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January 21, 2026

देश

सतविंदर कौर जी की अनुपम कृति “ श्री राम का सुमिरन किया कर “ यह दुनिया एक घोंसला है, न यह तेरा है, न यह मेरा है। पता नहीं कब छोड़ना पड़े इसे, कब यह मन उड़ान भर जाएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। दिल की बात दिल में न रख, अंतर की हर एक पुकार, आँखों के आँसुओं सहित चुपचाप श्री राम को सुनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सुन-सुन कर जीते हैं दुनिया की कहानियाँ, पर किसी को नहीं पता, कब छूट जाए यह नश्वर तन। श्री राम का सुमिरन किया कर। हर पल, हर एक क्षण, साँसों के संग उनका नाम जप, कदम-कदम पर वे तेरे साथ चलेंगे, कोई चिंता, कोई भय पास नहीं आएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। जो मिला है इस जीवन में, उसका मान कर, उसका सम्मान कर, मन की इच्छाएँ, सपने और आशाएँ, सब उनके चरणों में अर्पित कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। दुख भी उनकी कृपा है, सुख भी उनका दिया उपहार। जो वे करें, उसमें भलाई छिपी है, यह सत्य मन में बसाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। अहंकार छोड़, धैर्य सीख, सत्य और सेवा से जीवन सँवार, हर एक आत्मा में उनकी ज्योति देख, इस मंत्र को हृदय से अपनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर कहती हैं— जब राहें भटकने लगें, जब सब कुछ अधूरा लगे, तब सिर झुका कर बस यह कह दे— हर निर्णय तेरा है, श्री राम। और फिर केवल श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर ज़ीरकपुर, चंडीगढ़ पंजाब

सतविंदर कौर जी की अनुपम कृति “ श्री राम का सुमिरन किया कर “ यह दुनिया एक घोंसला है, न यह तेरा है, न यह मेरा है। पता नहीं कब छोड़ना पड़े इसे, कब यह मन उड़ान भर जाएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। दिल की बात दिल में न रख, अंतर की हर एक पुकार, आँखों के आँसुओं सहित चुपचाप श्री राम को सुनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सुन-सुन कर जीते हैं दुनिया की कहानियाँ, पर किसी को नहीं पता, कब छूट जाए यह नश्वर तन। श्री राम का सुमिरन किया कर। हर पल, हर एक क्षण, साँसों के संग उनका नाम जप, कदम-कदम पर वे तेरे साथ चलेंगे, कोई चिंता, कोई भय पास नहीं आएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। जो मिला है इस जीवन में, उसका मान कर, उसका सम्मान कर, मन की इच्छाएँ, सपने और आशाएँ, सब उनके चरणों में अर्पित कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। दुख भी उनकी कृपा है, सुख भी उनका दिया उपहार। जो वे करें, उसमें भलाई छिपी है, यह सत्य मन में बसाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। अहंकार छोड़, धैर्य सीख, सत्य और सेवा से जीवन सँवार, हर एक आत्मा में उनकी ज्योति देख, इस मंत्र को हृदय से अपनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर कहती हैं— जब राहें भटकने लगें, जब सब कुछ अधूरा लगे, तब सिर झुका कर बस यह कह दे— हर निर्णय तेरा है, श्री राम। और फिर केवल श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर ज़ीरकपुर, चंडीगढ़ पंजाब

विदेश

सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर Key Line Times छोटी खाटू, डीडवाना-कुचामण (राजस्थान) ,राजस्थान का नवीन जिला डिडवाना-कुचामण। इस जिले के अंतर्गत नवीन तहसील के रूप...
सतविंदर कौर जी की अनुपम कृति “ श्री राम का सुमिरन किया कर “ यह दुनिया एक घोंसला है, न यह तेरा है, न यह मेरा है। पता नहीं कब छोड़ना पड़े इसे, कब यह मन उड़ान भर जाएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। दिल की बात दिल में न रख, अंतर की हर एक पुकार, आँखों के आँसुओं सहित चुपचाप श्री राम को सुनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सुन-सुन कर जीते हैं दुनिया की कहानियाँ, पर किसी को नहीं पता, कब छूट जाए यह नश्वर तन। श्री राम का सुमिरन किया कर। हर पल, हर एक क्षण, साँसों के संग उनका नाम जप, कदम-कदम पर वे तेरे साथ चलेंगे, कोई चिंता, कोई भय पास नहीं आएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। जो मिला है इस जीवन में, उसका मान कर, उसका सम्मान कर, मन की इच्छाएँ, सपने और आशाएँ, सब उनके चरणों में अर्पित कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। दुख भी उनकी कृपा है, सुख भी उनका दिया उपहार। जो वे करें, उसमें भलाई छिपी है, यह सत्य मन में बसाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। अहंकार छोड़, धैर्य सीख, सत्य और सेवा से जीवन सँवार, हर एक आत्मा में उनकी ज्योति देख, इस मंत्र को हृदय से अपनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर कहती हैं— जब राहें भटकने लगें, जब सब कुछ अधूरा लगे, तब सिर झुका कर बस यह कह दे— हर निर्णय तेरा है, श्री राम। और फिर केवल श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर ज़ीरकपुर, चंडीगढ़ पंजाब

सतविंदर कौर जी की अनुपम कृति “ श्री राम का सुमिरन किया कर “ यह दुनिया एक घोंसला है, न यह तेरा है, न यह मेरा है। पता नहीं कब छोड़ना पड़े इसे, कब यह मन उड़ान भर जाएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। दिल की बात दिल में न रख, अंतर की हर एक पुकार, आँखों के आँसुओं सहित चुपचाप श्री राम को सुनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सुन-सुन कर जीते हैं दुनिया की कहानियाँ, पर किसी को नहीं पता, कब छूट जाए यह नश्वर तन। श्री राम का सुमिरन किया कर। हर पल, हर एक क्षण, साँसों के संग उनका नाम जप, कदम-कदम पर वे तेरे साथ चलेंगे, कोई चिंता, कोई भय पास नहीं आएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। जो मिला है इस जीवन में, उसका मान कर, उसका सम्मान कर, मन की इच्छाएँ, सपने और आशाएँ, सब उनके चरणों में अर्पित कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। दुख भी उनकी कृपा है, सुख भी उनका दिया उपहार। जो वे करें, उसमें भलाई छिपी है, यह सत्य मन में बसाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। अहंकार छोड़, धैर्य सीख, सत्य और सेवा से जीवन सँवार, हर एक आत्मा में उनकी ज्योति देख, इस मंत्र को हृदय से अपनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर कहती हैं— जब राहें भटकने लगें, जब सब कुछ अधूरा लगे, तब सिर झुका कर बस यह कह दे— हर निर्णय तेरा है, श्री राम। और फिर केवल श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर ज़ीरकपुर, चंडीगढ़ पंजाब

स्वास्थ

सतविंदर कौर जी की अनुपम कृति “ श्री राम का सुमिरन किया कर “ यह दुनिया एक घोंसला है, न यह तेरा है, न यह मेरा है। पता नहीं कब छोड़ना पड़े इसे, कब यह मन उड़ान भर जाएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। दिल की बात दिल में न रख, अंतर की हर एक पुकार, आँखों के आँसुओं सहित चुपचाप श्री राम को सुनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सुन-सुन कर जीते हैं दुनिया की कहानियाँ, पर किसी को नहीं पता, कब छूट जाए यह नश्वर तन। श्री राम का सुमिरन किया कर। हर पल, हर एक क्षण, साँसों के संग उनका नाम जप, कदम-कदम पर वे तेरे साथ चलेंगे, कोई चिंता, कोई भय पास नहीं आएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। जो मिला है इस जीवन में, उसका मान कर, उसका सम्मान कर, मन की इच्छाएँ, सपने और आशाएँ, सब उनके चरणों में अर्पित कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। दुख भी उनकी कृपा है, सुख भी उनका दिया उपहार। जो वे करें, उसमें भलाई छिपी है, यह सत्य मन में बसाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। अहंकार छोड़, धैर्य सीख, सत्य और सेवा से जीवन सँवार, हर एक आत्मा में उनकी ज्योति देख, इस मंत्र को हृदय से अपनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर कहती हैं— जब राहें भटकने लगें, जब सब कुछ अधूरा लगे, तब सिर झुका कर बस यह कह दे— हर निर्णय तेरा है, श्री राम। और फिर केवल श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर ज़ीरकपुर, चंडीगढ़ पंजाब

सतविंदर कौर जी की अनुपम कृति “ श्री राम का सुमिरन किया कर “ यह दुनिया एक घोंसला है, न यह तेरा है, न यह मेरा है। पता नहीं कब छोड़ना पड़े इसे, कब यह मन उड़ान भर जाएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। दिल की बात दिल में न रख, अंतर की हर एक पुकार, आँखों के आँसुओं सहित चुपचाप श्री राम को सुनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सुन-सुन कर जीते हैं दुनिया की कहानियाँ, पर किसी को नहीं पता, कब छूट जाए यह नश्वर तन। श्री राम का सुमिरन किया कर। हर पल, हर एक क्षण, साँसों के संग उनका नाम जप, कदम-कदम पर वे तेरे साथ चलेंगे, कोई चिंता, कोई भय पास नहीं आएगा। श्री राम का सुमिरन किया कर। जो मिला है इस जीवन में, उसका मान कर, उसका सम्मान कर, मन की इच्छाएँ, सपने और आशाएँ, सब उनके चरणों में अर्पित कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। दुख भी उनकी कृपा है, सुख भी उनका दिया उपहार। जो वे करें, उसमें भलाई छिपी है, यह सत्य मन में बसाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। अहंकार छोड़, धैर्य सीख, सत्य और सेवा से जीवन सँवार, हर एक आत्मा में उनकी ज्योति देख, इस मंत्र को हृदय से अपनाया कर। श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर कहती हैं— जब राहें भटकने लगें, जब सब कुछ अधूरा लगे, तब सिर झुका कर बस यह कह दे— हर निर्णय तेरा है, श्री राम। और फिर केवल श्री राम का सुमिरन किया कर। सतविंदर कौर ज़ीरकपुर, चंडीगढ़ पंजाब

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