
सुरेंंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर
Key Line Times
सेन्दड़ा, ब्यावर (राजस्थान) ,राजस्थान की धरा को अपने चरणों से पावन बनाने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी वर्तमान में ब्यावर जिले को पावन बना रहे हैं। बर में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं को अंग्रेजी नववर्ष के संदर्भ में मंगलपाठ का श्रवण कराने के उपरान्त शुक्रवार को प्रातः की मंगल बेला में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बर से मंगल प्रस्थान किया। बरवासियों ने ऐसा महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करने के लिए अपने आराध्य के प्रति कृतज्ञ भाव अर्पित किए। आचार्यश्री जनता पर मंगल आशीषवृष्टि करते हुए अगले गंतव्य की ओर बढ़ चले। आचार्यश्री लगभग 10 कि.मी. का विहार कर सेन्दड़ा में स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में पधारे।
शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में सहनशक्ति का महत्त्व है। मनुष्य में शारीरिक सहनशक्ति भी हो और मानसिक सहनशक्ति भी हो तो जीवन में काफी सुख-शांति रह सकती है। दो प्रकार के दुःख होते हैं- जरा और शोक। शारीरिक दुःख जरा के अंतर्गत और मानसिक दुःख को शोक के अंतर्गत लिया जा सकता है। शारीरिक कठिनाई जीवन में आए तो यथासंभवतया सहन करे और मानसिक प्रतिकूल स्थिति आ जाए तो उसमें भी सहिष्णुता रखे। आदमी को कभी कहीं ठंड लगे, कहीं गर्मी ज्यादा लगे उसे भी सहनशक्ति के साथ सहन करने का प्रयास करना चाहिए। सर्दी से भी बचाव हो सकता है। गर्मी से भी बचाव हो सकता है। शरीर में कभी कोई कठिनाई हो जाती है। इन कठिनाइयों को भी दूर किया जा सकता है, लेकिन सहनशक्ति रखने का प्रयास करना चाहिए। सहनशक्ति के विकास में मनोबल का भी काफी सहयोग होता है।
भूख लगना, प्यास लगना आदि भी एक प्रकार दुःख है, लेकिन इसे भी मनोबल के साथ सहन करने का प्रयास करना चाहिए। मनोबल होता है तो आदमी थोड़ी बड़ी कठिनाइयों को मनोबल के साथ सहन कर सकता है। परिवार अथवा समाज आदि में भी गुस्से का प्रयोग न हो। जितना संभव हो सके, सहन करने का प्रयास करना चाहिए। व्यवहार जगत को भी अपने-अपने नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
चतुर्दशी के संदर्भ में आचार्यश्री ने हाजरी के क्रम को संपादित किया। तदुपरान्त आचार्यश्री की अनुज्ञा से मुनि मेघकुमारजी व मुनि मर्यादाकुमारजी ने लेखपत्र का उच्चारण किया। तदुपरान्त उपस्थित चारित्रात्माओं ने अपने स्थान पर खड़े होकर लेखपत्र उच्चरित किया।
विद्यालय के प्रिंसिपल श्री भीखमचन्द परिहार ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। सायंकाल आचार्यश्री ने पुनः सेन्दड़ा से लगभग पांच किलोमीटर का विहार कर लालपुरा में स्थित अग्रवाल रिसोर्ट में पधारे। आचार्यश्री का कल ब्यावर में पधारेंगे।

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