बालेसर । जागरूकता की कमी के साथ शिक्षा का अभाव व गरीबी के कारण अक्षय तृतीया पर अबूझ सावों की आड़ मे लड़के व लड़कियों का बाल विवाह कर बैठते है। बाल विवाह रोकथाम व जागरूकता कार्यक्रम को लेकर बाल विवाह प्रतिषेध अभियान *’बाल विवाह को कहे ना”* के क्रम मे जोधपुर जिला न्याय क्षेत्र की तालुका विधिक सेवा समिति बालेसर के निर्देशानुसार बाल विवाह रोकथाम अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य को लेकर बुधवार को पैरा लिंगल वांलिटियर अमराराम यादव ने चामू ब्लॉक क्षेत्र की राउमावि डेरिया में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर विधार्थियों के साथ ग्रामीणों को बाल विवाह से होने वाले घातक परिणामों के साथ संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी। समाजसेवी सिमरथाराम पथिक ने विधार्थियों को बाल विवाह प्रथा अधिनियम शारदा एक्ट 1929 के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया की इस एक्ट के तहत 1 अप्रैल 1930 को बाल विवाह प्रथा को पहली बार समाप्त किया गया था जिसमें लड़के की उम्र 18 वर्ष और लड़की की उम्र 14 वर्ष रखी गई थी लेकिन बाद मे इसे संसोधन कर 1978 एक्ट में लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की उम्र 18 वर्ष कर दी गई। सामाजिक कार्यकर्ता जोगाराम कडे़ला ने विधार्थियों को बाल संरक्षण कानून के बारे मे जानकारी देकर जागरूक किया गया। संस्था प्रधान लालाराम गुर्जर ने बाल विवाह रोकथाम के बारे में विधार्थियों व ग्रामीणों को जानकारी देकर जागरूक किया।
इस अवसर खुशालाराम, गंगासिंह, गुलाब सिंह , जेठाराम कड़ेला, राजूनाथ कालबेलिया सहित अन्य ने जागरूकता कार्यक्रम मे भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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