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चंडीगढ़ मे सिनियर सीटीजन एसोसिएसन द्वारा महिला सशक्तिकरण परियोजना का आयोजन… सतविंदर कौर,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times चंडीगढ़ सीनियर सिटिज़न्स एसोसिएशन ने आज अपने महिला सशक्तिकरण परियोजना की शुरुआत कम्युनिटी सेंटर रामदरबार में की। इसका उद्घाटन क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती नेहा द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया और उन्हें हमारे महिला स्वयंसेवक श्रीमती अलका वालिया, सचिव वेलफेयर और ओशन सोसाइटी सचिव द्वारा सैनिटरी नैपकिन, बिस्कुट और फल वितरित किए गए। श्री सुभाष अग्रवाल, अध्यक्ष और श्री ब्रिगेडियर सप्रा, उपाध्यक्ष ने बताया कि यह परियोजना 4 साल बाद फिर से शुरू की गई है। हर महीने रामदरबार में एक बैठक आयोजित की जाएगी, और परियोजना-23 वेलफेयर सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि क्षेत्र में रहने वाली अधिकतम महिलाएं इसमें भाग लें। पार्षद श्रीमती नेहा से एक सिलाई शिक्षा केंद्र की शुरुआत के लिए भी अनुरोध किया गया, और उन्होंने इस परियोजना के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। श्री एस के माहेश्वरी, श्री विकास गोयल, श्रीमती मीनू , श्री विवेक शर्मा, श्रीमती स्वीटी और श्री पी.के. सूरी ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज की।
सुरत मे आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि परिग्रही मानव के लिए तप, दम और नियम की साधना कठिन…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 28.08.2024, बुधवार, वेसु, सूरत (गुजरात), युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी मंगल सन्निधि अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में द्विदिवसीय तेरापंथ कन्या मण्डल के ‘ज्योतिर्मय’ थीम पर आधारित 20वें अधिवेशन के अंतिम दिन मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान मंचीय उपक्रम बुधवार को रहा। देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंची सैंकड़ों कन्याओं को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान किया तो साध्वीप्रमुखाजी ने कन्याओं को मंगल प्रेरणा प्रदान की। बुधवार को महावीर समवसरण में उपस्थित जनता व अधिवेशन में सम्मिलित कन्याओं को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जो आदमी परिग्रही होता है, परिग्रह में अनुरक्त रहता है, मोह-माया की दुनिया में रमण करने वाला होता है तथा बाह्य आकर्षणों से आक्रान्त रहता है, इन्द्रिय विषयों के सेवन में रचा-पचा रहता है, ऐसे आदमी को यह पता ही नहीं होता कि उसे आगे भी जाना है। जहां चेतना आसक्ति में निमग्न है, वैसे आदमी के जीवन में न तप दिखाई देता है, दम दिखाई देता और न ही नियम दिखाई देता है। जीवन में तप, दम और नियम की बात बताई गयी है। स्वाद विजय की साधना तपस्या होती है। आसन विजय की साधना भी तपस्या होती है। विशेष साधक आसन विजय, निद्रा विजय और क्षुधा विजय करने वाले होते हैं। भोजन तो प्राणी को अपने जीवन को और देह को चलाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। शरीर से काम लेना है तो शरीर को भोजन के रूप में भाड़ा देना होता है। सामान्य मानव हो अथवा साधु, सभी को शरीर से कार्य करना है, विहार करना है, सेवा करना है तो शरीर को पोषण देने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। साधु के लिए बताया गया कि भोजन करने तो भी उसमें ज्यादा स्वाद लेकर नहीं करना चाहिए। अस्वाद की स्थिति होनी चाहिए। स्वाद विजय और उनोदरी भी तपस्या है। आसन विजय की भी साधना है। सोने, बैठने आदि में भी एक आसन में स्थित हो जाना भी साधना होती है। फिर निद्रा जय एक प्रकार की साधना है, किन्तु सामान्य मानव के लिए निद्रा की आवश्यकता होती है। उपयुक्त मात्रा में नींद, उपयुक्त मात्रा में भोजन आदि में संतुलन रखने का प्रयास करना चाहिए। इन्द्रिय विजय की साधना को दम कहा गया है। इसी प्रकार मानव अपने जीवन में अनेक कार्यों को नियमित रूप से करने का नियम भी ले सकता है। मानव को अपने जीवन में तप, दम और नियम को जीवन में रखने का अभ्यास करना चाहिए तथा आत्मा को अध्यात्म से भावित करने का लक्ष्य रखने प्रयास और उस दिशा में पुरुषार्थ करने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री गजसुकुमाल मुनि के मोक्ष में जाने व उनके वियोग आदि प्रसंगों को आख्यान रूप में प्रदान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने आख्यान के इस क्रम को सम्पन्न करने की घोषणा भी की। अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय तेरापंथ कन्या मण्डल के 20वें राष्ट्रीय अधिवेशन की ‘ज्योतिर्मय’ थीम के साथ समायोजित हुआ। इसके अंतिम मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में मंचीय उपक्रम रहा। इस संदर्भ में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती सरिता डागा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ कन्या मण्डल की प्रभारी श्रीमती अदिति सेखानी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। तेरापंका कन्या मण्डल-सूरत ने अपनी प्रस्तुति दी। उपस्थित कन्याओं ने चौबीसी के गीत का संगान किया।तदुपरान्त साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभाजी ने उपस्थित कन्याओं को मंगल अभिप्रेरणा देते हुए कन्याओं को जीवन ज्योतित करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। युगप्रधान आचार्यश्री ने अधिवेशन में उपस्थित कन्याओं को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य एक विकसित प्राणी होता है और वह जो उत्कृष्ट साधना कर सकता है, अन्य कोई प्राणी साधना नहीं कर सकता। कन्या मण्डल का यह अधिवेशन अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के अंतर्गत हो रहा है। कन्याओं में श्री, लज्जा, धैर्य, कीर्ति, बुद्धि और लक्ष्मी रूपी विशेषणों का विकास होता रहे। इन छह देवी रूपों कन्याएं अच्छा विकास करें। कन्याएं अच्छी श्राविकाएं बनें और अच्छे धार्मिक-आध्यात्मिक कार्य करती रहें और स्वयं के विकास का प्रयास करती रहें।
आचार्य महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन मे कहा कि प्रमाद के कारण अनेकानेक योनियों में भ्रमण करती है आत्मा…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 27.08.2024, मंगलवार, वेसु, सूरत (गुजरात),सम्पूर्ण भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपनी समृद्धि के लिए विख्यात गुजरात राज्य का सबसे प्राचीन तथा हीरे और कपड़े के व्यवसाय से सुप्रसिद्ध सूरत नगरी वर्तमान में अध्यात्म नगरी के रूप में अपनी छटा बिखेर रही है। सूरत की बदलती इस सूरत का कारण जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का इस नगरी में पावन चतुर्मास। ऐसे महागुरु की सन्निधि में देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने से व्यापारिक नगरी अध्यात्म प्रेमियों की नगरी भी बन रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु मानवता के मसीहा के दर्शन व मंगल प्रवचन से जीवन अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं। इतना ही तेरापंथ धर्मसंघ से जुड़ी संस्थाओं व संगठनों के अधिवेशन आदि के कार्यक्रमों का भी अनवत क्रम बना हुआ है। मंगलवार को भी अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में तेरापंथ कन्या मण्डल का 20 अधिवेशन भी शुभारम्भ हुआ। महावीर समवसरण में मंगलवार को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीवर्याजी ने उपस्थित जनता को उद्बोधित किया। तदुपरान्त शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम समुपस्थित जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि प्राणी अनेक योनियों में जाता है और नाना प्रकार के आघातों का प्रतिसंवेदन करता है, कष्ट भी भोगता है। प्रश्न हो सकता है कि अलग-अलग योनियों में जीवन को कौन ले जाता है? आगम में उत्तर प्रदान किया गया कि प्राणी अपने प्रमाद के कारण अनेक रूप वाली योनियों में जाता है और आघातों का अनुभव भी करता है। जैन आगमों में बताया गया है कि सुख और दुःख की कर्ता-धर्ता स्वयं उस प्राणी की आत्मा ही होती है। जैसा कर्म आत्मा करती है, प्राणी उसी प्रकार सुख अथवा दुःख को प्राप्त करता है। प्राणी के कर्म ही उसे कष्ट देने वाले होते हैं। पाप का आचरण करने वाला यथा चोरी, हिंसा, हत्या, लूट, किसी को कष्ट देने वाला अपने लिए स्वयं दुःख का प्रबन्ध कर लेता है। दुःख, कष्ट को दूर करने लिए प्राणी को अधिक से अधिक प्रमाद से बचने का प्रयास करना चाहिए। प्रमाद से बचने के लिए प्राणी को प्रमाद से बचते हुए आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास हो तो संभव है, कभी मोक्ष की प्राप्ति भी हो सकती है। आदमी को अपने कर्म पर ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए। आदमी के अपने भीतर में उत्पन्न हो रहे प्रमाद से भी बचने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री गजसुकुमाल मुनि के आख्यान क्रम का वाचन किया। कार्यक्रम में गुजरात की धरा से संबद्ध मुनि निकुंजकुमारजी अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। ‘रश्मियां रश्मिरथ की, गाथा महाश्रमण की’ विशेषांक को श्रीमती प्रभा जैन, श्री विनोद मरोठी आदि ने पूज्यप्रवर के समक्ष लोकार्पित किया। इस संदर्भ में श्रीमती प्रभा जैन ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।
अणुव्रत विश्व भारती द्वारा प्रसिद्ध उद्योगपति श्री रतन टाटा को दिया गया अणुव्रत पुरस्कार…आर.के.जैन,एडिटर इन चीफ, Key Line Times मुंबई 27-8-2024 *अणुव्रत विश्व भारती द्वारा दिये जाने वाले प्रतिष्ठित ‘‘अणुव्रत पुरस्कार’’ वर्ष 2023 के लिए प्रसिद्ध उद्योगपति व समाज सेवी श्री रतन टाटा को मुम्बई स्थित उनके आवास पर भेंट किया गया*। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर के साथ वहां पहुंचे प्रतिनिधि मण्डल ने श्री रतन टाटा को पुरस्कार स्वरूप स्मृति चिन्ह, प्रशिस्त पत्र सहित 1.51 लाख की राशि भेंट की। इस अवसर पर अणुविभा के महामंत्री श्री भीखम सुराणा, मुम्बई कस्टम कमिश्नर श्री अशोक कुमार कोठारी, अणुविभा उपाध्यक्ष श्री विनोद कुमार व सहमंत्री श्री मनोज सिंघवी उपस्थित थे। अणुविभा अध्यक्ष श्री नाहर ने श्री रतन टाटा को अणुव्रत पुरस्कार सौंपते हुए मानव जाति को उनके सकारात्मक योगदान की प्रशंसा की एवं दुनिया में मानवीयता का एक श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए सम्पूर्ण अणुविभा परिवार की ओर से बधाई ज्ञापित की। उन्होंने आगे बताया कि अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण ने श्री रतन टाटा के प्रति अपनी मंगल कामनाएं प्रेषित की हैं तथा उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की है। श्री रतन टाटा ने अणुव्रत अनुशास्ता के प्रति अपना हार्दिक आदर व सम्मान व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि 75वर्षों से गतिमान अणुव्रत आंदोलन मानवीय एकता, नैतिकता, अहिंसा व सद्भावना के क्षेत्र में विशद कार्य कर रहा हैं। आचार्य तुलसी द्वारा प्रणीत यह आंदोलन संयुक्त राष्ट्र तक अपनी विशेष पहचान स्थापित कर चुका है। अणुव्रत पुरस्कार की श्रृंखला में अभी तक देश के गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया है, जिनमें – श्री आत्माराम, श्री जैनेन्द्र कुमार, श्री शिवाजी भावे, श्री शिवराज पाटिल, श्री नीतिश कुमार, डॉ. ए.पी. जे. अब्दुल कलाम, डॉ. मनोहन सिंह, श्री टी.एन. शेषन, श्री प्रकाश आमटे इत्यादि शामिल है। इस अवसर पर अणुविभा प्रतिनिधि मण्डल ने श्री रतन टाटा को अणुव्रत साहित्य, ‘अणुव्रत’ व ‘बच्चों का देश’ पत्रिकाओं के विशेषांक भेंट किये एवं अणुव्रत की प्रवृत्तियों चुनावशुद्धि अभियान, अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स, एलिवेट, पर्यावरण जागरूकता अभियान, नशामुक्ति अभियान, जीवन विज्ञान आदि के बारे में जानकारी प्रदान की। श्री रतन टाटा ने मनाव समाज की भलाई के लिए अणुव्रत आंदोलन द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। समाचार प्रदाता.. कुसुम लुनिया राष्ट्रीय संगठनमंत्री अणुविभा
आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि गृहस्थ हो या साधु, जीवन में रखे समता….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 26.08.2024, सोमवार, वेसु, सूरत (गुजरात) ,सूरत शहर के वेसु क्षेत्र में स्थित भगवान महावीर युनिवर्सिटि परिसर में बने भव्य संयम विहार में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी वर्ष 2024 का चतुर्मास कर रहे हैं। सोमवार को अध्यात्म जगत के पुरोधा आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आयारो आगम के एक सूक्त में समता धर्म का समाचरण करने का संदेश दिया गया है। मनुष्य अपने जीवन में हर्षान्वित हो जाते हैं तो कभी आक्रोश और गुस्से में भी आ जाते हैं। अनुकूल स्थिति होता है तो आदमी प्रसन्न हो जाता है और प्रतिकूल परिस्थिति आ जाए तो आदमी दुःखी हो जाता है, कष्ट की अनुभूति करने लगता है। इसलिए यह बताया गया कि यह जीवन अनेक बार उच्च गोत्र वाला भी बन गया और अनेक बार नीच गोत्र वाला भी बन गया। कोई हीन नहीं और कोई अतिरिक्त नहीं होता। सामान्य व्यवहार में बड़ा और छोटा, हीन और अतिरिक्त, उच्चता और नीचता की बात हो सकती है। कोई उम्र में बहुत ज्यादा तो कोई बहुत उम्र वाला हो सकता है। कोई राजनीति में बहुत ऊंचे पद पर होता है तो कोई नीचे पद भी होता है। कोई धन-धान्य से बहुत उच्च होता है तो कोई धनहीन होता है। यह उच्चता और नीचता इस जीवनकाल की बातें हैं। मनुष्य अपनी आत्मा पर ध्यान दे कि आज कोई धनहीन है वो कभी किसी जन्म में बहुत उच्च कोटि का धनवान हो सकता है। कभी कोई बहुत ज्ञानवान रहा हो सकता है तो कभी कोई अल्पज्ञानी भी रहा हो सकता है। सिद्धों की दृष्टि से देखा जाए तो कोई हीन और कोई अतिरिक्त नहीं होता। इसलिए आयारो में बताया गया कि आत्मा के संदर्भ में कोई हीन नहीं और कोई अतिरिक्त नहीं होता। इसलिए कोई ऊंच और नीच की बात नहीं है। संसारी अवस्था में देखें तो भी जो इस जन्म में पिता है, वह अगले जन्म में अपने पुत्र का पुत्र हो जाए। इसलिए आयारो आगम में यह प्रेरणा दी गई कि कभी जीवन में उच्चता की स्थिति आ जाए अथवा कभी मंदता और नीचता की स्थिति आ जाए तो भी मानव हर्ष और विषाद में जाने से बचने का प्रयास करना चाहिए। जिन्दगी में भौतिक अनुकूलता मिले तो ज्यादा खुशी नहीं मनाना और कभी भौतिक प्रतिकूलता प्राप्त होने से लगी तो बहुत ज्यादा दुःखी नहीं बनना चाहिए। जहां तक संभव हो दोनों ही परिस्थितियों में समता में रहने का प्रयास करना चाहिए। साधु के लिए बताया गया कि साधु को भोजन मिले तो भी ठीक और नहीं मिले तो भी ठीक कहा गया है। अगर भोजन नहीं मिला तो साधु यह सोचे कि मुझे तपस्या का मौका मिल गया और मिल गया तो शरीर को पोषण मिल सकेगा। इस प्रकार का चिंतन कर साधु को समता में रहने का प्रयास करना चाहिए। साधु को तो समता मूर्ति तो होना ही चाहिए, गृहस्थों को भी जहां तक संभव हो सके, समता में रहने का प्रयास करना चाहिए। परिवार में कभी कोई कटु बोल दे तो भी समता और शांति रखने का प्रयास रखना चाहिए। परिवार में कलह की स्थिति न बने, ऐसा प्रयास करना चाहिए। समता रखने वाला बड़ा होता है। इसलिए साधु हो अथवा गृहस्थ उसे अपने जीवन में समता रखने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने गजसुकुमाल मुनि के आख्यान क्रम का वाचन किया। तदुपरान्त आचार्यश्री श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुआ कि आज भाद्रव कृष्णा अष्टमी का प्रसंग है। मैंने आचार्यश्री महाप्रज्ञजी की आज्ञा से श्रीमद्भगवद्गीता व जैन आगम पर कई भाषण दिए थे। श्रीमद्भगवद्गीता में 18 अध्यायों में श्रीकृष्ण व अर्जुन का संवाद है। इन ग्रंथों से अच्छी बातें अपनाकर आगे बढ़ते रहने का प्रयास करें। तेरापंथ किशोर मण्डल-सूरत ने चौबीसी के गीत तथा तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने पुरानी ढाल को प्रस्तुति दी।
— चंडीगढ़ सीनियर सिटिजन्स ऐसोसिएशन ने महिला सशक्तिकरण परियोजना का किया शुभारंभ….सतविंदर कौर,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times चंडीगढ़,चंडीगढ़ सीनियर सिटिज़न्स एसोसिएशन ने आज अपने महिला सशक्तिकरण परियोजना की शुरुआत कम्युनिटी सेंटर रामदरबार में की। इसका उद्घाटन क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती नीना द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया और उन्हें हमारे महिला स्वयंसेवक श्रीमती रीना वालिया, सचिव वेलफेयर और ओशन सोसाइटी सचिव द्वारा सैनिटरी नैपकिन, बिस्कुट और फल वितरित किए गए। श्री सुभाष अग्रवाल, अध्यक्ष और श्री ब्रिगेडियर सप्रा, उपाध्यक्ष ने बताया कि यह परियोजना 4 साल बाद फिर से शुरू की गई है। हर महीने रामदरबार में एक बैठक आयोजित की जाएगी, और परियोजना-23 वेलफेयर सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि क्षेत्र में रहने वाली अधिकतम महिलाएं इसमें भाग लें। पार्षद श्रीमती नीना से एक सिलाई शिक्षा केंद्र की शुरुआत के लिए भी अनुरोध किया गया, और उन्होंने इस परियोजना के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। श्री एस के माहेश्वरी, श्री विकास गोयल, श्रीमती मीनू, श्री विवेक शर्मा, श्रीमती स्वीटी और श्री पी.के. सूरी ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज की। —
गुजरात के सुरत मे आचार्य महाश्रमणजी के सानिध्य में सुप्रसिद्ध लेखिका डा.कुसुम लुनिया द्वारा लिखित “सर्वोत्तम जीवनशैली” का हुआ लोकार्पण… आर.के.जैन, मुख्य संपादक, Key Line Times “सर्वोत्तम जीवनशैली” सत्प्रेरणा और सन्मार्ग दर्शक ग्रन्थ सिद्ध हो* *आचार्य महाश्रमण* सुरत , गुजरात भारत के स्वर्णिम वर्तमान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सानिध्य में सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ. कुसुम लुनिया द्वारा लिखित जैन विश्व भारती -आदर्श साहित्य संघ विभाग द्वारा प्रकाशित जैन जीवनशैली पर आधारित शौध ग्रन्थ “सर्वोत्तम जीवनशैली “का लोकार्पण सुरत ,गुजरात में हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अमृत देशना में फरमाया कि “सर्वोत्तम जीवनशैली “ग्रन्थ पुस्तक आज सामने आया है। मनुष्य की जीवनशैली अच्छी रहे ,उसमें त्याग संयम तप स्वाध्याय ये तत्व भी सन्निहित हों। आदमी का रहन-रहन ,खान -पान ,चिन्तन-मनन , सोना – जागना- उठना* सब क्रियाओं में संयम एवं विवेक हो। आध्यात्मिकता -धार्मिकता जीवनशैली के साथ जुडी हुई हो तो जीवनशैली भी सर्वोत्तम बन सकती है*।यह बहुत ही अच्छी बात है।सर्वोत्तम बहुत ऊंचा शब्द है परन्तु यह असम्भव भी नहीं लगता। आपने आशीर्वचन के साथ उदबोधन फरमाया कि *सर्वोत्तम जीवनशैली” पुस्तक पाठक को सत्प्रेरणा और सन्मार्ग दर्शन देने वाला ग्रन्थ सिद्ध हो।*यह ग्रन्थ सफलता को प्राप्त हो*। लेखिका की प्रतिभा का उपयोग लेखन , भाषण, चिन्तन एवं सलाह देने में भी हो सकता है, कर्मजा शक्ति का, पुरूषार्थ शक्ति का उपयोग होता रहे। खूब अच्छा काम चलता रहे।अणुव्रत का भी काम चलता रहे। मुनि श्री दिनेश कुमार जी के कुशल संचालन में, मुनिश्री कीर्ति कुमार जी के आध्यात्मिक पर्यवेक्षण में श्री जैयन्ति लाल सुराना, डॉ धनपत लुनिया, श्री संजय सुराना, श्री संजय भंसाली अवधेश भाई को लोकार्पण हेतु आंमत्रित किया गया।वतन -विशाल लुनिया एवं अंजु सुराणा की विशेष उपस्थिति रही। इस अवसर पर विदुषी लेखिका ने कृतज्ञ भावों से ह्रदय के उदगार व्यक्त किये।जैन तेरापंथ धर्म के एकादशम अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी से भरपूर आशीर्वाद पाकर जैन विश्व भारती एवं लुनिया तथा बोथरा परिवार कृत्य कृत्य हो गया।