
सुरेंंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर
Key Line Times
बर, ब्यावर (राजस्थान) ,एक जनवरी 2026 अंग्रेजी कैलेण्डर नववर्ष का शुभागमन। प्रातः की मंगल बेला में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपनी धवल सेना के साथ ब्यावर जिले के झूंठा गांव से गतिमान हुए। इस अंग्रेजी नववर्ष के संदर्भ में भी लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा था। हालांकि सर्दी का असर भी दिखाई दे रहा था। ऐसे में जन-जन को मंगल आशीष प्रदान करते हुए आचार्यश्री आज के निर्धारित गंतव्य की ओर गतिमान थे।
राजस्थान के अजमेर जिले से पृथक् होकर वर्ष 2023 में ब्यावर जिले का निर्माण हुआ है। अंग्रेजी नववर्ष के संदर्भ में देश के कोने-कोने से मंगलपाठ का श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो रहे थे। कितने-कितने श्रद्धालु मार्ग मंे ही पहुंचकर आचार्यश्री के दर्शन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे थे। श्रद्धालुओं पर अपने दोनों करकमलों से मंगल आशीष की वृष्टि करते आगे बढ़ रहे थे। आचार्यश्री ब्यावर जिले के बर गांव के निकट जैसे-जैसे पधारते जा रहे थे, श्रद्धालुओं की संख्या के साथ उनका उत्साह की ओर बढ़ता जा रहा था।
श्रद्धालुओं की विराट उपस्थिति ने अनायास ही मानों स्वागत जुलूस का-सा दृश्य उत्पन्न हो गया। पूरा मार्ग श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण कहीं खो गया। विशाल जनसमुदाय के साथ लगभग 13 कि.मी. का विहार कर युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी बर गांव में स्थित मेवाड़ा गार्डन में पधारे।
मेवाड़ा गार्डन भी मानों ज्योतिचरण का स्पर्श पाकर ज्योतित हो रहा था। लगभग ग्यारह बजे आचार्यश्री इस गार्डन में बने प्रवचन पण्डाल में पधारे तो श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि आज नववर्ष का प्रारम्भ हुआ है। मंगलपाठ का भी आज उपक्रम होना है। आचार्यश्री के इंगितानुसार उपस्थित जनमेदिनी अपने स्थान पर खड़ी हुई और शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अंग्रेजी नववर्ष के संदर्भ में बृहत् मंगलपाठ सुनाया। चतुर्विध धर्मसंघ अपने वर्तमान अधिशास्ता के श्रीमुख से मंगलपाठ का श्रवण कर धन्यता की अनुभूति कर रहा था। कई आर्षवाणी से युक्त यह मंगलपाठ श्रद्धालुओं के लिए नववर्ष का सबसे बड़ा महाप्रसाद बन रहा था।
तदुपरान्त आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को अपनी इच्छानुसार एक संकल्प वर्ष भर के लिए लेने की प्रेरणा प्रदान करते हुए आचार्यश्री तुलसी द्वारा रचित पंच परमेष्टि गीतिकाओं को कंठस्थ करने अथवा उसके स्वाध्याय की प्रेरणा देते हुए निर्धारित संकल्प भी कराया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पावन संबोध प्रदान करते हुए कहा कि नववर्ष का प्रारम्भ हुआ है। सन् 2025 व्यतित हो गया है अब हम 2026 में आ गए हैं। काल का यह क्रम है। इस बीतने वाले काल का आदमी बढ़िया उपयोग करे, इसका प्रयास करना चाहिए। कोई आदमी घड़ी को भले रोक दे, किन्तु बीतने वाले काल को कोई रोक नहीं सकता है। इसलिए इसका जितना बढ़िया हो सके, सदुपयोग का प्रयास करना चाहिए। जीवन में धर्म से बढ़िया कोई पूंजी नहीं हो सकती। धर्म ही एकमात्र ऐसी पूंजी है, जो इस जीवन के बाद भी व्यक्ति के साथ जा सकती है। धर्म और कर्म ही साथ चलने वाले हैं। धर्म का कार्य करने से समय का सदुपयोग हो जाता है और आदमी को समय का सदुपयोग करने का प्रयास करना चाहिए।
पौष शुक्ला त्रयोदशी होने के कारण आचार्यश्री ने भिक्षु चेतना वर्ष के अंतर्गत आज के निर्धारित विषय ‘आचार्यश्री भिक्षु की समझाने की शैली- सात दृष्टांत’ विषय पर उपस्थित जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आचार्यश्री भिक्षु के सात ऐसे दृष्टांत हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने लोगों को समझाया।
आचार्यश्री के समक्ष जैन विश्व भारती द्वारा योगक्षेम का कैलेण्डर तथा योगक्षेम वर्ष मार्गदर्शिका पुस्तिका के संदर्भ में जनता को उत्प्रेरित करते हुए योगक्षेम वर्ष से संदर्भित गीत का आंशिक संगान किया। सभी लोग योगक्षेम वर्ष के कार्य को खूब अच्छे ढंग से सम्पन्न करने की भी प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री ने बर आगमन के संदर्भ में यहां के लोगों में आरोग्य व बोधि लाभ प्राप्त करते रहने की भी प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री द्वारा रचित पुस्तक ‘18 पाप’ की अंग्रेजी भाषा में अनुवादित पुस्तक जैन विश्व भारती द्वारा आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की गयी। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने उपस्थित जनता को उद्बोधित करते हुए आचार्यश्री के संकल्पों के प्रति निश्चयवान बनने की प्रेरणा प्रदान की। इस दौरान मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी व साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने भी इस नववर्ष के संदर्भ में अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

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