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February 21, 2026

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गंता को गंतव्य तक पहुंचाने में मार्गदर्शक का बहुत महत्त्व : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने प्रदान की पावन प्रेरणा* *-साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृतिसभा का हुआ आयोजन* *21.02.2026, शनिवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* करीब 37 वर्षों बाद जैन विश्व भारती, लाडनूं में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया है। शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। शांतदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि पांच शब्द हैं- गंता, गंतव्य, गति, मार्ग व मार्गदर्शक। चलने वाला अथवा गमन करने वाला व्यक्ति गंता होता है। चलने वाला व्यक्ति को जहां पहुंचना है, जो लक्ष्य होता है, वह गंतव्य हो जाता है। गंता और गंतव्य के मिलन किए गंता को गति करनी होती है। गति होती है तो गंता और गंतव्य का मिलन हो सकेगा। प्रश्न हो सकता है कि गंता किधर करे? उत्तर दिया गया कि गंतव्य तक जाने के लिए गंता को निर्धारित मार्ग पर गति करनी होती है, किन्तु कौन-सा मार्ग गंतव्य तक ले जाएगा, इसके लिए मार्गदर्शक की अपेक्षा होती है। ये पांच चीजें मिलती हैं तो कोई गंता गंतव्य तक पहुंच सकता है। अध्यात्म के संदर्भ में साधना करने वाला व्यक्ति गंता होता है। उसका गंतव्य मोक्ष होता है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप के मार्ग होता है और इस गति करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, किन्तु इन पर गति करने के लिए कोई मार्गदर्शक होना चाहिए। मार्ग दिखाने वाले तीर्थंकर, गुरु व साधु मार्गदर्शक बनते हैं। मोक्ष जाने के लिए चार मार्ग बताए गए हैं। इस जीवन में सम्यक्त्व का भी बहुत महत्त्व है। सम्यक् दर्शन के बिना सम्यक् ज्ञान नहीं होता और ज्ञान के बिना सम्यक् चारित्र की प्राप्ति नहीं और चारित्र की प्राप्ति के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं होती। इस संदर्भ में सम्यक्त्व के महत्त्व को जाना जा सकता है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि योगक्षेम वर्ष के दौरान जो प्राप्त नहीं है, उसे प्राप्त करने का अच्छा मौका है। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने एक जिज्ञासा को अवसर प्रदान किया तो एक साध्वीजी ने अपनी जिज्ञासा की तो आचार्यश्री ने उन्हें समाधान प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में 20 फरवरी को लाडनूं में ही स्थित साध्वी सेवा मंदिर में दिवंगत हुई साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृति सभा का आयोजन हुआ, जिसमें आचार्यश्री ने उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। आचार्यश्री के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने चार लोगस्स का ध्यान किया। इस अवसर पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने दिवंगत साध्वीजी के आत्मा के आध्यात्मिक ऊर्ध्वारोहण की मंगलकामना की।

गंता को गंतव्य तक पहुंचाने में मार्गदर्शक का बहुत महत्त्व : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने प्रदान की पावन प्रेरणा* *-साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृतिसभा का हुआ आयोजन* *21.02.2026, शनिवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* करीब 37 वर्षों बाद जैन विश्व भारती, लाडनूं में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया है। शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। शांतदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि पांच शब्द हैं- गंता, गंतव्य, गति, मार्ग व मार्गदर्शक। चलने वाला अथवा गमन करने वाला व्यक्ति गंता होता है। चलने वाला व्यक्ति को जहां पहुंचना है, जो लक्ष्य होता है, वह गंतव्य हो जाता है। गंता और गंतव्य के मिलन किए गंता को गति करनी होती है। गति होती है तो गंता और गंतव्य का मिलन हो सकेगा। प्रश्न हो सकता है कि गंता किधर करे? उत्तर दिया गया कि गंतव्य तक जाने के लिए गंता को निर्धारित मार्ग पर गति करनी होती है, किन्तु कौन-सा मार्ग गंतव्य तक ले जाएगा, इसके लिए मार्गदर्शक की अपेक्षा होती है। ये पांच चीजें मिलती हैं तो कोई गंता गंतव्य तक पहुंच सकता है। अध्यात्म के संदर्भ में साधना करने वाला व्यक्ति गंता होता है। उसका गंतव्य मोक्ष होता है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप के मार्ग होता है और इस गति करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, किन्तु इन पर गति करने के लिए कोई मार्गदर्शक होना चाहिए। मार्ग दिखाने वाले तीर्थंकर, गुरु व साधु मार्गदर्शक बनते हैं। मोक्ष जाने के लिए चार मार्ग बताए गए हैं। इस जीवन में सम्यक्त्व का भी बहुत महत्त्व है। सम्यक् दर्शन के बिना सम्यक् ज्ञान नहीं होता और ज्ञान के बिना सम्यक् चारित्र की प्राप्ति नहीं और चारित्र की प्राप्ति के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं होती। इस संदर्भ में सम्यक्त्व के महत्त्व को जाना जा सकता है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि योगक्षेम वर्ष के दौरान जो प्राप्त नहीं है, उसे प्राप्त करने का अच्छा मौका है। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने एक जिज्ञासा को अवसर प्रदान किया तो एक साध्वीजी ने अपनी जिज्ञासा की तो आचार्यश्री ने उन्हें समाधान प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में 20 फरवरी को लाडनूं में ही स्थित साध्वी सेवा मंदिर में दिवंगत हुई साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृति सभा का आयोजन हुआ, जिसमें आचार्यश्री ने उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। आचार्यश्री के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने चार लोगस्स का ध्यान किया। इस अवसर पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने दिवंगत साध्वीजी के आत्मा के आध्यात्मिक ऊर्ध्वारोहण की मंगलकामना की।

टीपीएफ कोलकाता पूर्वांचल द्वारा वाकाथोन का सफल आयोजन TPF Kolkata Purbanchal ने TPF north Howrah और Kolkata general के साथ मिलकर वाकथन का आयोजन स्थानीय दी decathlon, sector V, Kolkata में 15 फ़रवरी 2026 में किया!कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया गया, इसके पश्चात जुम्बा का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने काफ़ी आनन्द और उत्साह के साथ भागं लिया लगभग 7 बजे वाकथन का प्रारंभ हुआ इसके पश्चात लगभग 7:40 बजे मेडिटेशन का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने बढ़ चढ़कर भागं लिया तत पश्चात अल्पाहार और चाय की अच्छी व्यवस्था थी जिसका सभी ने लुफ्त उठाया इसके पश्चात सभी पदाधिकारियों के स्वागत का कार्यक्रम हुआ! इस दौरान के मुख्य अतिथि RJ Rakesh थे और अंत में लकी ड्रॉ हुआ जिसमें से तीन विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया!इस कार्यक्रम में पूर्वांचल सभा के मुख्य ट्रस्टी बाबूलाल जी गंग, टीपीएफ के ट्रस्टी सुशील जी चोपड़ा, टीपीए पूर्वांचल के अध्यक्ष राकेश सिंघी और उनकी टीम, टीपीएफ हावड़ा नार्थ के अध्यक्ष रितेश डुगर और उनकी टीम, कोलकाता जनरल के अध्यक्ष प्रतीक डुगर और उनकी टीम काफ़ी सक्रिय रही ! सभी संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों की अच्छी उपस्थिति रही! BSF के जवानों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया! कार्यक्रम में सभी का उत्साह और जोश देखते ही बन रहा था इस कार्यक्रम में पुर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश जी मालू तथा ईस्ट ज़ोन १ के अध्यक्ष प्रवीण सिरोहिया भी उपस्थित थे! इस walkathon में लगभाग ४५० लोगों नें हिस्सा लिया ! ओम अर्हम 🙏

टीपीएफ कोलकाता पूर्वांचल द्वारा वाकाथोन का सफल आयोजन TPF Kolkata Purbanchal ने TPF north Howrah और Kolkata general के साथ मिलकर वाकथन का आयोजन स्थानीय दी decathlon, sector V, Kolkata में 15 फ़रवरी 2026 में किया!कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया गया, इसके पश्चात जुम्बा का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने काफ़ी आनन्द और उत्साह के साथ भागं लिया लगभग 7 बजे वाकथन का प्रारंभ हुआ इसके पश्चात लगभग 7:40 बजे मेडिटेशन का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने बढ़ चढ़कर भागं लिया तत पश्चात अल्पाहार और चाय की अच्छी व्यवस्था थी जिसका सभी ने लुफ्त उठाया इसके पश्चात सभी पदाधिकारियों के स्वागत का कार्यक्रम हुआ! इस दौरान के मुख्य अतिथि RJ Rakesh थे और अंत में लकी ड्रॉ हुआ जिसमें से तीन विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया!इस कार्यक्रम में पूर्वांचल सभा के मुख्य ट्रस्टी बाबूलाल जी गंग, टीपीएफ के ट्रस्टी सुशील जी चोपड़ा, टीपीए पूर्वांचल के अध्यक्ष राकेश सिंघी और उनकी टीम, टीपीएफ हावड़ा नार्थ के अध्यक्ष रितेश डुगर और उनकी टीम, कोलकाता जनरल के अध्यक्ष प्रतीक डुगर और उनकी टीम काफ़ी सक्रिय रही ! सभी संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों की अच्छी उपस्थिति रही! BSF के जवानों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया! कार्यक्रम में सभी का उत्साह और जोश देखते ही बन रहा था इस कार्यक्रम में पुर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश जी मालू तथा ईस्ट ज़ोन १ के अध्यक्ष प्रवीण सिरोहिया भी उपस्थित थे! इस walkathon में लगभाग ४५० लोगों नें हिस्सा लिया ! ओम अर्हम 🙏

🌸 *मंगलमय हो योगक्षेम वर्ष : महातपस्वी महाश्रमण* 🌸 *-भव्य एवं आध्यात्मिक रूप में प्रारम्भ हुआ योगक्षेम वर्ष* *-शिक्षण, प्रशिक्षण, चिंतन, मंथन व निर्णय के लिए योगक्षेम वर्ष को आचार्यश्री ने बताया उपयुक्त* *-साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत को दी प्रस्तुति, मुमुक्षु बहनों ने भी किया गीत का संगान* *-तत्त्वज्ञान व प्रेक्षाध्यान के विद्यार्थियों को आचार्यश्री ने दी मंगल प्रेरणा* *-जैन विश्व भारती परिसर में अनेक भवनों का हुआ लोकार्पण* *-आठ बातें ज्ञान की पुस्तक भी श्रीचरणों में हुई लोकार्पित* *19.02.2026, गुरुवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* वर्षों की प्रतीक्षा व त्रिदिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान जब पूर्णतया फलित हुआ तो फाल्गुन शुक्ला द्वितीया तदनुसार 19 फरवरी 2026 को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी के जन्मदिवस के दिन जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती परिसर में तेरापंथ धर्मसंघ की प्रभावना को प्रसारित करने वाले योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया। इस शुभारम्भ के अवसर पर जैन विश्व भारती में विभिन्न आध्यात्मिक-धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों के कुशल संचालन के लिए अर्जवम् भवन, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम् का लोकार्पण युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगलपाठ के साथ प्रारम्भ हुआ। इतना ही नहीं योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ के दिन ही मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान आचार्यश्री के प्रवचनों पर आधारित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ भी जैन विश्व भारती द्वारा पूज्यचरणों में लोकार्पित की गई। इस प्रकार संघ प्रभावक योगक्षेम वर्ष का भव्य एवं आध्यात्मिक मंगल शुभारम्भ हो गया। गुरुवार को जैन विश्व भारती परिसर में मानों गुरुवार को एक अलग ही वातावरण छाया हुआ नजर आ रहा था। तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी का जन्मदिवस का अवसर भी था और करीब 37 वर्षों के बाद योगक्षेम वर्ष के शुभारम्भ का भी सुअवसर था तो श्रावकों की भी विशेष उपस्थिति नजर आ रही थी। आचार्यश्री मंगल प्रवचन में पधारने से पूर्व जैन विश्व भारती परिसर में धार्मिक-आध्यात्मिक, सामाजिक व संगठनात्मक कार्यों के उद्देश्य से बने चार नवीन भवन- आर्जवम्, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम में पधारे और मंगलपाठ का उच्चारण करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया तो संबंधित लोगों व उनके परिजनों द्वारा भवनों का लोकार्पण किया गया गया। मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के लिए युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी सुधर्मा सभा में पधारे तो पूरा वातावरण जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। तत्पश्चात महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को योगक्षेम वर्ष के मंगल शुभारम्भ के अवसर पर महामंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि योगक्षेम वर्ष 2026-27 के शुरु हो चुके की घोषणा करता हूं। आगम में योगक्षेम शब्द आया है। योगक्षेम वर्ष का नाम योग और क्षेम दो शब्दों का जुड़ाव है। आगम में यह शब्द प्राप्त होता है तो यह मानना चाहिए कि आगमिक आधार पर योगक्षेम वर्ष का नामकरण किया गया है। भगवान ऋषभ व भगवान महावीर से जुड़ी यह जैन शासन है, जिसमें दिगम्बर व श्वेताम्बर नाम की दो धाराएं बह रही हैं। श्वेताम्बर धारा में एक आम्नाय तेरापंथ है, जिसके प्रवर्तक आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु स्वामी हुए। उनकी परंपरा में उत्तराधिकारियों की परंपरा आगे बढ़ी। उसमें तेरापंथ के अष्टमाचार्य परम पूजनीय आचार्यश्री कालूगणी हुए। उनके समय में धर्मसंघ में विकास भी हुआ। उनके द्वारा दीक्षित दो सुशिष्य मुनि तुलसी व मुनि नथमलजी (टमकोर) हमें आचार्य के रूप में प्राप्त हुए। कालूगणी के अनंतर उत्तराधिकारी पूज्य आचार्यश्री तुलसी व उसके बाद परम स्तवनीय आचार्यश्री महाप्रज्ञजी हुए। ये दोनों ही पूज्यप्रवर युगप्रधान की गरिमा से मंडित हुए थे। ये दो आचार्य ऐसे हुए हैं, जिनको हम में से कइयों ने प्रत्यक्ष देखा भी हुआ है, उन्हें नमन भी किया गया है। आचार्यश्री तुलसी के समय योगक्षेम वर्ष आयोजित हुआ था और लगभग वहीं प्रांगण आज भी हमें प्राप्त है, जहां योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ की पुनरावृत्ति हुई है। महाश्रमणी साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने आचार्यश्री तुलसी के समय भी योगक्षेम वर्ष का निवेदन रखा था और उन्होंने ही मेरे सामने भी इसका निवेदन रखा था। उनके कथन को स्वीकार कर योगक्षेम वर्ष की घोषणा की, वह घोषणा आज प्रारम्भ हो रहा है। जिन्होंने निवेदन किया था वे तो अब सदेह नहीं हैं, परन्तु उस निवेदन के संदर्भ में साध्वीप्रमुखा अब विश्रुतविभाजी को मान लेता हूं। हमारे धर्मसंघ के लिए योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो। इस दौरान यदि हम अहिंसा, संयम की साधना करते हैं और तप तपते हैं तो यह योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो ही जाएगा। तीन दिनों का अनुष्ठान मानों योगक्षेम वर्ष का शिलान्यास था। अब योगक्षेम वर्ष की कालावधि शुरु हो गई है। यह हमारे विकास में सहायक बने। इस दौरान अनेक रूपों में प्रशिक्षण का कार्य चलता रहे। चिंतन, मंथन, निर्णय के लिए भी यह वर्ष महत्त्वपूर्ण है। धर्मसंघ की साधना कैसे पुष्ट हो, इसका प्रयास होना चाहिए। आचार, विचार पक्ष कैसे मजबूत हो। इस प्रकार शिक्षण-प्रशिक्षण व चिंतन-मंथन के द्वारा योगक्षेम वर्ष को अच्छा बनाने का प्रयास किया जा सकता है। इस योगक्षेम वर्ष की कालावधि तक यदि ज्ञानात्मक दृष्टि व जानकारी के दृष्टि से बहिर्विहार में रहने वाले साधु-साध्वियां भी यदि ठिकाणे में सहज रूप में यूट्यूब आदि के माध्यम से टीवी में प्रसारण हो रहा हो तो देख सकते हैं, इसके लिए अनापत्ति है। इस दौरान चलने वाले शिक्षण-प्रशिक्षण के बाद परीक्षा भी होने के बाद ही कोई डिग्री या उपाधि प्रदान की जाए। हमारे अष्टम आचार्यश्री कालूगणी का जन्मदिवस है। आज का दिन अणुव्रत, पारमार्थिक शिक्षण संस्था से जुड़ा हुआ है। यह वर्ष धर्मसंघ को ऊंचाई प्रदान करने वाला सिद्ध हो। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने उपस्थित चारित्रात्माओं को अपनी जिज्ञासाओं को भी प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पहले तत्त्वज्ञान के क्लास के विद्यार्थियों को मंगल प्रेरणा प्रदान की। इसी प्रकार प्रेक्षाध्यान के शिविरार्थियों को भी मंगल पाथेय प्रदान किए। तदुपरान्त आचार्यश्री के ठाणं प्रवचन के आधार पर जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ को जैन विश्व भारती आदि के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की। तदुपरान्त मुमुक्षु बहनों ने गीत का संगान किया। श्री राकेशमणिजी ने संस्कृत भाषा में अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज-छापर ने अपनी गीत को प्रस्तुति दी।

🌸 *मंगलमय हो योगक्षेम वर्ष : महातपस्वी महाश्रमण* 🌸 *-भव्य एवं आध्यात्मिक रूप में प्रारम्भ हुआ योगक्षेम वर्ष* *-शिक्षण, प्रशिक्षण, चिंतन, मंथन व निर्णय के लिए योगक्षेम वर्ष को आचार्यश्री ने बताया उपयुक्त* *-साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत को दी प्रस्तुति, मुमुक्षु बहनों ने भी किया गीत का संगान* *-तत्त्वज्ञान व प्रेक्षाध्यान के विद्यार्थियों को आचार्यश्री ने दी मंगल प्रेरणा* *-जैन विश्व भारती परिसर में अनेक भवनों का हुआ लोकार्पण* *-आठ बातें ज्ञान की पुस्तक भी श्रीचरणों में हुई लोकार्पित* *19.02.2026, गुरुवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* वर्षों की प्रतीक्षा व त्रिदिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान जब पूर्णतया फलित हुआ तो फाल्गुन शुक्ला द्वितीया तदनुसार 19 फरवरी 2026 को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी के जन्मदिवस के दिन जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती परिसर में तेरापंथ धर्मसंघ की प्रभावना को प्रसारित करने वाले योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया। इस शुभारम्भ के अवसर पर जैन विश्व भारती में विभिन्न आध्यात्मिक-धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों के कुशल संचालन के लिए अर्जवम् भवन, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम् का लोकार्पण युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगलपाठ के साथ प्रारम्भ हुआ। इतना ही नहीं योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ के दिन ही मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान आचार्यश्री के प्रवचनों पर आधारित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ भी जैन विश्व भारती द्वारा पूज्यचरणों में लोकार्पित की गई। इस प्रकार संघ प्रभावक योगक्षेम वर्ष का भव्य एवं आध्यात्मिक मंगल शुभारम्भ हो गया। गुरुवार को जैन विश्व भारती परिसर में मानों गुरुवार को एक अलग ही वातावरण छाया हुआ नजर आ रहा था। तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी का जन्मदिवस का अवसर भी था और करीब 37 वर्षों के बाद योगक्षेम वर्ष के शुभारम्भ का भी सुअवसर था तो श्रावकों की भी विशेष उपस्थिति नजर आ रही थी। आचार्यश्री मंगल प्रवचन में पधारने से पूर्व जैन विश्व भारती परिसर में धार्मिक-आध्यात्मिक, सामाजिक व संगठनात्मक कार्यों के उद्देश्य से बने चार नवीन भवन- आर्जवम्, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम में पधारे और मंगलपाठ का उच्चारण करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया तो संबंधित लोगों व उनके परिजनों द्वारा भवनों का लोकार्पण किया गया गया। मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के लिए युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी सुधर्मा सभा में पधारे तो पूरा वातावरण जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। तत्पश्चात महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को योगक्षेम वर्ष के मंगल शुभारम्भ के अवसर पर महामंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि योगक्षेम वर्ष 2026-27 के शुरु हो चुके की घोषणा करता हूं। आगम में योगक्षेम शब्द आया है। योगक्षेम वर्ष का नाम योग और क्षेम दो शब्दों का जुड़ाव है। आगम में यह शब्द प्राप्त होता है तो यह मानना चाहिए कि आगमिक आधार पर योगक्षेम वर्ष का नामकरण किया गया है। भगवान ऋषभ व भगवान महावीर से जुड़ी यह जैन शासन है, जिसमें दिगम्बर व श्वेताम्बर नाम की दो धाराएं बह रही हैं। श्वेताम्बर धारा में एक आम्नाय तेरापंथ है, जिसके प्रवर्तक आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु स्वामी हुए। उनकी परंपरा में उत्तराधिकारियों की परंपरा आगे बढ़ी। उसमें तेरापंथ के अष्टमाचार्य परम पूजनीय आचार्यश्री कालूगणी हुए। उनके समय में धर्मसंघ में विकास भी हुआ। उनके द्वारा दीक्षित दो सुशिष्य मुनि तुलसी व मुनि नथमलजी (टमकोर) हमें आचार्य के रूप में प्राप्त हुए। कालूगणी के अनंतर उत्तराधिकारी पूज्य आचार्यश्री तुलसी व उसके बाद परम स्तवनीय आचार्यश्री महाप्रज्ञजी हुए। ये दोनों ही पूज्यप्रवर युगप्रधान की गरिमा से मंडित हुए थे। ये दो आचार्य ऐसे हुए हैं, जिनको हम में से कइयों ने प्रत्यक्ष देखा भी हुआ है, उन्हें नमन भी किया गया है। आचार्यश्री तुलसी के समय योगक्षेम वर्ष आयोजित हुआ था और लगभग वहीं प्रांगण आज भी हमें प्राप्त है, जहां योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ की पुनरावृत्ति हुई है। महाश्रमणी साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने आचार्यश्री तुलसी के समय भी योगक्षेम वर्ष का निवेदन रखा था और उन्होंने ही मेरे सामने भी इसका निवेदन रखा था। उनके कथन को स्वीकार कर योगक्षेम वर्ष की घोषणा की, वह घोषणा आज प्रारम्भ हो रहा है। जिन्होंने निवेदन किया था वे तो अब सदेह नहीं हैं, परन्तु उस निवेदन के संदर्भ में साध्वीप्रमुखा अब विश्रुतविभाजी को मान लेता हूं। हमारे धर्मसंघ के लिए योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो। इस दौरान यदि हम अहिंसा, संयम की साधना करते हैं और तप तपते हैं तो यह योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो ही जाएगा। तीन दिनों का अनुष्ठान मानों योगक्षेम वर्ष का शिलान्यास था। अब योगक्षेम वर्ष की कालावधि शुरु हो गई है। यह हमारे विकास में सहायक बने। इस दौरान अनेक रूपों में प्रशिक्षण का कार्य चलता रहे। चिंतन, मंथन, निर्णय के लिए भी यह वर्ष महत्त्वपूर्ण है। धर्मसंघ की साधना कैसे पुष्ट हो, इसका प्रयास होना चाहिए। आचार, विचार पक्ष कैसे मजबूत हो। इस प्रकार शिक्षण-प्रशिक्षण व चिंतन-मंथन के द्वारा योगक्षेम वर्ष को अच्छा बनाने का प्रयास किया जा सकता है। इस योगक्षेम वर्ष की कालावधि तक यदि ज्ञानात्मक दृष्टि व जानकारी के दृष्टि से बहिर्विहार में रहने वाले साधु-साध्वियां भी यदि ठिकाणे में सहज रूप में यूट्यूब आदि के माध्यम से टीवी में प्रसारण हो रहा हो तो देख सकते हैं, इसके लिए अनापत्ति है। इस दौरान चलने वाले शिक्षण-प्रशिक्षण के बाद परीक्षा भी होने के बाद ही कोई डिग्री या उपाधि प्रदान की जाए। हमारे अष्टम आचार्यश्री कालूगणी का जन्मदिवस है। आज का दिन अणुव्रत, पारमार्थिक शिक्षण संस्था से जुड़ा हुआ है। यह वर्ष धर्मसंघ को ऊंचाई प्रदान करने वाला सिद्ध हो। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने उपस्थित चारित्रात्माओं को अपनी जिज्ञासाओं को भी प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पहले तत्त्वज्ञान के क्लास के विद्यार्थियों को मंगल प्रेरणा प्रदान की। इसी प्रकार प्रेक्षाध्यान के शिविरार्थियों को भी मंगल पाथेय प्रदान किए। तदुपरान्त आचार्यश्री के ठाणं प्रवचन के आधार पर जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ को जैन विश्व भारती आदि के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की। तदुपरान्त मुमुक्षु बहनों ने गीत का संगान किया। श्री राकेशमणिजी ने संस्कृत भाषा में अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज-छापर ने अपनी गीत को प्रस्तुति दी।

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 सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर key Line Times *-योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने प्रदान की पावन प्रेरणा* *-साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृतिसभा का हुआ आयोजन* *21.02.2026,...
गंता को गंतव्य तक पहुंचाने में मार्गदर्शक का बहुत महत्त्व : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने प्रदान की पावन प्रेरणा* *-साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृतिसभा का हुआ आयोजन* *21.02.2026, शनिवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* करीब 37 वर्षों बाद जैन विश्व भारती, लाडनूं में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया है। शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। शांतदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि पांच शब्द हैं- गंता, गंतव्य, गति, मार्ग व मार्गदर्शक। चलने वाला अथवा गमन करने वाला व्यक्ति गंता होता है। चलने वाला व्यक्ति को जहां पहुंचना है, जो लक्ष्य होता है, वह गंतव्य हो जाता है। गंता और गंतव्य के मिलन किए गंता को गति करनी होती है। गति होती है तो गंता और गंतव्य का मिलन हो सकेगा। प्रश्न हो सकता है कि गंता किधर करे? उत्तर दिया गया कि गंतव्य तक जाने के लिए गंता को निर्धारित मार्ग पर गति करनी होती है, किन्तु कौन-सा मार्ग गंतव्य तक ले जाएगा, इसके लिए मार्गदर्शक की अपेक्षा होती है। ये पांच चीजें मिलती हैं तो कोई गंता गंतव्य तक पहुंच सकता है। अध्यात्म के संदर्भ में साधना करने वाला व्यक्ति गंता होता है। उसका गंतव्य मोक्ष होता है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप के मार्ग होता है और इस गति करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, किन्तु इन पर गति करने के लिए कोई मार्गदर्शक होना चाहिए। मार्ग दिखाने वाले तीर्थंकर, गुरु व साधु मार्गदर्शक बनते हैं। मोक्ष जाने के लिए चार मार्ग बताए गए हैं। इस जीवन में सम्यक्त्व का भी बहुत महत्त्व है। सम्यक् दर्शन के बिना सम्यक् ज्ञान नहीं होता और ज्ञान के बिना सम्यक् चारित्र की प्राप्ति नहीं और चारित्र की प्राप्ति के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं होती। इस संदर्भ में सम्यक्त्व के महत्त्व को जाना जा सकता है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि योगक्षेम वर्ष के दौरान जो प्राप्त नहीं है, उसे प्राप्त करने का अच्छा मौका है। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने एक जिज्ञासा को अवसर प्रदान किया तो एक साध्वीजी ने अपनी जिज्ञासा की तो आचार्यश्री ने उन्हें समाधान प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में 20 फरवरी को लाडनूं में ही स्थित साध्वी सेवा मंदिर में दिवंगत हुई साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृति सभा का आयोजन हुआ, जिसमें आचार्यश्री ने उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। आचार्यश्री के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने चार लोगस्स का ध्यान किया। इस अवसर पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने दिवंगत साध्वीजी के आत्मा के आध्यात्मिक ऊर्ध्वारोहण की मंगलकामना की।

गंता को गंतव्य तक पहुंचाने में मार्गदर्शक का बहुत महत्त्व : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने प्रदान की पावन प्रेरणा* *-साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृतिसभा का हुआ आयोजन* *21.02.2026, शनिवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* करीब 37 वर्षों बाद जैन विश्व भारती, लाडनूं में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया है। शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। शांतदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि पांच शब्द हैं- गंता, गंतव्य, गति, मार्ग व मार्गदर्शक। चलने वाला अथवा गमन करने वाला व्यक्ति गंता होता है। चलने वाला व्यक्ति को जहां पहुंचना है, जो लक्ष्य होता है, वह गंतव्य हो जाता है। गंता और गंतव्य के मिलन किए गंता को गति करनी होती है। गति होती है तो गंता और गंतव्य का मिलन हो सकेगा। प्रश्न हो सकता है कि गंता किधर करे? उत्तर दिया गया कि गंतव्य तक जाने के लिए गंता को निर्धारित मार्ग पर गति करनी होती है, किन्तु कौन-सा मार्ग गंतव्य तक ले जाएगा, इसके लिए मार्गदर्शक की अपेक्षा होती है। ये पांच चीजें मिलती हैं तो कोई गंता गंतव्य तक पहुंच सकता है। अध्यात्म के संदर्भ में साधना करने वाला व्यक्ति गंता होता है। उसका गंतव्य मोक्ष होता है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप के मार्ग होता है और इस गति करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, किन्तु इन पर गति करने के लिए कोई मार्गदर्शक होना चाहिए। मार्ग दिखाने वाले तीर्थंकर, गुरु व साधु मार्गदर्शक बनते हैं। मोक्ष जाने के लिए चार मार्ग बताए गए हैं। इस जीवन में सम्यक्त्व का भी बहुत महत्त्व है। सम्यक् दर्शन के बिना सम्यक् ज्ञान नहीं होता और ज्ञान के बिना सम्यक् चारित्र की प्राप्ति नहीं और चारित्र की प्राप्ति के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं होती। इस संदर्भ में सम्यक्त्व के महत्त्व को जाना जा सकता है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि योगक्षेम वर्ष के दौरान जो प्राप्त नहीं है, उसे प्राप्त करने का अच्छा मौका है। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने एक जिज्ञासा को अवसर प्रदान किया तो एक साध्वीजी ने अपनी जिज्ञासा की तो आचार्यश्री ने उन्हें समाधान प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में 20 फरवरी को लाडनूं में ही स्थित साध्वी सेवा मंदिर में दिवंगत हुई साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृति सभा का आयोजन हुआ, जिसमें आचार्यश्री ने उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। आचार्यश्री के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने चार लोगस्स का ध्यान किया। इस अवसर पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने दिवंगत साध्वीजी के आत्मा के आध्यात्मिक ऊर्ध्वारोहण की मंगलकामना की।

टीपीएफ कोलकाता पूर्वांचल द्वारा वाकाथोन का सफल आयोजन TPF Kolkata Purbanchal ने TPF north Howrah और Kolkata general के साथ मिलकर वाकथन का आयोजन स्थानीय दी decathlon, sector V, Kolkata में 15 फ़रवरी 2026 में किया!कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया गया, इसके पश्चात जुम्बा का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने काफ़ी आनन्द और उत्साह के साथ भागं लिया लगभग 7 बजे वाकथन का प्रारंभ हुआ इसके पश्चात लगभग 7:40 बजे मेडिटेशन का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने बढ़ चढ़कर भागं लिया तत पश्चात अल्पाहार और चाय की अच्छी व्यवस्था थी जिसका सभी ने लुफ्त उठाया इसके पश्चात सभी पदाधिकारियों के स्वागत का कार्यक्रम हुआ! इस दौरान के मुख्य अतिथि RJ Rakesh थे और अंत में लकी ड्रॉ हुआ जिसमें से तीन विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया!इस कार्यक्रम में पूर्वांचल सभा के मुख्य ट्रस्टी बाबूलाल जी गंग, टीपीएफ के ट्रस्टी सुशील जी चोपड़ा, टीपीए पूर्वांचल के अध्यक्ष राकेश सिंघी और उनकी टीम, टीपीएफ हावड़ा नार्थ के अध्यक्ष रितेश डुगर और उनकी टीम, कोलकाता जनरल के अध्यक्ष प्रतीक डुगर और उनकी टीम काफ़ी सक्रिय रही ! सभी संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों की अच्छी उपस्थिति रही! BSF के जवानों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया! कार्यक्रम में सभी का उत्साह और जोश देखते ही बन रहा था इस कार्यक्रम में पुर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश जी मालू तथा ईस्ट ज़ोन १ के अध्यक्ष प्रवीण सिरोहिया भी उपस्थित थे! इस walkathon में लगभाग ४५० लोगों नें हिस्सा लिया ! ओम अर्हम 🙏

टीपीएफ कोलकाता पूर्वांचल द्वारा वाकाथोन का सफल आयोजन TPF Kolkata Purbanchal ने TPF north Howrah और Kolkata general के साथ मिलकर वाकथन का आयोजन स्थानीय दी decathlon, sector V, Kolkata में 15 फ़रवरी 2026 में किया!कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया गया, इसके पश्चात जुम्बा का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने काफ़ी आनन्द और उत्साह के साथ भागं लिया लगभग 7 बजे वाकथन का प्रारंभ हुआ इसके पश्चात लगभग 7:40 बजे मेडिटेशन का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने बढ़ चढ़कर भागं लिया तत पश्चात अल्पाहार और चाय की अच्छी व्यवस्था थी जिसका सभी ने लुफ्त उठाया इसके पश्चात सभी पदाधिकारियों के स्वागत का कार्यक्रम हुआ! इस दौरान के मुख्य अतिथि RJ Rakesh थे और अंत में लकी ड्रॉ हुआ जिसमें से तीन विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया!इस कार्यक्रम में पूर्वांचल सभा के मुख्य ट्रस्टी बाबूलाल जी गंग, टीपीएफ के ट्रस्टी सुशील जी चोपड़ा, टीपीए पूर्वांचल के अध्यक्ष राकेश सिंघी और उनकी टीम, टीपीएफ हावड़ा नार्थ के अध्यक्ष रितेश डुगर और उनकी टीम, कोलकाता जनरल के अध्यक्ष प्रतीक डुगर और उनकी टीम काफ़ी सक्रिय रही ! सभी संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों की अच्छी उपस्थिति रही! BSF के जवानों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया! कार्यक्रम में सभी का उत्साह और जोश देखते ही बन रहा था इस कार्यक्रम में पुर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश जी मालू तथा ईस्ट ज़ोन १ के अध्यक्ष प्रवीण सिरोहिया भी उपस्थित थे! इस walkathon में लगभाग ४५० लोगों नें हिस्सा लिया ! ओम अर्हम 🙏

🌸 *मंगलमय हो योगक्षेम वर्ष : महातपस्वी महाश्रमण* 🌸 *-भव्य एवं आध्यात्मिक रूप में प्रारम्भ हुआ योगक्षेम वर्ष* *-शिक्षण, प्रशिक्षण, चिंतन, मंथन व निर्णय के लिए योगक्षेम वर्ष को आचार्यश्री ने बताया उपयुक्त* *-साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत को दी प्रस्तुति, मुमुक्षु बहनों ने भी किया गीत का संगान* *-तत्त्वज्ञान व प्रेक्षाध्यान के विद्यार्थियों को आचार्यश्री ने दी मंगल प्रेरणा* *-जैन विश्व भारती परिसर में अनेक भवनों का हुआ लोकार्पण* *-आठ बातें ज्ञान की पुस्तक भी श्रीचरणों में हुई लोकार्पित* *19.02.2026, गुरुवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* वर्षों की प्रतीक्षा व त्रिदिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान जब पूर्णतया फलित हुआ तो फाल्गुन शुक्ला द्वितीया तदनुसार 19 फरवरी 2026 को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी के जन्मदिवस के दिन जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती परिसर में तेरापंथ धर्मसंघ की प्रभावना को प्रसारित करने वाले योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया। इस शुभारम्भ के अवसर पर जैन विश्व भारती में विभिन्न आध्यात्मिक-धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों के कुशल संचालन के लिए अर्जवम् भवन, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम् का लोकार्पण युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगलपाठ के साथ प्रारम्भ हुआ। इतना ही नहीं योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ के दिन ही मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान आचार्यश्री के प्रवचनों पर आधारित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ भी जैन विश्व भारती द्वारा पूज्यचरणों में लोकार्पित की गई। इस प्रकार संघ प्रभावक योगक्षेम वर्ष का भव्य एवं आध्यात्मिक मंगल शुभारम्भ हो गया। गुरुवार को जैन विश्व भारती परिसर में मानों गुरुवार को एक अलग ही वातावरण छाया हुआ नजर आ रहा था। तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी का जन्मदिवस का अवसर भी था और करीब 37 वर्षों के बाद योगक्षेम वर्ष के शुभारम्भ का भी सुअवसर था तो श्रावकों की भी विशेष उपस्थिति नजर आ रही थी। आचार्यश्री मंगल प्रवचन में पधारने से पूर्व जैन विश्व भारती परिसर में धार्मिक-आध्यात्मिक, सामाजिक व संगठनात्मक कार्यों के उद्देश्य से बने चार नवीन भवन- आर्जवम्, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम में पधारे और मंगलपाठ का उच्चारण करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया तो संबंधित लोगों व उनके परिजनों द्वारा भवनों का लोकार्पण किया गया गया। मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के लिए युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी सुधर्मा सभा में पधारे तो पूरा वातावरण जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। तत्पश्चात महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को योगक्षेम वर्ष के मंगल शुभारम्भ के अवसर पर महामंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि योगक्षेम वर्ष 2026-27 के शुरु हो चुके की घोषणा करता हूं। आगम में योगक्षेम शब्द आया है। योगक्षेम वर्ष का नाम योग और क्षेम दो शब्दों का जुड़ाव है। आगम में यह शब्द प्राप्त होता है तो यह मानना चाहिए कि आगमिक आधार पर योगक्षेम वर्ष का नामकरण किया गया है। भगवान ऋषभ व भगवान महावीर से जुड़ी यह जैन शासन है, जिसमें दिगम्बर व श्वेताम्बर नाम की दो धाराएं बह रही हैं। श्वेताम्बर धारा में एक आम्नाय तेरापंथ है, जिसके प्रवर्तक आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु स्वामी हुए। उनकी परंपरा में उत्तराधिकारियों की परंपरा आगे बढ़ी। उसमें तेरापंथ के अष्टमाचार्य परम पूजनीय आचार्यश्री कालूगणी हुए। उनके समय में धर्मसंघ में विकास भी हुआ। उनके द्वारा दीक्षित दो सुशिष्य मुनि तुलसी व मुनि नथमलजी (टमकोर) हमें आचार्य के रूप में प्राप्त हुए। कालूगणी के अनंतर उत्तराधिकारी पूज्य आचार्यश्री तुलसी व उसके बाद परम स्तवनीय आचार्यश्री महाप्रज्ञजी हुए। ये दोनों ही पूज्यप्रवर युगप्रधान की गरिमा से मंडित हुए थे। ये दो आचार्य ऐसे हुए हैं, जिनको हम में से कइयों ने प्रत्यक्ष देखा भी हुआ है, उन्हें नमन भी किया गया है। आचार्यश्री तुलसी के समय योगक्षेम वर्ष आयोजित हुआ था और लगभग वहीं प्रांगण आज भी हमें प्राप्त है, जहां योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ की पुनरावृत्ति हुई है। महाश्रमणी साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने आचार्यश्री तुलसी के समय भी योगक्षेम वर्ष का निवेदन रखा था और उन्होंने ही मेरे सामने भी इसका निवेदन रखा था। उनके कथन को स्वीकार कर योगक्षेम वर्ष की घोषणा की, वह घोषणा आज प्रारम्भ हो रहा है। जिन्होंने निवेदन किया था वे तो अब सदेह नहीं हैं, परन्तु उस निवेदन के संदर्भ में साध्वीप्रमुखा अब विश्रुतविभाजी को मान लेता हूं। हमारे धर्मसंघ के लिए योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो। इस दौरान यदि हम अहिंसा, संयम की साधना करते हैं और तप तपते हैं तो यह योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो ही जाएगा। तीन दिनों का अनुष्ठान मानों योगक्षेम वर्ष का शिलान्यास था। अब योगक्षेम वर्ष की कालावधि शुरु हो गई है। यह हमारे विकास में सहायक बने। इस दौरान अनेक रूपों में प्रशिक्षण का कार्य चलता रहे। चिंतन, मंथन, निर्णय के लिए भी यह वर्ष महत्त्वपूर्ण है। धर्मसंघ की साधना कैसे पुष्ट हो, इसका प्रयास होना चाहिए। आचार, विचार पक्ष कैसे मजबूत हो। इस प्रकार शिक्षण-प्रशिक्षण व चिंतन-मंथन के द्वारा योगक्षेम वर्ष को अच्छा बनाने का प्रयास किया जा सकता है। इस योगक्षेम वर्ष की कालावधि तक यदि ज्ञानात्मक दृष्टि व जानकारी के दृष्टि से बहिर्विहार में रहने वाले साधु-साध्वियां भी यदि ठिकाणे में सहज रूप में यूट्यूब आदि के माध्यम से टीवी में प्रसारण हो रहा हो तो देख सकते हैं, इसके लिए अनापत्ति है। इस दौरान चलने वाले शिक्षण-प्रशिक्षण के बाद परीक्षा भी होने के बाद ही कोई डिग्री या उपाधि प्रदान की जाए। हमारे अष्टम आचार्यश्री कालूगणी का जन्मदिवस है। आज का दिन अणुव्रत, पारमार्थिक शिक्षण संस्था से जुड़ा हुआ है। यह वर्ष धर्मसंघ को ऊंचाई प्रदान करने वाला सिद्ध हो। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने उपस्थित चारित्रात्माओं को अपनी जिज्ञासाओं को भी प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पहले तत्त्वज्ञान के क्लास के विद्यार्थियों को मंगल प्रेरणा प्रदान की। इसी प्रकार प्रेक्षाध्यान के शिविरार्थियों को भी मंगल पाथेय प्रदान किए। तदुपरान्त आचार्यश्री के ठाणं प्रवचन के आधार पर जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ को जैन विश्व भारती आदि के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की। तदुपरान्त मुमुक्षु बहनों ने गीत का संगान किया। श्री राकेशमणिजी ने संस्कृत भाषा में अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज-छापर ने अपनी गीत को प्रस्तुति दी।

🌸 *मंगलमय हो योगक्षेम वर्ष : महातपस्वी महाश्रमण* 🌸 *-भव्य एवं आध्यात्मिक रूप में प्रारम्भ हुआ योगक्षेम वर्ष* *-शिक्षण, प्रशिक्षण, चिंतन, मंथन व निर्णय के लिए योगक्षेम वर्ष को आचार्यश्री ने बताया उपयुक्त* *-साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत को दी प्रस्तुति, मुमुक्षु बहनों ने भी किया गीत का संगान* *-तत्त्वज्ञान व प्रेक्षाध्यान के विद्यार्थियों को आचार्यश्री ने दी मंगल प्रेरणा* *-जैन विश्व भारती परिसर में अनेक भवनों का हुआ लोकार्पण* *-आठ बातें ज्ञान की पुस्तक भी श्रीचरणों में हुई लोकार्पित* *19.02.2026, गुरुवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* वर्षों की प्रतीक्षा व त्रिदिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान जब पूर्णतया फलित हुआ तो फाल्गुन शुक्ला द्वितीया तदनुसार 19 फरवरी 2026 को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी के जन्मदिवस के दिन जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती परिसर में तेरापंथ धर्मसंघ की प्रभावना को प्रसारित करने वाले योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया। इस शुभारम्भ के अवसर पर जैन विश्व भारती में विभिन्न आध्यात्मिक-धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों के कुशल संचालन के लिए अर्जवम् भवन, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम् का लोकार्पण युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगलपाठ के साथ प्रारम्भ हुआ। इतना ही नहीं योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ के दिन ही मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान आचार्यश्री के प्रवचनों पर आधारित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ भी जैन विश्व भारती द्वारा पूज्यचरणों में लोकार्पित की गई। इस प्रकार संघ प्रभावक योगक्षेम वर्ष का भव्य एवं आध्यात्मिक मंगल शुभारम्भ हो गया। गुरुवार को जैन विश्व भारती परिसर में मानों गुरुवार को एक अलग ही वातावरण छाया हुआ नजर आ रहा था। तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी का जन्मदिवस का अवसर भी था और करीब 37 वर्षों के बाद योगक्षेम वर्ष के शुभारम्भ का भी सुअवसर था तो श्रावकों की भी विशेष उपस्थिति नजर आ रही थी। आचार्यश्री मंगल प्रवचन में पधारने से पूर्व जैन विश्व भारती परिसर में धार्मिक-आध्यात्मिक, सामाजिक व संगठनात्मक कार्यों के उद्देश्य से बने चार नवीन भवन- आर्जवम्, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम में पधारे और मंगलपाठ का उच्चारण करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया तो संबंधित लोगों व उनके परिजनों द्वारा भवनों का लोकार्पण किया गया गया। मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के लिए युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी सुधर्मा सभा में पधारे तो पूरा वातावरण जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। तत्पश्चात महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को योगक्षेम वर्ष के मंगल शुभारम्भ के अवसर पर महामंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि योगक्षेम वर्ष 2026-27 के शुरु हो चुके की घोषणा करता हूं। आगम में योगक्षेम शब्द आया है। योगक्षेम वर्ष का नाम योग और क्षेम दो शब्दों का जुड़ाव है। आगम में यह शब्द प्राप्त होता है तो यह मानना चाहिए कि आगमिक आधार पर योगक्षेम वर्ष का नामकरण किया गया है। भगवान ऋषभ व भगवान महावीर से जुड़ी यह जैन शासन है, जिसमें दिगम्बर व श्वेताम्बर नाम की दो धाराएं बह रही हैं। श्वेताम्बर धारा में एक आम्नाय तेरापंथ है, जिसके प्रवर्तक आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु स्वामी हुए। उनकी परंपरा में उत्तराधिकारियों की परंपरा आगे बढ़ी। उसमें तेरापंथ के अष्टमाचार्य परम पूजनीय आचार्यश्री कालूगणी हुए। उनके समय में धर्मसंघ में विकास भी हुआ। उनके द्वारा दीक्षित दो सुशिष्य मुनि तुलसी व मुनि नथमलजी (टमकोर) हमें आचार्य के रूप में प्राप्त हुए। कालूगणी के अनंतर उत्तराधिकारी पूज्य आचार्यश्री तुलसी व उसके बाद परम स्तवनीय आचार्यश्री महाप्रज्ञजी हुए। ये दोनों ही पूज्यप्रवर युगप्रधान की गरिमा से मंडित हुए थे। ये दो आचार्य ऐसे हुए हैं, जिनको हम में से कइयों ने प्रत्यक्ष देखा भी हुआ है, उन्हें नमन भी किया गया है। आचार्यश्री तुलसी के समय योगक्षेम वर्ष आयोजित हुआ था और लगभग वहीं प्रांगण आज भी हमें प्राप्त है, जहां योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ की पुनरावृत्ति हुई है। महाश्रमणी साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने आचार्यश्री तुलसी के समय भी योगक्षेम वर्ष का निवेदन रखा था और उन्होंने ही मेरे सामने भी इसका निवेदन रखा था। उनके कथन को स्वीकार कर योगक्षेम वर्ष की घोषणा की, वह घोषणा आज प्रारम्भ हो रहा है। जिन्होंने निवेदन किया था वे तो अब सदेह नहीं हैं, परन्तु उस निवेदन के संदर्भ में साध्वीप्रमुखा अब विश्रुतविभाजी को मान लेता हूं। हमारे धर्मसंघ के लिए योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो। इस दौरान यदि हम अहिंसा, संयम की साधना करते हैं और तप तपते हैं तो यह योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो ही जाएगा। तीन दिनों का अनुष्ठान मानों योगक्षेम वर्ष का शिलान्यास था। अब योगक्षेम वर्ष की कालावधि शुरु हो गई है। यह हमारे विकास में सहायक बने। इस दौरान अनेक रूपों में प्रशिक्षण का कार्य चलता रहे। चिंतन, मंथन, निर्णय के लिए भी यह वर्ष महत्त्वपूर्ण है। धर्मसंघ की साधना कैसे पुष्ट हो, इसका प्रयास होना चाहिए। आचार, विचार पक्ष कैसे मजबूत हो। इस प्रकार शिक्षण-प्रशिक्षण व चिंतन-मंथन के द्वारा योगक्षेम वर्ष को अच्छा बनाने का प्रयास किया जा सकता है। इस योगक्षेम वर्ष की कालावधि तक यदि ज्ञानात्मक दृष्टि व जानकारी के दृष्टि से बहिर्विहार में रहने वाले साधु-साध्वियां भी यदि ठिकाणे में सहज रूप में यूट्यूब आदि के माध्यम से टीवी में प्रसारण हो रहा हो तो देख सकते हैं, इसके लिए अनापत्ति है। इस दौरान चलने वाले शिक्षण-प्रशिक्षण के बाद परीक्षा भी होने के बाद ही कोई डिग्री या उपाधि प्रदान की जाए। हमारे अष्टम आचार्यश्री कालूगणी का जन्मदिवस है। आज का दिन अणुव्रत, पारमार्थिक शिक्षण संस्था से जुड़ा हुआ है। यह वर्ष धर्मसंघ को ऊंचाई प्रदान करने वाला सिद्ध हो। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने उपस्थित चारित्रात्माओं को अपनी जिज्ञासाओं को भी प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पहले तत्त्वज्ञान के क्लास के विद्यार्थियों को मंगल प्रेरणा प्रदान की। इसी प्रकार प्रेक्षाध्यान के शिविरार्थियों को भी मंगल पाथेय प्रदान किए। तदुपरान्त आचार्यश्री के ठाणं प्रवचन के आधार पर जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ को जैन विश्व भारती आदि के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की। तदुपरान्त मुमुक्षु बहनों ने गीत का संगान किया। श्री राकेशमणिजी ने संस्कृत भाषा में अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज-छापर ने अपनी गीत को प्रस्तुति दी।

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गंता को गंतव्य तक पहुंचाने में मार्गदर्शक का बहुत महत्त्व : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने प्रदान की पावन प्रेरणा* *-साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृतिसभा का हुआ आयोजन* *21.02.2026, शनिवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* करीब 37 वर्षों बाद जैन विश्व भारती, लाडनूं में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया है। शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। शांतदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि पांच शब्द हैं- गंता, गंतव्य, गति, मार्ग व मार्गदर्शक। चलने वाला अथवा गमन करने वाला व्यक्ति गंता होता है। चलने वाला व्यक्ति को जहां पहुंचना है, जो लक्ष्य होता है, वह गंतव्य हो जाता है। गंता और गंतव्य के मिलन किए गंता को गति करनी होती है। गति होती है तो गंता और गंतव्य का मिलन हो सकेगा। प्रश्न हो सकता है कि गंता किधर करे? उत्तर दिया गया कि गंतव्य तक जाने के लिए गंता को निर्धारित मार्ग पर गति करनी होती है, किन्तु कौन-सा मार्ग गंतव्य तक ले जाएगा, इसके लिए मार्गदर्शक की अपेक्षा होती है। ये पांच चीजें मिलती हैं तो कोई गंता गंतव्य तक पहुंच सकता है। अध्यात्म के संदर्भ में साधना करने वाला व्यक्ति गंता होता है। उसका गंतव्य मोक्ष होता है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप के मार्ग होता है और इस गति करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, किन्तु इन पर गति करने के लिए कोई मार्गदर्शक होना चाहिए। मार्ग दिखाने वाले तीर्थंकर, गुरु व साधु मार्गदर्शक बनते हैं। मोक्ष जाने के लिए चार मार्ग बताए गए हैं। इस जीवन में सम्यक्त्व का भी बहुत महत्त्व है। सम्यक् दर्शन के बिना सम्यक् ज्ञान नहीं होता और ज्ञान के बिना सम्यक् चारित्र की प्राप्ति नहीं और चारित्र की प्राप्ति के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं होती। इस संदर्भ में सम्यक्त्व के महत्त्व को जाना जा सकता है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि योगक्षेम वर्ष के दौरान जो प्राप्त नहीं है, उसे प्राप्त करने का अच्छा मौका है। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने एक जिज्ञासा को अवसर प्रदान किया तो एक साध्वीजी ने अपनी जिज्ञासा की तो आचार्यश्री ने उन्हें समाधान प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में 20 फरवरी को लाडनूं में ही स्थित साध्वी सेवा मंदिर में दिवंगत हुई साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृति सभा का आयोजन हुआ, जिसमें आचार्यश्री ने उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। आचार्यश्री के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने चार लोगस्स का ध्यान किया। इस अवसर पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने दिवंगत साध्वीजी के आत्मा के आध्यात्मिक ऊर्ध्वारोहण की मंगलकामना की।

गंता को गंतव्य तक पहुंचाने में मार्गदर्शक का बहुत महत्त्व : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने प्रदान की पावन प्रेरणा* *-साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृतिसभा का हुआ आयोजन* *21.02.2026, शनिवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* करीब 37 वर्षों बाद जैन विश्व भारती, लाडनूं में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया है। शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। शांतदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि पांच शब्द हैं- गंता, गंतव्य, गति, मार्ग व मार्गदर्शक। चलने वाला अथवा गमन करने वाला व्यक्ति गंता होता है। चलने वाला व्यक्ति को जहां पहुंचना है, जो लक्ष्य होता है, वह गंतव्य हो जाता है। गंता और गंतव्य के मिलन किए गंता को गति करनी होती है। गति होती है तो गंता और गंतव्य का मिलन हो सकेगा। प्रश्न हो सकता है कि गंता किधर करे? उत्तर दिया गया कि गंतव्य तक जाने के लिए गंता को निर्धारित मार्ग पर गति करनी होती है, किन्तु कौन-सा मार्ग गंतव्य तक ले जाएगा, इसके लिए मार्गदर्शक की अपेक्षा होती है। ये पांच चीजें मिलती हैं तो कोई गंता गंतव्य तक पहुंच सकता है। अध्यात्म के संदर्भ में साधना करने वाला व्यक्ति गंता होता है। उसका गंतव्य मोक्ष होता है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप के मार्ग होता है और इस गति करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, किन्तु इन पर गति करने के लिए कोई मार्गदर्शक होना चाहिए। मार्ग दिखाने वाले तीर्थंकर, गुरु व साधु मार्गदर्शक बनते हैं। मोक्ष जाने के लिए चार मार्ग बताए गए हैं। इस जीवन में सम्यक्त्व का भी बहुत महत्त्व है। सम्यक् दर्शन के बिना सम्यक् ज्ञान नहीं होता और ज्ञान के बिना सम्यक् चारित्र की प्राप्ति नहीं और चारित्र की प्राप्ति के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं होती। इस संदर्भ में सम्यक्त्व के महत्त्व को जाना जा सकता है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि योगक्षेम वर्ष के दौरान जो प्राप्त नहीं है, उसे प्राप्त करने का अच्छा मौका है। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने एक जिज्ञासा को अवसर प्रदान किया तो एक साध्वीजी ने अपनी जिज्ञासा की तो आचार्यश्री ने उन्हें समाधान प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में 20 फरवरी को लाडनूं में ही स्थित साध्वी सेवा मंदिर में दिवंगत हुई साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृति सभा का आयोजन हुआ, जिसमें आचार्यश्री ने उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। आचार्यश्री के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने चार लोगस्स का ध्यान किया। इस अवसर पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने दिवंगत साध्वीजी के आत्मा के आध्यात्मिक ऊर्ध्वारोहण की मंगलकामना की।

टीपीएफ कोलकाता पूर्वांचल द्वारा वाकाथोन का सफल आयोजन TPF Kolkata Purbanchal ने TPF north Howrah और Kolkata general के साथ मिलकर वाकथन का आयोजन स्थानीय दी decathlon, sector V, Kolkata में 15 फ़रवरी 2026 में किया!कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया गया, इसके पश्चात जुम्बा का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने काफ़ी आनन्द और उत्साह के साथ भागं लिया लगभग 7 बजे वाकथन का प्रारंभ हुआ इसके पश्चात लगभग 7:40 बजे मेडिटेशन का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने बढ़ चढ़कर भागं लिया तत पश्चात अल्पाहार और चाय की अच्छी व्यवस्था थी जिसका सभी ने लुफ्त उठाया इसके पश्चात सभी पदाधिकारियों के स्वागत का कार्यक्रम हुआ! इस दौरान के मुख्य अतिथि RJ Rakesh थे और अंत में लकी ड्रॉ हुआ जिसमें से तीन विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया!इस कार्यक्रम में पूर्वांचल सभा के मुख्य ट्रस्टी बाबूलाल जी गंग, टीपीएफ के ट्रस्टी सुशील जी चोपड़ा, टीपीए पूर्वांचल के अध्यक्ष राकेश सिंघी और उनकी टीम, टीपीएफ हावड़ा नार्थ के अध्यक्ष रितेश डुगर और उनकी टीम, कोलकाता जनरल के अध्यक्ष प्रतीक डुगर और उनकी टीम काफ़ी सक्रिय रही ! सभी संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों की अच्छी उपस्थिति रही! BSF के जवानों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया! कार्यक्रम में सभी का उत्साह और जोश देखते ही बन रहा था इस कार्यक्रम में पुर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश जी मालू तथा ईस्ट ज़ोन १ के अध्यक्ष प्रवीण सिरोहिया भी उपस्थित थे! इस walkathon में लगभाग ४५० लोगों नें हिस्सा लिया ! ओम अर्हम 🙏

टीपीएफ कोलकाता पूर्वांचल द्वारा वाकाथोन का सफल आयोजन TPF Kolkata Purbanchal ने TPF north Howrah और Kolkata general के साथ मिलकर वाकथन का आयोजन स्थानीय दी decathlon, sector V, Kolkata में 15 फ़रवरी 2026 में किया!कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया गया, इसके पश्चात जुम्बा का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने काफ़ी आनन्द और उत्साह के साथ भागं लिया लगभग 7 बजे वाकथन का प्रारंभ हुआ इसके पश्चात लगभग 7:40 बजे मेडिटेशन का कार्यक्रम हुआ जिसमें सभी ने बढ़ चढ़कर भागं लिया तत पश्चात अल्पाहार और चाय की अच्छी व्यवस्था थी जिसका सभी ने लुफ्त उठाया इसके पश्चात सभी पदाधिकारियों के स्वागत का कार्यक्रम हुआ! इस दौरान के मुख्य अतिथि RJ Rakesh थे और अंत में लकी ड्रॉ हुआ जिसमें से तीन विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया!इस कार्यक्रम में पूर्वांचल सभा के मुख्य ट्रस्टी बाबूलाल जी गंग, टीपीएफ के ट्रस्टी सुशील जी चोपड़ा, टीपीए पूर्वांचल के अध्यक्ष राकेश सिंघी और उनकी टीम, टीपीएफ हावड़ा नार्थ के अध्यक्ष रितेश डुगर और उनकी टीम, कोलकाता जनरल के अध्यक्ष प्रतीक डुगर और उनकी टीम काफ़ी सक्रिय रही ! सभी संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों की अच्छी उपस्थिति रही! BSF के जवानों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया! कार्यक्रम में सभी का उत्साह और जोश देखते ही बन रहा था इस कार्यक्रम में पुर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश जी मालू तथा ईस्ट ज़ोन १ के अध्यक्ष प्रवीण सिरोहिया भी उपस्थित थे! इस walkathon में लगभाग ४५० लोगों नें हिस्सा लिया ! ओम अर्हम 🙏

🌸 *मंगलमय हो योगक्षेम वर्ष : महातपस्वी महाश्रमण* 🌸 *-भव्य एवं आध्यात्मिक रूप में प्रारम्भ हुआ योगक्षेम वर्ष* *-शिक्षण, प्रशिक्षण, चिंतन, मंथन व निर्णय के लिए योगक्षेम वर्ष को आचार्यश्री ने बताया उपयुक्त* *-साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत को दी प्रस्तुति, मुमुक्षु बहनों ने भी किया गीत का संगान* *-तत्त्वज्ञान व प्रेक्षाध्यान के विद्यार्थियों को आचार्यश्री ने दी मंगल प्रेरणा* *-जैन विश्व भारती परिसर में अनेक भवनों का हुआ लोकार्पण* *-आठ बातें ज्ञान की पुस्तक भी श्रीचरणों में हुई लोकार्पित* *19.02.2026, गुरुवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* वर्षों की प्रतीक्षा व त्रिदिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान जब पूर्णतया फलित हुआ तो फाल्गुन शुक्ला द्वितीया तदनुसार 19 फरवरी 2026 को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी के जन्मदिवस के दिन जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती परिसर में तेरापंथ धर्मसंघ की प्रभावना को प्रसारित करने वाले योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया। इस शुभारम्भ के अवसर पर जैन विश्व भारती में विभिन्न आध्यात्मिक-धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों के कुशल संचालन के लिए अर्जवम् भवन, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम् का लोकार्पण युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगलपाठ के साथ प्रारम्भ हुआ। इतना ही नहीं योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ के दिन ही मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान आचार्यश्री के प्रवचनों पर आधारित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ भी जैन विश्व भारती द्वारा पूज्यचरणों में लोकार्पित की गई। इस प्रकार संघ प्रभावक योगक्षेम वर्ष का भव्य एवं आध्यात्मिक मंगल शुभारम्भ हो गया। गुरुवार को जैन विश्व भारती परिसर में मानों गुरुवार को एक अलग ही वातावरण छाया हुआ नजर आ रहा था। तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी का जन्मदिवस का अवसर भी था और करीब 37 वर्षों के बाद योगक्षेम वर्ष के शुभारम्भ का भी सुअवसर था तो श्रावकों की भी विशेष उपस्थिति नजर आ रही थी। आचार्यश्री मंगल प्रवचन में पधारने से पूर्व जैन विश्व भारती परिसर में धार्मिक-आध्यात्मिक, सामाजिक व संगठनात्मक कार्यों के उद्देश्य से बने चार नवीन भवन- आर्जवम्, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम में पधारे और मंगलपाठ का उच्चारण करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया तो संबंधित लोगों व उनके परिजनों द्वारा भवनों का लोकार्पण किया गया गया। मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के लिए युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी सुधर्मा सभा में पधारे तो पूरा वातावरण जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। तत्पश्चात महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को योगक्षेम वर्ष के मंगल शुभारम्भ के अवसर पर महामंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि योगक्षेम वर्ष 2026-27 के शुरु हो चुके की घोषणा करता हूं। आगम में योगक्षेम शब्द आया है। योगक्षेम वर्ष का नाम योग और क्षेम दो शब्दों का जुड़ाव है। आगम में यह शब्द प्राप्त होता है तो यह मानना चाहिए कि आगमिक आधार पर योगक्षेम वर्ष का नामकरण किया गया है। भगवान ऋषभ व भगवान महावीर से जुड़ी यह जैन शासन है, जिसमें दिगम्बर व श्वेताम्बर नाम की दो धाराएं बह रही हैं। श्वेताम्बर धारा में एक आम्नाय तेरापंथ है, जिसके प्रवर्तक आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु स्वामी हुए। उनकी परंपरा में उत्तराधिकारियों की परंपरा आगे बढ़ी। उसमें तेरापंथ के अष्टमाचार्य परम पूजनीय आचार्यश्री कालूगणी हुए। उनके समय में धर्मसंघ में विकास भी हुआ। उनके द्वारा दीक्षित दो सुशिष्य मुनि तुलसी व मुनि नथमलजी (टमकोर) हमें आचार्य के रूप में प्राप्त हुए। कालूगणी के अनंतर उत्तराधिकारी पूज्य आचार्यश्री तुलसी व उसके बाद परम स्तवनीय आचार्यश्री महाप्रज्ञजी हुए। ये दोनों ही पूज्यप्रवर युगप्रधान की गरिमा से मंडित हुए थे। ये दो आचार्य ऐसे हुए हैं, जिनको हम में से कइयों ने प्रत्यक्ष देखा भी हुआ है, उन्हें नमन भी किया गया है। आचार्यश्री तुलसी के समय योगक्षेम वर्ष आयोजित हुआ था और लगभग वहीं प्रांगण आज भी हमें प्राप्त है, जहां योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ की पुनरावृत्ति हुई है। महाश्रमणी साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने आचार्यश्री तुलसी के समय भी योगक्षेम वर्ष का निवेदन रखा था और उन्होंने ही मेरे सामने भी इसका निवेदन रखा था। उनके कथन को स्वीकार कर योगक्षेम वर्ष की घोषणा की, वह घोषणा आज प्रारम्भ हो रहा है। जिन्होंने निवेदन किया था वे तो अब सदेह नहीं हैं, परन्तु उस निवेदन के संदर्भ में साध्वीप्रमुखा अब विश्रुतविभाजी को मान लेता हूं। हमारे धर्मसंघ के लिए योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो। इस दौरान यदि हम अहिंसा, संयम की साधना करते हैं और तप तपते हैं तो यह योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो ही जाएगा। तीन दिनों का अनुष्ठान मानों योगक्षेम वर्ष का शिलान्यास था। अब योगक्षेम वर्ष की कालावधि शुरु हो गई है। यह हमारे विकास में सहायक बने। इस दौरान अनेक रूपों में प्रशिक्षण का कार्य चलता रहे। चिंतन, मंथन, निर्णय के लिए भी यह वर्ष महत्त्वपूर्ण है। धर्मसंघ की साधना कैसे पुष्ट हो, इसका प्रयास होना चाहिए। आचार, विचार पक्ष कैसे मजबूत हो। इस प्रकार शिक्षण-प्रशिक्षण व चिंतन-मंथन के द्वारा योगक्षेम वर्ष को अच्छा बनाने का प्रयास किया जा सकता है। इस योगक्षेम वर्ष की कालावधि तक यदि ज्ञानात्मक दृष्टि व जानकारी के दृष्टि से बहिर्विहार में रहने वाले साधु-साध्वियां भी यदि ठिकाणे में सहज रूप में यूट्यूब आदि के माध्यम से टीवी में प्रसारण हो रहा हो तो देख सकते हैं, इसके लिए अनापत्ति है। इस दौरान चलने वाले शिक्षण-प्रशिक्षण के बाद परीक्षा भी होने के बाद ही कोई डिग्री या उपाधि प्रदान की जाए। हमारे अष्टम आचार्यश्री कालूगणी का जन्मदिवस है। आज का दिन अणुव्रत, पारमार्थिक शिक्षण संस्था से जुड़ा हुआ है। यह वर्ष धर्मसंघ को ऊंचाई प्रदान करने वाला सिद्ध हो। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने उपस्थित चारित्रात्माओं को अपनी जिज्ञासाओं को भी प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पहले तत्त्वज्ञान के क्लास के विद्यार्थियों को मंगल प्रेरणा प्रदान की। इसी प्रकार प्रेक्षाध्यान के शिविरार्थियों को भी मंगल पाथेय प्रदान किए। तदुपरान्त आचार्यश्री के ठाणं प्रवचन के आधार पर जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ को जैन विश्व भारती आदि के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की। तदुपरान्त मुमुक्षु बहनों ने गीत का संगान किया। श्री राकेशमणिजी ने संस्कृत भाषा में अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज-छापर ने अपनी गीत को प्रस्तुति दी।

🌸 *मंगलमय हो योगक्षेम वर्ष : महातपस्वी महाश्रमण* 🌸 *-भव्य एवं आध्यात्मिक रूप में प्रारम्भ हुआ योगक्षेम वर्ष* *-शिक्षण, प्रशिक्षण, चिंतन, मंथन व निर्णय के लिए योगक्षेम वर्ष को आचार्यश्री ने बताया उपयुक्त* *-साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत को दी प्रस्तुति, मुमुक्षु बहनों ने भी किया गीत का संगान* *-तत्त्वज्ञान व प्रेक्षाध्यान के विद्यार्थियों को आचार्यश्री ने दी मंगल प्रेरणा* *-जैन विश्व भारती परिसर में अनेक भवनों का हुआ लोकार्पण* *-आठ बातें ज्ञान की पुस्तक भी श्रीचरणों में हुई लोकार्पित* *19.02.2026, गुरुवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* वर्षों की प्रतीक्षा व त्रिदिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान जब पूर्णतया फलित हुआ तो फाल्गुन शुक्ला द्वितीया तदनुसार 19 फरवरी 2026 को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी के जन्मदिवस के दिन जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती परिसर में तेरापंथ धर्मसंघ की प्रभावना को प्रसारित करने वाले योगक्षेम वर्ष का मंगल शुभारम्भ हो गया। इस शुभारम्भ के अवसर पर जैन विश्व भारती में विभिन्न आध्यात्मिक-धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों के कुशल संचालन के लिए अर्जवम् भवन, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम् का लोकार्पण युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगलपाठ के साथ प्रारम्भ हुआ। इतना ही नहीं योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ के दिन ही मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान आचार्यश्री के प्रवचनों पर आधारित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ भी जैन विश्व भारती द्वारा पूज्यचरणों में लोकार्पित की गई। इस प्रकार संघ प्रभावक योगक्षेम वर्ष का भव्य एवं आध्यात्मिक मंगल शुभारम्भ हो गया। गुरुवार को जैन विश्व भारती परिसर में मानों गुरुवार को एक अलग ही वातावरण छाया हुआ नजर आ रहा था। तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी का जन्मदिवस का अवसर भी था और करीब 37 वर्षों के बाद योगक्षेम वर्ष के शुभारम्भ का भी सुअवसर था तो श्रावकों की भी विशेष उपस्थिति नजर आ रही थी। आचार्यश्री मंगल प्रवचन में पधारने से पूर्व जैन विश्व भारती परिसर में धार्मिक-आध्यात्मिक, सामाजिक व संगठनात्मक कार्यों के उद्देश्य से बने चार नवीन भवन- आर्जवम्, मैत्री सदन, अणुव्रत भवन व बोधिगृहम में पधारे और मंगलपाठ का उच्चारण करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया तो संबंधित लोगों व उनके परिजनों द्वारा भवनों का लोकार्पण किया गया गया। मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के लिए युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी सुधर्मा सभा में पधारे तो पूरा वातावरण जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। तत्पश्चात महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को योगक्षेम वर्ष के मंगल शुभारम्भ के अवसर पर महामंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि योगक्षेम वर्ष 2026-27 के शुरु हो चुके की घोषणा करता हूं। आगम में योगक्षेम शब्द आया है। योगक्षेम वर्ष का नाम योग और क्षेम दो शब्दों का जुड़ाव है। आगम में यह शब्द प्राप्त होता है तो यह मानना चाहिए कि आगमिक आधार पर योगक्षेम वर्ष का नामकरण किया गया है। भगवान ऋषभ व भगवान महावीर से जुड़ी यह जैन शासन है, जिसमें दिगम्बर व श्वेताम्बर नाम की दो धाराएं बह रही हैं। श्वेताम्बर धारा में एक आम्नाय तेरापंथ है, जिसके प्रवर्तक आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु स्वामी हुए। उनकी परंपरा में उत्तराधिकारियों की परंपरा आगे बढ़ी। उसमें तेरापंथ के अष्टमाचार्य परम पूजनीय आचार्यश्री कालूगणी हुए। उनके समय में धर्मसंघ में विकास भी हुआ। उनके द्वारा दीक्षित दो सुशिष्य मुनि तुलसी व मुनि नथमलजी (टमकोर) हमें आचार्य के रूप में प्राप्त हुए। कालूगणी के अनंतर उत्तराधिकारी पूज्य आचार्यश्री तुलसी व उसके बाद परम स्तवनीय आचार्यश्री महाप्रज्ञजी हुए। ये दोनों ही पूज्यप्रवर युगप्रधान की गरिमा से मंडित हुए थे। ये दो आचार्य ऐसे हुए हैं, जिनको हम में से कइयों ने प्रत्यक्ष देखा भी हुआ है, उन्हें नमन भी किया गया है। आचार्यश्री तुलसी के समय योगक्षेम वर्ष आयोजित हुआ था और लगभग वहीं प्रांगण आज भी हमें प्राप्त है, जहां योगक्षेम वर्ष के प्रारम्भ की पुनरावृत्ति हुई है। महाश्रमणी साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने आचार्यश्री तुलसी के समय भी योगक्षेम वर्ष का निवेदन रखा था और उन्होंने ही मेरे सामने भी इसका निवेदन रखा था। उनके कथन को स्वीकार कर योगक्षेम वर्ष की घोषणा की, वह घोषणा आज प्रारम्भ हो रहा है। जिन्होंने निवेदन किया था वे तो अब सदेह नहीं हैं, परन्तु उस निवेदन के संदर्भ में साध्वीप्रमुखा अब विश्रुतविभाजी को मान लेता हूं। हमारे धर्मसंघ के लिए योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो। इस दौरान यदि हम अहिंसा, संयम की साधना करते हैं और तप तपते हैं तो यह योगक्षेम वर्ष मंगलमय हो ही जाएगा। तीन दिनों का अनुष्ठान मानों योगक्षेम वर्ष का शिलान्यास था। अब योगक्षेम वर्ष की कालावधि शुरु हो गई है। यह हमारे विकास में सहायक बने। इस दौरान अनेक रूपों में प्रशिक्षण का कार्य चलता रहे। चिंतन, मंथन, निर्णय के लिए भी यह वर्ष महत्त्वपूर्ण है। धर्मसंघ की साधना कैसे पुष्ट हो, इसका प्रयास होना चाहिए। आचार, विचार पक्ष कैसे मजबूत हो। इस प्रकार शिक्षण-प्रशिक्षण व चिंतन-मंथन के द्वारा योगक्षेम वर्ष को अच्छा बनाने का प्रयास किया जा सकता है। इस योगक्षेम वर्ष की कालावधि तक यदि ज्ञानात्मक दृष्टि व जानकारी के दृष्टि से बहिर्विहार में रहने वाले साधु-साध्वियां भी यदि ठिकाणे में सहज रूप में यूट्यूब आदि के माध्यम से टीवी में प्रसारण हो रहा हो तो देख सकते हैं, इसके लिए अनापत्ति है। इस दौरान चलने वाले शिक्षण-प्रशिक्षण के बाद परीक्षा भी होने के बाद ही कोई डिग्री या उपाधि प्रदान की जाए। हमारे अष्टम आचार्यश्री कालूगणी का जन्मदिवस है। आज का दिन अणुव्रत, पारमार्थिक शिक्षण संस्था से जुड़ा हुआ है। यह वर्ष धर्मसंघ को ऊंचाई प्रदान करने वाला सिद्ध हो। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने उपस्थित चारित्रात्माओं को अपनी जिज्ञासाओं को भी प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पहले तत्त्वज्ञान के क्लास के विद्यार्थियों को मंगल प्रेरणा प्रदान की। इसी प्रकार प्रेक्षाध्यान के शिविरार्थियों को भी मंगल पाथेय प्रदान किए। तदुपरान्त आचार्यश्री के ठाणं प्रवचन के आधार पर जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘आठ बातें ज्ञान की’ को जैन विश्व भारती आदि के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की। तदुपरान्त मुमुक्षु बहनों ने गीत का संगान किया। श्री राकेशमणिजी ने संस्कृत भाषा में अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज-छापर ने अपनी गीत को प्रस्तुति दी।

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