
सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर
Key Line Times
छोटी खाटू, डीडवाना-कुचामण (राजस्थान) ,राजस्थान का नवीन जिला डिडवाना-कुचामण। इस जिले के अंतर्गत नवीन तहसील के रूप में स्थापित छोटी खाटू के लिए मंगलवार का दिन मानों महामंगलमय बना हुआ था क्योंकि मंगलवार को छोटी खाटू की धरा पर पहली बार जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के महाकुम्भ के रूप में विख्यात ‘मर्यादा महोत्सव’ के 162वें आयोजन के लिए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, तेरापंथ धर्मसंघ के महासूर्य, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी विशाल धवल सेना के साथ पधार रहे थे। पूरी नगरी मानों महाश्रमणमय बनी हुई थी। केवल तेरापंथ समाज ही नहीं, अपितु मानवता का शंखनाद करने वाले मानवता के मसीहा के लिए छोटी खाटू का प्रत्येक मानव, चाहे वह भले ही किसी पंथ, मजहब अथवा संप्रदाय का हो, सबका उत्साह अपने चरम था। पूरी नगरी इस नवीन और महनीय आयोजना के लिए सजी-धजी हुई नजर आ रही थी।मंगलवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ छोटी खाटू की ओर गतिमान हुए। छोटी खाटू के उत्साही श्रद्धालु तो आज के विहार स्थल से ही युगप्रधान अनुशास्ता के चरणों का अनुगमन करने लगे। जैसे-जैसे आचार्यश्री की छोटी खाटू से निकटता बढ़ती जा रही थी, लोगों की संख्या व उनका उत्साह भी बढ़ता जा रहा था। लगभग ग्यारह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री जैसे ही छोटी खाटू की सीमा में पधारे तो मानों जनता व उनकी श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरा विहार मार्ग व आसपास का क्षेत्र जनाकीर्ण-सा दिखाई देने लगा। उपस्थित जन सैलाब विशाल और भव्य जुलूस का रूप ले रहा था।निवनिर्मित आचार्यश्री भिक्षु महाश्रमण द्वार से होते हुए आचार्यश्री छोटी खाटू में प्रविष्ट हुए तो बलुंद जयघोष से समूचा आसमान गूंज उठा। छोटी खाटू के विभिन्न सामाजिक संगठनों, संस्थाओं आदि ने अपने-अपने बैनर, होर्डिंग्स लगा रखे थे तथा स्थान-स्थान पर समूहबद्ध रूप में मानवता के मसीहा का अभिनंदन कर रहे थे। श्रद्धावान जनमेदिनी पर अपने दोनों करकमलों से आचार्यश्री आशीष प्रदान करते हुए बढ़ते जा रहे थे। तेरापंथ समाज की सभी संस्थाओं के सदस्य अपने-अपने गणवेश में सुसज्जीत दिखाई दे रहे थे। स्थान-स्थान पर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों, किशोर मण्डल तथा कन्या मण्डल द्वारा कई झांकियां भी आचार्यश्री की अभिवंदना में दिखाई दे रहे थे। झाकियों में खड़े बालकों आदि पर भी आचार्यश्री ने आशीर्वृष्टि की। डीडवाना विधानसभा के विधायक श्री युनूस खान भी राष्ट्रीय संत आचार्यश्री महाश्रमणजी के स्वागत में उपस्थित थे।निर्धारित समय पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता छोटी खाटू की धरा पर प्रथम व तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव के महामंगल प्रवेश के गतिमान हुए। पंक्तिबद्ध साधु, साध्वियां, समणियां, मुमुक्षुवृंद व मध्य गतिमान तेरापंथ के अधिशास्ता का गति करना नयनाभिराम दृश्य उत्पन्न कर रहा था। यह दृश्य छोटी खाटू की धरा पहली बार अपलक निहार रही थी। डेढ़ किलोमीटर से भी अधिक की इस अनुशासनात्मक जुलूस के साथ तेरापंथ के अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने छोटी खाटू में मर्यादा महोत्सवकालीन प्रवास हेतु छोटी खाटू के तेरापंथ भवन में पधारे।भव्य एवं विशाल मर्यादा समवसरण में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का पावन पदार्पण हुआ तो श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तदुपरान्त तेरापंथ महिला मण्डल-छोटीखाटू ने स्वागत गीत का संगान किया। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री डालचंद धारीवाल ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति के स्वागताध्यक्ष श्री भीखमचंद धारीवाल, आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति के अध्यक्ष तथा संस्था शिरोमणि तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया ने अपने हृदयोद्गार व्यक्त किए।साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने इस अवसर पर छोटीखाटूवासियों को मंगल संबोध प्रदान किया। तदुपरान्त जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने छोटीखाटूवासियों को प्रथम देशना प्रदान करते हुए कहा कि मंगल सभी के लिए अभिष्ट होता है। पदार्थ, मुहूर्त आदि भी मंगल हो सकते हैं, लेकिन उत्कृष्ट मंगल को बताते हुए आगमकार ने कहा कि धर्म सर्वोत्कृष्ट मंगल होता है। अहिंसा, संयम और तप रूपी धर्म ही उत्कृष्ट मंगल है। दुनिया में ऐसा कौन है, जो अहिंसा रूपी धर्म को नकार सकता है। अहिंसा, संयम और तप जिसके जीवन में है, उसके जीवन में धर्म रह सकता है। जिस आदमी का मन सदा धर्म में रत रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।आज छोटी खाटू में मर्यादा महोत्सव के संदर्भ को लेकर आए हैं। इतने संतों का समागम हुआ है। साध्वीप्रमुखाजी सहित इतनी साध्वियां, इतनी समणियां व मुमुक्षुवृंद भी यहां उपस्थित हैं। यह तेरापंथ धर्मसंघ का 162वां आयोजन है। मर्यादा और अनुशासन जीवन के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं। हमारे धर्मसंघ में अनुशासन और मर्यादाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। मर्यादाओं को पालन करने वाले भी अच्छे होते हैं। यहां के लोगों में खूब मैत्री भाव बना रहे। व्यवस्था समिति से जुड़े हुए लोग और सभी लोग खूब धार्मिक और आध्यात्मिक शक्ति से इस आयोजन को सुसम्पन्न करने का प्रयास करें।अलग-अलग क्षेत्रों में चतुर्मास करने के उपरान्त गुरुदर्शन करने वाली साध्वी जिनरेखाजी, साध्वी सम्पूर्णयशाजी व साध्वी मेघप्रभाजी ने आदि साध्वियों ने गीत का संगान किया। साध्वी प्रबलयशाजी ने अपनी सहवर्ती साध्वियों के साथ तथा साध्वी साध्वी क्षीतिप्रभाजी ने अपने सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया।

