सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर
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लाडनूं, डीडवाना-कुचामन (राजस्थान) ,योगक्षेम वर्ष के दौरान नित्य प्रातःकालीन मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया।
शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को आज के निर्धारित विषय ‘साध्य-साधन शुद्धि’ के आधार पर पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि साध्य, साधन और शुद्धि ये तीन शब्द हैं। एक साध्य होता है और उससे जुड़ा हुआ साधन होता है। साध्य और साधन में किसी दृष्टि से समानता का दर्शन भी किया जा सकता है। जैसा साध्य है, उसके अनुकूल ही साधन होता है तो साध्य की प्राप्ति संभव हो सकती है। धार्मिक जगत में आत्मवाद का सिद्धांत है। आत्मा है, यह आस्तिक की बात है। जो आत्मा के अस्तित्व को मानता हो, जो पूर्वजन्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत को मानता है, पुण्य-पाप के फल को मानता है। आत्मा जन्म-मरण करती है तो उसके मोक्ष की बात भी होती है।
जिन्होंने साधुता का स्वीकार कर लिया है, उनके जीवन का मुख्य साध्य क्या है-मोक्ष की प्राप्ति। मोक्ष जब साध्य होता है तो उसका साधन है पवित्र धर्म। मोक्ष पवित्र है तो उसकी प्राप्ति का साधन धर्म भी पवित्र होना चाहिए। क्यों पहले बताया गया कि साध्य-साधन में समानता होनी चाहिए। मोक्ष में वीतरागता होती है तो मोक्ष का साधन वीतरागता बन सकता है। मोक्ष में अनंत ज्ञान है तो मोक्ष का साधन सम्यक् ज्ञान बन सकता है। मोक्ष में अनंत दर्शन है तो मोक्ष का साधन भी सम्यक् दर्शन बनेगा। मोक्ष का साधन संयम बनेगा।
इस प्रकार जो साध्य का स्वरूप होता है, उसी अनुरूप साधन भी होना चाहिए। साध्य और साधन में एकरूपता होनी चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि आज फाल्गुन शुक्ला त्रयोदशी है। तिथि के अनुसार आचार्यश्री भिक्षु का मासिक जन्मदिवस भी है और मासिक महाप्रयाण दिवस भी है। अभी आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष चल रहा है, जिसे भिक्षु चेतना वर्ष नाम दिया गया है। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने चारित्रात्माओं के जिज्ञासाओं को भी समाहित किया।
आचार्यश्री ने चारित्रात्माओं के लिए प्रारम्भ होने वाले प्रेक्षाध्यान शिविर के शुभारम्भ के संदर्भ में संभागी चारित्रात्माओं को आचार्यश्री ने प्रेक्षाध्यान की उपसंपदा प्रदान की। मुनि श्रेयांशकुमारीजी ने गीत का संगान किया। अणुव्रत स्थापना दिवस के संदर्भ में अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रतापसिंह दूगड़ व अणुव्रत समिति-लाडनूं के अध्यक्ष श्री शांतिलाल बैद ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। युवा शिक्षिका सुश्री पायल बैद ने गीत का संगान किया। मंत्री श्रीमती राज कोचर ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रतजी ने गोंडलविहिर गांव में वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया 