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March 8, 2026

Key line times

Key Line Times राष्ट्रीय हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र है जो राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होता है एंव भारत सरकार के सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आर.एन.आई. से रजिस्ट्रड है। इसका आर.एन.आई.न. DELHIN/2017/72528 है। यह समाचार पत्र 2017 से लगातार प्रकाशित हो रहा है।
🌸 *सम्यक् ज्ञान व दर्शन है आचार की पृष्ठभूमि : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-आचार्यश्री ने आचार को प्रामाणिक बनाने की दी पावन प्रेरणा* *-आज भी अनेक चारित्रात्माओं की जिज्ञासाओं को मिला समाधान* *-अभातेमम को पूज्य सन्निधि में मिला एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सम्मान* *24.02.2026, मंगलवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* जैन विश्व भारती परिसर में साधिक एक वर्ष के लिए विराजमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में योगक्षेम वर्ष की कालावधि प्रारम्भ हो चुकी है। इस अवधि के दौरान बहने वाली आध्यात्मिक ज्ञानगंगा में चारित्रात्माओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी गोते लगा रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले श्रद्धालु भी इस अवसर का पूर्ण लाभ उठा रहे हैं। दूर क्षेत्रों से समागत श्रद्धालुओं के कारण जैन विश्व भारती और अधिक गुलजार दिखाई दे रहा है। मंगलवार को सुधर्मा सभा में मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञागीत का संगान किया। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को आज के निर्धारित विषय ‘आचार की पृष्ठभूमि’ पर आधारित मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि ‘आचार की पृष्ठभूमि’ आज का विषय है। आदमी सदाचार के पथ पर चलता है, उच्च आचार का पालन करता है। साधुत्व के रूप में, श्रावकत्व के रूप में और बिना साधु व श्रावक के एक सामान्य आदमी कोई अणुव्रत आन्दोलन की आचार संहिता आदि को मानकर अथवा अपने ढंग से सदाचार का पालन कर सकता है। प्रश्न हो सकता है कि किस भूमिका के आधार पर आचार का पालन हो सकता है? इसके लिए एक समाधान दिया गया है कि चारित्र सम्यक्त्व विहीन नहीं हो सकता। यदि सम्यक्त्व नहीं है तो सम्यक् आचार और सम्यक् चारित्र हो नहीं सकता। सम्यक् दर्शन व सम्यक् ज्ञान सम्यक् आचार की पृष्ठभूमि हो सकती है। हम सामन्य तैर पर देंखें तो सम्यक्त्व के बिना सम्यक् आचार नहीं आ सकता। ज्ञान को आचार तक लाने के लिए दर्शन रूपी सेतु की आवश्यकता होती है। आदमी के संस्कार जितने पुष्ट हो जाएं तो वह उनके आचार में भी परिणत हो सकता है। संस्कार और विचार को भी आचार की पृष्ठभूमि में माना जा सकता है। ज्ञान, दर्शन को आचार की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है। आदमी का व्यवहार प्रामाणिक होना चाहिए। आदमी को अपना व्यवहार प्रामाणिक रखने का प्रयास करना चाहिए। कोई बात बतानी है तो पहले उस बात का प्रमाण भी साथ में होना चाहिए। बातों में प्रमाणिकता को सूक्ष्मता से भी ध्यान देने का प्रयास किया जा सकता है। इसलिए आदमी का व्यवहार भी प्रमाणिकता से पूर्ण होना चाहिए। आचार की पृष्ठभूमि में सम्यक् ज्ञान व सम्यक् दर्शन पुष्ट रहें तो आचार भी सम्यक् हो सकता है। आज आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के एशिया बुक ऑफ रिकार्ड का सम्मान समारोह समायोजित किया गया। विश्व कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर अभातेमम ने अपने 309 शाखा मण्डलों के माध्यम से 17200 पैप स्मीयर टेस्ट कराया जो एरिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज हुआ। इस संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम तेरापंथ महिला मण्डल-लाडनूं व अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की सदस्याओं ने गीत का संगान किया। अभातेमम की अध्यक्ष श्रीमती सुमन नाहटा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के अधिकृत प्रतिनिधि श्री संजय फूला ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने इस रिकॉर्ड से संबंधित सर्टिफिकेट व मैडेल को अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के पदाधिकारियों को प्रदान किया गया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। 1 min read

🌸 *सम्यक् ज्ञान व दर्शन है आचार की पृष्ठभूमि : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-आचार्यश्री ने आचार को प्रामाणिक बनाने की दी पावन प्रेरणा* *-आज भी अनेक चारित्रात्माओं की जिज्ञासाओं को मिला समाधान* *-अभातेमम को पूज्य सन्निधि में मिला एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सम्मान* *24.02.2026, मंगलवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* जैन विश्व भारती परिसर में साधिक एक वर्ष के लिए विराजमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में योगक्षेम वर्ष की कालावधि प्रारम्भ हो चुकी है। इस अवधि के दौरान बहने वाली आध्यात्मिक ज्ञानगंगा में चारित्रात्माओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी गोते लगा रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले श्रद्धालु भी इस अवसर का पूर्ण लाभ उठा रहे हैं। दूर क्षेत्रों से समागत श्रद्धालुओं के कारण जैन विश्व भारती और अधिक गुलजार दिखाई दे रहा है। मंगलवार को सुधर्मा सभा में मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञागीत का संगान किया। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को आज के निर्धारित विषय ‘आचार की पृष्ठभूमि’ पर आधारित मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि ‘आचार की पृष्ठभूमि’ आज का विषय है। आदमी सदाचार के पथ पर चलता है, उच्च आचार का पालन करता है। साधुत्व के रूप में, श्रावकत्व के रूप में और बिना साधु व श्रावक के एक सामान्य आदमी कोई अणुव्रत आन्दोलन की आचार संहिता आदि को मानकर अथवा अपने ढंग से सदाचार का पालन कर सकता है। प्रश्न हो सकता है कि किस भूमिका के आधार पर आचार का पालन हो सकता है? इसके लिए एक समाधान दिया गया है कि चारित्र सम्यक्त्व विहीन नहीं हो सकता। यदि सम्यक्त्व नहीं है तो सम्यक् आचार और सम्यक् चारित्र हो नहीं सकता। सम्यक् दर्शन व सम्यक् ज्ञान सम्यक् आचार की पृष्ठभूमि हो सकती है। हम सामन्य तैर पर देंखें तो सम्यक्त्व के बिना सम्यक् आचार नहीं आ सकता। ज्ञान को आचार तक लाने के लिए दर्शन रूपी सेतु की आवश्यकता होती है। आदमी के संस्कार जितने पुष्ट हो जाएं तो वह उनके आचार में भी परिणत हो सकता है। संस्कार और विचार को भी आचार की पृष्ठभूमि में माना जा सकता है। ज्ञान, दर्शन को आचार की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है। आदमी का व्यवहार प्रामाणिक होना चाहिए। आदमी को अपना व्यवहार प्रामाणिक रखने का प्रयास करना चाहिए। कोई बात बतानी है तो पहले उस बात का प्रमाण भी साथ में होना चाहिए। बातों में प्रमाणिकता को सूक्ष्मता से भी ध्यान देने का प्रयास किया जा सकता है। इसलिए आदमी का व्यवहार भी प्रमाणिकता से पूर्ण होना चाहिए। आचार की पृष्ठभूमि में सम्यक् ज्ञान व सम्यक् दर्शन पुष्ट रहें तो आचार भी सम्यक् हो सकता है। आज आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के एशिया बुक ऑफ रिकार्ड का सम्मान समारोह समायोजित किया गया। विश्व कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर अभातेमम ने अपने 309 शाखा मण्डलों के माध्यम से 17200 पैप स्मीयर टेस्ट कराया जो एरिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज हुआ। इस संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम तेरापंथ महिला मण्डल-लाडनूं व अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की सदस्याओं ने गीत का संगान किया। अभातेमम की अध्यक्ष श्रीमती सुमन नाहटा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के अधिकृत प्रतिनिधि श्री संजय फूला ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने इस रिकॉर्ड से संबंधित सर्टिफिकेट व मैडेल को अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के पदाधिकारियों को प्रदान किया गया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

    सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर Key Line Times लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) जैन विश्व भारती परिसर में साधिक एक वर्ष के लिए विराजमान जैन...
सम्यक् ज्ञान व दर्शन है आचार की पृष्ठभूमि : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-आचार्यश्री ने आचार को प्रामाणिक बनाने की दी पावन प्रेरणा* *-आज भी अनेक चारित्रात्माओं की जिज्ञासाओं को मिला समाधान* *-अभातेमम को पूज्य सन्निधि में मिला एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सम्मान* *24.02.2026, मंगलवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* जैन विश्व भारती परिसर में साधिक एक वर्ष के लिए विराजमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में योगक्षेम वर्ष की कालावधि प्रारम्भ हो चुकी है। इस अवधि के दौरान बहने वाली आध्यात्मिक ज्ञानगंगा में चारित्रात्माओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी गोते लगा रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले श्रद्धालु भी इस अवसर का पूर्ण लाभ उठा रहे हैं। दूर क्षेत्रों से समागत श्रद्धालुओं के कारण जैन विश्व भारती और अधिक गुलजार दिखाई दे रहा है। मंगलवार को सुधर्मा सभा में मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञागीत का संगान किया। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को आज के निर्धारित विषय ‘आचार की पृष्ठभूमि’ पर आधारित मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि ‘आचार की पृष्ठभूमि’ आज का विषय है। आदमी सदाचार के पथ पर चलता है, उच्च आचार का पालन करता है। साधुत्व के रूप में, श्रावकत्व के रूप में और बिना साधु व श्रावक के एक सामान्य आदमी कोई अणुव्रत आन्दोलन की आचार संहिता आदि को मानकर अथवा अपने ढंग से सदाचार का पालन कर सकता है। प्रश्न हो सकता है कि किस भूमिका के आधार पर आचार का पालन हो सकता है? इसके लिए एक समाधान दिया गया है कि चारित्र सम्यक्त्व विहीन नहीं हो सकता। यदि सम्यक्त्व नहीं है तो सम्यक् आचार और सम्यक् चारित्र हो नहीं सकता। सम्यक् दर्शन व सम्यक् ज्ञान सम्यक् आचार की पृष्ठभूमि हो सकती है। हम सामन्य तैर पर देंखें तो सम्यक्त्व के बिना सम्यक् आचार नहीं आ सकता। ज्ञान को आचार तक लाने के लिए दर्शन रूपी सेतु की आवश्यकता होती है। आदमी के संस्कार जितने पुष्ट हो जाएं तो वह उनके आचार में भी परिणत हो सकता है। संस्कार और विचार को भी आचार की पृष्ठभूमि में माना जा सकता है। ज्ञान, दर्शन को आचार की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है। आदमी का व्यवहार प्रामाणिक होना चाहिए। आदमी को अपना व्यवहार प्रामाणिक रखने का प्रयास करना चाहिए। कोई बात बतानी है तो पहले उस बात का प्रमाण भी साथ में होना चाहिए। बातों में प्रमाणिकता को सूक्ष्मता से भी ध्यान देने का प्रयास किया जा सकता है। इसलिए आदमी का व्यवहार भी प्रमाणिकता से पूर्ण होना चाहिए। आचार की पृष्ठभूमि में सम्यक् ज्ञान व सम्यक् दर्शन पुष्ट रहें तो आचार भी सम्यक् हो सकता है। आज आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के एशिया बुक ऑफ रिकार्ड का सम्मान समारोह समायोजित किया गया। विश्व कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर अभातेमम ने अपने 309 शाखा मण्डलों के माध्यम से 17200 पैप स्मीयर टेस्ट कराया जो एरिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज हुआ। इस संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम तेरापंथ महिला मण्डल-लाडनूं व अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की सदस्याओं ने गीत का संगान किया। अभातेमम की अध्यक्ष श्रीमती सुमन नाहटा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के अधिकृत प्रतिनिधि श्री संजय फूला ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने इस रिकॉर्ड से संबंधित सर्टिफिकेट व मैडेल को अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के पदाधिकारियों को प्रदान किया गया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। 1 min read

सम्यक् ज्ञान व दर्शन है आचार की पृष्ठभूमि : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸 *-आचार्यश्री ने आचार को प्रामाणिक बनाने की दी पावन प्रेरणा* *-आज भी अनेक चारित्रात्माओं की जिज्ञासाओं को मिला समाधान* *-अभातेमम को पूज्य सन्निधि में मिला एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सम्मान* *24.02.2026, मंगलवार, लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) :* जैन विश्व भारती परिसर में साधिक एक वर्ष के लिए विराजमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में योगक्षेम वर्ष की कालावधि प्रारम्भ हो चुकी है। इस अवधि के दौरान बहने वाली आध्यात्मिक ज्ञानगंगा में चारित्रात्माओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी गोते लगा रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले श्रद्धालु भी इस अवसर का पूर्ण लाभ उठा रहे हैं। दूर क्षेत्रों से समागत श्रद्धालुओं के कारण जैन विश्व भारती और अधिक गुलजार दिखाई दे रहा है। मंगलवार को सुधर्मा सभा में मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञागीत का संगान किया। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को आज के निर्धारित विषय ‘आचार की पृष्ठभूमि’ पर आधारित मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि ‘आचार की पृष्ठभूमि’ आज का विषय है। आदमी सदाचार के पथ पर चलता है, उच्च आचार का पालन करता है। साधुत्व के रूप में, श्रावकत्व के रूप में और बिना साधु व श्रावक के एक सामान्य आदमी कोई अणुव्रत आन्दोलन की आचार संहिता आदि को मानकर अथवा अपने ढंग से सदाचार का पालन कर सकता है। प्रश्न हो सकता है कि किस भूमिका के आधार पर आचार का पालन हो सकता है? इसके लिए एक समाधान दिया गया है कि चारित्र सम्यक्त्व विहीन नहीं हो सकता। यदि सम्यक्त्व नहीं है तो सम्यक् आचार और सम्यक् चारित्र हो नहीं सकता। सम्यक् दर्शन व सम्यक् ज्ञान सम्यक् आचार की पृष्ठभूमि हो सकती है। हम सामन्य तैर पर देंखें तो सम्यक्त्व के बिना सम्यक् आचार नहीं आ सकता। ज्ञान को आचार तक लाने के लिए दर्शन रूपी सेतु की आवश्यकता होती है। आदमी के संस्कार जितने पुष्ट हो जाएं तो वह उनके आचार में भी परिणत हो सकता है। संस्कार और विचार को भी आचार की पृष्ठभूमि में माना जा सकता है। ज्ञान, दर्शन को आचार की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है। आदमी का व्यवहार प्रामाणिक होना चाहिए। आदमी को अपना व्यवहार प्रामाणिक रखने का प्रयास करना चाहिए। कोई बात बतानी है तो पहले उस बात का प्रमाण भी साथ में होना चाहिए। बातों में प्रमाणिकता को सूक्ष्मता से भी ध्यान देने का प्रयास किया जा सकता है। इसलिए आदमी का व्यवहार भी प्रमाणिकता से पूर्ण होना चाहिए। आचार की पृष्ठभूमि में सम्यक् ज्ञान व सम्यक् दर्शन पुष्ट रहें तो आचार भी सम्यक् हो सकता है। आज आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के एशिया बुक ऑफ रिकार्ड का सम्मान समारोह समायोजित किया गया। विश्व कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर अभातेमम ने अपने 309 शाखा मण्डलों के माध्यम से 17200 पैप स्मीयर टेस्ट कराया जो एरिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज हुआ। इस संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम तेरापंथ महिला मण्डल-लाडनूं व अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की सदस्याओं ने गीत का संगान किया। अभातेमम की अध्यक्ष श्रीमती सुमन नाहटा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के अधिकृत प्रतिनिधि श्री संजय फूला ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने इस रिकॉर्ड से संबंधित सर्टिफिकेट व मैडेल को अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के पदाधिकारियों को प्रदान किया गया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर Key Line Times लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) ,जैन विश्व भारती परिसर में साधिक एक वर्ष के लिए विराजमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ...
सतीश चंद लुणावत, सब एडिटर Key Line Times राजस्थान,श्री प्राज्ञ मिर्गी रोग निवारक समिति गुलाबपुरा द्वारा माह के चतुर्थ मंगलवार को आयोजित कैंप दिनाक...
सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर Key Line Times पश्चिम बंगाल,सकल जैन समाज के लिए यह अत्यंत हर्ष का क्षण है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने...
सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर Key Line Times लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान),जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान...
  सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर Key Line Times लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) ,जन-जन के मानस को आध्यात्मिक ऊर्जा का अभिसिंचन प्रदान करने वाले, जन-जन के...
कमल जैन,ऐसोसिएट एडिटर Key Line Times बडौत,कल जैन स्थानक, मैन बाजार, बड़ौत में एक रक्तदान शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय नागरिकों...
*एडवोकेट संजय नाहर जैन प्रबुद्ध मंच के जिला सचिव नियुक्त* ब्यावर सकल जैन समाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने की परिकल्पना अब साकार होती दिखाई दे रही है। इसी दिशा में ब्यावर जिले में जैन प्रबुद्ध मंच ट्रस्ट का गठन किया गया है। राजस्थान राज्य संघ अध्यक्ष श्री राजेश जैन (पंड्या) ने ब्यावर जिला सचिव के रूप मे ब्यावर निवासी एडवोकेट श्री संजय जैन (नाहर) को नियुक्ति प्रदान की है। संघ ने समाज की डिजिटल पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए “जैनत्व ऐप” को लॉन्च किया है । नवनियुक्त जिला सचिव श्री नाहर ने बताया कि यह ऐप समाजजनों को एक ही मंच पर लाने का सशक्त माध्यम बनेगा। इसके माध्यम से धार्मिक, सामाजिक और सेवाकार्यों की नवीनतम जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी। साथ ही जैन श्रावक कार्ड जैसी विशेष सुविधा भी जोड़ी गई है, जिससे प्रत्येक श्रावक को अलग डिजिटल पहचान मिलेगी। ऐप में सामाजिक पंच व्यवस्था की भी व्यवस्था की गई है, जिसके माध्यम से छोटे-बड़े विवादों का निपटारा समाज स्तर पर सौहार्दपूर्ण ढंग से किया जा सकेगा। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ने से जैन समाज की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकता और भी मजबूत होगी। आपने समाजजनों से आह्वान किया है कि वे जैनत्व ऐप को डाउनलोड कर इस डिजिटल क्रांति में सहभागी बनें। श्री नाहर की इस नियुक्ति पर जैन समाज के वरिष्ठजनों ने बधाईयां देते हुए शुभकामनाएं प्रेषित की है। 1 min read

*एडवोकेट संजय नाहर जैन प्रबुद्ध मंच के जिला सचिव नियुक्त* ब्यावर सकल जैन समाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने की परिकल्पना अब साकार होती दिखाई दे रही है। इसी दिशा में ब्यावर जिले में जैन प्रबुद्ध मंच ट्रस्ट का गठन किया गया है। राजस्थान राज्य संघ अध्यक्ष श्री राजेश जैन (पंड्या) ने ब्यावर जिला सचिव के रूप मे ब्यावर निवासी एडवोकेट श्री संजय जैन (नाहर) को नियुक्ति प्रदान की है। संघ ने समाज की डिजिटल पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए “जैनत्व ऐप” को लॉन्च किया है । नवनियुक्त जिला सचिव श्री नाहर ने बताया कि यह ऐप समाजजनों को एक ही मंच पर लाने का सशक्त माध्यम बनेगा। इसके माध्यम से धार्मिक, सामाजिक और सेवाकार्यों की नवीनतम जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी। साथ ही जैन श्रावक कार्ड जैसी विशेष सुविधा भी जोड़ी गई है, जिससे प्रत्येक श्रावक को अलग डिजिटल पहचान मिलेगी। ऐप में सामाजिक पंच व्यवस्था की भी व्यवस्था की गई है, जिसके माध्यम से छोटे-बड़े विवादों का निपटारा समाज स्तर पर सौहार्दपूर्ण ढंग से किया जा सकेगा। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ने से जैन समाज की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकता और भी मजबूत होगी। आपने समाजजनों से आह्वान किया है कि वे जैनत्व ऐप को डाउनलोड कर इस डिजिटल क्रांति में सहभागी बनें। श्री नाहर की इस नियुक्ति पर जैन समाज के वरिष्ठजनों ने बधाईयां देते हुए शुभकामनाएं प्रेषित की है।

सतीश चंद लुणावत, सब एडिटर Key Line Times ब्यावर,सकल जैन समाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने की परिकल्पना अब साकार होती...
 सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर key Line Times *-योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने प्रदान की पावन प्रेरणा* *-साध्वी सूरजकुमारीजी की स्मृतिसभा का हुआ आयोजन* *21.02.2026,...
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