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गुजरात के सुरत मे मंगलवार को आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि सबसे निष्पक्ष होता है कर्म ….. सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात), नौ दिनों के आध्यात्मिक अनुष्ठान के उपरान्त महावीर समवसरण से जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पुनः आयारो आगम के माध्यम से अपनी अमृतवाणी की वृष्टि प्रारम्भ की। इस अमृतवाणी का रसपान कर श्रद्धालु अपने जीवन को धर्म से भावित बना रहे हैं। मंगलवार को प्रातःकालीन मुख्य प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि दुःख और सुख प्रत्येक का अपना-अपना होता है। कर्मवाद का सिद्धांत सुख-दुःख की प्राप्ति के संदर्भ में लाने के लायक है। हम सभी दुनिया में देखते हैं कि प्राणी दुःख भी भोगता है तो सुख भी भोगता है। दुःख और सुख दोनों के जिम्मेदार हम स्वयं अर्थात् हमारी स्वयं की आत्मा होती है। जैन धर्म में आठ कर्म बताए गए हैं। उन कर्मों के आलोक में जीवन की व्याख्या भी की जा सकती है। कोई बालक मंदबुद्धि होता है तो कोई तीव्र बुद्धि वाला होता है। कोई रटने के बाद भी याद नहीं कर पाता तो कोई मात्र पढ लेने से ही याद कर लेता है। इससे यह मानना चाहिए कि जो प्रखर बुद्धि वाला है, उसके ज्ञानावरणीय कर्म का अच्छा क्षयोपशम है। कोई बीमार रहता है तो कोई शरीर से बलिष्ट होता है। इससे यह पता किया जा सकता है उसके सातवेदनीय कर्म का उदय चल रहा है। माया, छलना और झूठ बोलने वाले के ऊपर मोहनीय कर्म का बहुत ज्यादा प्रभाव होता है। कुछ लोग बहुत शांत होते हैं, संतोष और सरलता का जीवन है तो मानना चाहिए कि उनके मोहनीय कर्म का अच्छा क्षयोपशम होता है। कोई अल्प आयुष्य वाले अथवा दीर्घ आयुष्य वाले भी होते हैं। इसी प्रकार जाति कुल, उच्च गोत्र, वीर्यवत्ता आदि-आदि के संदर्भ में भी अलग-अलग कर्मों का उदय अथवा क्षयोपशम होता है। इसके माध्यम से किसी के भी जीवन का समस्त विश्लेषण किया जा सकता है। इस प्रकार आदमी को यह जानने का प्रयास करना चाहिए आदमी को स्वयं द्वारा किए गए कर्मों को स्वयं ही भोगना होता है। अर्थ का अर्जन करने और काम के अर्जन में जो कर्मफल बंधता है, वह हर प्राणी का अपना होता है। कोई किसी के दूसरे कर्म को नहीं भोगता और कोई किसी के सुख-दुःख को बांट नहीं सकता। कर्म बड़ा बलवान होता है, यह किसी को नहीं छोड़ता। कर्म सबसे निष्पक्ष होता है। उसके यहां कोई बड़ा-छोटा, धनवान-गरीब, ज्ञानी-अज्ञानी होना मायने नहीं रखता है। पूर्वार्जित कर्मों का फल भी जीवन में भोगना पड़ता है। इतना जानना के बाद आदमी को यह ध्यान रखना चाहिए कि आदमी को अनासक्ति की चेतना का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। धन, दौलत, पदार्थों के सेवन में बहुत ज्यादा आसक्ति नहीं रखना चाहिए। आदमी को आसक्ति से बचने का प्रयास करना चाहिए। कर्मवाद को जानने के बाद आदमी को बुरे कर्मों के बंधन से बचने का प्रयास करना चाहिए। जहां तक संभव हो सके, अनुकूलता में समता और प्रतिकूलता में भी समता भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त अनेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। तेरापंथ किशोर मण्डल-सूरत ने चौबीसी के एक गीत का संगान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने भी चौबीसी के एक गीत को प्रस्तुति दी। सूरत के सामायिक साधना परिवार के सदस्यों ने अपनी डायरेक्ट्री को पूज्यप्रवर के समक्ष लोकार्पित किया। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया। उनकी ओर से श्री कमलकुमार रामपुरिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्रीमती सरोज बांठिया ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी।
तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में क्षमापना दिवस का हुआ आयोजन …सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times सोमवार, वेसु, सूरत (गुजरात) आठ दिनों के आध्यात्मिक, साधनात्मक समृद्धि को बढ़ाने वाले और अपनी आत्मा का कल्याण करने वाले महापर्व पर्युषण के शिखर दिवस भगवती संवत्सरी के बाद का सूर्योदय जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में क्षमापना दिवस के रूप में समायोजित हुआ। एक दिवसीय उपवास के बाद संयम विहार परिसर में ही रहने वाले श्रद्धालु जनता के अलवा डायमण्डल सिटि सूरत में रहने वाले श्रद्धालु भी अपनी मन की गांठों को खोलने व क्षमापना पर्व को मनाने के लिए सोमवार को सूर्योदय से पूर्व ही पहुंच गए थे। जनाकीर्ण बने संयम विहार के महावीर समवसरण में सूर्योदय के आसपास मंच पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी पधारे प्रातःकाल का निरव वातावरण भी श्रद्धालुओं के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। शांतिदूत आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को प्रातःकाल बृहद् मंगलपाठ प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री संजय सुराणा ने सभी संस्थाओं आदि की ओर से आचार्यश्री तथा समस्त चारित्रात्माओं से खमतखामणा की। साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी व मुख्यमुनिश्री ने जनता को उद्बोधित किया। तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने क्षमापना दिवस पर उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि प्रश्न किया गया है कि क्षमापना से जीव को क्या मिलता है? उत्तर दिया गया है कि क्षमापना से प्रह्लाद भाव अर्थात् प्रसन्नता प्रकट होता है और सभी जीवों के प्रति मनुष्य मैत्री भाव उत्पन्न कर लेता है। इससे आदमी का भाव शुद्ध हो जाते हैं तथा इससे जीव निर्भय बन जाता है। हमने पर्युषण महापर्व की आराधना की। कल का दिन शिखर दिवस भगवती संवत्सरी के रूप में पदार्पण हुआ, जिसकी भी आराधना हुई। कितने के चौविहार व तिविहार आदि-आदि उपवास का क्रम भी रहा होगा। हम सभी इंसान हैं तो वर्ष में बातचीत करने में, किसी अन्य प्रसंग में भी किसी से कटु व्यवहार हो सकता है। इस दिन से पुराने सभी बातों को धो दिया जाता है। क्षमा का यह पर्व बहुत महत्त्वपूर्ण है। यह विश्वमैत्री की प्रतीक हो सकता है। मेरा संदेश है कि अंतर्राष्ट्रीय मैत्री दिवस भी आयोजित हो जाए तो पूरे विश्व में मैत्री का माहौल बने, ऐसा प्रयास किया जा सकता है। चौरासी लाख जीव योनियों से व्यावहारिक रूप में खमतखामणा का प्रावधान है। मंगल प्रवचन के साथ ही आचार्यश्री ने खमतखामणा का क्रम प्रारम्भ किया तो सर्वप्रथम साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया। आचार्यश्री ने समस्त साध्वीवृंद, समणीवृंद से भी खमतखामणा की तथा मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। देश भर में प्रवासित साध्वियों व देश-विदेश में प्रवासित समणियों से खमतखामणा की। इस प्रकार आचार्यश्री ने मुमुक्षु बहनों, श्राविकाओं से खमतखामणा की। आचार्यश्री ने पुरुष वर्ग में सर्वप्रथम मुख्यमुनिश्री से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमुनिश्री ने अपने सुगुरु के चरणों की वंदना की। आचार्यश्री ने गुरुकुलवास में दीक्षा पर्याय में सबसे बड़े मुनिश्री धर्मरुचिजी, मुनिश्री उदितकुमारजी से खमतखामणा की। इसके बाद समस्त संतों से खमतखामणा करते हुए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। बहिर्विहारी संतों से भी खमतखामणा करने के उपरान्त श्रावक समाज से भी खमतखामणा की। मुमुक्षु भाइयों, उपासक श्रेणी, सम्पूर्ण श्रावक समाज तथा केन्द्रीय संस्थाओं के पदाधिकारियों व उनके कर्मचारियों से खमतखामणा की। जैन शासन के अन्य साधु-साध्वियों, धर्मगुरुओं, राजनेताओं आदि से भी खमतखामणा की। आचार्यश्री ने चारित्रात्माओं को एक-एक उपवास की आलोयणा प्रदान की तथा श्रावक-श्राविकाओं को एक वर्ष में तीन उपवास की आलोयणा बताई। परम पूज्य कालूगणी के महाप्रयाण के अवसर आचार्यश्री ने उनको श्रद्धा के साथ वंदन किया। तदुपरान्त साधु-साध्वियों ने बारी-बारी से आचार्यश्री से खमतखामणा की। तदुपरान्त साधु-साध्वियों ने आपस में खमतखामणा की। श्रावक-श्राविकाओं आचार्यश्री से तथा परस्पर भी खमतखामणा की।
तमिलनाडु के मदुरै मे यातायात नियंत्रण के लिए लगाये गये स्वचालित सिग्नल यंत्र…सतीश जैन,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times तमिलनाडु,मदुरै शहर में यातायात को नियंत्रित करने के लिए स्वचालित सिग्नल स्थापित किए गए हैं और अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। इसकी निरंतरता में, 06.09.2024 को आज रुमम्पुचला जंक्शन पर एक नई स्वचालित सिल का उपयोग किया जाएगा। रुमापुचला जंक्शन मदुरै शहर के पश्चिमी प्रवेश द्वार और केरल राज्य के थेनी जिले के राजमार्ग के मुख्य हिस्सों में से एक है और मुख्य बिंदु है जहां मदुरै उपनगरों से शहर में वाहन आते हैं। कन्याकुमारी श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से मदुरै शहर के लिए मुख्य वाहन मार्ग भी है। थेनी रोड, डुवारिमन रोड और कलावासल जंक्शन को जोड़ने वाले तीन-तरफ़ा जंक्शन पर मौजूदा वाहन यातायात को भी कम करें। दुर्घटनाओं को रोकने और क्षेत्र में अपराध की निगरानी के लिए एक यातायात स्वचालित सिग्नल और एक आधुनिक पुलिस सहायता डेस्क स्थापित की गई है। इसके अलावा, यातायात को विनियमित करने में मदद करने, लाउडस्पीकर के माध्यम से जनता और मोटर चालकों को दुर्घटनाओं और सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता प्रदान करने और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से यातायात उल्लंघन की घटनाओं और अपराधों की निगरानी करने के लिए एक स्वचालित सिग्नल पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किया गया है। 1. तीन प्राथमिक सिग्नल पोस्ट और दो द्वितीयक सिग्नल पोस्ट टाइमर सुविधाओं के साथ, 2. आधुनिक पुलिस बूथ जिसमें मॉनिटर और यूपीएस बैटरी के साथ पांच सीसीटीवी आईपी कैमरे हैं, 3. 51 पोल और स्पीकर के साथ पीए सिस्टम, 4. टेबल, कुर्सियाँ और पानी की सुविधा, 5. तीन रंग की एलईडी स्ट्रिप्स की व्यवस्था की गई है ताकि सिग्नल के रंग के अनुसार सिग्नल चमकें। उपरोक्त सुविधाओं के साथ यातायात सुधार उपकरण सी इसमें आधुनिक यातायात स्वचालित सिग्नल और आधुनिक पुलिस सहायता शामिल है मदुरै मेट्रोपॉलिटन पुलिस उपरोक्त उल्लिखित सुविधाओं के साथ एक आधुनिक यातायात स्वचालन और आधुनिक पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किया जाएगा और श्री जे. लोकनाथन, पुलिस आयुक्त के आदेश से 06.09.2024 (शुक्रवार) को जनता और मोटर चालकों के उपयोग के लिए खोला और चालू किया जाएगा। , मदुरै शहर। साथ ही मदुरै मेट्रोपॉलिटन पुलिस की ओर से अनुरोध किया गया है कि यातायात नियमों का पालन करें, शहर में बिना तेज गति के यात्रा करें, दुर्घटनाओं से बचने के लिए वाहन चलाएं और दुर्घटना मुक्त शहर बनाएं।
साउथ हावडा मे पर्युषण पर्व का सांतवा दिन ध्यान के रुप में मनाया….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times साउथ हावड़ा, आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में प्रेक्षा विहार में पर्युषण पर्व का सातवां दिन ध्यान दिवस के रूप में साउथ हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुनि श्री जिनेशकुमार जी ने कहा – आत्म शुद्धि के दो उपाय है. स्वाध्याय और ध्यान । ध्यान एक नई स्फूर्ति देता है। ध्यान जीने की कला है और जीवन का मूल्यवान पक्ष है। ध्यान के द्वारा किसी को साधा जा सकता है। ध्यान साधान है।, साध्य नहीं है। साध्य तो मोक्ष है। ध्यान के समान कोई पाप का शोधन करने वाला नहीं है। ध्यान आभ्यन्तर तप है। ध्यान संजीवनी बूटी है। ध्यान से देह की, गेह की, स्नेह की आसक्ति दूर होती है। विचारों में अनाग्रह का भाव आता है। ध्यान से व्यक्ति के जीवन में असंग्रह की भावना पैदा होती है। आचरण में अहिंसा का विकास होता है। ध्यान से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। ध्यान में एक ध्यान है- प्रेक्षा ध्यान। प्रेक्षाध्यान ज्योति है, प्रकाश है। गहराई से से देखना ही प्रेक्षाध्यान है। योगों का स्थिरीकरण ध्यान है। मुनिश्री ने आगे कहा आज की भाषा में ध्यान के पांच हेतु है। तनाव मुक्ति मन: प्रसाद, संवेग नियंत्रण, संतोष, अन्तर्दृष्टि का जागरण है। ध्यान का जन्म कषाय, आसक्ति के त्याग से व्रत नियम धारणा व इन्दिय और मन के विजय से होता है गुरुदेव तुलसी की सन्निधि में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने प्रेक्षाध्यान का शुभारंभ किया। ध्यान दिवस पर इतना ही कहना चाहता हूं सभी भाई बहिन प्रेक्षा ध्यान की साधना के द्वारा जीवन को रुपान्तरित करें। मुनि श्री परमानंदजी ने पौषध व्रत के बारे में बताते हुए पौषध की प्रेरणा दी। इस अवसर पर बाल मुनिश्री कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान करते हुए प्रेक्षा ध्यान की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल उत्तर हावड़ा के मंगलाचरण से हुआ। प्रेक्षा प्रशिक्षक – प्रशिक्षिकाओं ने प्रेक्षा गीत का संगान किया। कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री परमानंदजी ने किया।
🌸 *पर्युषण पर्वाधिराज : सातवां दिवस ध्यान दिवस के रूप में समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) ,पर्युषण महापर्व का सातवां दिवस। ध्यान दिवस का समायोजन। महावीर समवसरण में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तीर्थ एवं तीर्थंकरों पर चर्चा के संदर्भ में भगवान पार्श्वनाथ के जीवनवृत्त को मुनि पार्श्वकुमारजी व मुनि केशीकुमारजी ने प्रस्तुति दी। दस धर्मों में एक ब्रह्मचर्य धर्म पर साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। ब्रह्मचर्य धर्म पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने गीत का संगान किया। साध्वी स्तुतिप्रभाजी ने ध्यान दिवस पर गीत का संगान किया। ध्यान दिवस पर साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने ध्यान के महत्त्व को व्याख्यायित किया। जन-जन को मानवता का संदेश प्रदान करने वाले युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ के वर्णन के साथ जोड़ते हुए भगवान महावीर की आत्मा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में गर्भस्थ होती है। भगवान महावीर के पांच प्रसंग एक ही नक्षत्र में सम्पन्न हुए। प्रभु महावीर की आत्मा दशम देवलोक से च्युत हुई तब चौथे अर का अंतिम समय था। उस समय आषाढ़ शुक्ला षष्ठी को वैशाली नगरी के उपनगर ब्राह्मणकुण्ड नामक गांव में ऋषभदत्त नामक ब्राह्मण की पत्नी देवानंदा के गर्भ में गर्भस्थ होती है। पुनः इन्द्र के निर्देश पर देवानंदा के गर्भ को क्षत्रीय सिद्धार्थ की पत्नी त्रिशला की गर्भ में स्थापित किया और त्रिशला के गर्भ को देवानंदा के गर्भ में स्थापित कर दिया गया। शिशु का विकास अब त्रिशला के गर्भ में हो रहा है। गर्भस्थ शिशु मां को कष्ट न हो इसके लिए अपना हलन-चलन बंद कर किया तो मां दुःखी हो गयी। मां को दुःखी देख बालक ने पुनः अपना हलन-चलन प्रारम्भ कर दिया। माता-पिता कितने उपकारी होते हैं। उस शिशु ने गर्भ में ही यह प्रतिज्ञा कर ली कि माता-पिता के संसार में रहते हुए साधु दीक्षा नहीं स्वीकार करूंगा। चैत्र शुक्ला त्रयोदशी को रात्रि में जन्म हुआ। बालक के जन्मोत्सव मनाया गया। आचार्यश्री ने ध्यान दिवस के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि ध्यान अपने आप में साधना है। हमारे यहां प्रेक्षाध्यान की पद्धति प्रचलित है। 30 सितम्बर को प्रेक्षाध्यान दिवस पर प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष का शुभारम्भ होने वाला है। प्रेक्षाध्यान दिवस गुरुदेव तुलसी के शासनकाल में व मुनि नथमलजी (टमकोर) के योगदान से प्रारम्भ हुआ। वह केवल तेरापंथ के लिए नहीं, जैन-अजैन सभी के लिए कारगर बना। प्रेक्षाध्यान साधना का एक उपक्रम है। आज भी कितने लोग ध्यान का प्रयोग करने वाले होंगे। अनेक रूपों में ध्यान हो सकता है। दीर्घश्वास, समताल, शरीर प्रेक्षा, अनुप्रेक्षा, कायोत्सर्ग आदि अनेक विधियां हैं। आदमी अपने जीवन में यथायोग्य ध्यान का भी अभ्यास करें, यह काम्य है। पर्युषण के शिखर दिवस के संदर्भ में प्रेरणा देते हुए आचार्य श्री ने आगे कहा की कल महान दिन है। भगवती संवत्सरी का दिन है। वह पर्युषण का मानों सरताज दिन है। उसे आध्यात्मिक रूप में मनाने का प्रयास होना चाहिए। चारित्रात्माओं को तो उस दिन चौविहार उपवास रखना होता ही है। इसके साथ श्रावक-श्राविकाएं भी उपवास करते हैं। इससे छोटे बालकों को भी संयम के साथ यथासंभव जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने आवश्यक जानकारी भी दी। *भगवती संवत्सरी कल : उपवास, तपस्या, प्रतिक्रमण द्वारा आराधना* आचार्य श्री के सान्निध्य में कल संवत्सरी महापर्व मनाया जायेगा। जिसके तहत धर्मावलाबी चौविहार, तिविहार उपवास करेंगे। साथ ही सैकड़ों तपस्वियों द्वारा अठाई तप का प्रत्याख्यान किया जायेगा। प्रातः 07 बजे से महावीर समवसरण में प्रवचन कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएगा जिसके तहत आचार्यश्री एवं अन्य साधु-साध्वियों जैन इतिहास, दर्शन, तत्व आदि पर वक्तव्य देंगे। हजारों श्रावक–श्राविकाएं पौषध द्वारा भी संयम विहार में रहकर धर्म आराधना करेंगे।
सत्य भारती स्कूल जाटी भांडू में संपन्न हुयी अभिभावक-शिक्षक बैठक….मदा राम,जिला संवाददाता जोधपुर, Key Line Times जोधपुर,भारती एयरटेल फाउंडेशन राजस्थान के रीजनल हेड संदीप सारडा और जिला समन्वयक सुभाष यादव और क्षेत्रीय समन्वयक जितेन्द्र सोलंकी के निर्देशानुसार आज सत्य भारती स्कूल जाटी भांडू में अभिभावक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने मीटिंग उपस्थिति सभी अभिभावकों के साथ उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा के बारे में चर्चा की गई, उन्होंने अभिभावको से अपने बच्चों की शिक्षा में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। और माताओं अभिभावकों के मध्य खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की गई, भाग लेने वाली समस्त माताओं अभिभावकों को प्रशंसा पत्र दिए गए। इस दौरान प्रधानाध्यापक प्रेमाराम जवलिया, भोमाराम, हमीर लवारन, मेहराराम,प्रेमाराम मुंडण, संतोष, दल्लाराम, चौथाराम, बागाराम, श्रवण राम, पुखराज चौधरी, तीजो समस्त शिक्षक एवं अभिभावकगण उपस्थित थे।