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July 25, 2026

Key line times

Key Line Times राष्ट्रीय हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र है जो राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होता है एंव भारत सरकार के सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आर.एन.आई. से रजिस्ट्रड है। इसका आर.एन.आई.न. DELHIN/2017/72528 है। यह समाचार पत्र 2017 से लगातार प्रकाशित हो रहा है।
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि साहित्य की अभूतपूर्व सेवा कर रहा है जैन साहित्य संगम…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times जैन साहित्य संगम का राष्ट्रीय अधिवेशन 20-21-22 सितम्बर को मुंबई में….* *कर्नाटक के राज्यपाल को दिया आतिथ्य आमन्त्रण* उदयपुर, अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम के प्रतिनिधि-मंडल ने राजभवन-बैंगलोर में महामहिम श्री थावरचंद जी गहलोत राज्यपाल-कर्नाटक से भेंट कर मुम्बई में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन-2024 में मुख्य अतिथि के रूप में पधारने का निमन्त्रण दिया । महामहिम राज्यपाल श्री गहलोत को जैन साहित्य संगम-कर्नाटक प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. प्रकाश दक के नेतृत्व में गौतमचंद सालेचा (कर्नाटक-सचिव), दिलीप गाँधी (बैंगलोर-अध्यक्ष), रमेश श्रीश्रीमाल (सहसचिव-कर्नाटक), राजेश चावत (सचिव-बैंगलोर) ने अधिवेशन में पधारने का आत्मीय-आमन्त्रण दिया गया । इस अवसर पर राज्यपाल गहलोत ने जैन साहित्य संगम के साहित्यिक अवदानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था साहित्य की अभूतपूर्व सेवा कर रही है । आपने यथासंभव अधिवेशन में आने के लिए आश्वस्त किया । उल्लेखनीय है कि जैन कवि-साहित्यकारों की प्रतिनिधि संस्था जैन साहित्य संगम का राष्ट्रीय अधिवेशन 20-21-22 सितम्बर को लोढाधाम मुम्बई में होने जा रहा है । संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन “हर्षदर्शी” ने बताया कि इस अवसर विश्वसंत, श्रेष्ठीवर्य, राष्ट्रीय राजनेता व फिल्मी संगीतकार आदि विशिष्ट अतिथि पधार रहे हैं । महामंत्री मनोज मनोकामना ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्था की अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती मंजू-मंगलप्रभात लोढ़ा के सौजन्य से आयोजित इस अधिवेशन में देश-विदेश से कवि-साहित्यकार भाग ले रहे हैं । संस्था के संरक्षक राजेन्द्र कांठेड ने बताया कि त्रि-दिवसीय आयोजन में विविध सत्रों में साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन होंगे ।

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि साहित्य की अभूतपूर्व सेवा कर रहा है जैन साहित्य संगम…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times जैन साहित्य संगम का राष्ट्रीय अधिवेशन 20-21-22 सितम्बर को मुंबई में….* *कर्नाटक के राज्यपाल को दिया आतिथ्य आमन्त्रण* उदयपुर, अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम के प्रतिनिधि-मंडल ने राजभवन-बैंगलोर में महामहिम श्री थावरचंद जी गहलोत राज्यपाल-कर्नाटक से भेंट कर मुम्बई में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन-2024 में मुख्य अतिथि के रूप में पधारने का निमन्त्रण दिया । महामहिम राज्यपाल श्री गहलोत को जैन साहित्य संगम-कर्नाटक प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. प्रकाश दक के नेतृत्व में गौतमचंद सालेचा (कर्नाटक-सचिव), दिलीप गाँधी (बैंगलोर-अध्यक्ष), रमेश श्रीश्रीमाल (सहसचिव-कर्नाटक), राजेश चावत (सचिव-बैंगलोर) ने अधिवेशन में पधारने का आत्मीय-आमन्त्रण दिया गया । इस अवसर पर राज्यपाल गहलोत ने जैन साहित्य संगम के साहित्यिक अवदानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था साहित्य की अभूतपूर्व सेवा कर रही है । आपने यथासंभव अधिवेशन में आने के लिए आश्वस्त किया । उल्लेखनीय है कि जैन कवि-साहित्यकारों की प्रतिनिधि संस्था जैन साहित्य संगम का राष्ट्रीय अधिवेशन 20-21-22 सितम्बर को लोढाधाम मुम्बई में होने जा रहा है । संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन “हर्षदर्शी” ने बताया कि इस अवसर विश्वसंत, श्रेष्ठीवर्य, राष्ट्रीय राजनेता व फिल्मी संगीतकार आदि विशिष्ट अतिथि पधार रहे हैं । महामंत्री मनोज मनोकामना ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्था की अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती मंजू-मंगलप्रभात लोढ़ा के सौजन्य से आयोजित इस अधिवेशन में देश-विदेश से कवि-साहित्यकार भाग ले रहे हैं । संस्था के संरक्षक राजेन्द्र कांठेड ने बताया कि त्रि-दिवसीय आयोजन में विविध सत्रों में साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन होंगे ।

तेली घाणी विकास बोर्ड में नियुक्तियां देने की मांग को लेकर सोपा ज्ञापन….सरूपाराम प्रजापत,जिला प्रमुख संवाददाता बालोतरा, Key Line Times बालोतरा, तेली समाज बायतु में तेली घाणी विकास बोर्ड में राजनीतिक नियुक्ति देने की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सोपा गया। समाजसेवी शहीद मंसूरी ने बताया कि राजस्थान राज्य में तेली घाणी विकास बोर्ड के गठन की स्वीकृति 23जुलाई 2023 को होने के बाद सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने मुल्लिम तेली समुदाय की शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति की उन्नति के लिए स्वीकृति प्रदान की गई थी। राजस्थान राज्य में 20लाख से भी ज्यादा मुस्लिम तेली समुदाय के लोग रहते हैं। जिनका पुस्तैनी काम तेल घाणी चलाना था। समय के साथ किसी भी तरह की सरकारी सहयोग और आर्थिक मदद नहीं मिलने के कारण युवा रोजगार और स्वरोजगार स्थापित करने में असफल रहे हैं। राज्य सरकार ने एक वर्ष पूर्व बोर्ड गठित करने की स्वीकृति दी थी लेकिन अभी तक कोई किसी प्रकार का ठोस कदम नहीं उठाया गया है। राजस्थान के सभी ब्लॉक और जिला स्तर पर राज्य सरकार को पुनः स्मरण दिलाने के लिए शुक्रवार को बायतु मुख्यालय पर तेली समाज के लोगो द्वारा उपखंड अधिकारी बायतु को मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। जिसमें मौलाना शफ़ी मोहम्मद, हनीफ़ ख़ान, अब्दुल गनी, शहीद मंसूरी, अमीन खान,सतार ख़ान, नसार ख़ान नौसर, मुस्ताक ख़ान, मंज़ूर सोलंकी, मुस्ताक गौरी, सरफ़ुदिन गोरी, सायरख़ान, फ़रीद ख़ान, शौक़त सोलंकी, मुख्तयार मंसूरी सहित समाज के लोग मौजूद रहे।

तेली घाणी विकास बोर्ड में नियुक्तियां देने की मांग को लेकर सोपा ज्ञापन….सरूपाराम प्रजापत,जिला प्रमुख संवाददाता बालोतरा, Key Line Times बालोतरा, तेली समाज बायतु में तेली घाणी विकास बोर्ड में राजनीतिक नियुक्ति देने की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सोपा गया। समाजसेवी शहीद मंसूरी ने बताया कि राजस्थान राज्य में तेली घाणी विकास बोर्ड के गठन की स्वीकृति 23जुलाई 2023 को होने के बाद सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने मुल्लिम तेली समुदाय की शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति की उन्नति के लिए स्वीकृति प्रदान की गई थी। राजस्थान राज्य में 20लाख से भी ज्यादा मुस्लिम तेली समुदाय के लोग रहते हैं। जिनका पुस्तैनी काम तेल घाणी चलाना था। समय के साथ किसी भी तरह की सरकारी सहयोग और आर्थिक मदद नहीं मिलने के कारण युवा रोजगार और स्वरोजगार स्थापित करने में असफल रहे हैं। राज्य सरकार ने एक वर्ष पूर्व बोर्ड गठित करने की स्वीकृति दी थी लेकिन अभी तक कोई किसी प्रकार का ठोस कदम नहीं उठाया गया है। राजस्थान के सभी ब्लॉक और जिला स्तर पर राज्य सरकार को पुनः स्मरण दिलाने के लिए शुक्रवार को बायतु मुख्यालय पर तेली समाज के लोगो द्वारा उपखंड अधिकारी बायतु को मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। जिसमें मौलाना शफ़ी मोहम्मद, हनीफ़ ख़ान, अब्दुल गनी, शहीद मंसूरी, अमीन खान,सतार ख़ान, नसार ख़ान नौसर, मुस्ताक ख़ान, मंज़ूर सोलंकी, मुस्ताक गौरी, सरफ़ुदिन गोरी, सायरख़ान, फ़रीद ख़ान, शौक़त सोलंकी, मुख्तयार मंसूरी सहित समाज के लोग मौजूद रहे।

किसानों ने कलेक्टर से की फसल बीमा घोटाले की एफआईआर से स्टे हटाने की मांग….गणेश जैन, Key Line Times जैसलमेर, जैसलमेर कलेक्टर प्रतापसिंह की फलसूंड तहसील के खूमानसर गांव में गुरुवार रात आयोजित रात्रि चौपाल में प्रधानमंत्री फसल बीमा घोटाले के 20 गांवों के पीङित किसान फरियाद लेकर पहुंचे। किसान संघर्ष समिति ने अर्जुनसिंह, मनोहरसिंह, गणेश जैन मगराज गोदारा, नसीर खां, अमराराम सुथार, करना राम, नरपतराम दर्जी आदि के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर सिंह से फलसूंड थाने में दर्ज पीएम फसल बीमा घोटाले की दोषी 6 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर गलत तथ्य पेश कर लाए गए स्टे खुलवाने की मांग की। दोषी सोसायटियों को बर्खास्त करने की मांग की। कलेक्टर ने पुलिस को निर्देशित कर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने बताया कि 13 माह से फलसूंड से भणियाणा तक के 20 गांवों के किसान आंदोलित हैं। ग्राम सेवा सहकारी समिति स्वामीजी की ढाणी, मानासर, फलसूंड, भुर्जगढ, पदमपुरा और दांतल ने हजारों किसानों के खेतों पर फर्जी लोनी बनाकर बंटाईदार के नाम लोन पास करा दिए। किसान को कुछ बताए बिना उनके दस्तावेज चुरा कर दूसरे अनजान लोगों को खेतों का हिस्सेदार बना और लोन पास कर दिए। करोङों रुपए का गबन हुआ है। इस बाबत फलसूंड क्षेत्र के 15-20 गांवों के किसान 40 से ज्यादा बार कलेक्टर कार्यालय से लेकर स्थानीय तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन घेराव आदि कर चुके। कलेक्टर के आदेश से एमडी सीसीबी जैसलमेर ने 5 ग्राम सेवा सहकारी समितियों संचालकों के खिलाफ नामजद एफआईआर फलसूंड थाने में दर्ज करवाई। लेकिन कुछ सोसायटी वाले मिलीभगत से स्टे ले आए। जबकि जांच पर कोई स्टे नहीं है। पुलिस जांच पूरी कर दोष साबित करने का काम भी नहीं कर रही। जब कलेक्टर के आदेश की पालना में सीसीबी एमडी ने एफआईआर में साफ लिखा हैऐ कि कूट रचित दस्तावेजों और हेराफेरी कर किसानों के खेतों पर फर्जी लोन उठाया है। यह एमडी ने मान लिया तो इसमें कानूनी और तकनीकी दिक्कत क्या आ रही। फर्जी लोन पास करने वाले सोसायटी संचालक और फर्जी लोन के लिए अपने दस्तावेज जमा करा कूट रचित तरीके से प्रीमियम भरने वाले फर्जी बंटाईदारों पर स्टे खुलवा कर सख्त कार्रवाई की जाए।। फर्जी बंटाईदारों और सोसायटी संचालकों के करीब 1837 खातें सीज है। किसानों ने मांग की कि कलेक्टर सीज खाते किसी हालत में खोलने की अनुमति न दें। किसान हजारों परेशान हैं। किसान हर स्तर पर न्याय के लिए दर दर भटक रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम भणियाणा की जांच रिपोर्ट में साबित है कि सोसायटियों ने करोङों का घोटाला किया है। 27 सितंबर 2023 की रिपोर्ट करेक्टर के माध्यम से सरकार को प्रेषित हो चुकी। फिर कार्रवाई में विलंब क्यों? पीङित किसानों के खेतों पर चढाए फर्जी बंटाईदार हटाकर फर्जी लोन की राशि ब्याज और दंड सहित दोषियों से वसूली जाए। जैसलमेर. त्रि-स्तरीय व्यवस्था के तहत माह के अंतिम गुरुवार को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत स्तरीय जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक समस्याओं का रखा। जिला कलक्टर प्रतापसिंह ने ग्राम पंचायत खुमानसर में आयोजित पंचायत स्तरीय जन सुनवाई के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को सुना व परिवेदना प्रार्थना-पत्रों को प्राप्त किया और संबंधित विभाग के अधिकारी से समस्या के संबंध में जानकारी ली। जनसुनवाई के दौरान खुमानससर सरपंच पेमाराम जी, ग्राम विकास अधिकारी राजु राम एवं आसदें की ढांणी के लोगों ने जिला कलक्टर के समक्ष क्षेत्र में कम वॉल्टेज से हो रही विद्युतापूर्ति एवं पेयजल की समस्या के संबंध में प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किए। जिला कलक्टर ने मौके पर ही बिजली विभाग के अभियंता को निर्देश दिए। उन्होंने जलदाय विभाग के अभियंता को निर्देश दिए कि वे खुमानसर व आसदे की ढाणी में पानी की आपूर्ति सुचारु कर लोगों को समय पर पीने का पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वह आस पास लगने वाली ग्राम पंचायत फलसूड़, भुर्जगढ सरपंच पतिनिघी जसवंत सिंह जोधा ने भुर्जगढ जिला कलक्टर ने पंचायत स्तरीय जनसुनवाई में विकास राजु राम,, तहसीलदार सुनील कुमार विश्नोई ,कोपरेटिव बैंक के एमडी जलदयक विभाग के अधिकारी भुराराम धन्धें बिजली विभाग सरपंच पेमाराम के साथ ही पानी-बिजली एवं अन्य विभागों के अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित थे। फलसूड़ सरपंच रतन सिंह जी जोधा भुर्जगढ सरपंच जसवंत सिंह जोधा, मनोहर सिंह,अर्जुनसिंह, अमरा राम सुथार सेवाराम स्वामिजि कि ढाणी गणेश जैन, रावल सिंह अरविंद कुमार 1 min read

किसानों ने कलेक्टर से की फसल बीमा घोटाले की एफआईआर से स्टे हटाने की मांग….गणेश जैन, Key Line Times जैसलमेर, जैसलमेर कलेक्टर प्रतापसिंह की फलसूंड तहसील के खूमानसर गांव में गुरुवार रात आयोजित रात्रि चौपाल में प्रधानमंत्री फसल बीमा घोटाले के 20 गांवों के पीङित किसान फरियाद लेकर पहुंचे। किसान संघर्ष समिति ने अर्जुनसिंह, मनोहरसिंह, गणेश जैन मगराज गोदारा, नसीर खां, अमराराम सुथार, करना राम, नरपतराम दर्जी आदि के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर सिंह से फलसूंड थाने में दर्ज पीएम फसल बीमा घोटाले की दोषी 6 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर गलत तथ्य पेश कर लाए गए स्टे खुलवाने की मांग की। दोषी सोसायटियों को बर्खास्त करने की मांग की। कलेक्टर ने पुलिस को निर्देशित कर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने बताया कि 13 माह से फलसूंड से भणियाणा तक के 20 गांवों के किसान आंदोलित हैं। ग्राम सेवा सहकारी समिति स्वामीजी की ढाणी, मानासर, फलसूंड, भुर्जगढ, पदमपुरा और दांतल ने हजारों किसानों के खेतों पर फर्जी लोनी बनाकर बंटाईदार के नाम लोन पास करा दिए। किसान को कुछ बताए बिना उनके दस्तावेज चुरा कर दूसरे अनजान लोगों को खेतों का हिस्सेदार बना और लोन पास कर दिए। करोङों रुपए का गबन हुआ है। इस बाबत फलसूंड क्षेत्र के 15-20 गांवों के किसान 40 से ज्यादा बार कलेक्टर कार्यालय से लेकर स्थानीय तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन घेराव आदि कर चुके। कलेक्टर के आदेश से एमडी सीसीबी जैसलमेर ने 5 ग्राम सेवा सहकारी समितियों संचालकों के खिलाफ नामजद एफआईआर फलसूंड थाने में दर्ज करवाई। लेकिन कुछ सोसायटी वाले मिलीभगत से स्टे ले आए। जबकि जांच पर कोई स्टे नहीं है। पुलिस जांच पूरी कर दोष साबित करने का काम भी नहीं कर रही। जब कलेक्टर के आदेश की पालना में सीसीबी एमडी ने एफआईआर में साफ लिखा हैऐ कि कूट रचित दस्तावेजों और हेराफेरी कर किसानों के खेतों पर फर्जी लोन उठाया है। यह एमडी ने मान लिया तो इसमें कानूनी और तकनीकी दिक्कत क्या आ रही। फर्जी लोन पास करने वाले सोसायटी संचालक और फर्जी लोन के लिए अपने दस्तावेज जमा करा कूट रचित तरीके से प्रीमियम भरने वाले फर्जी बंटाईदारों पर स्टे खुलवा कर सख्त कार्रवाई की जाए।। फर्जी बंटाईदारों और सोसायटी संचालकों के करीब 1837 खातें सीज है। किसानों ने मांग की कि कलेक्टर सीज खाते किसी हालत में खोलने की अनुमति न दें। किसान हजारों परेशान हैं। किसान हर स्तर पर न्याय के लिए दर दर भटक रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम भणियाणा की जांच रिपोर्ट में साबित है कि सोसायटियों ने करोङों का घोटाला किया है। 27 सितंबर 2023 की रिपोर्ट करेक्टर के माध्यम से सरकार को प्रेषित हो चुकी। फिर कार्रवाई में विलंब क्यों? पीङित किसानों के खेतों पर चढाए फर्जी बंटाईदार हटाकर फर्जी लोन की राशि ब्याज और दंड सहित दोषियों से वसूली जाए। जैसलमेर. त्रि-स्तरीय व्यवस्था के तहत माह के अंतिम गुरुवार को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत स्तरीय जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक समस्याओं का रखा। जिला कलक्टर प्रतापसिंह ने ग्राम पंचायत खुमानसर में आयोजित पंचायत स्तरीय जन सुनवाई के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को सुना व परिवेदना प्रार्थना-पत्रों को प्राप्त किया और संबंधित विभाग के अधिकारी से समस्या के संबंध में जानकारी ली। जनसुनवाई के दौरान खुमानससर सरपंच पेमाराम जी, ग्राम विकास अधिकारी राजु राम एवं आसदें की ढांणी के लोगों ने जिला कलक्टर के समक्ष क्षेत्र में कम वॉल्टेज से हो रही विद्युतापूर्ति एवं पेयजल की समस्या के संबंध में प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किए। जिला कलक्टर ने मौके पर ही बिजली विभाग के अभियंता को निर्देश दिए। उन्होंने जलदाय विभाग के अभियंता को निर्देश दिए कि वे खुमानसर व आसदे की ढाणी में पानी की आपूर्ति सुचारु कर लोगों को समय पर पीने का पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वह आस पास लगने वाली ग्राम पंचायत फलसूड़, भुर्जगढ सरपंच पतिनिघी जसवंत सिंह जोधा ने भुर्जगढ जिला कलक्टर ने पंचायत स्तरीय जनसुनवाई में विकास राजु राम,, तहसीलदार सुनील कुमार विश्नोई ,कोपरेटिव बैंक के एमडी जलदयक विभाग के अधिकारी भुराराम धन्धें बिजली विभाग सरपंच पेमाराम के साथ ही पानी-बिजली एवं अन्य विभागों के अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित थे। फलसूड़ सरपंच रतन सिंह जी जोधा भुर्जगढ सरपंच जसवंत सिंह जोधा, मनोहर सिंह,अर्जुनसिंह, अमरा राम सुथार सेवाराम स्वामिजि कि ढाणी गणेश जैन, रावल सिंह अरविंद कुमार

आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि अनुशासन, विधि, व्यवस्था व बहुश्रुतता के द्योतक थे श्रीमज्जयाचार्य …….सुरेंद्र मुनोत,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 30.08.2024, शुक्रवार, वेसु, सूरत (गुजरात) , महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि सभी प्राणियों को जीवन प्रिय होता है। मनुष्य हो अथवा कोई अन्य छोटे से छोटा प्राणी ही क्यों न हो, सभी को जीवन प्रिय होता है, कोई मरना नहीं चाहता। प्राणी की यह सामान्य प्रवृत्ति होती है कि कोई मरना नहीं चाहता। मनुष्य इस बात पर ध्यान दे कि यदि वह नहीं मरना चाहता तो दूसरे भी मरना नहीं चाहते। सभी को अपने समान ही समझने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी स्थिति में मनुष्य जितना अन्य प्राणियों की हिंसा से बच सके, बचने का प्रयास करना चाहिए। आदमी यह सोचे कि जैसे वह सुख चाहता है, कष्ट नहीं चाहता, मरना नहीं चाहता तो भला दूसरा दुःख, कष्ट और मरना क्यों चाहेगा। ऐसा विचार कर आदमी को अहिंसा की साधना करने का प्रयास करना चाहिए। अपनी आत्मा के हित के लिए और दूसरों को किसी भी प्रकार का अपनी ओर से कष्ट न देने की भावना अहिंसा की भावना होती है। साधु के लिए अहिंसा पूर्णरूपेण पालनीय होती है और जिंदगी भर अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले होते हैं। आज भाद्रव कृष्णा द्वादशी है। यह तिथि ऐसे महापुरुष से जुड़ी हुई है, जिन्होंने इतनी छोटी उम्र में अहिंसा आदि महाव्रतों के पालक बन गए। वे महापुरुष थे तेरापंथ धर्मसंघ के चतुर्थ आचार्य जीतमल स्वामी, जिन्हें जयाचार्य भी कहते हैं। उन्हें श्रीमज्जयाचार्य भी कहते हैं। श्रीमज् शब्द उन्हीं के नाम के आगे क्यों जुड़ा है, इस पर विचार किया जा सकता है। उनका संयम पर्याय भी काफी लम्बा रहा। उनकी ज्ञान चेतना भी बहुत विशिष्ट थी। छोटी उम्र में रचना करना, आगम पर कार्य करना कितनी बड़ी बात होती है। हमारे धर्मसंघ में आगम पर कार्य आचार्यश्री तुलसी के समय वि.सं. 2012 से शुरु हुआ जो काम अभी भी चल रहा है। काफी काम हो चुका है और अभी अवशिष्ट भी है। ऐसा लगता है कि आगमों पर कार्य श्रीमज्जयाचार्यजी ने भी किया। उन्होंने कई आगमों पर उन्होंने राजस्थानी भाषा में जोड़ की रचना कर दी। भगवती जोड़ को देखें तो आश्चर्य होता है कि इतने बड़े ग्रन्थ पर उन्होंने राजस्थानी भाषा में राग-रागणियों में अपनी विशेष समीक्षा आदि लिख दिए। उनके कितने ही ग्रंथ को देख लें तो तेरापंथ धर्मसंघ के दर्शन को जाना जा सकता है। अनेकानेक ग्रंथ उनकी विद्वता के यशोगान करने वाले हैं। वे आगमवेत्ता, तत्त्ववेत्ता आचार्य थे। एक आचार्य के सामने और भी व्यवस्था संबंधी कार्य होते हुए भी इतने साहित्य व ग्रंथ की रचना कर देना उनकी प्रज्ञा और मेधा का द्योतक प्रतीत हो रहा है। वे अनुशासन, विधि, व्यवस्था रखने वाले आचार्य थे। धर्मसंघ में साध्वीप्रमुखा का पद भी उन्हीं के द्वारा प्राप्त है। उनके बाद से यह परंपरा चली और उसके बाद आचार्यों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने साध्वी समुदाय की व्यवस्था में नया अध्याय जोड़ा था। उन्होंने महासंती सरदारांजी को मुखिया के रूप में आगे लाए। वे अनुशासन व्यवस्था के पक्ष में भी एक महत्त्वपूर्ण कदम था, जिसकी प्रासंगिकता आज भी प्रतीत हो रही है। वे बहुश्रुत, कुशल व्यवस्था प्रबंधकारक आचार्य थे। उनके जीवन में अध्यात्म और साधना का पक्ष भी है। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय में विशेष साधना भी की। जयाचार्य का महाप्रयाण आज के दिन जयपुर में हुआ था। आज के दिन पंचम आचार्य के रूप में मघवागणी प्राप्त हुए। श्रीमज्जयाचार्यजी ने अनुदान धर्मसंघ को दिए हैं, वे बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। हम उनके आभारी हैं। उनके जैसा महान व्यक्तित्व प्राप्त होना, धर्मसंघ का सौभाग्य था। ऐसे आचार्यप्रवर की हम अभिवंदना करते हैं। आचार्यश्री ने उनकी अभ्यर्थना में गीत का आंशिक संगान किया। मंगल प्रवचन के उपरान्त मुनि दिनेशकुमारजी के नेतृत्व में चतुर्विध धर्मसंघ ने आचार्यश्री के मुखारविंद और केशलुंचन की निर्जरा में सहभागी बनाने हेतु निवेदन करने से पूर्व त्रिपदी द्वारा वंदना भी की। आचार्यश्री ने लोच के संदर्भ में साधु-साध्वियों को एक-एक घंटा आगम स्वाध्याय, श्रावक-श्राविकाओं को अतिरिक्त रूपी में सात सामायिक करने की प्रेरणा प्रदान की। कार्यक्रम में आचार्यश्री के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीप्रमुखाजी का उद्बोधन हुआ। अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान श्रीमुख से स्वीकार किया। तदुपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने श्रीमज्जयाचार्य की अभ्यर्थना में गीत का संगान किया। साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने भी श्रीमज्जयाचार्यजी की अभ्यर्थना में अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम में ठाणे के पूर्व सांसद श्री संजीव नाईक, राजस्थान पत्रिका के संपादक श्री शैलेन्द्र तिवारी, टेक्सटाइल युवा बिग्रेड के अध्यक्ष श्री ललित शर्मा ने आचार्यश्री के दर्शन किए। पूर्व सांसद श्री संजीव नाईक ने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।

आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि अनुशासन, विधि, व्यवस्था व बहुश्रुतता के द्योतक थे श्रीमज्जयाचार्य …….सुरेंद्र मुनोत,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 30.08.2024, शुक्रवार, वेसु, सूरत (गुजरात) , महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि सभी प्राणियों को जीवन प्रिय होता है। मनुष्य हो अथवा कोई अन्य छोटे से छोटा प्राणी ही क्यों न हो, सभी को जीवन प्रिय होता है, कोई मरना नहीं चाहता। प्राणी की यह सामान्य प्रवृत्ति होती है कि कोई मरना नहीं चाहता। मनुष्य इस बात पर ध्यान दे कि यदि वह नहीं मरना चाहता तो दूसरे भी मरना नहीं चाहते। सभी को अपने समान ही समझने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी स्थिति में मनुष्य जितना अन्य प्राणियों की हिंसा से बच सके, बचने का प्रयास करना चाहिए। आदमी यह सोचे कि जैसे वह सुख चाहता है, कष्ट नहीं चाहता, मरना नहीं चाहता तो भला दूसरा दुःख, कष्ट और मरना क्यों चाहेगा। ऐसा विचार कर आदमी को अहिंसा की साधना करने का प्रयास करना चाहिए। अपनी आत्मा के हित के लिए और दूसरों को किसी भी प्रकार का अपनी ओर से कष्ट न देने की भावना अहिंसा की भावना होती है। साधु के लिए अहिंसा पूर्णरूपेण पालनीय होती है और जिंदगी भर अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले होते हैं। आज भाद्रव कृष्णा द्वादशी है। यह तिथि ऐसे महापुरुष से जुड़ी हुई है, जिन्होंने इतनी छोटी उम्र में अहिंसा आदि महाव्रतों के पालक बन गए। वे महापुरुष थे तेरापंथ धर्मसंघ के चतुर्थ आचार्य जीतमल स्वामी, जिन्हें जयाचार्य भी कहते हैं। उन्हें श्रीमज्जयाचार्य भी कहते हैं। श्रीमज् शब्द उन्हीं के नाम के आगे क्यों जुड़ा है, इस पर विचार किया जा सकता है। उनका संयम पर्याय भी काफी लम्बा रहा। उनकी ज्ञान चेतना भी बहुत विशिष्ट थी। छोटी उम्र में रचना करना, आगम पर कार्य करना कितनी बड़ी बात होती है। हमारे धर्मसंघ में आगम पर कार्य आचार्यश्री तुलसी के समय वि.सं. 2012 से शुरु हुआ जो काम अभी भी चल रहा है। काफी काम हो चुका है और अभी अवशिष्ट भी है। ऐसा लगता है कि आगमों पर कार्य श्रीमज्जयाचार्यजी ने भी किया। उन्होंने कई आगमों पर उन्होंने राजस्थानी भाषा में जोड़ की रचना कर दी। भगवती जोड़ को देखें तो आश्चर्य होता है कि इतने बड़े ग्रन्थ पर उन्होंने राजस्थानी भाषा में राग-रागणियों में अपनी विशेष समीक्षा आदि लिख दिए। उनके कितने ही ग्रंथ को देख लें तो तेरापंथ धर्मसंघ के दर्शन को जाना जा सकता है। अनेकानेक ग्रंथ उनकी विद्वता के यशोगान करने वाले हैं। वे आगमवेत्ता, तत्त्ववेत्ता आचार्य थे। एक आचार्य के सामने और भी व्यवस्था संबंधी कार्य होते हुए भी इतने साहित्य व ग्रंथ की रचना कर देना उनकी प्रज्ञा और मेधा का द्योतक प्रतीत हो रहा है। वे अनुशासन, विधि, व्यवस्था रखने वाले आचार्य थे। धर्मसंघ में साध्वीप्रमुखा का पद भी उन्हीं के द्वारा प्राप्त है। उनके बाद से यह परंपरा चली और उसके बाद आचार्यों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने साध्वी समुदाय की व्यवस्था में नया अध्याय जोड़ा था। उन्होंने महासंती सरदारांजी को मुखिया के रूप में आगे लाए। वे अनुशासन व्यवस्था के पक्ष में भी एक महत्त्वपूर्ण कदम था, जिसकी प्रासंगिकता आज भी प्रतीत हो रही है। वे बहुश्रुत, कुशल व्यवस्था प्रबंधकारक आचार्य थे। उनके जीवन में अध्यात्म और साधना का पक्ष भी है। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय में विशेष साधना भी की। जयाचार्य का महाप्रयाण आज के दिन जयपुर में हुआ था। आज के दिन पंचम आचार्य के रूप में मघवागणी प्राप्त हुए। श्रीमज्जयाचार्यजी ने अनुदान धर्मसंघ को दिए हैं, वे बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। हम उनके आभारी हैं। उनके जैसा महान व्यक्तित्व प्राप्त होना, धर्मसंघ का सौभाग्य था। ऐसे आचार्यप्रवर की हम अभिवंदना करते हैं। आचार्यश्री ने उनकी अभ्यर्थना में गीत का आंशिक संगान किया। मंगल प्रवचन के उपरान्त मुनि दिनेशकुमारजी के नेतृत्व में चतुर्विध धर्मसंघ ने आचार्यश्री के मुखारविंद और केशलुंचन की निर्जरा में सहभागी बनाने हेतु निवेदन करने से पूर्व त्रिपदी द्वारा वंदना भी की। आचार्यश्री ने लोच के संदर्भ में साधु-साध्वियों को एक-एक घंटा आगम स्वाध्याय, श्रावक-श्राविकाओं को अतिरिक्त रूपी में सात सामायिक करने की प्रेरणा प्रदान की। कार्यक्रम में आचार्यश्री के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीप्रमुखाजी का उद्बोधन हुआ। अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान श्रीमुख से स्वीकार किया। तदुपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने श्रीमज्जयाचार्य की अभ्यर्थना में गीत का संगान किया। साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने भी श्रीमज्जयाचार्यजी की अभ्यर्थना में अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम में ठाणे के पूर्व सांसद श्री संजीव नाईक, राजस्थान पत्रिका के संपादक श्री शैलेन्द्र तिवारी, टेक्सटाइल युवा बिग्रेड के अध्यक्ष श्री ललित शर्मा ने आचार्यश्री के दर्शन किए। पूर्व सांसद श्री संजीव नाईक ने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।

राष्ट्रीय महिला स्तर में पहुंची कोलकाता की समृद्धि दुगड़…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर,Key Line Times कोलकाता,शासनसेवी श्रीमान बुधमल जी दुगड़ ( कल्याणमित्र परिवार ) कोलकाता , की पड़पौत्री ऋषभ – सलोनी दुगड़ की सुपुत्री तथा सुरेन्द्र – विनीता दुगड़ की सुपौत्री समृद्धि दुगड़ पश्चिम बंगाल महिला स्नूकर चैम्पियनशिप 2024 के पहले फाइनल में पहुंची और उपविजेता रही। इस उपलब्धि के साथ समृद्धि का मात्र 13 वर्ष की उम्र में महिला राष्ट्रीय स्तर में खेलने के लिए स्थान सुरक्षित हो गया। मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक राज्य से केवल शीर्ष 2 खिलाड़ियों को ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश मिलता है, इसमें इस बार एक नाम समृद्धि का है। जैन समाज के विशिष्ट लोगों ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे समाज के लिेए गौरवशाली क्षण बताया है । सभी ने दुगड़ परिवार को बधाई देने के साथ साथ समृद्धि के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है ।

राष्ट्रीय महिला स्तर में पहुंची कोलकाता की समृद्धि दुगड़…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर,Key Line Times कोलकाता,शासनसेवी श्रीमान बुधमल जी दुगड़ ( कल्याणमित्र परिवार ) कोलकाता , की पड़पौत्री ऋषभ – सलोनी दुगड़ की सुपुत्री तथा सुरेन्द्र – विनीता दुगड़ की सुपौत्री समृद्धि दुगड़ पश्चिम बंगाल महिला स्नूकर चैम्पियनशिप 2024 के पहले फाइनल में पहुंची और उपविजेता रही। इस उपलब्धि के साथ समृद्धि का मात्र 13 वर्ष की उम्र में महिला राष्ट्रीय स्तर में खेलने के लिए स्थान सुरक्षित हो गया। मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक राज्य से केवल शीर्ष 2 खिलाड़ियों को ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश मिलता है, इसमें इस बार एक नाम समृद्धि का है। जैन समाज के विशिष्ट लोगों ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे समाज के लिेए गौरवशाली क्षण बताया है । सभी ने दुगड़ परिवार को बधाई देने के साथ साथ समृद्धि के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है ।

आचार्य महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन मे कहा कि काल का भरोसा नहीं तो आत्मकल्याण के प्रति रहें सजग…..सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 29.08.2024, गुरुवार, वेसु, सूरत (गुजरात) , चतुर्मासकाल के दौरान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में पर्युषण महापर्व की उपासना भी बड़े ही आध्यात्मिक तरीके से सुसम्पन्न होती है। आध्यात्मिकता की दिशा में ले जाने इस महापर्व का शुभारम्भ एक सितम्बर से प्रारम्भ होने वाला है। इन आठ दिनों में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में हजारों-हजारों की संख्या में श्रद्धालु धर्म, ध्यान, स्वाध्याय, तपस्या, जप, नौकारसी, पोरसी आदि-आदि धार्मिक अनुष्ठानों से ओतप्रोत नजर आएंगे। गुरुवार को महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी जो गृहस्थ है, परिग्रह से युक्त होता है, इस कारण उसमें ज्यादा आसक्ति भी हो सकती है। इस संसार में दो चीजे हैं-धु्रव और अधु्रव। आत्मा धु्रव है तो स्थूल शरीर अधु्रव होता है। भौतिक संसाधन अधु्रव होते हैं। आदमी भोग-विलास में आसक्त होता है। कहा गया है कि जो धु्रव को छोड़कर अधु्रव का परिसेवन करता है, उसके धु्रव और अधु्रव दोनों ही नष्ट हो जाते हैं। मानव का शरीर अधु्रव है। धन-वैभव स्थाई नहीं होता। मृत्यु निकट आ रही है। जन्म के साथ में मृत्यु भी आती है। जितना समय होता है, उसके बाद मृत्यु आती है और जीव को ले जाती है। यही पूरी दुनिया की स्थिति है। शरीर अशाश्वत है, धन-सम्पत्ति भी धु्रव नहीं है तो आदमी का कर्त्तव्य है कि आदमी अपने जीवन में धर्म का संचय करे। प्रश्न हो सकता है कि आदमी धर्म का संचय कैसे कर सकता है? जैन धर्म के अनुसार बताया गया कि सामायिक करना, नौकारसी, पोरसी, जप, ध्यान, जीवन में ईमानदारी, भोजन में सात्विकता, शुद्ध दान देता है तो उसके जीवन में धर्म का संचय हो सकता है। पर्युषण महापर्व और भगवती संवत्सरी निकट आ रहे हैं। भाद्रव कृष्णा चतुर्दशी से पर्युषण प्रारम्भ हो रहा है। यह अवसर वर्ष में एक बार आता है। इन दिनों में जितना संभव हो सके धर्म, ध्यान, साधना, प्रवचन सुनना, प्रतिक्रमण में भाग लेना संवत्सरी भगवती का उपवास, पौषध आदि का इन आठ दिनों में आदमी को अपने धर्म के खाते को भर लेने का प्रयास करना चाहिए। इस दौरान तो जितना संभव हो सके, सामायिक करें, जप करें तो प्रत्येक साल धर्म की अच्छी आराधना होती है तो धर्म का संचय हो जाता है। ‘आयारो’ आगम में भी बताया गया कि अधु्रव को छोड़कर धु्रव की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। मृत्यु का कोई भरोसा होता नहीं होता, इसलिए जितना संभव हो सके, आज से भले और अभी से धर्म के संचय और साधना के दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। मुमुक्षु बाइयां उपस्थित हैं। मुमुक्षु का जीवन भी कितना अच्छा है। सौभाग्य से ऐसा अवसर प्राप्त होता है। जीवन का क्या भरोसा, मृत्यु के लिए कोई भी क्षण अनवसर नहीं है, इसलिए आदमी को अपनी आत्मा के कल्याण के लिए प्रयास करने का प्रयास करना चाहिए। नवयुवक ज्यादा ध्यान, जप नहीं कर सकता तो ईमानदारी रखो, जहां तक संभव हो सके नशीली पदार्थों का त्याग हो, जमीकंद का त्याग हो, गुस्से से बचने का प्रयास हो, नॉनवेज का प्रयोग न हो, तो भी धर्म का समाचरण हो सकता है। इसलिए जितना संभव हो सके, धर्म के रास्ते पर चलने का प्रयास करना चाहिए। स्वयं ही युग के साथ न चलें, युग को भी अपने साथ चलाने का प्रयास करना चाहिए। काल का कोई भरोसा नहीं होता, इसलिए आदमी को आत्मकल्याण के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी धारणा के अनुसार आचार्यश्री के श्रीमुख से अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा ‘बच्चों का देश’ पुस्तक के रजत जयंती का विशेषांक भी श्रीचरणों में लोकार्पित किया गया। इस पुस्तक के संपादक श्री संचय जैन ने भी इस अवसर पर अपनी भावाभिव्यक्ति दी। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने आशीष प्रदान करते हुए कहा कि अणुव्रत पत्रिका और ‘बच्चों का देश’ रजत जयंती के प्रसंग से जुड़ा हुआ है। बच्चे मानों भविष्य होते हैं। बच्चों में अणुव्रत के संस्कार आ जाएं और उनका ज्ञान प्रखर हो तो बच्चे आगे जाकर बहुत कार्यकारी हो सकते हैं। इसके माध्यम से बालपीढ़ी में अच्छा विकास हो। नैतिकता, आध्यात्मिकता, धर्म आदि भी विकास हो, ऐसा प्रयास होता रहे। जहां भी जैसा अवसर मिले, इसके कार्य को आगे बढ़ाने का प्रयास होता रहे। तेरापंथ किशोर मण्डल-सूरत ने चौबीसी के गीत का संगान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल ने भी चौबीसी के गीत का संगान किया। *01 सितंबर से पर्युषण महापर्व का शुभारंभ* तेरापंथ धर्मसंघ में इन आठ दिनों के आध्यात्मिक अनुष्ठान के लिए प्रतिदिन के नियम भी निर्धारित होते हैं तो आठ दिनों को अलग-अलग दिवस का नाम भी प्रदान किया जाता है। इसके अंतिम संवत्सरी महापर्व और तदुपरान्त समस्त चराचर जगत से क्षमापना का उपक्रम भी बहुत ही आध्यात्मिक माहौल में मनाया जाता है। दिनांक 01 सितंबर से शुरू होने वाले पर्युषण का प्रथम दिवस खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया जायेगा वहीं दूसरा स्वाध्याय दिवस, तीसरा सामायिक दिवस, चौथा वाणी संयम दिवस, पांचवां अणुव्रत चेतना दिवस, छठा जप दिवस, सातवां ध्यान दिवस, आठवें शिखर दिवस के रूप में संवत्सरी महापर्व का उपक्रम रहता है। इन सभी के बाद क्षमापना महापर्व मनाया जाता है। इन दिनों में श्रावक समाज के लिए विशेष रूप से साधना निर्धारित होती है जिसके तहत प्रतिदिन तीन सामायिक, दो घंटा मौन, ब्रह्मचर्य का पालन, नौ द्रव्यों से अधिक खाने का त्याग, सचित्त और जमीकंद खाने का त्याग, जप व ध्यान आधा घंटा और रात्रि भोजन के त्याग की बात भी होती है।

आचार्य महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन मे कहा कि काल का भरोसा नहीं तो आत्मकल्याण के प्रति रहें सजग…..सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 29.08.2024, गुरुवार, वेसु, सूरत (गुजरात) , चतुर्मासकाल के दौरान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में पर्युषण महापर्व की उपासना भी बड़े ही आध्यात्मिक तरीके से सुसम्पन्न होती है। आध्यात्मिकता की दिशा में ले जाने इस महापर्व का शुभारम्भ एक सितम्बर से प्रारम्भ होने वाला है। इन आठ दिनों में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में हजारों-हजारों की संख्या में श्रद्धालु धर्म, ध्यान, स्वाध्याय, तपस्या, जप, नौकारसी, पोरसी आदि-आदि धार्मिक अनुष्ठानों से ओतप्रोत नजर आएंगे। गुरुवार को महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी जो गृहस्थ है, परिग्रह से युक्त होता है, इस कारण उसमें ज्यादा आसक्ति भी हो सकती है। इस संसार में दो चीजे हैं-धु्रव और अधु्रव। आत्मा धु्रव है तो स्थूल शरीर अधु्रव होता है। भौतिक संसाधन अधु्रव होते हैं। आदमी भोग-विलास में आसक्त होता है। कहा गया है कि जो धु्रव को छोड़कर अधु्रव का परिसेवन करता है, उसके धु्रव और अधु्रव दोनों ही नष्ट हो जाते हैं। मानव का शरीर अधु्रव है। धन-वैभव स्थाई नहीं होता। मृत्यु निकट आ रही है। जन्म के साथ में मृत्यु भी आती है। जितना समय होता है, उसके बाद मृत्यु आती है और जीव को ले जाती है। यही पूरी दुनिया की स्थिति है। शरीर अशाश्वत है, धन-सम्पत्ति भी धु्रव नहीं है तो आदमी का कर्त्तव्य है कि आदमी अपने जीवन में धर्म का संचय करे। प्रश्न हो सकता है कि आदमी धर्म का संचय कैसे कर सकता है? जैन धर्म के अनुसार बताया गया कि सामायिक करना, नौकारसी, पोरसी, जप, ध्यान, जीवन में ईमानदारी, भोजन में सात्विकता, शुद्ध दान देता है तो उसके जीवन में धर्म का संचय हो सकता है। पर्युषण महापर्व और भगवती संवत्सरी निकट आ रहे हैं। भाद्रव कृष्णा चतुर्दशी से पर्युषण प्रारम्भ हो रहा है। यह अवसर वर्ष में एक बार आता है। इन दिनों में जितना संभव हो सके धर्म, ध्यान, साधना, प्रवचन सुनना, प्रतिक्रमण में भाग लेना संवत्सरी भगवती का उपवास, पौषध आदि का इन आठ दिनों में आदमी को अपने धर्म के खाते को भर लेने का प्रयास करना चाहिए। इस दौरान तो जितना संभव हो सके, सामायिक करें, जप करें तो प्रत्येक साल धर्म की अच्छी आराधना होती है तो धर्म का संचय हो जाता है। ‘आयारो’ आगम में भी बताया गया कि अधु्रव को छोड़कर धु्रव की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। मृत्यु का कोई भरोसा होता नहीं होता, इसलिए जितना संभव हो सके, आज से भले और अभी से धर्म के संचय और साधना के दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। मुमुक्षु बाइयां उपस्थित हैं। मुमुक्षु का जीवन भी कितना अच्छा है। सौभाग्य से ऐसा अवसर प्राप्त होता है। जीवन का क्या भरोसा, मृत्यु के लिए कोई भी क्षण अनवसर नहीं है, इसलिए आदमी को अपनी आत्मा के कल्याण के लिए प्रयास करने का प्रयास करना चाहिए। नवयुवक ज्यादा ध्यान, जप नहीं कर सकता तो ईमानदारी रखो, जहां तक संभव हो सके नशीली पदार्थों का त्याग हो, जमीकंद का त्याग हो, गुस्से से बचने का प्रयास हो, नॉनवेज का प्रयोग न हो, तो भी धर्म का समाचरण हो सकता है। इसलिए जितना संभव हो सके, धर्म के रास्ते पर चलने का प्रयास करना चाहिए। स्वयं ही युग के साथ न चलें, युग को भी अपने साथ चलाने का प्रयास करना चाहिए। काल का कोई भरोसा नहीं होता, इसलिए आदमी को आत्मकल्याण के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी धारणा के अनुसार आचार्यश्री के श्रीमुख से अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा ‘बच्चों का देश’ पुस्तक के रजत जयंती का विशेषांक भी श्रीचरणों में लोकार्पित किया गया। इस पुस्तक के संपादक श्री संचय जैन ने भी इस अवसर पर अपनी भावाभिव्यक्ति दी। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने आशीष प्रदान करते हुए कहा कि अणुव्रत पत्रिका और ‘बच्चों का देश’ रजत जयंती के प्रसंग से जुड़ा हुआ है। बच्चे मानों भविष्य होते हैं। बच्चों में अणुव्रत के संस्कार आ जाएं और उनका ज्ञान प्रखर हो तो बच्चे आगे जाकर बहुत कार्यकारी हो सकते हैं। इसके माध्यम से बालपीढ़ी में अच्छा विकास हो। नैतिकता, आध्यात्मिकता, धर्म आदि भी विकास हो, ऐसा प्रयास होता रहे। जहां भी जैसा अवसर मिले, इसके कार्य को आगे बढ़ाने का प्रयास होता रहे। तेरापंथ किशोर मण्डल-सूरत ने चौबीसी के गीत का संगान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल ने भी चौबीसी के गीत का संगान किया। *01 सितंबर से पर्युषण महापर्व का शुभारंभ* तेरापंथ धर्मसंघ में इन आठ दिनों के आध्यात्मिक अनुष्ठान के लिए प्रतिदिन के नियम भी निर्धारित होते हैं तो आठ दिनों को अलग-अलग दिवस का नाम भी प्रदान किया जाता है। इसके अंतिम संवत्सरी महापर्व और तदुपरान्त समस्त चराचर जगत से क्षमापना का उपक्रम भी बहुत ही आध्यात्मिक माहौल में मनाया जाता है। दिनांक 01 सितंबर से शुरू होने वाले पर्युषण का प्रथम दिवस खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया जायेगा वहीं दूसरा स्वाध्याय दिवस, तीसरा सामायिक दिवस, चौथा वाणी संयम दिवस, पांचवां अणुव्रत चेतना दिवस, छठा जप दिवस, सातवां ध्यान दिवस, आठवें शिखर दिवस के रूप में संवत्सरी महापर्व का उपक्रम रहता है। इन सभी के बाद क्षमापना महापर्व मनाया जाता है। इन दिनों में श्रावक समाज के लिए विशेष रूप से साधना निर्धारित होती है जिसके तहत प्रतिदिन तीन सामायिक, दो घंटा मौन, ब्रह्मचर्य का पालन, नौ द्रव्यों से अधिक खाने का त्याग, सचित्त और जमीकंद खाने का त्याग, जप व ध्यान आधा घंटा और रात्रि भोजन के त्याग की बात भी होती है।

चंडीगढ़ मे सिनियर सीटीजन एसोसिएसन द्वारा महिला सशक्तिकरण परियोजना का आयोजन… सतविंदर कौर,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times चंडीगढ़ सीनियर सिटिज़न्स एसोसिएशन ने आज अपने महिला सशक्तिकरण परियोजना की शुरुआत कम्युनिटी सेंटर रामदरबार में की। इसका उद्घाटन क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती नेहा द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया और उन्हें हमारे महिला स्वयंसेवक श्रीमती अलका वालिया, सचिव वेलफेयर और ओशन सोसाइटी सचिव द्वारा सैनिटरी नैपकिन, बिस्कुट और फल वितरित किए गए। श्री सुभाष अग्रवाल, अध्यक्ष और श्री ब्रिगेडियर सप्रा, उपाध्यक्ष ने बताया कि यह परियोजना 4 साल बाद फिर से शुरू की गई है। हर महीने रामदरबार में एक बैठक आयोजित की जाएगी, और परियोजना-23 वेलफेयर सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि क्षेत्र में रहने वाली अधिकतम महिलाएं इसमें भाग लें। पार्षद श्रीमती नेहा से एक सिलाई शिक्षा केंद्र की शुरुआत के लिए भी अनुरोध किया गया, और उन्होंने इस परियोजना के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। श्री एस के माहेश्वरी, श्री विकास गोयल, श्रीमती मीनू , श्री विवेक शर्मा, श्रीमती स्वीटी और श्री पी.के. सूरी ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज की।

चंडीगढ़ मे सिनियर सीटीजन एसोसिएसन द्वारा महिला सशक्तिकरण परियोजना का आयोजन… सतविंदर कौर,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times चंडीगढ़ सीनियर सिटिज़न्स एसोसिएशन ने आज अपने महिला सशक्तिकरण परियोजना की शुरुआत कम्युनिटी सेंटर रामदरबार में की। इसका उद्घाटन क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती नेहा द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया और उन्हें हमारे महिला स्वयंसेवक श्रीमती अलका वालिया, सचिव वेलफेयर और ओशन सोसाइटी सचिव द्वारा सैनिटरी नैपकिन, बिस्कुट और फल वितरित किए गए। श्री सुभाष अग्रवाल, अध्यक्ष और श्री ब्रिगेडियर सप्रा, उपाध्यक्ष ने बताया कि यह परियोजना 4 साल बाद फिर से शुरू की गई है। हर महीने रामदरबार में एक बैठक आयोजित की जाएगी, और परियोजना-23 वेलफेयर सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि क्षेत्र में रहने वाली अधिकतम महिलाएं इसमें भाग लें। पार्षद श्रीमती नेहा से एक सिलाई शिक्षा केंद्र की शुरुआत के लिए भी अनुरोध किया गया, और उन्होंने इस परियोजना के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। श्री एस के माहेश्वरी, श्री विकास गोयल, श्रीमती मीनू , श्री विवेक शर्मा, श्रीमती स्वीटी और श्री पी.के. सूरी ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज की।

सुरत मे आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि परिग्रही मानव के लिए तप, दम और नियम की साधना कठिन…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 28.08.2024, बुधवार, वेसु, सूरत (गुजरात), युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी मंगल सन्निधि अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में द्विदिवसीय तेरापंथ कन्या मण्डल के ‘ज्योतिर्मय’ थीम पर आधारित 20वें अधिवेशन के अंतिम दिन मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान मंचीय उपक्रम बुधवार को रहा। देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंची सैंकड़ों कन्याओं को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान किया तो साध्वीप्रमुखाजी ने कन्याओं को मंगल प्रेरणा प्रदान की। बुधवार को महावीर समवसरण में उपस्थित जनता व अधिवेशन में सम्मिलित कन्याओं को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जो आदमी परिग्रही होता है, परिग्रह में अनुरक्त रहता है, मोह-माया की दुनिया में रमण करने वाला होता है तथा बाह्य आकर्षणों से आक्रान्त रहता है, इन्द्रिय विषयों के सेवन में रचा-पचा रहता है, ऐसे आदमी को यह पता ही नहीं होता कि उसे आगे भी जाना है। जहां चेतना आसक्ति में निमग्न है, वैसे आदमी के जीवन में न तप दिखाई देता है, दम दिखाई देता और न ही नियम दिखाई देता है। जीवन में तप, दम और नियम की बात बताई गयी है। स्वाद विजय की साधना तपस्या होती है। आसन विजय की साधना भी तपस्या होती है। विशेष साधक आसन विजय, निद्रा विजय और क्षुधा विजय करने वाले होते हैं। भोजन तो प्राणी को अपने जीवन को और देह को चलाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। शरीर से काम लेना है तो शरीर को भोजन के रूप में भाड़ा देना होता है। सामान्य मानव हो अथवा साधु, सभी को शरीर से कार्य करना है, विहार करना है, सेवा करना है तो शरीर को पोषण देने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। साधु के लिए बताया गया कि भोजन करने तो भी उसमें ज्यादा स्वाद लेकर नहीं करना चाहिए। अस्वाद की स्थिति होनी चाहिए। स्वाद विजय और उनोदरी भी तपस्या है। आसन विजय की भी साधना है। सोने, बैठने आदि में भी एक आसन में स्थित हो जाना भी साधना होती है। फिर निद्रा जय एक प्रकार की साधना है, किन्तु सामान्य मानव के लिए निद्रा की आवश्यकता होती है। उपयुक्त मात्रा में नींद, उपयुक्त मात्रा में भोजन आदि में संतुलन रखने का प्रयास करना चाहिए। इन्द्रिय विजय की साधना को दम कहा गया है। इसी प्रकार मानव अपने जीवन में अनेक कार्यों को नियमित रूप से करने का नियम भी ले सकता है। मानव को अपने जीवन में तप, दम और नियम को जीवन में रखने का अभ्यास करना चाहिए तथा आत्मा को अध्यात्म से भावित करने का लक्ष्य रखने प्रयास और उस दिशा में पुरुषार्थ करने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री गजसुकुमाल मुनि के मोक्ष में जाने व उनके वियोग आदि प्रसंगों को आख्यान रूप में प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने आख्यान के इस क्रम को सम्पन्न करने की घोषणा भी की। अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय तेरापंथ कन्या मण्डल के 20वें राष्ट्रीय अधिवेशन की ‘ज्योतिर्मय’ थीम के साथ समायोजित हुआ। इसके अंतिम मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में मंचीय उपक्रम रहा। इस संदर्भ में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती सरिता डागा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ कन्या मण्डल की प्रभारी श्रीमती अदिति सेखानी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। तेरापंका कन्या मण्डल-सूरत ने अपनी प्रस्तुति दी। उपस्थित कन्याओं ने चौबीसी के गीत का संगान किया।तदुपरान्त साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभाजी ने उपस्थित कन्याओं को मंगल अभिप्रेरणा देते हुए कन्याओं को जीवन ज्योतित करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। युगप्रधान आचार्यश्री ने अधिवेशन में उपस्थित कन्याओं को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य एक विकसित प्राणी होता है और वह जो उत्कृष्ट साधना कर सकता है, अन्य कोई प्राणी साधना नहीं कर सकता। कन्या मण्डल का यह अधिवेशन अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के अंतर्गत हो रहा है। कन्याओं में श्री, लज्जा, धैर्य, कीर्ति, बुद्धि और लक्ष्मी रूपी विशेषणों का विकास होता रहे। इन छह देवी रूपों कन्याएं अच्छा विकास करें। कन्याएं अच्छी श्राविकाएं बनें और अच्छे धार्मिक-आध्यात्मिक कार्य करती रहें और स्वयं के विकास का प्रयास करती रहें।

सुरत मे आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि परिग्रही मानव के लिए तप, दम और नियम की साधना कठिन…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 28.08.2024, बुधवार, वेसु, सूरत (गुजरात), युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी मंगल सन्निधि अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में द्विदिवसीय तेरापंथ कन्या मण्डल के ‘ज्योतिर्मय’ थीम पर आधारित 20वें अधिवेशन के अंतिम दिन मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान मंचीय उपक्रम बुधवार को रहा। देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंची सैंकड़ों कन्याओं को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान किया तो साध्वीप्रमुखाजी ने कन्याओं को मंगल प्रेरणा प्रदान की। बुधवार को महावीर समवसरण में उपस्थित जनता व अधिवेशन में सम्मिलित कन्याओं को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जो आदमी परिग्रही होता है, परिग्रह में अनुरक्त रहता है, मोह-माया की दुनिया में रमण करने वाला होता है तथा बाह्य आकर्षणों से आक्रान्त रहता है, इन्द्रिय विषयों के सेवन में रचा-पचा रहता है, ऐसे आदमी को यह पता ही नहीं होता कि उसे आगे भी जाना है। जहां चेतना आसक्ति में निमग्न है, वैसे आदमी के जीवन में न तप दिखाई देता है, दम दिखाई देता और न ही नियम दिखाई देता है। जीवन में तप, दम और नियम की बात बताई गयी है। स्वाद विजय की साधना तपस्या होती है। आसन विजय की साधना भी तपस्या होती है। विशेष साधक आसन विजय, निद्रा विजय और क्षुधा विजय करने वाले होते हैं। भोजन तो प्राणी को अपने जीवन को और देह को चलाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। शरीर से काम लेना है तो शरीर को भोजन के रूप में भाड़ा देना होता है। सामान्य मानव हो अथवा साधु, सभी को शरीर से कार्य करना है, विहार करना है, सेवा करना है तो शरीर को पोषण देने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। साधु के लिए बताया गया कि भोजन करने तो भी उसमें ज्यादा स्वाद लेकर नहीं करना चाहिए। अस्वाद की स्थिति होनी चाहिए। स्वाद विजय और उनोदरी भी तपस्या है। आसन विजय की भी साधना है। सोने, बैठने आदि में भी एक आसन में स्थित हो जाना भी साधना होती है। फिर निद्रा जय एक प्रकार की साधना है, किन्तु सामान्य मानव के लिए निद्रा की आवश्यकता होती है। उपयुक्त मात्रा में नींद, उपयुक्त मात्रा में भोजन आदि में संतुलन रखने का प्रयास करना चाहिए। इन्द्रिय विजय की साधना को दम कहा गया है। इसी प्रकार मानव अपने जीवन में अनेक कार्यों को नियमित रूप से करने का नियम भी ले सकता है। मानव को अपने जीवन में तप, दम और नियम को जीवन में रखने का अभ्यास करना चाहिए तथा आत्मा को अध्यात्म से भावित करने का लक्ष्य रखने प्रयास और उस दिशा में पुरुषार्थ करने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री गजसुकुमाल मुनि के मोक्ष में जाने व उनके वियोग आदि प्रसंगों को आख्यान रूप में प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने आख्यान के इस क्रम को सम्पन्न करने की घोषणा भी की। अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय तेरापंथ कन्या मण्डल के 20वें राष्ट्रीय अधिवेशन की ‘ज्योतिर्मय’ थीम के साथ समायोजित हुआ। इसके अंतिम मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में मंचीय उपक्रम रहा। इस संदर्भ में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती सरिता डागा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ कन्या मण्डल की प्रभारी श्रीमती अदिति सेखानी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। तेरापंका कन्या मण्डल-सूरत ने अपनी प्रस्तुति दी। उपस्थित कन्याओं ने चौबीसी के गीत का संगान किया।तदुपरान्त साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभाजी ने उपस्थित कन्याओं को मंगल अभिप्रेरणा देते हुए कन्याओं को जीवन ज्योतित करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। युगप्रधान आचार्यश्री ने अधिवेशन में उपस्थित कन्याओं को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य एक विकसित प्राणी होता है और वह जो उत्कृष्ट साधना कर सकता है, अन्य कोई प्राणी साधना नहीं कर सकता। कन्या मण्डल का यह अधिवेशन अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के अंतर्गत हो रहा है। कन्याओं में श्री, लज्जा, धैर्य, कीर्ति, बुद्धि और लक्ष्मी रूपी विशेषणों का विकास होता रहे। इन छह देवी रूपों कन्याएं अच्छा विकास करें। कन्याएं अच्छी श्राविकाएं बनें और अच्छे धार्मिक-आध्यात्मिक कार्य करती रहें और स्वयं के विकास का प्रयास करती रहें।

आचार्य महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन मे कहा कि प्रमाद के कारण अनेकानेक योनियों में भ्रमण करती है आत्मा…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 27.08.2024, मंगलवार, वेसु, सूरत (गुजरात),सम्पूर्ण भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपनी समृद्धि के लिए विख्यात गुजरात राज्य का सबसे प्राचीन तथा हीरे और कपड़े के व्यवसाय से सुप्रसिद्ध सूरत नगरी वर्तमान में अध्यात्म नगरी के रूप में अपनी छटा बिखेर रही है। सूरत की बदलती इस सूरत का कारण जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का इस नगरी में पावन चतुर्मास। ऐसे महागुरु की सन्निधि में देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने से व्यापारिक नगरी अध्यात्म प्रेमियों की नगरी भी बन रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु मानवता के मसीहा के दर्शन व मंगल प्रवचन से जीवन अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं। इतना ही तेरापंथ धर्मसंघ से जुड़ी संस्थाओं व संगठनों के अधिवेशन आदि के कार्यक्रमों का भी अनवत क्रम बना हुआ है। मंगलवार को भी अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में तेरापंथ कन्या मण्डल का 20 अधिवेशन भी शुभारम्भ हुआ। महावीर समवसरण में मंगलवार को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीवर्याजी ने उपस्थित जनता को उद्बोधित किया। तदुपरान्त शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम समुपस्थित जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि प्राणी अनेक योनियों में जाता है और नाना प्रकार के आघातों का प्रतिसंवेदन करता है, कष्ट भी भोगता है। प्रश्न हो सकता है कि अलग-अलग योनियों में जीवन को कौन ले जाता है? आगम में उत्तर प्रदान किया गया कि प्राणी अपने प्रमाद के कारण अनेक रूप वाली योनियों में जाता है और आघातों का अनुभव भी करता है। जैन आगमों में बताया गया है कि सुख और दुःख की कर्ता-धर्ता स्वयं उस प्राणी की आत्मा ही होती है। जैसा कर्म आत्मा करती है, प्राणी उसी प्रकार सुख अथवा दुःख को प्राप्त करता है। प्राणी के कर्म ही उसे कष्ट देने वाले होते हैं। पाप का आचरण करने वाला यथा चोरी, हिंसा, हत्या, लूट, किसी को कष्ट देने वाला अपने लिए स्वयं दुःख का प्रबन्ध कर लेता है। दुःख, कष्ट को दूर करने लिए प्राणी को अधिक से अधिक प्रमाद से बचने का प्रयास करना चाहिए। प्रमाद से बचने के लिए प्राणी को प्रमाद से बचते हुए आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास हो तो संभव है, कभी मोक्ष की प्राप्ति भी हो सकती है। आदमी को अपने कर्म पर ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए। आदमी के अपने भीतर में उत्पन्न हो रहे प्रमाद से भी बचने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री गजसुकुमाल मुनि के आख्यान क्रम का वाचन किया। कार्यक्रम में गुजरात की धरा से संबद्ध मुनि निकुंजकुमारजी अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। ‘रश्मियां रश्मिरथ की, गाथा महाश्रमण की’ विशेषांक को श्रीमती प्रभा जैन, श्री विनोद मरोठी आदि ने पूज्यप्रवर के समक्ष लोकार्पित किया। इस संदर्भ में श्रीमती प्रभा जैन ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

आचार्य महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन मे कहा कि प्रमाद के कारण अनेकानेक योनियों में भ्रमण करती है आत्मा…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 27.08.2024, मंगलवार, वेसु, सूरत (गुजरात),सम्पूर्ण भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपनी समृद्धि के लिए विख्यात गुजरात राज्य का सबसे प्राचीन तथा हीरे और कपड़े के व्यवसाय से सुप्रसिद्ध सूरत नगरी वर्तमान में अध्यात्म नगरी के रूप में अपनी छटा बिखेर रही है। सूरत की बदलती इस सूरत का कारण जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का इस नगरी में पावन चतुर्मास। ऐसे महागुरु की सन्निधि में देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने से व्यापारिक नगरी अध्यात्म प्रेमियों की नगरी भी बन रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु मानवता के मसीहा के दर्शन व मंगल प्रवचन से जीवन अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं। इतना ही तेरापंथ धर्मसंघ से जुड़ी संस्थाओं व संगठनों के अधिवेशन आदि के कार्यक्रमों का भी अनवत क्रम बना हुआ है। मंगलवार को भी अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में तेरापंथ कन्या मण्डल का 20 अधिवेशन भी शुभारम्भ हुआ। महावीर समवसरण में मंगलवार को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीवर्याजी ने उपस्थित जनता को उद्बोधित किया। तदुपरान्त शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम समुपस्थित जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि प्राणी अनेक योनियों में जाता है और नाना प्रकार के आघातों का प्रतिसंवेदन करता है, कष्ट भी भोगता है। प्रश्न हो सकता है कि अलग-अलग योनियों में जीवन को कौन ले जाता है? आगम में उत्तर प्रदान किया गया कि प्राणी अपने प्रमाद के कारण अनेक रूप वाली योनियों में जाता है और आघातों का अनुभव भी करता है। जैन आगमों में बताया गया है कि सुख और दुःख की कर्ता-धर्ता स्वयं उस प्राणी की आत्मा ही होती है। जैसा कर्म आत्मा करती है, प्राणी उसी प्रकार सुख अथवा दुःख को प्राप्त करता है। प्राणी के कर्म ही उसे कष्ट देने वाले होते हैं। पाप का आचरण करने वाला यथा चोरी, हिंसा, हत्या, लूट, किसी को कष्ट देने वाला अपने लिए स्वयं दुःख का प्रबन्ध कर लेता है। दुःख, कष्ट को दूर करने लिए प्राणी को अधिक से अधिक प्रमाद से बचने का प्रयास करना चाहिए। प्रमाद से बचने के लिए प्राणी को प्रमाद से बचते हुए आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास हो तो संभव है, कभी मोक्ष की प्राप्ति भी हो सकती है। आदमी को अपने कर्म पर ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए। आदमी के अपने भीतर में उत्पन्न हो रहे प्रमाद से भी बचने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री गजसुकुमाल मुनि के आख्यान क्रम का वाचन किया। कार्यक्रम में गुजरात की धरा से संबद्ध मुनि निकुंजकुमारजी अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। ‘रश्मियां रश्मिरथ की, गाथा महाश्रमण की’ विशेषांक को श्रीमती प्रभा जैन, श्री विनोद मरोठी आदि ने पूज्यप्रवर के समक्ष लोकार्पित किया। इस संदर्भ में श्रीमती प्रभा जैन ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

*तेरापंथ युवक परिषद साउथ कोलकाता को सुरत मे किया गया सम्मानित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times सुरत,सेवा – संस्कार – संगठन के कार्यों का मूल्यांकन करते हुए आ भा ते यु प द्वारा ते यु प साउथ कोलकाता को सूरत में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सानिध्य में आयोजित 58 वें वार्षिक अधिवेशन में पुरस्कृत कर उत्साह वर्धन किया गया। जिसमें *ते यु प साउथ कोलकाता को संगठन के क्षेत्र में विशाल श्रेणी में प्रथम पुरस्कार* प्राप्त हुआ वहीं सेवा के क्षेत्र में ते यु प साउथ कोलकाता को चौका सत्कार सेवा प्रदान करने पर सम्मानित किया गया साथ ही संस्कार के क्षेत्र तेयुप साउथ कोलकाता को भिक्षु दर्शन कार्यशाला आयोजन करने पर आ भा ते यु प द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। तेरापंथ युवक परिषद साउथ कोलकाता के सत्र २०२३-२४ के अध्यक्ष श्री राकेश जी नाहटा एवं मंत्री श्री संदीप जी मनोत ने अपनी पूरी टीम के साथ परिषद को प्राप्त सम्मान के लिए *मुनि श्री जिनेश कुमार जी मुनि श्री परमानंद जी एवं मुनि श्री कुणाल कुमार जी के प्रति अत्यंत कृतज्ञता ज्ञापित की जिनकी प्रेरणा एवं सानिध्य से परिषद ने सभी कार्यों को सक्रियता से पूर्ण किए, साथ ही परिषद के मुख्य परिमार्शकगण श्री तुलसी जी दुगड़, श्री भूपेन्द्र जी दुगड़ एवं श्री कमल जी कोचर* तथा विशिष्ट अतिथिगण एवं कार्यकारिणी सदस्यों का अपने कार्यकाल के दौरान सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। परिषद के वर्तमान प्रबंध मण्डल एवं *कार्यकारिणी सदस्यों विशेष कर प्रतिभावान अध्यक्ष श्री मोहित जी बैद के श्रम से भविष्य में तेरापंथ युवक परिषद साउथ कोलकाता, सेवा संस्कार संगठन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी ऐसी मंगलकामना

*तेरापंथ युवक परिषद साउथ कोलकाता को सुरत मे किया गया सम्मानित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times सुरत,सेवा – संस्कार – संगठन के कार्यों का मूल्यांकन करते हुए आ भा ते यु प द्वारा ते यु प साउथ कोलकाता को सूरत में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सानिध्य में आयोजित 58 वें वार्षिक अधिवेशन में पुरस्कृत कर उत्साह वर्धन किया गया। जिसमें *ते यु प साउथ कोलकाता को संगठन के क्षेत्र में विशाल श्रेणी में प्रथम पुरस्कार* प्राप्त हुआ वहीं सेवा के क्षेत्र में ते यु प साउथ कोलकाता को चौका सत्कार सेवा प्रदान करने पर सम्मानित किया गया साथ ही संस्कार के क्षेत्र तेयुप साउथ कोलकाता को भिक्षु दर्शन कार्यशाला आयोजन करने पर आ भा ते यु प द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। तेरापंथ युवक परिषद साउथ कोलकाता के सत्र २०२३-२४ के अध्यक्ष श्री राकेश जी नाहटा एवं मंत्री श्री संदीप जी मनोत ने अपनी पूरी टीम के साथ परिषद को प्राप्त सम्मान के लिए *मुनि श्री जिनेश कुमार जी मुनि श्री परमानंद जी एवं मुनि श्री कुणाल कुमार जी के प्रति अत्यंत कृतज्ञता ज्ञापित की जिनकी प्रेरणा एवं सानिध्य से परिषद ने सभी कार्यों को सक्रियता से पूर्ण किए, साथ ही परिषद के मुख्य परिमार्शकगण श्री तुलसी जी दुगड़, श्री भूपेन्द्र जी दुगड़ एवं श्री कमल जी कोचर* तथा विशिष्ट अतिथिगण एवं कार्यकारिणी सदस्यों का अपने कार्यकाल के दौरान सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। परिषद के वर्तमान प्रबंध मण्डल एवं *कार्यकारिणी सदस्यों विशेष कर प्रतिभावान अध्यक्ष श्री मोहित जी बैद के श्रम से भविष्य में तेरापंथ युवक परिषद साउथ कोलकाता, सेवा संस्कार संगठन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी ऐसी मंगलकामना

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