक आ जाने की सुचना मिलने पर पुलिस मित्र सुरेंद्र सिंह भाटी स्नेक रेस्क्यूवर व सर्प शिक्षा अभियान से जुड़े बिजयनगर को सुचना मिलने पर यहां से रवाना हुए तों बिजयनगर पार्षद वार्ड नंबर दो के ऋषिदत्त जी द्वारा फोन आया की छ फीट का सांप निर्भय स्वामी के घर के सामने आ गया। बलवीर कालोनी में जा कर बड़े ही सहज भाव से रेस्क्यू कर सर्प शिक्षा अभियान के तहत आमजन को जागरूक किया व बाद में गुलाबपुरा के लिए रवाना हुए व वहां भी रेट स्नेक दिखाई दिया लेकिन सांप को पकड़ने से पहले वह शौचालय की सीट के जरिए टेक में चला गया। बाद में आई.टी.आई.सेटर के प्रिंसिपल शीतल जी गोठवाल व स्टाफ मोहम्मद असलम, प्रकाश चंद गुप्ता से भाटी द्वारा सर्प शिक्षा अभियान जागृति से सर्पदंश मुक्त भारत बनें पर चर्चा हुई व विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ सर्प शिक्षा को भी लिए बहुत जरूरी बताया इसके लिए विधार्थियों का तीस मिनट का समय लिया।जिस में विभिन्न गांवों से आए रूपाहली, सरेड़ी,जालिया सेकंड, बरल, खारी का लांबा बड़ली, नगर, कोठीया क्षैत्र के मौजूद थे, सर्प शिक्षा अभियान के साथ सर्पदंश से कैसे बचें,क्षेत्र में हो रही अधिक बारिश के कारण सांप अपना जीवन बचाने के लिए बिलों निकालकर कॉलोनी व मकानों में आ जाने पर घबराएं नहीं वन विभाग टीम या एक्सपक्ट रेस्क्यूवर की हेल्प ले। उचित नजर बनाते हुए ध्यान रखें तथा साथ ही बारिश के समय में खेतों पर जाने से पहले सेफ्टी शूज, व दस्तानों के साथ रात्रि में जाएं तो साथ में पांच फीट लंबा सरिया एल टाईप का व टॉर्च लेकर जाएं जहां पानी भरा है मेंढक की आवाज आती है उसे जगह सावधानी बरतें तथा मोटर घरो में पड़े सामानों का विशेष ध्यान रखें। यदि उसके बाद भी किसी को सर्प दंश हो जाता है। तो घबराई नहीं सबसे पहले उचित दूरी से सांप हो तों उसकी फोटो ले, दंश के स्थान को डेटॉल या एंटीसेप्टिक साबुन से धोएं व कोई भी अंगुठी, कड़ा या पैरों में पायल बिछिया भी पहना हो तो खोल दें।बाद में उस स्थान को लकड़ी की खपचियों लगा कर कपड़े से बांधे लेकिन ज्यादा टाईट नहीं व बीना समय गंवाए राजकीय चिकित्सालय में डॉक्टरों के मार्गदर्शन पर एंटीक स्नेक वेन्यू लगवायें झाड़ फूंक व अंधविश्वास में विश्वास ना करे।व जिस व्यक्ति को सर्प दंश हुआ है उसे होसला बंधाये नींद आयें तों सोने नहीं दे। सर्प से सम्बंधित अनेकों जानकारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई वह सभी विद्यार्थियों ने कहा की वह सर्प शिक्षा अभियान के जरिए सर्पदंश से कैसे आमजन को सुरक्षित रखे,व सांप को नुक्सान नहीं पहुचाने का प्रयास करेंगे।

पुलिस मित्र सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया सर्प शिक्षाअभियान से सर्पदंश मृत्यु विहीन भारत बने…सतीशचन्द लुणावत। बिजयनगर सतीशचन्द लुणावत राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान गुलाबपुरा भीलवाड़ा राजस्थान में आज रेट स्नेक आ जाने की सुचना मिलने पर पुलिस मित्र सुरेंद्र सिंह भाटी स्नेक रेस्क्यूवर व सर्प शिक्षा अभियान से जुड़े बिजयनगर को सुचना मिलने पर यहां से रवाना हुए तों बिजयनगर पार्षद वार्ड नंबर दो के ऋषिदत्त जी द्वारा फोन आया की छ फीट का सांप निर्भय स्वामी के घर के सामने आ गया। बलवीर कालोनी में जा कर बड़े ही सहज भाव से रेस्क्यू कर सर्प शिक्षा अभियान के तहत आमजन को जागरूक किया व बाद में गुलाबपुरा के लिए रवाना हुए व वहां भी रेट स्नेक दिखाई दिया लेकिन सांप को पकड़ने से पहले वह शौचालय की सीट के जरिए टेक में चला गया। बाद में आई.टी.आई.सेटर के प्रिंसिपल शीतल जी गोठवाल व स्टाफ मोहम्मद असलम, प्रकाश चंद गुप्ता से भाटी द्वारा सर्प शिक्षा अभियान जागृति से सर्पदंश मुक्त भारत बनें पर चर्चा हुई व विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ सर्प शिक्षा को भी लिए बहुत जरूरी बताया इसके लिए विधार्थियों का तीस मिनट का समय लिया।जिस में विभिन्न गांवों से आए रूपाहली, सरेड़ी,जालिया सेकंड, बरल, खारी का लांबा बड़ली, नगर, कोठीया क्षैत्र के मौजूद थे, सर्प शिक्षा अभियान के साथ सर्पदंश से कैसे बचें,क्षेत्र में हो रही अधिक बारिश के कारण सांप अपना जीवन बचाने के लिए बिलों निकालकर कॉलोनी व मकानों में आ जाने पर घबराएं नहीं वन विभाग टीम या एक्सपक्ट रेस्क्यूवर की हेल्प ले। उचित नजर बनाते हुए ध्यान रखें तथा साथ ही बारिश के समय में खेतों पर जाने से पहले सेफ्टी शूज, व दस्तानों के साथ रात्रि में जाएं तो साथ में पांच फीट लंबा सरिया एल टाईप का व टॉर्च लेकर जाएं जहां पानी भरा है मेंढक की आवाज आती है उसे जगह सावधानी बरतें तथा मोटर घरो में पड़े सामानों का विशेष ध्यान रखें। यदि उसके बाद भी किसी को सर्प दंश हो जाता है। तो घबराई नहीं सबसे पहले उचित दूरी से सांप हो तों उसकी फोटो ले, दंश के स्थान को डेटॉल या एंटीसेप्टिक साबुन से धोएं व कोई भी अंगुठी, कड़ा या पैरों में पायल बिछिया भी पहना हो तो खोल दें।बाद में उस स्थान को लकड़ी की खपचियों लगा कर कपड़े से बांधे लेकिन ज्यादा टाईट नहीं व बीना समय गंवाए राजकीय चिकित्सालय में डॉक्टरों के मार्गदर्शन पर एंटीक स्नेक वेन्यू लगवायें झाड़ फूंक व अंधविश्वास में विश्वास ना करे।व जिस व्यक्ति को सर्प दंश हुआ है उसे होसला बंधाये नींद आयें तों सोने नहीं दे। सर्प से सम्बंधित अनेकों जानकारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई वह सभी विद्यार्थियों ने कहा की वह सर्प शिक्षा अभियान के जरिए सर्पदंश से कैसे आमजन को सुरक्षित रखे,व सांप को नुक्सान नहीं पहुचाने का प्रयास करेंगे।

*गुजरात राज्य के डांग जिलेमे सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रम के तहत शासकीय माध्यमिक विद्यालय कालीबेल एवं एकलव्य विद्यालय अहवा में स्क्रीनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया…सुभाष एल पंवार डांग,स्कूल जाने वाले बच्चों की जांच जिला पंचायत स्वास्थ्य शाखा द्वारा डांग जिले के वधाई तालुका के एक सरकारी माध्यमिक विद्यालय कालीबेल के साथ-साथ एकलव्य स्कूल, अहवानी में की गई। इस बीच, कालीबेल में 78 बच्चों का डीटीटी परीक्षण किया गया। जिनमें से 6 नमूने एचपीएलसी के लिए लिए गए जो सकारात्मक थे। इसी तरह अहवा में भी बच्चों के सैंपल लिए गए। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उक्त विद्यालयों में सिकल सेल रोग की रोकथाम के बारे में भी व्यापक जानकारी दी गयी. सिकल सेल रोग एक वंशानुगत रोग है। संबंधित समस्याओं को फैलने से रोका जा सकता है। यहां यह भी समझ दी गई कि यदि पुरुष और महिला दोनों सिकल सेल वाहक हैं, तो उन्हें एक-दूसरे से शादी नहीं करनी चाहिए। शादी से पहले इस बीमारी की जांच कराकर इस बीमारी से बचा जा सकता है। वहीं इस बीमारी से बचाव के लिए दाम्पत्य से पहले सिकल सेल की जांच अनिवार्य करने की भी जानकारी दी गयी. इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य कर्मी, स्कूल के प्राचार्य, शिक्षक और बच्चे मौजूद थे.

*गुजरात राज्य के डांग जिलेमे सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रम के तहत शासकीय माध्यमिक विद्यालय कालीबेल एवं एकलव्य विद्यालय अहवा में स्क्रीनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया…सुभाष एल पंवार डांग,स्कूल जाने वाले बच्चों की जांच जिला पंचायत स्वास्थ्य शाखा द्वारा डांग जिले के वधाई तालुका के एक सरकारी माध्यमिक विद्यालय कालीबेल के साथ-साथ एकलव्य स्कूल, अहवानी में की गई। इस बीच, कालीबेल में 78 बच्चों का डीटीटी परीक्षण किया गया। जिनमें से 6 नमूने एचपीएलसी के लिए लिए गए जो सकारात्मक थे। इसी तरह अहवा में भी बच्चों के सैंपल लिए गए। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उक्त विद्यालयों में सिकल सेल रोग की रोकथाम के बारे में भी व्यापक जानकारी दी गयी. सिकल सेल रोग एक वंशानुगत रोग है। संबंधित समस्याओं को फैलने से रोका जा सकता है। यहां यह भी समझ दी गई कि यदि पुरुष और महिला दोनों सिकल सेल वाहक हैं, तो उन्हें एक-दूसरे से शादी नहीं करनी चाहिए। शादी से पहले इस बीमारी की जांच कराकर इस बीमारी से बचा जा सकता है। वहीं इस बीमारी से बचाव के लिए दाम्पत्य से पहले सिकल सेल की जांच अनिवार्य करने की भी जानकारी दी गयी. इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य कर्मी, स्कूल के प्राचार्य, शिक्षक और बच्चे मौजूद थे.

आचार्य महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन मे कहा कि भोगी और रोगी नहीं, योगी बनने की दिशा में हो गति….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 11.09.2024, बुधवार, वेसु, सूरत (गुजरात), युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को आयारो आगम के माध्यम से पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को जब यह जानकारी हो जाती है कि काम-भोगों से जीवन में रोग की उत्पत्ति होती है। आदमी अत्राण और अशरण भी है, दुःख, सुख भी अपना-अपना होता है। इन बातों का ज्ञान होने के बाद भी कुछ लोग धर्म की ओर आगे बढ़ जाते हैं और कुछ लोग जानकर भी भोगों के विषय में ही आसक्त रहते हैं। तीन शब्द बताए गए हैं- भोग, योग और रोग। योग साधना में धर्म और अध्यात्म की साधना होती है, जिससे आत्मा के रोग भी दूर हो जाते हैं। कई बार शारीरिक कष्ट भी योग की साधना से दूर हो सकते हैं। जीवन को चलाने में पदार्थों की अपेक्षा भी होती है। आदमी को यह विचार करना चाहिए कि आदमी को अपने जीवन में किसी पदार्थ की आवश्यकता कितनी है और अपेक्षा और लालसा कितनी है। भूख लगे तो भोजन, प्यास लगे तो पानी, शरीर के लिए कपड़ा, आश्रय के लिए मकान की आवश्यकता होती है। पढ़ने-लिखने के लिए संबंधित पदार्थ चाहिए। सोने के लिए कुर्सी और पलंग की आवश्यकता होती है। ये सारी चीजें तो आवश्यक हैं, किन्तु इन संदर्भों में इच्छा कितनी है, इसे ध्यान में रखने का प्रयास करना चाहिए। आदमी साधारण कपड़े से भी शरीर को ढंक सकता है, कोई महंगे कपड़े पहनने की कोई आवश्यकता नहीं होती। जीवन के लिए किसी चीज की आवश्यकता तो हो सकती है और उसे पूरा करने का प्रयास भी किया जा सकता है, किन्तु लालसा के वशीभूत होकर उसीमें रम जाना अच्छा नहीं होता। आदमी को विचार करना चाहिए कि जीवन में सबकुछ हो सकता है, समय बीत रहा है तो वह अपनी आत्मा के कल्याण के लिए तथा आगे के जीवन को अच्छा बनाए रखने के लिए क्या करता है। जैसे-जैसे समय बढ़ता है, वैसे-वैसे जीवन में धर्म की साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। जवानी के समय में भी अन्य कार्यों के साथ जितना संभव हो सके, धर्म करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में यथासंभव ईमानदारी, नैतिकता, अहिंसा रखने से भी धर्म की बात हो सकती है। जीवन में ईमानदारी, नैतिकता, अहिंसा रूपी धर्म के लिए अलग कोई समय लगाने की भी अपेक्षा नहीं होती है। उसके बाद जितना संभव हो सके धर्म-ध्यान के लिए भी समय निकालने का प्रयास करना चाहिए। गृहस्थ अपने जीवन में जितना त्याग कर ले, वह उसके लिए कल्याणकारी हो सकता है। जितना संभव हो सके आदमी को अपने जीवन में त्याग और संयम की चेतना का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। पहले आदमी भोग भोगता है और फिर भोग आदमी को भोग लेता है। जैसे पहले आदमी शराब पीता है और बाद में शराब आदमी को पी जाती है। इसलिए जितना संभव हो, भोग नहीं योग की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। आदमी अपने जीवन में केवल भोगी और रोगी नहीं, योगी भी बनने का प्रयास करना चाहिए। आसन, प्राणायाम ही नहीं, मोक्ष के मार्ग से जोड़ने वाला सारी पवृत्ति अपने आप में योग होती है। इसलिए आदमी को यथासंभव मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त होसपेट के श्री अशोकजी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने होसपेटवासियों को पावन आशीर्वाद प्रदान किया। श्रीमती शायर बोथरा ने अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए पूज्यप्रवर के समक्ष ‘चैतन्य केन्द्र एवं अन्य योग चक्रों का तुलनात्मक अध्ययन’ शोध ग्रन्थ को आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने पावन आशीर्वाद प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती की ओर से संघ सेवा पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। नेमचंद जेसराज सेखानी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा श्रीमती पानादेवी सेखानी संघ सेवा पुरस्कार-वर्ष 2024 श्री बुधमल दुगड़ (कोलकाता) को प्रदान किया गया। इस संदर्भ में श्रीमती सरिता सेखानी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। श्री दुगड़ के सम्मान पत्र का वाचन जैन विश्व भारती के मंत्री श्री सलिल लोढ़ा ने किया। श्रीमती मधु दुगड़ ने ने भी इस संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। विकास परिषद के सदस्य श्री बनेचंद मालू ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में पुरस्कारप्राप्तकर्ता व पुरस्कार प्रदाता परिवार व संस्था को पावन आशीर्वाद प्रदान किया। श्री सुरेन्द्र दुगड़ ने अपने कृतज्ञभावों को प्रस्तुति दी।

आचार्य महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन मे कहा कि भोगी और रोगी नहीं, योगी बनने की दिशा में हो गति….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 11.09.2024, बुधवार, वेसु, सूरत (गुजरात), युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को आयारो आगम के माध्यम से पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को जब यह जानकारी हो जाती है कि काम-भोगों से जीवन में रोग की उत्पत्ति होती है। आदमी अत्राण और अशरण भी है, दुःख, सुख भी अपना-अपना होता है। इन बातों का ज्ञान होने के बाद भी कुछ लोग धर्म की ओर आगे बढ़ जाते हैं और कुछ लोग जानकर भी भोगों के विषय में ही आसक्त रहते हैं। तीन शब्द बताए गए हैं- भोग, योग और रोग। योग साधना में धर्म और अध्यात्म की साधना होती है, जिससे आत्मा के रोग भी दूर हो जाते हैं। कई बार शारीरिक कष्ट भी योग की साधना से दूर हो सकते हैं। जीवन को चलाने में पदार्थों की अपेक्षा भी होती है। आदमी को यह विचार करना चाहिए कि आदमी को अपने जीवन में किसी पदार्थ की आवश्यकता कितनी है और अपेक्षा और लालसा कितनी है। भूख लगे तो भोजन, प्यास लगे तो पानी, शरीर के लिए कपड़ा, आश्रय के लिए मकान की आवश्यकता होती है। पढ़ने-लिखने के लिए संबंधित पदार्थ चाहिए। सोने के लिए कुर्सी और पलंग की आवश्यकता होती है। ये सारी चीजें तो आवश्यक हैं, किन्तु इन संदर्भों में इच्छा कितनी है, इसे ध्यान में रखने का प्रयास करना चाहिए। आदमी साधारण कपड़े से भी शरीर को ढंक सकता है, कोई महंगे कपड़े पहनने की कोई आवश्यकता नहीं होती। जीवन के लिए किसी चीज की आवश्यकता तो हो सकती है और उसे पूरा करने का प्रयास भी किया जा सकता है, किन्तु लालसा के वशीभूत होकर उसीमें रम जाना अच्छा नहीं होता। आदमी को विचार करना चाहिए कि जीवन में सबकुछ हो सकता है, समय बीत रहा है तो वह अपनी आत्मा के कल्याण के लिए तथा आगे के जीवन को अच्छा बनाए रखने के लिए क्या करता है। जैसे-जैसे समय बढ़ता है, वैसे-वैसे जीवन में धर्म की साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। जवानी के समय में भी अन्य कार्यों के साथ जितना संभव हो सके, धर्म करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में यथासंभव ईमानदारी, नैतिकता, अहिंसा रखने से भी धर्म की बात हो सकती है। जीवन में ईमानदारी, नैतिकता, अहिंसा रूपी धर्म के लिए अलग कोई समय लगाने की भी अपेक्षा नहीं होती है। उसके बाद जितना संभव हो सके धर्म-ध्यान के लिए भी समय निकालने का प्रयास करना चाहिए। गृहस्थ अपने जीवन में जितना त्याग कर ले, वह उसके लिए कल्याणकारी हो सकता है। जितना संभव हो सके आदमी को अपने जीवन में त्याग और संयम की चेतना का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। पहले आदमी भोग भोगता है और फिर भोग आदमी को भोग लेता है। जैसे पहले आदमी शराब पीता है और बाद में शराब आदमी को पी जाती है। इसलिए जितना संभव हो, भोग नहीं योग की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। आदमी अपने जीवन में केवल भोगी और रोगी नहीं, योगी भी बनने का प्रयास करना चाहिए। आसन, प्राणायाम ही नहीं, मोक्ष के मार्ग से जोड़ने वाला सारी पवृत्ति अपने आप में योग होती है। इसलिए आदमी को यथासंभव मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त होसपेट के श्री अशोकजी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने होसपेटवासियों को पावन आशीर्वाद प्रदान किया। श्रीमती शायर बोथरा ने अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए पूज्यप्रवर के समक्ष ‘चैतन्य केन्द्र एवं अन्य योग चक्रों का तुलनात्मक अध्ययन’ शोध ग्रन्थ को आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने पावन आशीर्वाद प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती की ओर से संघ सेवा पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। नेमचंद जेसराज सेखानी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा श्रीमती पानादेवी सेखानी संघ सेवा पुरस्कार-वर्ष 2024 श्री बुधमल दुगड़ (कोलकाता) को प्रदान किया गया। इस संदर्भ में श्रीमती सरिता सेखानी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। श्री दुगड़ के सम्मान पत्र का वाचन जैन विश्व भारती के मंत्री श्री सलिल लोढ़ा ने किया। श्रीमती मधु दुगड़ ने ने भी इस संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। विकास परिषद के सदस्य श्री बनेचंद मालू ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में पुरस्कारप्राप्तकर्ता व पुरस्कार प्रदाता परिवार व संस्था को पावन आशीर्वाद प्रदान किया। श्री सुरेन्द्र दुगड़ ने अपने कृतज्ञभावों को प्रस्तुति दी।

श्री विजय गुरु का है फरमान नष्ट ना करें अपने अरमान…सतीशचन्द लुणावत उदयपुर,सभी में आत्मविश्वास बढ़ाने कि प्रेरणा के लिए आचार्य श्री विजय राज जी महाराज द्वारा शुरू करवाये गए अभियान में आज राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय में संकल्प पत्र भरवाए गए। महाविद्यालय के प्राचार्य श्री दीपक माहेश्वरी जी ने संकल्प लिया है कि सभी छात्राओं को आत्मविश्वास कायम रखने के इस अभियान में संकल्पित करेंगे। राजस्थान का सबसे बड़ा कन्या महाविद्यालय जहां 6000 से ज्यादा छात्राएं अध्ययन करती है राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय है।प्राचार्य श्री दीपक माहेश्वरी जी ने इस अभियान कि उन्नति कि कामना करते हुए श्री शांत क्रांति जैन श्रावक संघ को धन्यवाद ज्ञापित किया व आचार्य श्री को वंदन।संभाग का सबसे बड़ा महाविद्यालय वो भी बेटियों का। बेटियों का आत्मविश्वास मजबूत होने का अर्थ है समाज का आत्मविश्वास बढ़ना। इस अवसर पर डॉ स्नेहा जी बावेल ने बताया कि समाज कि संरचना बेटियों से ही है। बेटियां एक नही दो घर सजाती हैं। समाज कि शान ही पढी लिखी बेटियों से है। समाज के सभी वर्गों के लोगों से निवेदन है कि समय-समय पर ऐसे महाविद्यालय व छात्रावासों में जाकर जानकारी लेते रहें।हमारा भी दायित्व है। सिर्फ सरकारी स्तर पर न छोड़ें। हमारे अभियान में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। और इस अभियान के लिए मील का पत्थर साबित होगा। मैं डॉक्टर स्नेहा जी बावेल व प्राचार्य श्री दीपक माहेश्वरी जी को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।आप सभी से अनुरोध है कि इस अभियान कि महत्ता को जन जन तक पहुंचाने में सहयोग करें। आज आत्महत्या निषेध दिवस है मगर हमें संकल्प लेना होगा कि हम इस शब्द को ही मिटा देंगे। हमारा नारा है आत्मविश्वास के लिए प्रेरणा – प्रेरणा के लिए पहल।

श्री विजय गुरु का है फरमान नष्ट ना करें अपने अरमान…सतीशचन्द लुणावत उदयपुर,सभी में आत्मविश्वास बढ़ाने कि प्रेरणा के लिए आचार्य श्री विजय राज जी महाराज द्वारा शुरू करवाये गए अभियान में आज राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय में संकल्प पत्र भरवाए गए। महाविद्यालय के प्राचार्य श्री दीपक माहेश्वरी जी ने संकल्प लिया है कि सभी छात्राओं को आत्मविश्वास कायम रखने के इस अभियान में संकल्पित करेंगे। राजस्थान का सबसे बड़ा कन्या महाविद्यालय जहां 6000 से ज्यादा छात्राएं अध्ययन करती है राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय है।प्राचार्य श्री दीपक माहेश्वरी जी ने इस अभियान कि उन्नति कि कामना करते हुए श्री शांत क्रांति जैन श्रावक संघ को धन्यवाद ज्ञापित किया व आचार्य श्री को वंदन।संभाग का सबसे बड़ा महाविद्यालय वो भी बेटियों का। बेटियों का आत्मविश्वास मजबूत होने का अर्थ है समाज का आत्मविश्वास बढ़ना। इस अवसर पर डॉ स्नेहा जी बावेल ने बताया कि समाज कि संरचना बेटियों से ही है। बेटियां एक नही दो घर सजाती हैं। समाज कि शान ही पढी लिखी बेटियों से है। समाज के सभी वर्गों के लोगों से निवेदन है कि समय-समय पर ऐसे महाविद्यालय व छात्रावासों में जाकर जानकारी लेते रहें।हमारा भी दायित्व है। सिर्फ सरकारी स्तर पर न छोड़ें। हमारे अभियान में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। और इस अभियान के लिए मील का पत्थर साबित होगा। मैं डॉक्टर स्नेहा जी बावेल व प्राचार्य श्री दीपक माहेश्वरी जी को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।आप सभी से अनुरोध है कि इस अभियान कि महत्ता को जन जन तक पहुंचाने में सहयोग करें। आज आत्महत्या निषेध दिवस है मगर हमें संकल्प लेना होगा कि हम इस शब्द को ही मिटा देंगे। हमारा नारा है आत्मविश्वास के लिए प्रेरणा – प्रेरणा के लिए पहल।

*श्री वर्द्धमान कन्या महाविद्यालय, ब्यावर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 व उच्च शिक्षा पर राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन…सतीशचन्द लुणावत ब्यावर,श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति द्वारा संचालित श्री वर्द्धमान कन्या महाविद्यालय में आज दिनांक 10.09.2024 को आईक्यूएसी के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 व उच्च शिक्षा पर राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया गया जिसका शुभारम्भ माॅं सरस्वती के पूजन से हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. आर. सी. लोढ़ा, सेमीनार समन्वयक डाॅ. नीलम लोढ़ा द्वारा मुख्य वक्ता डाॅ एम एल शर्मा व रिसोर्स स्पीकर डाॅ गिरीश सिंह का माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. लोढ़ा ने अपने स्वागत उद्बोधन में बताया कि नई शिक्षा नीति देश के विद्यार्थियों के हित में है। नई शिक्षा नीति के हर क्षत्र में डिजीटलाइजेशन पर जोर देती है, जो समावेशन को बढ़ावा देता है। यह शिक्षा नीति विषयों से परे है और सृजनात्मकता, उत्पादकता एवं शोध प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। राष्ट्रीय सेमीनार के मुख्य वक्ता डाॅ एम एल शर्मा ने उच्चत्तर शिक्षा में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के साथ जीवन कौशल, अनुसंधान, दूरस्थ शिक्षा , पर्यावरण संरक्षण व विश्लेषणात्मक शिक्षा द्वारा भारत को एक बार पुनः विश्व गुरू बनने की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्त्व पर प्रकाश डाला । सेमीनार में रिसोर्स स्पीकर डाॅ. गिरीश सिंह ने उच्च शिक्षा में विद्यमान समस्याओं से अवगत कराते हुए समानता, स्वतन्त्रता जैसे संवैधानिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु औद्योगीकरण, शिक्षक- प्रशिक्षण , अनुसंधान व सामाजिक जागरूकता के साथ युवा वर्ग को देश के विकास में प्रत्यक्ष रूप से योगदान देने का आह्वान किया । जोधपुर से आॅन लाईन रिसोर्स स्पीकर के रूप में डाॅ. बी. एल. जाखड़ ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर महत्ती प्रकाश डालते हुए इक्कीसवीं सदी के भारत की अपेक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सरलीकृत, उदार, अन्तःअनुशासनात्मक व शिक्षा नीति के चरणबद्ध क्रियान्वयन पर बल दिया। सेमीनार में विभिन्न महाविद्यालयों व विद्यालयों के शिक्षविद् ने भाग लिया साथ ही विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा आॅनलाइन व आॅॅफलाइन शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए जिसमें महाविद्यालय के बीसीए विभाग के विभागाध्यक्ष श्री नवीन देवडा व समस्त बीसीए संकाय सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। सेमीनार के समापन पर संयोजिका डाॅ नीलम लोढा द्वारा सभी उपस्थित अतिथियों, आईक्यूएसी कमेटी, समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारीगण को इस सफलता पूर्वक आयोजन पर धन्यवाद ज्ञापित किया। सेमीनार का संचालन महाविद्यालय के सहायक आचार्य गिरीश कुमार बैरवा, राजकुमारी कुमावत, डाॅ रीना कुमारी व डाॅ रोमा रतानी द्वारा किया गया।

*श्री वर्द्धमान कन्या महाविद्यालय, ब्यावर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 व उच्च शिक्षा पर राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन…सतीशचन्द लुणावत ब्यावर,श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति द्वारा संचालित श्री वर्द्धमान कन्या महाविद्यालय में आज दिनांक 10.09.2024 को आईक्यूएसी के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 व उच्च शिक्षा पर राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया गया जिसका शुभारम्भ माॅं सरस्वती के पूजन से हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. आर. सी. लोढ़ा, सेमीनार समन्वयक डाॅ. नीलम लोढ़ा द्वारा मुख्य वक्ता डाॅ एम एल शर्मा व रिसोर्स स्पीकर डाॅ गिरीश सिंह का माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. लोढ़ा ने अपने स्वागत उद्बोधन में बताया कि नई शिक्षा नीति देश के विद्यार्थियों के हित में है। नई शिक्षा नीति के हर क्षत्र में डिजीटलाइजेशन पर जोर देती है, जो समावेशन को बढ़ावा देता है। यह शिक्षा नीति विषयों से परे है और सृजनात्मकता, उत्पादकता एवं शोध प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। राष्ट्रीय सेमीनार के मुख्य वक्ता डाॅ एम एल शर्मा ने उच्चत्तर शिक्षा में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के साथ जीवन कौशल, अनुसंधान, दूरस्थ शिक्षा , पर्यावरण संरक्षण व विश्लेषणात्मक शिक्षा द्वारा भारत को एक बार पुनः विश्व गुरू बनने की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्त्व पर प्रकाश डाला । सेमीनार में रिसोर्स स्पीकर डाॅ. गिरीश सिंह ने उच्च शिक्षा में विद्यमान समस्याओं से अवगत कराते हुए समानता, स्वतन्त्रता जैसे संवैधानिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु औद्योगीकरण, शिक्षक- प्रशिक्षण , अनुसंधान व सामाजिक जागरूकता के साथ युवा वर्ग को देश के विकास में प्रत्यक्ष रूप से योगदान देने का आह्वान किया । जोधपुर से आॅन लाईन रिसोर्स स्पीकर के रूप में डाॅ. बी. एल. जाखड़ ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर महत्ती प्रकाश डालते हुए इक्कीसवीं सदी के भारत की अपेक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सरलीकृत, उदार, अन्तःअनुशासनात्मक व शिक्षा नीति के चरणबद्ध क्रियान्वयन पर बल दिया। सेमीनार में विभिन्न महाविद्यालयों व विद्यालयों के शिक्षविद् ने भाग लिया साथ ही विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा आॅनलाइन व आॅॅफलाइन शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए जिसमें महाविद्यालय के बीसीए विभाग के विभागाध्यक्ष श्री नवीन देवडा व समस्त बीसीए संकाय सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। सेमीनार के समापन पर संयोजिका डाॅ नीलम लोढा द्वारा सभी उपस्थित अतिथियों, आईक्यूएसी कमेटी, समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारीगण को इस सफलता पूर्वक आयोजन पर धन्यवाद ज्ञापित किया। सेमीनार का संचालन महाविद्यालय के सहायक आचार्य गिरीश कुमार बैरवा, राजकुमारी कुमावत, डाॅ रीना कुमारी व डाॅ रोमा रतानी द्वारा किया गया।

गुलाबपुरा मे निशुल्क मिर्गी रोग शिविर में 115 रोगी हुए लाभान्वित…सतीशचन्द लुणावत, Key Line Times गुलाबपुरा ,श्री प्राज्ञ मृगी रोग निवारक समिति गुलाबपुरा द्वारा माह के द्वितीय मंगलवार को आयोजित कैंप दिनाक 10.09.24 मंगलवार को संस्था परिसर में लगाया गया । संस्था के मंत्री पदम चंद खटोड़ ने बताया की कैंप में वरिष्ठ डॉक्टर आर के चंडक ने अपनी सेवाए प्रदान करते हुए 115 मरीजों को सेवा प्रदान की एवम निशुल्क दवा का वितरण किया गया। आज के कैम्प के लाभार्थी M/S TAF Consultancy Dubai एवम स्वर्गीय श्री निहाल चंद लोढ़ा की पुण्य स्मृति में प्रकाश चंद, गौतम चंद ,ज्ञान चंद, विमल चंद ,दीपक चंद लोढ़ा भिनाय/विजयनगर रहे। शिविर में अनिल चौधरी ने मरीजों को मृगी रोग से बचाव व योगा के बारे में विस्तार से समझाते हुए इसके नियमित रूप से करने पर जोर दिया। संस्था के मंत्री पदम चंद खटोड़ ने संस्था की गतिविधि की जानकारी दी,मूल चंद नाबेडा ने आभार व्यक्त किया। तारा चंद लोढ़ा ने सभी मरीजों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की शुभ कामनाएं देते हुए संस्था के कार्यों की सराहना की। शिविर में मदनलाल लोढ़ा, सुरेश लोढ़ा,राजेंद्र चोरडिया, कमल कावड़िया, दिनेश जोशी सहित गणमान्य व्यक्तियो ने सेवाएं प्रदान की। शिविर का संचालन अनिल चौधरी ने किया।

गुलाबपुरा मे निशुल्क मिर्गी रोग शिविर में 115 रोगी हुए लाभान्वित…सतीशचन्द लुणावत, Key Line Times गुलाबपुरा ,श्री प्राज्ञ मृगी रोग निवारक समिति गुलाबपुरा द्वारा माह के द्वितीय मंगलवार को आयोजित कैंप दिनाक 10.09.24 मंगलवार को संस्था परिसर में लगाया गया । संस्था के मंत्री पदम चंद खटोड़ ने बताया की कैंप में वरिष्ठ डॉक्टर आर के चंडक ने अपनी सेवाए प्रदान करते हुए 115 मरीजों को सेवा प्रदान की एवम निशुल्क दवा का वितरण किया गया। आज के कैम्प के लाभार्थी M/S TAF Consultancy Dubai एवम स्वर्गीय श्री निहाल चंद लोढ़ा की पुण्य स्मृति में प्रकाश चंद, गौतम चंद ,ज्ञान चंद, विमल चंद ,दीपक चंद लोढ़ा भिनाय/विजयनगर रहे। शिविर में अनिल चौधरी ने मरीजों को मृगी रोग से बचाव व योगा के बारे में विस्तार से समझाते हुए इसके नियमित रूप से करने पर जोर दिया। संस्था के मंत्री पदम चंद खटोड़ ने संस्था की गतिविधि की जानकारी दी,मूल चंद नाबेडा ने आभार व्यक्त किया। तारा चंद लोढ़ा ने सभी मरीजों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की शुभ कामनाएं देते हुए संस्था के कार्यों की सराहना की। शिविर में मदनलाल लोढ़ा, सुरेश लोढ़ा,राजेंद्र चोरडिया, कमल कावड़िया, दिनेश जोशी सहित गणमान्य व्यक्तियो ने सेवाएं प्रदान की। शिविर का संचालन अनिल चौधरी ने किया।

साउथ हावडा मे अष्टमाचार्य कालूगणी का 89 वां स्वर्गवास दिवस मनाया….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times साउथ हावड़ा,युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में प्रेक्षा विहार में अष्टमाचार्य कालूगणी का 89 वां स्वर्गवास दिवस साउथ हावड़‌ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कहा – आचार्य श्री कालूगणी तेरापंथ धर्म संघ के अष्टम् अधिशास्ता थे। उनका जन्म छापर में हुआ। उनके पिता का नाम मूलचंदजी, माता का नाम छोगाजी था। तेरापंथ के पंचम् अधिशास्ता मघवागणी के कर कमलों से कालूगणी की दीक्षा हुई। कालूगणी का जीवन निर्मल और पवित्र था। वे निस्पृह साधक आचारनिष्ठ थे।वे अनुशासन प्रिय थे। उन्होंने धर्म संघ का खूब विकास किया। उनके शासन काल में बालक बालिकाओं की अतिशय दीक्षाएं हुई। वे संघ का प्ररा ध्यान रखते थे। उन्होंने अनेक साधु साध्वियां को योग्य बनाया। उनके द्वारा दीक्षित दो मुनि आचार्य बने। आचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी। उन्होंने देशाटन भी किया। वे सिद्धान्त से कभी समझोता नहीं करते थे । उनका जीवन बेदाग था। मुनिश्री ने आगे कहा- आचार्य श्री कालूगणी पुण्यात्मा थे। उनका चिन्तन स्वस्थ व स्पष्ट था। आज के दिन दिन कालूगणी का गंगापुर (मेवाड़) में उनका स्वर्गवास हुआ। मुनिश्री ने उनसे संबोधित अनेक संस्मरण सुनाए। इस अवसर पर मुनिश्री परमानंदजी ने कहा- परमपूज्य कालूगणी वचन सिद्ध पुरुष थे। उनकी दूर दृष्टि से धर्मसंध में संस्कृत शिक्षा का बहुत विकास हु‌आ। उनका जीवन चरित्र सभी के लिए प्रेरक बना हुआ है। बाल मुनिश्री कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। महासभा के पूर्व अध्यक्ष सुरेशजी गोयल ने कालूगणी से सम्बंधित संस्मरण सुनाया।

साउथ हावडा मे अष्टमाचार्य कालूगणी का 89 वां स्वर्गवास दिवस मनाया….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times साउथ हावड़ा,युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में प्रेक्षा विहार में अष्टमाचार्य कालूगणी का 89 वां स्वर्गवास दिवस साउथ हावड़‌ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कहा – आचार्य श्री कालूगणी तेरापंथ धर्म संघ के अष्टम् अधिशास्ता थे। उनका जन्म छापर में हुआ। उनके पिता का नाम मूलचंदजी, माता का नाम छोगाजी था। तेरापंथ के पंचम् अधिशास्ता मघवागणी के कर कमलों से कालूगणी की दीक्षा हुई। कालूगणी का जीवन निर्मल और पवित्र था। वे निस्पृह साधक आचारनिष्ठ थे।वे अनुशासन प्रिय थे। उन्होंने धर्म संघ का खूब विकास किया। उनके शासन काल में बालक बालिकाओं की अतिशय दीक्षाएं हुई। वे संघ का प्ररा ध्यान रखते थे। उन्होंने अनेक साधु साध्वियां को योग्य बनाया। उनके द्वारा दीक्षित दो मुनि आचार्य बने। आचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी। उन्होंने देशाटन भी किया। वे सिद्धान्त से कभी समझोता नहीं करते थे । उनका जीवन बेदाग था। मुनिश्री ने आगे कहा- आचार्य श्री कालूगणी पुण्यात्मा थे। उनका चिन्तन स्वस्थ व स्पष्ट था। आज के दिन दिन कालूगणी का गंगापुर (मेवाड़) में उनका स्वर्गवास हुआ। मुनिश्री ने उनसे संबोधित अनेक संस्मरण सुनाए। इस अवसर पर मुनिश्री परमानंदजी ने कहा- परमपूज्य कालूगणी वचन सिद्ध पुरुष थे। उनकी दूर दृष्टि से धर्मसंध में संस्कृत शिक्षा का बहुत विकास हु‌आ। उनका जीवन चरित्र सभी के लिए प्रेरक बना हुआ है। बाल मुनिश्री कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। महासभा के पूर्व अध्यक्ष सुरेशजी गोयल ने कालूगणी से सम्बंधित संस्मरण सुनाया।

जीरकपुर के रायल स्टेट क्लब हाऊस मे नशा मुक्ति जागरूकता सत्र का आयोजन.. सतविंदर कौर,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times जीरकपुर,हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ब्रह्मा कुमारी और “भारत सरकार” के सहयोग से एक “नशा मुक्ति जागरूकता सत्र” का आयोजन किया गया । जिसका उद्देश्य हमारे समाज में इस बढ़ती समस्या पर अंकुश लगाना है।यह जानकारीपूर्ण सत्र नशे की लत के खतरों पर केंद्रित हुआ और व्यक्तियों और समुदायों को इस चुनौती से उबरने के लिए व्यावहारिक समाधान प्रदान किया ।सभी निवासियों ने बड़ चर कर हिसा लिया । रॉयल एस्टेट क्लब हाउस ज़िरक़पुर में यह नशा मुक्त प्रोग्राम हुआ और सोसाइटी में रहने वाले सभी लोगों ने उत्साह बड़ाया .

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गुजरात के सुरत मे मंगलवार को आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि सबसे निष्पक्ष होता है कर्म ….. सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात), नौ दिनों के आध्यात्मिक अनुष्ठान के उपरान्त महावीर समवसरण से जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पुनः आयारो आगम के माध्यम से अपनी अमृतवाणी की वृष्टि प्रारम्भ की। इस अमृतवाणी का रसपान कर श्रद्धालु अपने जीवन को धर्म से भावित बना रहे हैं। मंगलवार को प्रातःकालीन मुख्य प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि दुःख और सुख प्रत्येक का अपना-अपना होता है। कर्मवाद का सिद्धांत सुख-दुःख की प्राप्ति के संदर्भ में लाने के लायक है। हम सभी दुनिया में देखते हैं कि प्राणी दुःख भी भोगता है तो सुख भी भोगता है। दुःख और सुख दोनों के जिम्मेदार हम स्वयं अर्थात् हमारी स्वयं की आत्मा होती है। जैन धर्म में आठ कर्म बताए गए हैं। उन कर्मों के आलोक में जीवन की व्याख्या भी की जा सकती है। कोई बालक मंदबुद्धि होता है तो कोई तीव्र बुद्धि वाला होता है। कोई रटने के बाद भी याद नहीं कर पाता तो कोई मात्र पढ लेने से ही याद कर लेता है। इससे यह मानना चाहिए कि जो प्रखर बुद्धि वाला है, उसके ज्ञानावरणीय कर्म का अच्छा क्षयोपशम है। कोई बीमार रहता है तो कोई शरीर से बलिष्ट होता है। इससे यह पता किया जा सकता है उसके सातवेदनीय कर्म का उदय चल रहा है। माया, छलना और झूठ बोलने वाले के ऊपर मोहनीय कर्म का बहुत ज्यादा प्रभाव होता है। कुछ लोग बहुत शांत होते हैं, संतोष और सरलता का जीवन है तो मानना चाहिए कि उनके मोहनीय कर्म का अच्छा क्षयोपशम होता है। कोई अल्प आयुष्य वाले अथवा दीर्घ आयुष्य वाले भी होते हैं। इसी प्रकार जाति कुल, उच्च गोत्र, वीर्यवत्ता आदि-आदि के संदर्भ में भी अलग-अलग कर्मों का उदय अथवा क्षयोपशम होता है। इसके माध्यम से किसी के भी जीवन का समस्त विश्लेषण किया जा सकता है। इस प्रकार आदमी को यह जानने का प्रयास करना चाहिए आदमी को स्वयं द्वारा किए गए कर्मों को स्वयं ही भोगना होता है। अर्थ का अर्जन करने और काम के अर्जन में जो कर्मफल बंधता है, वह हर प्राणी का अपना होता है। कोई किसी के दूसरे कर्म को नहीं भोगता और कोई किसी के सुख-दुःख को बांट नहीं सकता। कर्म बड़ा बलवान होता है, यह किसी को नहीं छोड़ता। कर्म सबसे निष्पक्ष होता है। उसके यहां कोई बड़ा-छोटा, धनवान-गरीब, ज्ञानी-अज्ञानी होना मायने नहीं रखता है। पूर्वार्जित कर्मों का फल भी जीवन में भोगना पड़ता है। इतना जानना के बाद आदमी को यह ध्यान रखना चाहिए कि आदमी को अनासक्ति की चेतना का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। धन, दौलत, पदार्थों के सेवन में बहुत ज्यादा आसक्ति नहीं रखना चाहिए। आदमी को आसक्ति से बचने का प्रयास करना चाहिए। कर्मवाद को जानने के बाद आदमी को बुरे कर्मों के बंधन से बचने का प्रयास करना चाहिए। जहां तक संभव हो सके, अनुकूलता में समता और प्रतिकूलता में भी समता भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त अनेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। तेरापंथ किशोर मण्डल-सूरत ने चौबीसी के एक गीत का संगान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने भी चौबीसी के एक गीत को प्रस्तुति दी। सूरत के सामायिक साधना परिवार के सदस्यों ने अपनी डायरेक्ट्री को पूज्यप्रवर के समक्ष लोकार्पित किया। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया। उनकी ओर से श्री कमलकुमार रामपुरिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्रीमती सरोज बांठिया ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

गुजरात के सुरत मे मंगलवार को आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि सबसे निष्पक्ष होता है कर्म ….. सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात), नौ दिनों के आध्यात्मिक अनुष्ठान के उपरान्त महावीर समवसरण से जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पुनः आयारो आगम के माध्यम से अपनी अमृतवाणी की वृष्टि प्रारम्भ की। इस अमृतवाणी का रसपान कर श्रद्धालु अपने जीवन को धर्म से भावित बना रहे हैं। मंगलवार को प्रातःकालीन मुख्य प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि दुःख और सुख प्रत्येक का अपना-अपना होता है। कर्मवाद का सिद्धांत सुख-दुःख की प्राप्ति के संदर्भ में लाने के लायक है। हम सभी दुनिया में देखते हैं कि प्राणी दुःख भी भोगता है तो सुख भी भोगता है। दुःख और सुख दोनों के जिम्मेदार हम स्वयं अर्थात् हमारी स्वयं की आत्मा होती है। जैन धर्म में आठ कर्म बताए गए हैं। उन कर्मों के आलोक में जीवन की व्याख्या भी की जा सकती है। कोई बालक मंदबुद्धि होता है तो कोई तीव्र बुद्धि वाला होता है। कोई रटने के बाद भी याद नहीं कर पाता तो कोई मात्र पढ लेने से ही याद कर लेता है। इससे यह मानना चाहिए कि जो प्रखर बुद्धि वाला है, उसके ज्ञानावरणीय कर्म का अच्छा क्षयोपशम है। कोई बीमार रहता है तो कोई शरीर से बलिष्ट होता है। इससे यह पता किया जा सकता है उसके सातवेदनीय कर्म का उदय चल रहा है। माया, छलना और झूठ बोलने वाले के ऊपर मोहनीय कर्म का बहुत ज्यादा प्रभाव होता है। कुछ लोग बहुत शांत होते हैं, संतोष और सरलता का जीवन है तो मानना चाहिए कि उनके मोहनीय कर्म का अच्छा क्षयोपशम होता है। कोई अल्प आयुष्य वाले अथवा दीर्घ आयुष्य वाले भी होते हैं। इसी प्रकार जाति कुल, उच्च गोत्र, वीर्यवत्ता आदि-आदि के संदर्भ में भी अलग-अलग कर्मों का उदय अथवा क्षयोपशम होता है। इसके माध्यम से किसी के भी जीवन का समस्त विश्लेषण किया जा सकता है। इस प्रकार आदमी को यह जानने का प्रयास करना चाहिए आदमी को स्वयं द्वारा किए गए कर्मों को स्वयं ही भोगना होता है। अर्थ का अर्जन करने और काम के अर्जन में जो कर्मफल बंधता है, वह हर प्राणी का अपना होता है। कोई किसी के दूसरे कर्म को नहीं भोगता और कोई किसी के सुख-दुःख को बांट नहीं सकता। कर्म बड़ा बलवान होता है, यह किसी को नहीं छोड़ता। कर्म सबसे निष्पक्ष होता है। उसके यहां कोई बड़ा-छोटा, धनवान-गरीब, ज्ञानी-अज्ञानी होना मायने नहीं रखता है। पूर्वार्जित कर्मों का फल भी जीवन में भोगना पड़ता है। इतना जानना के बाद आदमी को यह ध्यान रखना चाहिए कि आदमी को अनासक्ति की चेतना का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। धन, दौलत, पदार्थों के सेवन में बहुत ज्यादा आसक्ति नहीं रखना चाहिए। आदमी को आसक्ति से बचने का प्रयास करना चाहिए। कर्मवाद को जानने के बाद आदमी को बुरे कर्मों के बंधन से बचने का प्रयास करना चाहिए। जहां तक संभव हो सके, अनुकूलता में समता और प्रतिकूलता में भी समता भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त अनेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। तेरापंथ किशोर मण्डल-सूरत ने चौबीसी के एक गीत का संगान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने भी चौबीसी के एक गीत को प्रस्तुति दी। सूरत के सामायिक साधना परिवार के सदस्यों ने अपनी डायरेक्ट्री को पूज्यप्रवर के समक्ष लोकार्पित किया। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया। उनकी ओर से श्री कमलकुमार रामपुरिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्रीमती सरोज बांठिया ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

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