
रामदेव सजनाणी, रिपोर्टर आल इंडिया
Key Line Times
राजस्थान,एक लाख का इनामी, पांच राज्यों का अपराधी रमेश कोलकाता से गिरफ्तार,एएनटीएफ और एटीएस की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन “विषाणुबाहु” चलाकर एक बड़े अपराधी को दबोचने में सफलता प्राप्त की है। यह अपराधी रमेश कुमार उर्फ अनिल उर्फ रामलाल पुत्र सोहन लाल जाति बिश्नोई उम्र 31 साल निवासी शिव मन्दिर के पास, नेडी नाडी पुलिस थाना धोरीमन्ना जिला बाड़मेर है, जो एक लाख का इनामी, पांच राज्यों का अपराधी, राजस्थान का टॉप-10 फरार अपराधी है। रमेश राजस्थान में MD के काले कारोबार और जहर परोसने का मुख्य रसोइया था। वह अवैध मादक पदार्थ, चोरी, मारपीट, फिरौती के लिए अपहरण आदि गम्भीर अपराधों में लिप्त था। उसकी उम्र केवल 31 साल की है, परन्तु उसपर चल रहे मुकदमों की कुल संख्या लगभग तीन दर्जन के आस पास है। पांच राज्यों राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में रमेश के अपराध की धमक पहुँच चुकी थी और उस पर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। राजस्थान में लगभग 15-17, गुजरात में 8, तेलंगाना में 3, महाराष्ट्र में 2 और कर्नाटक में 1 मुकदमा होना रमेश स्वयं स्वीकार कर चुका है, जिसका सत्यापन किया जा रहा है। आसाम और मणिपुर में भी फर्जी नाम से अपराध करने और मुकदमा दर्ज होने की सूचना आयी है, जिसका सत्यापन किया जाना है। करीब 8 वर्षों से फरार रहकर काला कारोबार चला रहा था आरोपी रमेश। पश्चिमी राजस्थान में MD के काले कारोबार का सरगना था रमेश। हाल के दिनों में पश्चिमी राजस्थान में MD की फैक्टरियों की संख्या में अचानक हुई वृद्धि का सीधे जिम्मेदार थे रमेश और उसका गैंग। जोधपुर के कुड़ी भगतासनी इलाके में पकड़ी गयी फैक्ट्री रमेश के द्वारा ही लगायी गयी थी। बाड़मेर के सेड़वा इलाके में पकड़ी गयी MD फैक्ट्री का मुख्य सूत्रधार भी रमेश ही था। सिरोही के इलाके में पकड़ी गयी फैक्ट्री का कर्ता-धर्ता भी रमेश का ही गैंग था। इसके अतिरिक्त अन्य कई फैक्ट्री से रमेश के जुड़े होने की सूचना आयी है, जिसे अनुसंधान की गोपनीयता की दृष्टि से उजागर नहीं किया जा रहा है। भारी मुनाफे का काला कारोबार – महाराष्ट्र से रमेश MD बनाने का नया और सस्ता फार्मूला सीखकर आया था। इस फार्मूला में ब्रोमो, कास्टिक सोडा, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, टार्लबन और एथिल अल्कोहल को मिलाकर केमिकल प्रक्रिया से MD बनायीं जाती थी। इस प्रक्रिया में 5 से 7 दिन लगते थे। कुल खर्च प्रति किलोग्राम एक लाख के आस पास आता था, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 30 लाख आँकी जाती है। इस प्रकार करोड़ों रुपये कूट लिया रमेश ने इस अवैध व्यापार से और खूब सम्पति बना डाली। कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा – महाराष्ट्र की जेल में सरगना डॉ. बिरजू के संपर्क में आने के बाद रमेश के कदम MD के घिनौने व्यापार की ओर बढ़ गए। पहले तो महाराष्ट्र से खुदरा में MD बनाकर राजस्थान आपूर्ति का कार्य शुरू किया, पर मुनाफे को तेजी से बढ़ाने के लिए उसने स्वयं MD की फैक्ट्री लगाने का काम शुरू कर दिया। इसके लिए अपने 2-3 सहयोगियों को अपने पार्टनर बनाया। अलग-अलग जिलों में अलग-अलग पार्टनर बनाकर उनकी जमीन और मकान में कारखाना स्थापित कराया। महाराष्ट्र से डॉ. बिरजू के माध्यम से केमिकल एक्सपर्ट आते थे। मुंबई की एक महिला के माध्यम से मुंबई-पुणे और गुजरात से केमिकल्स आते थे। फाइनेंस की व्यवस्था के लिए मारवाड़ से कोई मोटा आसामी खोजा जाता था। तैयार माल को गाड़ियों से गुजरात और महाराष्ट्र भेजकर वहां से फुटकर में राजस्थान सप्लाई कराई जाती थी, ताकि किसी को कानोकान शक न हो। शातिर रमेश कभी बहुरुपिया तो कभी छलिया बनकर न सिर्फ पुलिस बल्कि अपने सहयोगियों को भी चकता रहा। रमेश ने अपने कई अलग अलग नाम रखे हुए थे। कहीं वह रमेश, कहीं रामलाल, कहीं अनिल तो कहीं कुछ और नाम रखकर कारोबार करता था। रमेश पुत्र सोहनलाल, उम्र 31 साल, निवासी शिव मंदिर के पास नेड़ी नाड़ी पुलिस थाना धोरीमन्ना, जिला बाड़मेर न सिर्फ MD के कारोबार का मुख्य सूत्रधार तो था ही, वाहन चोरी, शराब तस्करी, मारपीट, लूट, फिरौती के लिए अपहरण जैसे अपराधों का भी सरगना रहा है। भंवरी देवी काण्ड का सूत्रधार आरोपी बिश्नाराम भी करीबी सहयोगी रहा है रमेश का। आपराधिक करियर के शुरुवात में रमेश वाहन चोरी का बड़ा कारोबार करता रहा है। बिश्नाराम जो एक बड़े आपराधिक गैंग का सूत्रधार रहा है, को रमेश ने दर्जनों चोरी की गाड़ियां, अवैध शराब के परिवहन और नशे के कारोबार के लिए आपूर्ति की और उसका प्रमुख सहयोगी भी रहा। बाद में धंधा बढ़ा लेने के बाद रमेश स्वयं ही सरगना बन बैठा और बिश्नाराम से सम्बन्ध तोड़ लिया। एक ही टकसाल से एक ही सांचे में ढल कर निकलते आये हैं नशे की दुनिया के शहंशाह। ज्यादातर बड़े तस्करों की तरह ही रमेश भी 12 वीं के बाद पढाई को तोबा करके आवारागर्दी की दुनिया में कूद पड़ा। शौक पूरे करने के लिए पहले तो गाड़ियां चुरानी शुरू की, फिर इसे ही कमाई का धंधा बना लिया। सैकड़ों वाहन चोरी करके इसे तस्करों को बेचकर अच्छी खासी कमाई की रमेश ने, फिर स्वयं ही शराब तस्करी के धंधे में कूद पड़ा। अकूत सम्पति बनाने के बाद रमेश ने अपना कारोबार बढ़ाकर कई राज्यों के कर लिया और हर राज्य में “जैसा देश-वैसा वेश” की तर्ज पर कई प्रकार के काले कारोबार करने लगा। महाराष्ट्र की जेल में एमडी के धंधेबाज डॉ. बिरजू से मुलाकात के बाद तो उसके आपराधिक जीवन की दशा-दिशा ही बदल गयी और वह एमडी के धंधे का सूत्रधार बनकर अरबपति बनने के सपने देखने लगा। सूत्रों के अनुसार रमेश ने वर्ल्ड स्टोन के नाम से धोरीमन्ना में मार्बल की बड़ी फैक्ट्री लगवा राखी है। अर्चना कार डेकॉर के नाम से भी उसने दूकान खुलवा रखी है। दसियों प्लॉट्स, फार्म हाउस और दुकानों की बात भी सामने आयी है। पकडे जाने की पटकथा – अंतर्फ के लगातार बढ़ते दबाव के कारण रमेश के राज्य से पलायन कर जाने की सूचनाएं क्षेत्र के मुखबिरों से प्राप्त हो रही थी। गहनता से शोध किये जाने पर यह विदित हुआ कि रमेश कोलकाता में जाकर अपना नशे का व्यापार स्थापित करने की फिराक में है। रमेश के सभी व्यापारिक केमिकल आपूर्तिकर्ता पुणे, मुंबई और उसके आस पास के इलाके में होने की सूचना थी। यह भी पता था कि अपने सूत्रों से माल आपूर्ति की बातचीत के लिए रमेश स्वयं हवाई जहाज से पुणे जाया करता है। ऐसे में कोलकाता से पुणे और पुणे से कोलकाता के हवाई टिकेटों की लगातार और गहनता से छानबीन की जाती रहीं। अनवरत परिश्रम के बाद यह सामने आया कि रमेश स्वयं के नाम पर जनवरी के प्रथम सप्ताह में कोलकाता से पुणे गया और द्वितीय सप्ताह में वापस कोलकता आया है। यह तथ्य सामने आते ही अंतर्फ और एटीएस की एक विशेष टीम को कोलकाता में स्थापित कर सुरागरसी में लगा दिया गया। शातिर रमेश न तो राजस्थान में किसी के सीधे संपर्क में था, न ही किसी भी प्रकार का मोबाइल इत्यादि इस्तेमाल कर रहा था, जिससे उसका ठिकाना पता करना दुरूह हो रहा था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी का जिला सीमा पर भव्य स्वागत..