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🌸 *पर्युषण पर्वाधिराज : सातवां दिवस ध्यान दिवस के रूप में समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) ,पर्युषण महापर्व का सातवां दिवस। ध्यान दिवस का समायोजन। महावीर समवसरण में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तीर्थ एवं तीर्थंकरों पर चर्चा के संदर्भ में भगवान पार्श्वनाथ के जीवनवृत्त को मुनि पार्श्वकुमारजी व मुनि केशीकुमारजी ने प्रस्तुति दी। दस धर्मों में एक ब्रह्मचर्य धर्म पर साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। ब्रह्मचर्य धर्म पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने गीत का संगान किया। साध्वी स्तुतिप्रभाजी ने ध्यान दिवस पर गीत का संगान किया। ध्यान दिवस पर साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने ध्यान के महत्त्व को व्याख्यायित किया। जन-जन को मानवता का संदेश प्रदान करने वाले युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ के वर्णन के साथ जोड़ते हुए भगवान महावीर की आत्मा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में गर्भस्थ होती है। भगवान महावीर के पांच प्रसंग एक ही नक्षत्र में सम्पन्न हुए। प्रभु महावीर की आत्मा दशम देवलोक से च्युत हुई तब चौथे अर का अंतिम समय था। उस समय आषाढ़ शुक्ला षष्ठी को वैशाली नगरी के उपनगर ब्राह्मणकुण्ड नामक गांव में ऋषभदत्त नामक ब्राह्मण की पत्नी देवानंदा के गर्भ में गर्भस्थ होती है। पुनः इन्द्र के निर्देश पर देवानंदा के गर्भ को क्षत्रीय सिद्धार्थ की पत्नी त्रिशला की गर्भ में स्थापित किया और त्रिशला के गर्भ को देवानंदा के गर्भ में स्थापित कर दिया गया। शिशु का विकास अब त्रिशला के गर्भ में हो रहा है। गर्भस्थ शिशु मां को कष्ट न हो इसके लिए अपना हलन-चलन बंद कर किया तो मां दुःखी हो गयी। मां को दुःखी देख बालक ने पुनः अपना हलन-चलन प्रारम्भ कर दिया। माता-पिता कितने उपकारी होते हैं। उस शिशु ने गर्भ में ही यह प्रतिज्ञा कर ली कि माता-पिता के संसार में रहते हुए साधु दीक्षा नहीं स्वीकार करूंगा। चैत्र शुक्ला त्रयोदशी को रात्रि में जन्म हुआ। बालक के जन्मोत्सव मनाया गया। आचार्यश्री ने ध्यान दिवस के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि ध्यान अपने आप में साधना है। हमारे यहां प्रेक्षाध्यान की पद्धति प्रचलित है। 30 सितम्बर को प्रेक्षाध्यान दिवस पर प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष का शुभारम्भ होने वाला है। प्रेक्षाध्यान दिवस गुरुदेव तुलसी के शासनकाल में व मुनि नथमलजी (टमकोर) के योगदान से प्रारम्भ हुआ। वह केवल तेरापंथ के लिए नहीं, जैन-अजैन सभी के लिए कारगर बना। प्रेक्षाध्यान साधना का एक उपक्रम है। आज भी कितने लोग ध्यान का प्रयोग करने वाले होंगे। अनेक रूपों में ध्यान हो सकता है। दीर्घश्वास, समताल, शरीर प्रेक्षा, अनुप्रेक्षा, कायोत्सर्ग आदि अनेक विधियां हैं। आदमी अपने जीवन में यथायोग्य ध्यान का भी अभ्यास करें, यह काम्य है। पर्युषण के शिखर दिवस के संदर्भ में प्रेरणा देते हुए आचार्य श्री ने आगे कहा की कल महान दिन है। भगवती संवत्सरी का दिन है। वह पर्युषण का मानों सरताज दिन है। उसे आध्यात्मिक रूप में मनाने का प्रयास होना चाहिए। चारित्रात्माओं को तो उस दिन चौविहार उपवास रखना होता ही है। इसके साथ श्रावक-श्राविकाएं भी उपवास करते हैं। इससे छोटे बालकों को भी संयम के साथ यथासंभव जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने आवश्यक जानकारी भी दी। *भगवती संवत्सरी कल : उपवास, तपस्या, प्रतिक्रमण द्वारा आराधना* आचार्य श्री के सान्निध्य में कल संवत्सरी महापर्व मनाया जायेगा। जिसके तहत धर्मावलाबी चौविहार, तिविहार उपवास करेंगे। साथ ही सैकड़ों तपस्वियों द्वारा अठाई तप का प्रत्याख्यान किया जायेगा। प्रातः 07 बजे से महावीर समवसरण में प्रवचन कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएगा जिसके तहत आचार्यश्री एवं अन्य साधु-साध्वियों जैन इतिहास, दर्शन, तत्व आदि पर वक्तव्य देंगे। हजारों श्रावक–श्राविकाएं पौषध द्वारा भी संयम विहार में रहकर धर्म आराधना करेंगे।
सत्य भारती स्कूल जाटी भांडू में संपन्न हुयी अभिभावक-शिक्षक बैठक….मदा राम,जिला संवाददाता जोधपुर, Key Line Times जोधपुर,भारती एयरटेल फाउंडेशन राजस्थान के रीजनल हेड संदीप सारडा और जिला समन्वयक सुभाष यादव और क्षेत्रीय समन्वयक जितेन्द्र सोलंकी के निर्देशानुसार आज सत्य भारती स्कूल जाटी भांडू में अभिभावक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने मीटिंग उपस्थिति सभी अभिभावकों के साथ उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा के बारे में चर्चा की गई, उन्होंने अभिभावको से अपने बच्चों की शिक्षा में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। और माताओं अभिभावकों के मध्य खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की गई, भाग लेने वाली समस्त माताओं अभिभावकों को प्रशंसा पत्र दिए गए। इस दौरान प्रधानाध्यापक प्रेमाराम जवलिया, भोमाराम, हमीर लवारन, मेहराराम,प्रेमाराम मुंडण, संतोष, दल्लाराम, चौथाराम, बागाराम, श्रवण राम, पुखराज चौधरी, तीजो समस्त शिक्षक एवं अभिभावकगण उपस्थित थे।
पर्वाधिराज पर्युषण का चतुर्थ दिवस वाणी संयम दिवस के रूप में हुआ समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , बुधवार को प्रातःकाल से संयम विहार में चतुर्मासरत जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में पर्वाधिराज पर्युषण के सभी उपक्रमों का अनवरत समायोजन प्रारम्भ हुआ। अर्हत् वंदना, प्रेक्षाध्यान, तात्त्विक विश्लेषण, आगम वाचन आदि कार्यक्रमों के द्वारा आध्यात्मिक गंगा की विभिन्न धाराएं प्रवाहित होने लगीं। निर्धारित समय पर महावीर समवसरण में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी पधारे तो पूरा परिसर जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तीर्थ और तीर्थंकर के विषय के संदर्भ में मुनि मार्दवकुमारजी ने भगवान शांतिनाथ के विषय में अपनी प्रस्तुति दी। मुनि गौरवकुमारजी ने भगवान ऋषभ के संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। लाघव और सत्य धर्म पर आधारित गीत का साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने संगान किया। मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने लाघव व सत्य धर्म की व्याख्या की। कल के सामायिक दिवस के संदर्भ में साध्वी वैराग्यप्रभाजी व साध्वी समत्वप्रभाजी ने गीत का संगान किया। वाणी संयम दिवस पर साध्वी प्रफुल्लप्रभाजी व साध्वी श्रुतविभाजी ने गीत का संगान किया। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने उपस्थित जनता को वाणी संयम दिवस के संदर्भ में उद्बोधन प्रदान किया। तदुपरान्त भगवान महावीर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि परम आराध्य भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा का प्रसंग है। भगवान महावीर अपने अनंत पूर्व जन्मों में एकबार मनुष्य के रूप में उत्पन्न हुए, जहां उनका नाम नयसार पड़ा। लकड़ी के प्रयोजन से महाअटवी में जाना हुआ। मार्ग भूल जाने के कारण उस महाअटवी में साधु पधारे और उन साधुओं को नयसार ने अन्न का दान किया तो साधुओं ने उन्हें उपदेश दिया। नयसार के भव में उनकी आत्मा को समयकत्व की प्राप्ति हुई थी। इसलिए ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ का शुभारम्भ इसी भव से किया जाता है। सम्यकत्व से बड़ा रत्न नहीं होता है। चारित्र को सम्यकत्व पर निर्धारित रहना होता है, किन्तु सम्यकत्व को चारित्र की अपेक्षा नहीं होती है। इस कारण सम्यकत्व चारित्र से बड़ा होता है। सम्यकत्व स्वतंत्र भी हो सकता है। नयसार में सम्यकत्व का पालन भी किया। अपने जीवन में धर्म का अभ्यास भी किया। अनाग्रह भाव रखकर तत्व को समझने का प्रयास किया जाए तो नए ज्ञान की प्राप्ति भी हो सकती है। आदमी को अनाग्रह भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। प्रथम देवलोक में नयसार की आत्मा उत्पन्न हुई। वहां के बाद पुनः आत्मा च्युत हुई और पुनः मनुष्य जन्म में पहुंची तो नयसार की आत्मा भगवान ऋषभ के पौत्र और चक्रवर्ती भरत के पुत्र मरिचि के रूप में उत्पन्न हुए। एकबार भगवान ऋषभ की प्रेरणा मरिचि को प्राप्त हुई और उसने साधुत्व का जीवन स्वीकार कर लिया। साधु बनने के बाद परिषहों को सहने में कठिनाई होने लगी और मरिचि ने उस साधुपन को छोड़कर अलग से ढंग से साधना प्रारम्भ की। आचार्यश्री ने वाणी संयम दिवस के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को अपनी वाणी का संयम रखने का प्रयास करना चाहिए। बोलना आवश्यक है, किन्तु वाणी का विवेक होना अतिआवश्यक होता है। विवेकपूर्ण वाणी वाणी संयम का ही एक माध्यम हो सकता है। एक दिवस पूर्व ही आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में चतुर्मासरत और तपस्यारत साध्वी धैर्यप्रभाजी का देवलोक गमन हो गया था। इस कारण आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उनकी स्मृतिसभा का भी समायोजन हुआ। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने साध्वी धैर्यप्रभाजी संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के आध्यात्मिक गति करने की कामना की। आचार्यश्री ने उनकी आत्मा की शांति के लिए चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। तदुपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी, साध्वी धैर्यप्रभाजी की संसारपक्षीया पुत्री साध्वी सिद्धार्थप्रभाजी, साध्वी सुमतिप्रभाजी, साध्वी जिनप्रभाजी, साध्वी हिमश्रीजी, साध्वी विशालप्रभाजी, साध्वी प्रांजलयशाजी, साध्वी हेमरेखाजी ने अपनी श्रद्धांजलि समर्पित की। श्री ताराचन्द बोहारा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। साध्वी तेजस्वीप्रभाजी द्वारा रचित गीत को साध्वीवृंद ने प्रस्तुति दी। साध्वी सिद्धार्थप्रभाजी ने मुनि कौशलकुमारजी के भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। साध्वीवृंद ने उनकी स्मृति में एक गीत का संगान किया। श्रीमती मधु बोहरा व श्री रमेशचन्द बोहरा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। सुश्री सेजल चोरड़िया आदि ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में कहा कि पर्युषण पर्व के दौरान साध्वी धैर्यप्रभाजी का प्रयाण हुआ। हमारे धर्मसंघ की एक साध्वी सदस्या अपनी संयम यात्रा को सम्पन्न करते हुए विदा हुई। उनकी आत्मा उत्थान करे और शीघ्र मोक्षश्री का वरण करे।
सुरत मे वर्षावास के दौरान आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि तन ही नहीं, मन भी रहे स्वस्थ …..सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 31.08.2024, शनिवार, वेसु, सूरत (गुजरात),भगवान महावीर समवसरण से जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शनिवार को आयारो आगमाधारित अपने पावन प्रवचन के माध्यम से जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि गलत खान-पान, रहन-सहन और प्राकृतिक प्रभाव से बीमारी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कोई आदमी स्वस्थ है तो वह उसकी एक उपलब्धि है, किन्तु उसका घमण्ड नहीं करना चाहिए। कब किसको क्या हो जाए। बीमारी कभी हो भी जाए तो उसमें आदमी को अशांत नहीं होना चाहिए, चित्त को शांत बनाए रखने और उसको शांति से सहने का प्रयास करना चाहिए। बीमारी होने के बाद भी मन में शांति और समाधि रखने का प्रयास करना चाहिए साधु–साध्वियों के लिए कहा गया है कि बीमारी हो जाए तो उसमें चित्त की समाधि और शांति बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। कोई साधु-साध्वी रुग्ण हो जाए तो उसकी सेवा करना, उसकी परिचर्या करना, अस्पताल दिखाने आदि में भी मन में भी प्रसन्नता रहनी चाहिए। बीमार साधु-साध्वियों की प्रसन्न मन से की गई सेवा भी जीवन की एक उपलब्धि हो सकती है। सेवा सापेक्ष की सेवा करना चारित्रात्मा का समुदाय का कर्त्तव्य होता है। आयारो आगम में कहा गया है कि कभी रोग उत्पन्न हो जाते हैं। पूर्वार्जित कर्मों के योग से साधु को भी बीमारी हो सकती है। किसी को ज्यादा और किसी को कम भी हो सकता है। साधु को विशेष मनोबल रखने का प्रयास करना चाहिए। जहां तक संभव हो अपने जीवन की गाड़ी को मनोबल के द्वारा चलायमान रखने का प्रयास करना चाहिए। जितनी अपेक्षा हो बीमारी का इलाज कराने का भी प्रयास करना चाहिए, लेकिन डरते रहना, अशांत हो जाना, अधीर नहीं होना चाहिए। जहां तक संभव हो उसे सहन करने का प्रयास करना चाहिए। बाह्य के साथ-साथ आंतरिक शांति का भी प्रभाव पड़ता है। एलोपैथी दवाइयों का प्रयोग डॉक्टर की सलाह लेने का प्रयास होना चाहिए। इस प्रकार बीमारी के संदर्भ में कुछ बातें चिंतन और विवेक की भी हो सकती हैं। बीमारी में भी मनोबल रखने का प्रयास करना चाहिए। बीमारी के आने पर भी चित्त की समाधि, शांति बनी रहे। शरीर की स्वस्थता, चित्त की प्रसन्नता और मनोबल हो। इस प्रकार आदमी का तन और मन दोनों स्वस्थ और मजबूत रहें, यह काम्य है। आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि कल से पर्युषण महापर्व का प्रारम्भ होने जा रहा है। वर्ष में एक बार चतुर्मास के दौरान इसका प्रसंग आता है जो अध्यात्म और साधना की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण समय होता है। कुल मिलाकर नौ दिनों का उपक्रम होता है। यह चतुर्विध धर्मसंघ के लिए अच्छा अवसर है। आचार्यश्री ने इन सात दिनों में साधु-साध्वियों व गृहस्थों के लिए भी आवश्यक पालनीय दिशा-निर्देश भी प्रदान किए। साथ ही आचार्यश्री ने इस दौरान चलने वाले आध्यात्मिक उपक्रमों के समय आदि का भी वर्णन किया। पर्युषण की आराधना अच्छे ढंग से करने की प्रेरणा प्रदान की। मंगल प्रेरणा और पर्युषण महापर्व के संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करने के उपरान्त आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में दिवंगत साध्वी रतनश्रीजी (श्रीडूंगरगढ़) की स्मृतिसभा का भी आयोजन हुआ। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने उनके जीवन का संक्षिप्त परिचय वाचन करते हुए उनके प्रति मध्यस्थ भावना अभिव्यक्त करते हुए चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। तत्पश्चात साध्वी रतनश्रीजी (श्रीडूंगरगढ़) स्मृतिसभा ने मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखाजी, मुनि ध्यानमूर्तिजी, साध्वी अखिलयशाजी व साध्वी मुक्तिश्रीजी ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली सभा के अध्यक्ष श्री सुखराज सेठिया ने भी इस संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। जयपुर से समागत नवरत्नमल बाफना ने अपनी पुस्तक ‘कामधेनु मां रतनाश्री’ आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की।
तेली घाणी विकास बोर्ड में नियुक्तियां देने की मांग को लेकर सोपा ज्ञापन….सरूपाराम प्रजापत,जिला प्रमुख संवाददाता बालोतरा, Key Line Times बालोतरा, तेली समाज बायतु में तेली घाणी विकास बोर्ड में राजनीतिक नियुक्ति देने की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सोपा गया। समाजसेवी शहीद मंसूरी ने बताया कि राजस्थान राज्य में तेली घाणी विकास बोर्ड के गठन की स्वीकृति 23जुलाई 2023 को होने के बाद सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने मुल्लिम तेली समुदाय की शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति की उन्नति के लिए स्वीकृति प्रदान की गई थी। राजस्थान राज्य में 20लाख से भी ज्यादा मुस्लिम तेली समुदाय के लोग रहते हैं। जिनका पुस्तैनी काम तेल घाणी चलाना था। समय के साथ किसी भी तरह की सरकारी सहयोग और आर्थिक मदद नहीं मिलने के कारण युवा रोजगार और स्वरोजगार स्थापित करने में असफल रहे हैं। राज्य सरकार ने एक वर्ष पूर्व बोर्ड गठित करने की स्वीकृति दी थी लेकिन अभी तक कोई किसी प्रकार का ठोस कदम नहीं उठाया गया है। राजस्थान के सभी ब्लॉक और जिला स्तर पर राज्य सरकार को पुनः स्मरण दिलाने के लिए शुक्रवार को बायतु मुख्यालय पर तेली समाज के लोगो द्वारा उपखंड अधिकारी बायतु को मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। जिसमें मौलाना शफ़ी मोहम्मद, हनीफ़ ख़ान, अब्दुल गनी, शहीद मंसूरी, अमीन खान,सतार ख़ान, नसार ख़ान नौसर, मुस्ताक ख़ान, मंज़ूर सोलंकी, मुस्ताक गौरी, सरफ़ुदिन गोरी, सायरख़ान, फ़रीद ख़ान, शौक़त सोलंकी, मुख्तयार मंसूरी सहित समाज के लोग मौजूद रहे।
किसानों ने कलेक्टर से की फसल बीमा घोटाले की एफआईआर से स्टे हटाने की मांग….गणेश जैन, Key Line Times जैसलमेर, जैसलमेर कलेक्टर प्रतापसिंह की फलसूंड तहसील के खूमानसर गांव में गुरुवार रात आयोजित रात्रि चौपाल में प्रधानमंत्री फसल बीमा घोटाले के 20 गांवों के पीङित किसान फरियाद लेकर पहुंचे। किसान संघर्ष समिति ने अर्जुनसिंह, मनोहरसिंह, गणेश जैन मगराज गोदारा, नसीर खां, अमराराम सुथार, करना राम, नरपतराम दर्जी आदि के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर सिंह से फलसूंड थाने में दर्ज पीएम फसल बीमा घोटाले की दोषी 6 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर गलत तथ्य पेश कर लाए गए स्टे खुलवाने की मांग की। दोषी सोसायटियों को बर्खास्त करने की मांग की। कलेक्टर ने पुलिस को निर्देशित कर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने बताया कि 13 माह से फलसूंड से भणियाणा तक के 20 गांवों के किसान आंदोलित हैं। ग्राम सेवा सहकारी समिति स्वामीजी की ढाणी, मानासर, फलसूंड, भुर्जगढ, पदमपुरा और दांतल ने हजारों किसानों के खेतों पर फर्जी लोनी बनाकर बंटाईदार के नाम लोन पास करा दिए। किसान को कुछ बताए बिना उनके दस्तावेज चुरा कर दूसरे अनजान लोगों को खेतों का हिस्सेदार बना और लोन पास कर दिए। करोङों रुपए का गबन हुआ है। इस बाबत फलसूंड क्षेत्र के 15-20 गांवों के किसान 40 से ज्यादा बार कलेक्टर कार्यालय से लेकर स्थानीय तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन घेराव आदि कर चुके। कलेक्टर के आदेश से एमडी सीसीबी जैसलमेर ने 5 ग्राम सेवा सहकारी समितियों संचालकों के खिलाफ नामजद एफआईआर फलसूंड थाने में दर्ज करवाई। लेकिन कुछ सोसायटी वाले मिलीभगत से स्टे ले आए। जबकि जांच पर कोई स्टे नहीं है। पुलिस जांच पूरी कर दोष साबित करने का काम भी नहीं कर रही। जब कलेक्टर के आदेश की पालना में सीसीबी एमडी ने एफआईआर में साफ लिखा हैऐ कि कूट रचित दस्तावेजों और हेराफेरी कर किसानों के खेतों पर फर्जी लोन उठाया है। यह एमडी ने मान लिया तो इसमें कानूनी और तकनीकी दिक्कत क्या आ रही। फर्जी लोन पास करने वाले सोसायटी संचालक और फर्जी लोन के लिए अपने दस्तावेज जमा करा कूट रचित तरीके से प्रीमियम भरने वाले फर्जी बंटाईदारों पर स्टे खुलवा कर सख्त कार्रवाई की जाए।। फर्जी बंटाईदारों और सोसायटी संचालकों के करीब 1837 खातें सीज है। किसानों ने मांग की कि कलेक्टर सीज खाते किसी हालत में खोलने की अनुमति न दें। किसान हजारों परेशान हैं। किसान हर स्तर पर न्याय के लिए दर दर भटक रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम भणियाणा की जांच रिपोर्ट में साबित है कि सोसायटियों ने करोङों का घोटाला किया है। 27 सितंबर 2023 की रिपोर्ट करेक्टर के माध्यम से सरकार को प्रेषित हो चुकी। फिर कार्रवाई में विलंब क्यों? पीङित किसानों के खेतों पर चढाए फर्जी बंटाईदार हटाकर फर्जी लोन की राशि ब्याज और दंड सहित दोषियों से वसूली जाए। जैसलमेर. त्रि-स्तरीय व्यवस्था के तहत माह के अंतिम गुरुवार को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत स्तरीय जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक समस्याओं का रखा। जिला कलक्टर प्रतापसिंह ने ग्राम पंचायत खुमानसर में आयोजित पंचायत स्तरीय जन सुनवाई के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को सुना व परिवेदना प्रार्थना-पत्रों को प्राप्त किया और संबंधित विभाग के अधिकारी से समस्या के संबंध में जानकारी ली। जनसुनवाई के दौरान खुमानससर सरपंच पेमाराम जी, ग्राम विकास अधिकारी राजु राम एवं आसदें की ढांणी के लोगों ने जिला कलक्टर के समक्ष क्षेत्र में कम वॉल्टेज से हो रही विद्युतापूर्ति एवं पेयजल की समस्या के संबंध में प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किए। जिला कलक्टर ने मौके पर ही बिजली विभाग के अभियंता को निर्देश दिए। उन्होंने जलदाय विभाग के अभियंता को निर्देश दिए कि वे खुमानसर व आसदे की ढाणी में पानी की आपूर्ति सुचारु कर लोगों को समय पर पीने का पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वह आस पास लगने वाली ग्राम पंचायत फलसूड़, भुर्जगढ सरपंच पतिनिघी जसवंत सिंह जोधा ने भुर्जगढ जिला कलक्टर ने पंचायत स्तरीय जनसुनवाई में विकास राजु राम,, तहसीलदार सुनील कुमार विश्नोई ,कोपरेटिव बैंक के एमडी जलदयक विभाग के अधिकारी भुराराम धन्धें बिजली विभाग सरपंच पेमाराम के साथ ही पानी-बिजली एवं अन्य विभागों के अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित थे। फलसूड़ सरपंच रतन सिंह जी जोधा भुर्जगढ सरपंच जसवंत सिंह जोधा, मनोहर सिंह,अर्जुनसिंह, अमरा राम सुथार सेवाराम स्वामिजि कि ढाणी गणेश जैन, रावल सिंह अरविंद कुमार
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आचार्य महाश्रमणजी ने कहा कि अनुशासन, विधि, व्यवस्था व बहुश्रुतता के द्योतक थे श्रीमज्जयाचार्य …….सुरेंद्र मुनोत,ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times 30.08.2024, शुक्रवार, वेसु, सूरत (गुजरात) , महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि सभी प्राणियों को जीवन प्रिय होता है। मनुष्य हो अथवा कोई अन्य छोटे से छोटा प्राणी ही क्यों न हो, सभी को जीवन प्रिय होता है, कोई मरना नहीं चाहता। प्राणी की यह सामान्य प्रवृत्ति होती है कि कोई मरना नहीं चाहता। मनुष्य इस बात पर ध्यान दे कि यदि वह नहीं मरना चाहता तो दूसरे भी मरना नहीं चाहते। सभी को अपने समान ही समझने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी स्थिति में मनुष्य जितना अन्य प्राणियों की हिंसा से बच सके, बचने का प्रयास करना चाहिए। आदमी यह सोचे कि जैसे वह सुख चाहता है, कष्ट नहीं चाहता, मरना नहीं चाहता तो भला दूसरा दुःख, कष्ट और मरना क्यों चाहेगा। ऐसा विचार कर आदमी को अहिंसा की साधना करने का प्रयास करना चाहिए। अपनी आत्मा के हित के लिए और दूसरों को किसी भी प्रकार का अपनी ओर से कष्ट न देने की भावना अहिंसा की भावना होती है। साधु के लिए अहिंसा पूर्णरूपेण पालनीय होती है और जिंदगी भर अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले होते हैं। आज भाद्रव कृष्णा द्वादशी है। यह तिथि ऐसे महापुरुष से जुड़ी हुई है, जिन्होंने इतनी छोटी उम्र में अहिंसा आदि महाव्रतों के पालक बन गए। वे महापुरुष थे तेरापंथ धर्मसंघ के चतुर्थ आचार्य जीतमल स्वामी, जिन्हें जयाचार्य भी कहते हैं। उन्हें श्रीमज्जयाचार्य भी कहते हैं। श्रीमज् शब्द उन्हीं के नाम के आगे क्यों जुड़ा है, इस पर विचार किया जा सकता है। उनका संयम पर्याय भी काफी लम्बा रहा। उनकी ज्ञान चेतना भी बहुत विशिष्ट थी। छोटी उम्र में रचना करना, आगम पर कार्य करना कितनी बड़ी बात होती है। हमारे धर्मसंघ में आगम पर कार्य आचार्यश्री तुलसी के समय वि.सं. 2012 से शुरु हुआ जो काम अभी भी चल रहा है। काफी काम हो चुका है और अभी अवशिष्ट भी है। ऐसा लगता है कि आगमों पर कार्य श्रीमज्जयाचार्यजी ने भी किया। उन्होंने कई आगमों पर उन्होंने राजस्थानी भाषा में जोड़ की रचना कर दी। भगवती जोड़ को देखें तो आश्चर्य होता है कि इतने बड़े ग्रन्थ पर उन्होंने राजस्थानी भाषा में राग-रागणियों में अपनी विशेष समीक्षा आदि लिख दिए। उनके कितने ही ग्रंथ को देख लें तो तेरापंथ धर्मसंघ के दर्शन को जाना जा सकता है। अनेकानेक ग्रंथ उनकी विद्वता के यशोगान करने वाले हैं। वे आगमवेत्ता, तत्त्ववेत्ता आचार्य थे। एक आचार्य के सामने और भी व्यवस्था संबंधी कार्य होते हुए भी इतने साहित्य व ग्रंथ की रचना कर देना उनकी प्रज्ञा और मेधा का द्योतक प्रतीत हो रहा है। वे अनुशासन, विधि, व्यवस्था रखने वाले आचार्य थे। धर्मसंघ में साध्वीप्रमुखा का पद भी उन्हीं के द्वारा प्राप्त है। उनके बाद से यह परंपरा चली और उसके बाद आचार्यों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने साध्वी समुदाय की व्यवस्था में नया अध्याय जोड़ा था। उन्होंने महासंती सरदारांजी को मुखिया के रूप में आगे लाए। वे अनुशासन व्यवस्था के पक्ष में भी एक महत्त्वपूर्ण कदम था, जिसकी प्रासंगिकता आज भी प्रतीत हो रही है। वे बहुश्रुत, कुशल व्यवस्था प्रबंधकारक आचार्य थे। उनके जीवन में अध्यात्म और साधना का पक्ष भी है। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय में विशेष साधना भी की। जयाचार्य का महाप्रयाण आज के दिन जयपुर में हुआ था। आज के दिन पंचम आचार्य के रूप में मघवागणी प्राप्त हुए। श्रीमज्जयाचार्यजी ने अनुदान धर्मसंघ को दिए हैं, वे बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। हम उनके आभारी हैं। उनके जैसा महान व्यक्तित्व प्राप्त होना, धर्मसंघ का सौभाग्य था। ऐसे आचार्यप्रवर की हम अभिवंदना करते हैं। आचार्यश्री ने उनकी अभ्यर्थना में गीत का आंशिक संगान किया। मंगल प्रवचन के उपरान्त मुनि दिनेशकुमारजी के नेतृत्व में चतुर्विध धर्मसंघ ने आचार्यश्री के मुखारविंद और केशलुंचन की निर्जरा में सहभागी बनाने हेतु निवेदन करने से पूर्व त्रिपदी द्वारा वंदना भी की। आचार्यश्री ने लोच के संदर्भ में साधु-साध्वियों को एक-एक घंटा आगम स्वाध्याय, श्रावक-श्राविकाओं को अतिरिक्त रूपी में सात सामायिक करने की प्रेरणा प्रदान की। कार्यक्रम में आचार्यश्री के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीप्रमुखाजी का उद्बोधन हुआ। अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान श्रीमुख से स्वीकार किया। तदुपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने श्रीमज्जयाचार्य की अभ्यर्थना में गीत का संगान किया। साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने भी श्रीमज्जयाचार्यजी की अभ्यर्थना में अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम में ठाणे के पूर्व सांसद श्री संजीव नाईक, राजस्थान पत्रिका के संपादक श्री शैलेन्द्र तिवारी, टेक्सटाइल युवा बिग्रेड के अध्यक्ष श्री ललित शर्मा ने आचार्यश्री के दर्शन किए। पूर्व सांसद श्री संजीव नाईक ने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।