‘प्राकृतिक खेती एक पवित्र महायज्ञ, हर किसान बने इसका सहभागी’ ।
गुजरात,आहवा-डांग
आहवा, 20 जुलाई। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की प्रेरणा से डांग जिले के आहवा तहसील के प्रगतिशील किसान उमेशभाई राउत ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल अपनी खेती को नई दिशा दी है, बल्कि अब वे हजारों किसानों को भी इस अभियान से जोड़ रहे हैं।
एम.ए. तक शिक्षित उमेशभाई राउत के पास बेहतर करियर के अनेक अवसर थे, लेकिन उन्होंने मिट्टी की सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। पिछले 12 वर्षों से खेती कर रहे उमेशभाई ने वर्ष 2019 में ‘आत्मा’ परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक खेती का वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने राज्यपाल आचार्य देवव्रत और प्राकृतिक खेती के प्रणेता सुभाष पालेकर के विचारों से प्रेरित होकर रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाने का निर्णय लिया।
उमेशभाई बताते हैं कि राज्यपाल के प्राकृतिक खेती मॉडल का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के दौरान उन्होंने देखा कि भारी वर्षा के बावजूद खेत का पानी पूरी तरह जमीन में समा गया था, जबकि पास के रासायनिक खेती वाले खेतों में पानी भरा हुआ था। इस अनुभव ने उन्हें प्राकृतिक खेती की शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण दिया।
उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, वाफसा तथा मिश्रित फसल प्रणाली जैसी प्राकृतिक खेती की प्रमुख तकनीकों को अपनाया। ‘आगा खान संस्था’ के सहयोग से उन्होंने पूरी तरह प्राकृतिक पद्धति से परवल और बाद में करेला की खेती की। रसायनमुक्त उत्पादन होने के कारण उनकी उपज को बाजार में अच्छी मांग और बेहतर मूल्य मिला।
वर्तमान में वे देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से जीवामृत तैयार कर धान सहित विभिन्न फसलों की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी भूमि पहले की तुलना में अधिक उपजाऊ, नरम और जीवंत बन गई है। साथ ही परिवार को शुद्ध, पौष्टिक एवं विषमुक्त भोजन भी उपलब्ध हो रहा है।
उमेशभाई अब केवल अपने खेत तक सीमित नहीं हैं। वे ‘आत्मा’ परियोजना के अंतर्गत मास्टर ट्रेनर एवं सीआरपी के रूप में कार्य करते हुए आसपास की तीन ग्राम पंचायतों के हजारों किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
उन्होंने किसानों से आह्वान करते हुए कहा, “प्राकृतिक खेती एक पवित्र महायज्ञ है। हर किसान को इस महायज्ञ में अपनी आहुति देनी चाहिए। समय की मांग है कि हम सभी रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाएं, धरती माता की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वस्थ एवं विषमुक्त भविष्य दें।”






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