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July 25, 2026

Key line times

Key Line Times राष्ट्रीय हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र है जो राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होता है एंव भारत सरकार के सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आर.एन.आई. से रजिस्ट्रड है। इसका आर.एन.आई.न. DELHIN/2017/72528 है। यह समाचार पत्र 2017 से लगातार प्रकाशित हो रहा है।
धन-धन श्री गुरु रामदास जी महाराज का प्रकाश पर्व को समर्पित श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ एवं गुरुबाणी शब्द कीर्तन के साथ मनाया जाएगा…. बिजयनगर सतीशचंद लुणावत ,जिला संवाददाता अजमेर, Key Line Times धन-धन श्री गुरु रामदास जी महाराज के प्रकाश पर्व पर नूं समर्पित पर ट्रस्ट श्री गुरु सिंह सभा बिजय नगर गुरुद्वारा साहिब बिजय नगर द्वारा बड़ी श्रद्धा और भावना से दिनाक 19 अक्टूबर 2024 वार शनिवार को मनाया जाएगा! श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ दोपहर को 3:15 से 4:15 तक बजे तक उपरांत कीर्तन दरबार सजाया जाएगा ! जिसमे भाई साहब भाई अमरजीत सिंह जी बूंदी वाले हाजरी भरेंगे संपूर्ण समाप्ति शाम को 6:15 बजे उपरांत गुरु महाराज का अटुट जलपान वरतेगा। यह जानकारी प्रधान हरगोविंद सिंह टुटेजा ने दी!

धन-धन श्री गुरु रामदास जी महाराज का प्रकाश पर्व को समर्पित श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ एवं गुरुबाणी शब्द कीर्तन के साथ मनाया जाएगा…. बिजयनगर सतीशचंद लुणावत ,जिला संवाददाता अजमेर, Key Line Times धन-धन श्री गुरु रामदास जी महाराज के प्रकाश पर्व पर नूं समर्पित पर ट्रस्ट श्री गुरु सिंह सभा बिजय नगर गुरुद्वारा साहिब बिजय नगर द्वारा बड़ी श्रद्धा और भावना से दिनाक 19 अक्टूबर 2024 वार शनिवार को मनाया जाएगा! श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ दोपहर को 3:15 से 4:15 तक बजे तक उपरांत कीर्तन दरबार सजाया जाएगा ! जिसमे भाई साहब भाई अमरजीत सिंह जी बूंदी वाले हाजरी भरेंगे संपूर्ण समाप्ति शाम को 6:15 बजे उपरांत गुरु महाराज का अटुट जलपान वरतेगा। यह जानकारी प्रधान हरगोविंद सिंह टुटेजा ने दी!

*भारत विकास परिषद मुख्य शाखा एवम् विवेकानंद शाखा का भारत को जानो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया* *8 छात्र प्रांत स्तरीय प्रतियोगिता मे दोनो शाखाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे* बिजयनगर सतीशचंद लुणावत भारत विकास परिषद मुख्य शाखा एवम् विवेकानंद शाखा का शाखा स्तरीय भारत को जानो प्रतियोगिता का द्वितीय चरण कार्यक्रम प्रश्न मंच का आयोजन महेश शिक्षा सदन संजय नगर रोड विजयनगर में किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती एवम् स्वामी विवेकानंद की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्जावलन कर वंदे मातरम गायन के साथ किया गया । कार्यक्रम में दोनो शाखाओं की कुल 25 टीमों ने भाग लिया , इनमे से वरिष्ठ वर्ग में राजकीय उ मा विद्यालय सथाना बाजार विजयनगर के टीकम लोहार तथा मोहित सोनी एवम् राज उ मा विद्यालय बाड़ी के गौरव जांगिड़ तथा निर्मल गुजर की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी तरह कनिष्ठ वर्ग में राज उ. मा. विद्यालय बाड़ी के लक्की जांगिड़ तथा कुलदीप ने एवम संजीवनी उ मा विद्यालय की हिमानी साहू तथा शशि सिखवाल की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उक्त 8 छात्रो को परितोषिक रूप में चांदी के सिक्के एवम् प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।उक्त 8 छात्र 20 अक्टूबर 2024 को अजमेर में होने वाली प्रांत स्तरीय प्रतियोगिता मे दोनो शाखाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे। शेष सभी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को प्रमाण पत्र एवम् पेन प्रदान कर उत्साह वर्धन किया गया। कार्यक्रम पूर्णरूपेण डिजिटल माध्यम से भीलवाड़ा से आए टीम सदस्य श्री पंकज जी अग्रवाल एवम् आदित्यजी व्यास द्वारा संपन्न करवाया गया। कार्यक्रम में परिषद परिवार से शाखा प्रभारी के डी मिश्रा, प्रांतीय संरक्षक रतन लाल नाहर, जिला सचिव जितेंद्र पीपाड़ा ,दिनेश कोगटा ,सत्य नारायण जोशी , बृजेश बाल्दी, विमल भंसाली , ज्ञान चन्द नाहर,प्रहलाद रायसिंघानी, डी सी जैन , लक्ष्मण लाल शर्मा , बुद्धिप्रकाश पारीक ,वीर चंद जैन ,वैभव गर्ग प्रीतेश बडोला एवम् अन्य सदस्य उपस्थित थे ।

*भारत विकास परिषद मुख्य शाखा एवम् विवेकानंद शाखा का भारत को जानो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया* *8 छात्र प्रांत स्तरीय प्रतियोगिता मे दोनो शाखाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे* बिजयनगर सतीशचंद लुणावत भारत विकास परिषद मुख्य शाखा एवम् विवेकानंद शाखा का शाखा स्तरीय भारत को जानो प्रतियोगिता का द्वितीय चरण कार्यक्रम प्रश्न मंच का आयोजन महेश शिक्षा सदन संजय नगर रोड विजयनगर में किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती एवम् स्वामी विवेकानंद की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्जावलन कर वंदे मातरम गायन के साथ किया गया । कार्यक्रम में दोनो शाखाओं की कुल 25 टीमों ने भाग लिया , इनमे से वरिष्ठ वर्ग में राजकीय उ मा विद्यालय सथाना बाजार विजयनगर के टीकम लोहार तथा मोहित सोनी एवम् राज उ मा विद्यालय बाड़ी के गौरव जांगिड़ तथा निर्मल गुजर की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी तरह कनिष्ठ वर्ग में राज उ. मा. विद्यालय बाड़ी के लक्की जांगिड़ तथा कुलदीप ने एवम संजीवनी उ मा विद्यालय की हिमानी साहू तथा शशि सिखवाल की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उक्त 8 छात्रो को परितोषिक रूप में चांदी के सिक्के एवम् प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।उक्त 8 छात्र 20 अक्टूबर 2024 को अजमेर में होने वाली प्रांत स्तरीय प्रतियोगिता मे दोनो शाखाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे। शेष सभी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को प्रमाण पत्र एवम् पेन प्रदान कर उत्साह वर्धन किया गया। कार्यक्रम पूर्णरूपेण डिजिटल माध्यम से भीलवाड़ा से आए टीम सदस्य श्री पंकज जी अग्रवाल एवम् आदित्यजी व्यास द्वारा संपन्न करवाया गया। कार्यक्रम में परिषद परिवार से शाखा प्रभारी के डी मिश्रा, प्रांतीय संरक्षक रतन लाल नाहर, जिला सचिव जितेंद्र पीपाड़ा ,दिनेश कोगटा ,सत्य नारायण जोशी , बृजेश बाल्दी, विमल भंसाली , ज्ञान चन्द नाहर,प्रहलाद रायसिंघानी, डी सी जैन , लक्ष्मण लाल शर्मा , बुद्धिप्रकाश पारीक ,वीर चंद जैन ,वैभव गर्ग प्रीतेश बडोला एवम् अन्य सदस्य उपस्थित थे ।

मुमुक्षु करुणा जी गुलेछा का करा बहुमान आनंद भवन मे …… सतीशचंद लुणावत,जिला संवाददाता अजमेर, Key Line Times ब्यावर, साधूमार्गि जैन संघ के आचार्य श्री रामेश व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म सा की महती कृपा से भीलवाड़ा शिखर महोत्सव के दौरान एक साथ 5 दीक्षा होगी। .आचार्य रामेश के मुखारविंद से 7 अक्टूबर को होने वाली एक साथ 5 दीक्षा मे से मुमुक्षु सुश्री करुणा जी सुपुत्री ऊषा हीरालाल गुलेछा के ब्यावर आगमन पर साधुमार्गी जैन संघ,समता महिला मंडल व समता युवा संघ ब्यावर द्वारा मेवाडी गेट स्थित आनंद भवन मे आये मुमुक्षु का साल माला पहनाकर बहुमान किया गया इस दौरान महिला मंडल ने मुमुक्षु के वीर माता पिता उषा हीरालाल का बहुमान करा गया। इस अवसर पर अध्यक्ष विनय रांका,पारसमल खेतपालिया,भंवर लाल औस्तवाल, उपाध्यक्ष गोतम चौधरी,रविन्द्र मकाणा, चंदूरांका,अशौक बडौला, अंकुश बोहरा, शांति लाल कुकडा, मनीष बंट, विजय औस्तवाल, कैलाश खीचा,हुक्मीचंद औस्तवाल, पंकज डागा,अध्यक्ष प्रवीण बडौला, महिला मंडल की अध्यक्ष आशा बाबेल, रूची कोठारी, मधु मेहता, रिद्धि बोहरा,अनु गुलेछा, किरणमुथा,प्रिति मुथा,सिमा डेढिया,शीलू बोहरा सम्मेत श्रावक श्राविकाओं ने सभी का अथितियों का स्वागत सत्कार किया गया। (यह लेंगे दीक्षा) 1. मुमुक्षु भाई श्री वीरांश जी पितलिया, हैदराबाद 2. मुमुक्षु श्रीमती संगीता जी पितलिया, हैदराबाद 3. मुमुक्षु बहिन सुश्री करुणा जी गुलेच्छा, केतु 4. मुमुक्षु बहिन सुश्री जिया जी कोठारी, बैंगलौर 5. मुमुक्षु बहिन सुश्री काजल जी नाहटा, अतरिया रोड़ प्रवचन पांडाल राजकीय प्राथमिक विद्यालय के पास गेट नं 33, आर. सी. व्यास कालोनी(धान्धोलाई) भीलवाड़ा (राज) में दीक्षा का कार्यक्रम होगा।

मुमुक्षु करुणा जी गुलेछा का करा बहुमान आनंद भवन मे …… सतीशचंद लुणावत,जिला संवाददाता अजमेर, Key Line Times ब्यावर, साधूमार्गि जैन संघ के आचार्य श्री रामेश व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म सा की महती कृपा से भीलवाड़ा शिखर महोत्सव के दौरान एक साथ 5 दीक्षा होगी। .आचार्य रामेश के मुखारविंद से 7 अक्टूबर को होने वाली एक साथ 5 दीक्षा मे से मुमुक्षु सुश्री करुणा जी सुपुत्री ऊषा हीरालाल गुलेछा के ब्यावर आगमन पर साधुमार्गी जैन संघ,समता महिला मंडल व समता युवा संघ ब्यावर द्वारा मेवाडी गेट स्थित आनंद भवन मे आये मुमुक्षु का साल माला पहनाकर बहुमान किया गया इस दौरान महिला मंडल ने मुमुक्षु के वीर माता पिता उषा हीरालाल का बहुमान करा गया। इस अवसर पर अध्यक्ष विनय रांका,पारसमल खेतपालिया,भंवर लाल औस्तवाल, उपाध्यक्ष गोतम चौधरी,रविन्द्र मकाणा, चंदूरांका,अशौक बडौला, अंकुश बोहरा, शांति लाल कुकडा, मनीष बंट, विजय औस्तवाल, कैलाश खीचा,हुक्मीचंद औस्तवाल, पंकज डागा,अध्यक्ष प्रवीण बडौला, महिला मंडल की अध्यक्ष आशा बाबेल, रूची कोठारी, मधु मेहता, रिद्धि बोहरा,अनु गुलेछा, किरणमुथा,प्रिति मुथा,सिमा डेढिया,शीलू बोहरा सम्मेत श्रावक श्राविकाओं ने सभी का अथितियों का स्वागत सत्कार किया गया। (यह लेंगे दीक्षा) 1. मुमुक्षु भाई श्री वीरांश जी पितलिया, हैदराबाद 2. मुमुक्षु श्रीमती संगीता जी पितलिया, हैदराबाद 3. मुमुक्षु बहिन सुश्री करुणा जी गुलेच्छा, केतु 4. मुमुक्षु बहिन सुश्री जिया जी कोठारी, बैंगलौर 5. मुमुक्षु बहिन सुश्री काजल जी नाहटा, अतरिया रोड़ प्रवचन पांडाल राजकीय प्राथमिक विद्यालय के पास गेट नं 33, आर. सी. व्यास कालोनी(धान्धोलाई) भीलवाड़ा (राज) में दीक्षा का कार्यक्रम होगा।

शांतिदूत की मंगल सन्निधि में पहुंचे भारत सरकार के कानून एवं न्याय राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , डायमण्ड सिटि व सिल्क सिटि सूरत को आध्यात्मिक नगरी के रूप में स्थापित कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु की भारी भीड़ उमड़ रही है तो दूसरी ओर आए दिन कोई न कोई विशिष्ट व्यक्तित्व भी आचार्यश्री के दर्शनार्थ उपस्थित होते हैं। गुजरात के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, शिक्षामंत्री, भारत के जलशक्ति मंत्री आदि-आदि अनेक विशिष्ट लोगों के साथ अनेक संप्रदायों के सर्वोच्च गुुरु भी उपस्थित हो रहे हैं। इनकी उपस्थिति इस चतुर्मास प्रवास को और अधिक वैशिष्ट्य प्रदान कर रही है। नवरात्र के आध्यात्मिक अनुष्ठान व अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दौरान शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भारत सरकार के कानून एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री तथा जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अर्जुनराम मेघवाल भी उपस्थित हुए। उन्होंने आचार्यश्री के दर्शन किया। साथ आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में आज एनसीसी के सैंकड़ों कैडेट भी अपने मेजर के साथ उपस्थित हुए और आचार्यश्री से नशामुक्ति का संकल्प स्वीकार किया। नित्य की भांति शनिवार को महावीर समवसरण में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का मंगल पदार्पण हुआ। आचार्यश्री ने चतुर्विध धर्मसंघ को आध्यात्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत मंत्रों का जप कराया। लगभग आधे घंटे के इस क्रम में मानों पूरा महावीर समवसरण एक तपोस्थली की भांति प्रतीत हो रही थी। उपस्थित जनता को ‘आयारो’ आगम के माध्यम से युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में भोजन का भी महत्त्व होता है। शरीर को टिकाए रखने के लिए हवा, पानी और भोजन भी चाहिए। यह जीवन की प्रथम कोटि की आवश्यकताएं हैं। इन तीनों में पहला स्थान हवा का है, दूसरा स्थान जल का और तीसरा स्थान भोजन का है। भोजन किए बिना तो कितने तपस्वी महीने-दो महीने से भी अधिक समय तक रह जाते हैं तो उनका जीवन चलता रहता है। आहार के बिना तो कई महीनों तक मानव जिंदा रह सकता है। जल मानों मानव जीवन के लिए ज्यादा जरूरी है। पानी के बिना ज्यादा लम्बे समय तक जीवित रहना कठिन है। पानी से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हवा होती है। हवा न हो तो आदमी श्वास नहीं ले तो कुछ ही मिनट में मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। प्रथम कोटि की आवश्यकताओं में हवा उत्कृष्ट, पानी मध्यम और भोजन जघन्य रूप की आवश्यकता होती है। दूसरे कोटि की आवश्यकताओं में देखें तो तन ढकने के कपड़ा और रहने के लिए मकान की आवश्यकता होती है। कितने दिगम्बर मुनि और अन्य परंपराओं के कितने मुनि बिना वस्त्रों के जीवन जीते हैं। मकान नहीं होता है तो भी फुटपाथ और वृक्षों के नीचे रहकर भी जीवन चलाया जा सकता है। तीसरे कोटि की आवश्यकता में शिक्षा और चिकित्सा होती है। इस प्रकार जीवन की इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मानव कई बार चिंतित हो सकता है और दुःखी भी हो सकते हैं। आयारो में बताया गया कि जो वीर होते हैं, वो रूखा-सुखा खाकर भी जीवित रह जाते हैं। आदमी को भोजन चाहिए, सात्विक भोजन की आवश्कता है, किन्तु कई बार आदमी ऐसी चीजों को खा लेता है, जो जीवन को नुक्सान पहुंचाने वाली होती हैं। जैसे मानव जीवन के लिए जल कितना आवश्यक है, लेकिन आदमी शराब पीने लग जाता है। शराब, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी आदि जो शरीर के लिए अहितकर होती है, उसका आसेवन करने लगता है। शाकाहार से काम चलता है तो फिर भोजन मासांहार क्यों शामिल किया जाए। जैन परंपरा में नॉनवेज को निषेध किया गया है। जीवन में नशामुक्ति की बात भी है। अणुव्रत आन्दोलन का एक सूत्र है नशामुक्ति। आचार्यश्री तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन का शुभारम्भ किया था। आज अर्जुनरामजी मेघवाल जी आए हैं। भारत सरकार के मंत्री हैं, अणुव्रत से भी जुड़े हुए हैं और हमारे जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं। ये इतने बार आ चुके हैं, मानों हमारे बहुत अच्छे परिचित हैं। मानों परिवार के सदस्य की भांति हैं। गुरुदेव तुलसी के समय ये विद्यार्थी के रूप में थे, तब से इनका लगाव रहा है। प्राकृत भाषा को क्लासिकल भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। हमारे शास्त्रों की भाषा प्राकृत, अर्धमागधि में है। संस्कृत, प्राकृत आदि में निर्मित ग्रंथों में इतने गूढ़ रहस्य हैं कि विज्ञान के लिए भी काम आ जाते हैं। ग्रंथों और पंथों का लाभ जनता को मिले। राजनीति भी सेवा बहुत बड़ा माध्यम है। अणुव्रत की अनेक संस्थाएं हैं, इनमें अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी अणुव्रत के कार्यों के लिए जिम्मेवार संस्था है। अभी अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह भी चल रहा है। आज पांचवा दिन है। अणुव्रत का जितना प्रचार-प्रसार हो सके, इसका प्रयास हो। आचार्यश्री ने समुपस्थित एन.सी.सी. के कैडेटों को प्रेरणा देते हुए ड्रग्स और ड्रिंकिंग न करने प्रतिज्ञा करने का आह्वान किया तो एन.सी.सी. के कैडेटों ने सहर्ष संकल्प स्वीकार किया। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का पांचवा दिन नशामुक्ति दिवस के रूप में समायोजित हुआ। श्री राजेश सुराणा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। एन.सी.सी. की मेजर अरुधंति शाह ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि आज के अवसर पर मैं आचार्यश्री महाश्रमणजी को प्रणाम करती हूं। नशामुक्ति आज के समय की सबसे बड़ी समस्या है। जैन धर्म को वैज्ञानिक धर्म माना गया है। यहां पर मानव जीवन के विभिन्न समस्याओं का समाधान हो सकता है। आज दुनिया डेटा में फंस गयी है तो उसे सप्ताह में एक दिन डेटा का भी उपवास करे, ऐसा प्रयास होना चाहिए। एलिवेट के कार्य से जुड़े मुनि अभिजितकुमारजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। अणुव्रत समिति-सूरत के अध्यक्ष श्री विमल लोढ़ा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। उपस्थित जनता को आज के अवसर पर साध्वीप्रमुखाजी ने भी उद्बोधित किया। भारत सरकार के कानून एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में पहुंचे और आचार्यश्री को वंदन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि मैं आचार्यश्री महाश्रमणजी को प्रणाम करता हूं। आज अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत नशामुक्ति दिवस है, उस संदर्भ में कहना चाहूंगा कि नशामुक्ति के लिए अणुव्रत एक्सप्रेस में कार्य किया जा सकता है। एन.सी.सी. जीवन में अनुशासन का बहुत महत्त्व होता है। आचार्यश्री तुलसी ने अपने से अपना अनुशासन करने की प्रेरणा दी। नॉनवेज छोड़कर सात्विक हो जाएं तो विचारों में कितनी उन्नति हो जाएगी। आचार्यश्री जो आशीर्वाद बरसाया, मेरे लिए बहुत ही प्रेरणास्पद रही है। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति-सूरत की ओर से चतुर्मास के लिए स्थान प्रदान करने वाले वालों को सम्मानित करने का उपक्रम रहा, जिसमें भगवान महावीर युनिवर्सिटि परिवार, श्री विट्ठलभाई परेवियार परिवार, श्री राजेश-तनसुख आहिर परिवार, श्री किरणभाई पटेल परिवार, श्री मोहनभाई छिवंका भाई पटेल परिवार, श्री जयप्रकाश खानचंदजी आसवानी परिवार, श्री शंकरलाल मारवाड़ी परिवार, श्री जीवन केवलभाई पटेल परिवार, श्री रविन्द्रभाई पटेल परिवार, श्री मनीष, महेन्द्र, मुकुल देसाई परिवार, श्री मोहनभाई मोंजानी परिवार, श्री संजयभाई पटेल परिवार, श्री विनीत रणजीतसिंह सुराणा, श्री हिरणभाई देसाई परिवार, श्री अमितभाई देसाई परिवार, श्री दिवेश, मनहर परमार परिवार, चीफ फायर आफिसर श्री बसंतभाई पारिख, जोन आफिसर अठवा जोन श्रीमती मिताबेन गांधी परिवार, भाजपा-सूरत के महामंत्री श्री किशोर बिंदल को सम्मानित किया गया। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने पावन आशीर्वाद प्रदान किया। इस कार्यक्रम का संचालन चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री श्री नानालाल राठौड़ ने किया।

शांतिदूत की मंगल सन्निधि में पहुंचे भारत सरकार के कानून एवं न्याय राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , डायमण्ड सिटि व सिल्क सिटि सूरत को आध्यात्मिक नगरी के रूप में स्थापित कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु की भारी भीड़ उमड़ रही है तो दूसरी ओर आए दिन कोई न कोई विशिष्ट व्यक्तित्व भी आचार्यश्री के दर्शनार्थ उपस्थित होते हैं। गुजरात के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, शिक्षामंत्री, भारत के जलशक्ति मंत्री आदि-आदि अनेक विशिष्ट लोगों के साथ अनेक संप्रदायों के सर्वोच्च गुुरु भी उपस्थित हो रहे हैं। इनकी उपस्थिति इस चतुर्मास प्रवास को और अधिक वैशिष्ट्य प्रदान कर रही है। नवरात्र के आध्यात्मिक अनुष्ठान व अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दौरान शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भारत सरकार के कानून एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री तथा जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अर्जुनराम मेघवाल भी उपस्थित हुए। उन्होंने आचार्यश्री के दर्शन किया। साथ आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में आज एनसीसी के सैंकड़ों कैडेट भी अपने मेजर के साथ उपस्थित हुए और आचार्यश्री से नशामुक्ति का संकल्प स्वीकार किया। नित्य की भांति शनिवार को महावीर समवसरण में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का मंगल पदार्पण हुआ। आचार्यश्री ने चतुर्विध धर्मसंघ को आध्यात्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत मंत्रों का जप कराया। लगभग आधे घंटे के इस क्रम में मानों पूरा महावीर समवसरण एक तपोस्थली की भांति प्रतीत हो रही थी। उपस्थित जनता को ‘आयारो’ आगम के माध्यम से युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में भोजन का भी महत्त्व होता है। शरीर को टिकाए रखने के लिए हवा, पानी और भोजन भी चाहिए। यह जीवन की प्रथम कोटि की आवश्यकताएं हैं। इन तीनों में पहला स्थान हवा का है, दूसरा स्थान जल का और तीसरा स्थान भोजन का है। भोजन किए बिना तो कितने तपस्वी महीने-दो महीने से भी अधिक समय तक रह जाते हैं तो उनका जीवन चलता रहता है। आहार के बिना तो कई महीनों तक मानव जिंदा रह सकता है। जल मानों मानव जीवन के लिए ज्यादा जरूरी है। पानी के बिना ज्यादा लम्बे समय तक जीवित रहना कठिन है। पानी से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हवा होती है। हवा न हो तो आदमी श्वास नहीं ले तो कुछ ही मिनट में मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। प्रथम कोटि की आवश्यकताओं में हवा उत्कृष्ट, पानी मध्यम और भोजन जघन्य रूप की आवश्यकता होती है। दूसरे कोटि की आवश्यकताओं में देखें तो तन ढकने के कपड़ा और रहने के लिए मकान की आवश्यकता होती है। कितने दिगम्बर मुनि और अन्य परंपराओं के कितने मुनि बिना वस्त्रों के जीवन जीते हैं। मकान नहीं होता है तो भी फुटपाथ और वृक्षों के नीचे रहकर भी जीवन चलाया जा सकता है। तीसरे कोटि की आवश्यकता में शिक्षा और चिकित्सा होती है। इस प्रकार जीवन की इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मानव कई बार चिंतित हो सकता है और दुःखी भी हो सकते हैं। आयारो में बताया गया कि जो वीर होते हैं, वो रूखा-सुखा खाकर भी जीवित रह जाते हैं। आदमी को भोजन चाहिए, सात्विक भोजन की आवश्कता है, किन्तु कई बार आदमी ऐसी चीजों को खा लेता है, जो जीवन को नुक्सान पहुंचाने वाली होती हैं। जैसे मानव जीवन के लिए जल कितना आवश्यक है, लेकिन आदमी शराब पीने लग जाता है। शराब, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी आदि जो शरीर के लिए अहितकर होती है, उसका आसेवन करने लगता है। शाकाहार से काम चलता है तो फिर भोजन मासांहार क्यों शामिल किया जाए। जैन परंपरा में नॉनवेज को निषेध किया गया है। जीवन में नशामुक्ति की बात भी है। अणुव्रत आन्दोलन का एक सूत्र है नशामुक्ति। आचार्यश्री तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन का शुभारम्भ किया था। आज अर्जुनरामजी मेघवाल जी आए हैं। भारत सरकार के मंत्री हैं, अणुव्रत से भी जुड़े हुए हैं और हमारे जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं। ये इतने बार आ चुके हैं, मानों हमारे बहुत अच्छे परिचित हैं। मानों परिवार के सदस्य की भांति हैं। गुरुदेव तुलसी के समय ये विद्यार्थी के रूप में थे, तब से इनका लगाव रहा है। प्राकृत भाषा को क्लासिकल भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। हमारे शास्त्रों की भाषा प्राकृत, अर्धमागधि में है। संस्कृत, प्राकृत आदि में निर्मित ग्रंथों में इतने गूढ़ रहस्य हैं कि विज्ञान के लिए भी काम आ जाते हैं। ग्रंथों और पंथों का लाभ जनता को मिले। राजनीति भी सेवा बहुत बड़ा माध्यम है। अणुव्रत की अनेक संस्थाएं हैं, इनमें अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी अणुव्रत के कार्यों के लिए जिम्मेवार संस्था है। अभी अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह भी चल रहा है। आज पांचवा दिन है। अणुव्रत का जितना प्रचार-प्रसार हो सके, इसका प्रयास हो। आचार्यश्री ने समुपस्थित एन.सी.सी. के कैडेटों को प्रेरणा देते हुए ड्रग्स और ड्रिंकिंग न करने प्रतिज्ञा करने का आह्वान किया तो एन.सी.सी. के कैडेटों ने सहर्ष संकल्प स्वीकार किया। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का पांचवा दिन नशामुक्ति दिवस के रूप में समायोजित हुआ। श्री राजेश सुराणा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। एन.सी.सी. की मेजर अरुधंति शाह ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि आज के अवसर पर मैं आचार्यश्री महाश्रमणजी को प्रणाम करती हूं। नशामुक्ति आज के समय की सबसे बड़ी समस्या है। जैन धर्म को वैज्ञानिक धर्म माना गया है। यहां पर मानव जीवन के विभिन्न समस्याओं का समाधान हो सकता है। आज दुनिया डेटा में फंस गयी है तो उसे सप्ताह में एक दिन डेटा का भी उपवास करे, ऐसा प्रयास होना चाहिए। एलिवेट के कार्य से जुड़े मुनि अभिजितकुमारजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। अणुव्रत समिति-सूरत के अध्यक्ष श्री विमल लोढ़ा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। उपस्थित जनता को आज के अवसर पर साध्वीप्रमुखाजी ने भी उद्बोधित किया। भारत सरकार के कानून एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में पहुंचे और आचार्यश्री को वंदन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि मैं आचार्यश्री महाश्रमणजी को प्रणाम करता हूं। आज अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत नशामुक्ति दिवस है, उस संदर्भ में कहना चाहूंगा कि नशामुक्ति के लिए अणुव्रत एक्सप्रेस में कार्य किया जा सकता है। एन.सी.सी. जीवन में अनुशासन का बहुत महत्त्व होता है। आचार्यश्री तुलसी ने अपने से अपना अनुशासन करने की प्रेरणा दी। नॉनवेज छोड़कर सात्विक हो जाएं तो विचारों में कितनी उन्नति हो जाएगी। आचार्यश्री जो आशीर्वाद बरसाया, मेरे लिए बहुत ही प्रेरणास्पद रही है। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति-सूरत की ओर से चतुर्मास के लिए स्थान प्रदान करने वाले वालों को सम्मानित करने का उपक्रम रहा, जिसमें भगवान महावीर युनिवर्सिटि परिवार, श्री विट्ठलभाई परेवियार परिवार, श्री राजेश-तनसुख आहिर परिवार, श्री किरणभाई पटेल परिवार, श्री मोहनभाई छिवंका भाई पटेल परिवार, श्री जयप्रकाश खानचंदजी आसवानी परिवार, श्री शंकरलाल मारवाड़ी परिवार, श्री जीवन केवलभाई पटेल परिवार, श्री रविन्द्रभाई पटेल परिवार, श्री मनीष, महेन्द्र, मुकुल देसाई परिवार, श्री मोहनभाई मोंजानी परिवार, श्री संजयभाई पटेल परिवार, श्री विनीत रणजीतसिंह सुराणा, श्री हिरणभाई देसाई परिवार, श्री अमितभाई देसाई परिवार, श्री दिवेश, मनहर परमार परिवार, चीफ फायर आफिसर श्री बसंतभाई पारिख, जोन आफिसर अठवा जोन श्रीमती मिताबेन गांधी परिवार, भाजपा-सूरत के महामंत्री श्री किशोर बिंदल को सम्मानित किया गया। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने पावन आशीर्वाद प्रदान किया। इस कार्यक्रम का संचालन चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री श्री नानालाल राठौड़ ने किया।

सिलीगुड़ी चातुर्मास 2024 दिनाक 5-10-2024 को सुबह 5:30 बजे से कार्यक्रम मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र कुमारजी के नवकार महामंत्र के संगान के साथ प्रारम्भ हुवा….मीनू धाडेंवा, जिला संवाददाता, Key Line Times आज भक्ताम्बर स्तोत्र मंत्र सिद्धि आराधना महाअनुष्ठान का तृतीय दिवस था,आज मुनिश्री ने श्लोक नबर 11 से 15 तक का अनुष्ठान ऋद्धि मंत्रो एवम मंत्रो के उच्चारणों के साथ बहुत ही तन्मयता के साथ करवाया,वहा का वातावरण बहुत ही तलीन और खुशनुमा प्रतीत हो रहा था सभी ने मनोभाव के साथ यह महाअनुष्ठान में भाग लेकर अपने आप को अच्छा मान रहे हैं, मुनिश्री ने पहले फ़रमाया था की जो भी इस अनुष्ठान में भाग लेने में चूक जाएगा वह आगे निराश अवश्य होगा यह बात भी सच हो रही है मुनिश्री द्वारा मंगल पाठ के साथ आज का अनुष्ठान संपन्न किया गया,यह अनुष्ठान नो दिन तक चलेगा संवाददाता मीनू धाडे़वा

सिलीगुड़ी चातुर्मास 2024 दिनाक 5-10-2024 को सुबह 5:30 बजे से कार्यक्रम मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र कुमारजी के नवकार महामंत्र के संगान के साथ प्रारम्भ हुवा….मीनू धाडेंवा, जिला संवाददाता, Key Line Times आज भक्ताम्बर स्तोत्र मंत्र सिद्धि आराधना महाअनुष्ठान का तृतीय दिवस था,आज मुनिश्री ने श्लोक नबर 11 से 15 तक का अनुष्ठान ऋद्धि मंत्रो एवम मंत्रो के उच्चारणों के साथ बहुत ही तन्मयता के साथ करवाया,वहा का वातावरण बहुत ही तलीन और खुशनुमा प्रतीत हो रहा था सभी ने मनोभाव के साथ यह महाअनुष्ठान में भाग लेकर अपने आप को अच्छा मान रहे हैं, मुनिश्री ने पहले फ़रमाया था की जो भी इस अनुष्ठान में भाग लेने में चूक जाएगा वह आगे निराश अवश्य होगा यह बात भी सच हो रही है मुनिश्री द्वारा मंगल पाठ के साथ आज का अनुष्ठान संपन्न किया गया,यह अनुष्ठान नो दिन तक चलेगा संवाददाता मीनू धाडे़वा

मुंबई ज्ञानशाला द्वारा नवज्ञा कार्यशाला का सफल आयोजन….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times. 2 अक्टूबर बुधवार, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा मुंबई के तत्वावधान में मुम्बई ज्ञानशाला विभाग द्वारा महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल कालबादेवी के प्रांगण में आचार्य महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री कुलदीप कुमारजी एवं सहवर्ती मुनि श्री मुकुलकुमारजी के सान्निध्य में *”नवज्ञा – नव विचार नव दिशा”* कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की रूपरेखा आंचलिक संयोजिका श्रीमती राजश्री जी कच्छारा,आंचलिक सह संयोजिका अंजु जी चौधरी एवं विभागीय संयोजिका चंचल जी परमार ने की। कार्यक्रम की शुभ शुरुआत मुनिश्री ने नमस्कार महामंत्र से की। परामर्शक मधु जी मेहता ने ध्यान के प्रयोग करवाए। कार्यक्रम के प्रथम चरण में आशुभाषण प्रतियोगिता रखी गयी जिसमे 18 प्रतियोगियों ने भाग लिया, सभी को विषय उसी समय दिए गए । इस प्रतियोगिता में प्रथम – रेखा धाकड़ (सायन कोलीवाड़ा) ,द्वितीय- कविता बदामिया (पालघर) एवं तृतीय – कुसुम हिरण (चेम्बूर) व मीना मेडतवाल (वाशी) ने प्राप्त किया। सभी विजेताओं व प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया । आशुभाषण प्रतियोगिता का संचालन समिति सदस्या निर्मला जी मेहता ने किया और उसके निर्णायक की भूमिका मुंबई ज्ञानशाला की दोनों पूर्व आंचलिक संयोजिका श्रीमती निर्मला जी चण्डालिया एवं श्रीमती सुमन जी चपलोत ने निभाई । कार्यक्रम के द्वितीय चरण में महाप्रज्ञ जोन की प्रशिक्षिकाओं ने मंगलाचरण की सुंदर प्रस्तुति दी। श्रद्धेय मुनिश्री कुलदीप कुमारजी ने प्रेरणास्पद शब्दो में ज्ञानशाला के इतिहास पर प्रकाश डाला व नए ज्ञानार्थियों को जोड़ने की प्रेरणा दी। मुनि श्री मुकुल कुमार जी ने नवज्ञा का अर्थ बताते हुए मिच्छामि दुक्कड़, खमत खमणा के अनेक रहस्यों को उद्घाटित किया । प्रत्याख्यान ,प्रायश्चित, सारणा -वारणा ,सूझता असूझता आदि को समझाते हुए भक्तामर के श्लोक व लाभ की सभी को सूक्ष्म जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षिका कैसी हो, प्रशिक्षिका का गृहस्थ रूप कैसा हो आदि तथ्यों को समझाया। मुनिश्री द्वारा प्रदत्त नवरात्रि मंत्रों के जाप का संकल्प मुम्बई ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं ने लिया। परामर्शक हेमलता जी मादरेचा एवं नीलम जी कोठारी ने इन संकल्पों के लिए नवरात्रि मंत्र आराधना कार्ड बनाया और इस कार्ड द्वारा मुनिश्री के चरण कमलों में संकल्पों की भेंट समर्पित की गई । आंचलिक संयोजिका श्रीमती राजश्री कच्छारा ने स्वागत के स्वरों के साथ अपने भावों को अभिव्यक्त किया। मुंबई सभा के अध्यक्ष श्रीमान माणक जी धींग, महामंत्री दिनेश जी सुतरिया, नवरतन जी गन्ना, महाप्रज्ञ विद्या निधि फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष कुंदनमल जी धाकड़, दक्षिण मुंबई तेरापंथी सभा के अध्यक्ष सुरेश जी डागलिया,उपाध्यक्ष नितेश जी धाकड़, गणपत जी डागलिया, लक्ष्मीलाल जी डागलिया, तेयुप अध्यक्ष गिरीश जी सिसोदिया, महिला मंडल अध्यक्ष वनिता जी धाकड़ के साथ अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ सभा दक्षिण मुंबई के ज्ञानशाला परिवार की तपस्वी प्रशिक्षक बहनों का सम्मान किया गया जिसका नामोल्लेख समिति सदस्य रेखा जी कच्छारा ने किया। विभागीय सह संयोजिका शीतल जी सांखला ने वीडियो प्रतिभागियों का नामोल्लेख किया। सूरत चातुर्मास में ज्ञानकुंज में वीडियो भेजने वाले मुम्बई ज्ञानशाला के भिक्षु, माणकगणी, डालगणी, कालुगणी एवं महाप्रज्ञ ज़ोन को सम्मानित किया गया, साथ ही ज्ञानशाला दिवस पर वीडियो बनाने वाले विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। जिसमे प्रथम डालगणी जोन, द्वितीय भारमल जोन व तृतीय जोन मघवागणी जोन रहे। ज्ञानशाला प्रशिक्षक परीक्षा की तैयारी कराने के लिए प्रशिक्षक सपना जी डागलिया ठाणे, रेखा जी धाकड़ सायन कोलीवाड़ा, कुसुम जी हिरण चेंबूर, रत्ना जी कोठारी घाटकोपर , संगीता जी हिरण भायंदर व इंद्रा जी चण्डालिया को सम्मानित किया गया। 100 %उपस्थित रहने वाली ज्ञानशालाओ की प्रशिक्षिकाओ को सम्मानित किया गया और लक्की ड्रॉ भी निकाले गए। कार्यशाला का कुशल संचालन विभागीय सह संयोजिका संगीता जी बाफना एवं समिति सदस्य नयना जी धाकड़ ने किया तथा आभार ज्ञापन समिति सदस्या वनिता जी धाकड़ ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में रेखा जी खाब्या, कामिनी जी बडाला, रिंकु जी भंसाली, सोनल जी हिंगड़, रमिला जी गन्ना, सुनीता जी कोठारी, मोनिका जी बापना, प्रीति जी एवं दक्षिण मुंबई की प्रशिक्षक बहनों का विशेष सहयोग रहा ।

मुंबई ज्ञानशाला द्वारा नवज्ञा कार्यशाला का सफल आयोजन….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times. 2 अक्टूबर बुधवार, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा मुंबई के तत्वावधान में मुम्बई ज्ञानशाला विभाग द्वारा महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल कालबादेवी के प्रांगण में आचार्य महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री कुलदीप कुमारजी एवं सहवर्ती मुनि श्री मुकुलकुमारजी के सान्निध्य में *”नवज्ञा – नव विचार नव दिशा”* कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की रूपरेखा आंचलिक संयोजिका श्रीमती राजश्री जी कच्छारा,आंचलिक सह संयोजिका अंजु जी चौधरी एवं विभागीय संयोजिका चंचल जी परमार ने की। कार्यक्रम की शुभ शुरुआत मुनिश्री ने नमस्कार महामंत्र से की। परामर्शक मधु जी मेहता ने ध्यान के प्रयोग करवाए। कार्यक्रम के प्रथम चरण में आशुभाषण प्रतियोगिता रखी गयी जिसमे 18 प्रतियोगियों ने भाग लिया, सभी को विषय उसी समय दिए गए । इस प्रतियोगिता में प्रथम – रेखा धाकड़ (सायन कोलीवाड़ा) ,द्वितीय- कविता बदामिया (पालघर) एवं तृतीय – कुसुम हिरण (चेम्बूर) व मीना मेडतवाल (वाशी) ने प्राप्त किया। सभी विजेताओं व प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया । आशुभाषण प्रतियोगिता का संचालन समिति सदस्या निर्मला जी मेहता ने किया और उसके निर्णायक की भूमिका मुंबई ज्ञानशाला की दोनों पूर्व आंचलिक संयोजिका श्रीमती निर्मला जी चण्डालिया एवं श्रीमती सुमन जी चपलोत ने निभाई । कार्यक्रम के द्वितीय चरण में महाप्रज्ञ जोन की प्रशिक्षिकाओं ने मंगलाचरण की सुंदर प्रस्तुति दी। श्रद्धेय मुनिश्री कुलदीप कुमारजी ने प्रेरणास्पद शब्दो में ज्ञानशाला के इतिहास पर प्रकाश डाला व नए ज्ञानार्थियों को जोड़ने की प्रेरणा दी। मुनि श्री मुकुल कुमार जी ने नवज्ञा का अर्थ बताते हुए मिच्छामि दुक्कड़, खमत खमणा के अनेक रहस्यों को उद्घाटित किया । प्रत्याख्यान ,प्रायश्चित, सारणा -वारणा ,सूझता असूझता आदि को समझाते हुए भक्तामर के श्लोक व लाभ की सभी को सूक्ष्म जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षिका कैसी हो, प्रशिक्षिका का गृहस्थ रूप कैसा हो आदि तथ्यों को समझाया। मुनिश्री द्वारा प्रदत्त नवरात्रि मंत्रों के जाप का संकल्प मुम्बई ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं ने लिया। परामर्शक हेमलता जी मादरेचा एवं नीलम जी कोठारी ने इन संकल्पों के लिए नवरात्रि मंत्र आराधना कार्ड बनाया और इस कार्ड द्वारा मुनिश्री के चरण कमलों में संकल्पों की भेंट समर्पित की गई । आंचलिक संयोजिका श्रीमती राजश्री कच्छारा ने स्वागत के स्वरों के साथ अपने भावों को अभिव्यक्त किया। मुंबई सभा के अध्यक्ष श्रीमान माणक जी धींग, महामंत्री दिनेश जी सुतरिया, नवरतन जी गन्ना, महाप्रज्ञ विद्या निधि फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष कुंदनमल जी धाकड़, दक्षिण मुंबई तेरापंथी सभा के अध्यक्ष सुरेश जी डागलिया,उपाध्यक्ष नितेश जी धाकड़, गणपत जी डागलिया, लक्ष्मीलाल जी डागलिया, तेयुप अध्यक्ष गिरीश जी सिसोदिया, महिला मंडल अध्यक्ष वनिता जी धाकड़ के साथ अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ सभा दक्षिण मुंबई के ज्ञानशाला परिवार की तपस्वी प्रशिक्षक बहनों का सम्मान किया गया जिसका नामोल्लेख समिति सदस्य रेखा जी कच्छारा ने किया। विभागीय सह संयोजिका शीतल जी सांखला ने वीडियो प्रतिभागियों का नामोल्लेख किया। सूरत चातुर्मास में ज्ञानकुंज में वीडियो भेजने वाले मुम्बई ज्ञानशाला के भिक्षु, माणकगणी, डालगणी, कालुगणी एवं महाप्रज्ञ ज़ोन को सम्मानित किया गया, साथ ही ज्ञानशाला दिवस पर वीडियो बनाने वाले विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। जिसमे प्रथम डालगणी जोन, द्वितीय भारमल जोन व तृतीय जोन मघवागणी जोन रहे। ज्ञानशाला प्रशिक्षक परीक्षा की तैयारी कराने के लिए प्रशिक्षक सपना जी डागलिया ठाणे, रेखा जी धाकड़ सायन कोलीवाड़ा, कुसुम जी हिरण चेंबूर, रत्ना जी कोठारी घाटकोपर , संगीता जी हिरण भायंदर व इंद्रा जी चण्डालिया को सम्मानित किया गया। 100 %उपस्थित रहने वाली ज्ञानशालाओ की प्रशिक्षिकाओ को सम्मानित किया गया और लक्की ड्रॉ भी निकाले गए। कार्यशाला का कुशल संचालन विभागीय सह संयोजिका संगीता जी बाफना एवं समिति सदस्य नयना जी धाकड़ ने किया तथा आभार ज्ञापन समिति सदस्या वनिता जी धाकड़ ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में रेखा जी खाब्या, कामिनी जी बडाला, रिंकु जी भंसाली, सोनल जी हिंगड़, रमिला जी गन्ना, सुनीता जी कोठारी, मोनिका जी बापना, प्रीति जी एवं दक्षिण मुंबई की प्रशिक्षक बहनों का विशेष सहयोग रहा ।

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का चौथा दिन पर्यावरण शुद्धि दिवस के रूप में समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , आश्विन माह के शुक्लपक्ष में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में नौ दिनों तक आध्यात्मिक अनुष्ठान का क्रम चल रहा है तो दूसरी ओर अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का क्रम भी संचालित हो रहा है। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में इन विभिन्न आध्यात्मिक उपक्रमों से जुड़कर श्रद्धालु अपनी धार्मिक-आध्यात्मिक उन्नति करने का प्रयास कर रहे हैं। पूरे विश्व भर इस समय शक्ति की अधिष्ठात्री देवी की आराधना का क्रम भी चल रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस त्योहार अलग-अलग रूपों में मनाया जा रहा है। गुजरात प्रदेश में इन नौ दिनों में दुर्गापूजा के साथ-साथ गरबे की धूम भी देखने को मिलती है। गुजरात राज्य के डायमण्ड सिटि सूरत में चतुर्मास कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में महावीर समवसरण में शुक्रवार को भी आचार्यश्री के साथ उपस्थित जनता ने मंगल प्रवचन से पूर्व आध्यात्मिक अनुष्ठान से जुड़ी। लगभग आधे घंटे के आध्यात्मिक अनुष्ठान के उपरान्त जनता को आचार्यश्री ने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराया। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को आयारो आगम के माध्यम से पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि हमारे जीवन में आत्मा और शरीर दो तत्त्व हैं। आत्मा चैतन्यमय है तो शरीर पुद्गल है। चेतन और अचेतन दोनों का योग होना ही जीवन है। आत्मा और शरीर का अलग हो जाना ही मृत्यु है। चेतन का अचेतन के साथ वियोग हो जाना मृत्यु हो जाती है। आत्मा हमेशा के लिए शरीर से मुक्त हो जाए, वह मोक्ष हो जाता है। स्थूल शरीर के सिवाय दो शरीर और होते हैं। उनमें एक होता है तैजस शरीर है। उससे भी सूक्ष्मतर शरीर है कार्मण शरीर उसे कर्म शरीर भी कहा जाता है। आयारो में कहा गया है कि कर्म शरीर को प्रकंपित करो। ज्ञातव्य है कि यह कार्मण शरीर ही जन्म-मरण का कारण है। आदमी के जीवन में होने वाले प्रत्येक सुख-दुःख हर्ष-विसाद आदि का मूल कारण कार्मण शरीर होता है। इसलिए इसे कारण शरीर भी कहा जाता है। आदमी ज्ञान और संयम के द्वारा इसे कमजोर कर सकते हैं। आदमी के पास सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र है तो इस कारण शरीर को प्रकंपित किया जा सकता है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तीसरे दिन को पर्यावरण शुद्धि दिवस के रूप में समायोजित किया गया। इस कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. दयांजलि ठक्कर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन का सौभाग्य मिल रहा है। हम सभी को पर्यावरण को प्रदूषित नहीं, जितना हो संभव हो सके, उसके शुद्धिकरण का प्रयास करें। जितना संभव हो सके पेड़-पौधों को लगाने का प्रयास करें। अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तीसरे दिन पर्यावरण शुद्धि दिवस के संदर्भ में पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में अहिंसा और संयम-ये दो तत्त्व रहते हैं तो अनेक समस्याओं का समाधान अपने आप हो सकता है। यह मानव जीवन के व्यवहार के साथ जुड़ा रहे। वृक्षों को अनावश्यक न काटा जाए, इसके लिए आगम में जागरूक किया गया है। वनस्पति और मानव में समानता की बात भी बताई गई है। वनस्पति भी प्राणी है, उसके प्रति संयम रखने का प्रयास हो। बिजली, पानी आदि का जितना संयम किया जा सके, करने का प्रयास करना चाहिए। अहिंसा और संयम के द्वारा पर्यावरण को ही नहीं, अपनी आत्मा को भी शुद्ध बनाया जा सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश गौतम ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने चौबीसी के गीत को प्रस्तुति दी। तेरापंथी सभा-चेन्नई केे अध्यक्ष श्री अशोक खंतग ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। चेन्नई ज्ञानशालाओं के ज्ञानार्थियों व प्रशिक्षिकाओं ने संयुक्त रूप से गीत को प्रस्तुति दी। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने पावन आशीर्वाद प्रदान किया। बालक हर्षिल बरड़िया बालसुलभ गीत को प्रस्तुति दी।

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का चौथा दिन पर्यावरण शुद्धि दिवस के रूप में समायोजित…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , आश्विन माह के शुक्लपक्ष में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में नौ दिनों तक आध्यात्मिक अनुष्ठान का क्रम चल रहा है तो दूसरी ओर अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का क्रम भी संचालित हो रहा है। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में इन विभिन्न आध्यात्मिक उपक्रमों से जुड़कर श्रद्धालु अपनी धार्मिक-आध्यात्मिक उन्नति करने का प्रयास कर रहे हैं। पूरे विश्व भर इस समय शक्ति की अधिष्ठात्री देवी की आराधना का क्रम भी चल रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस त्योहार अलग-अलग रूपों में मनाया जा रहा है। गुजरात प्रदेश में इन नौ दिनों में दुर्गापूजा के साथ-साथ गरबे की धूम भी देखने को मिलती है। गुजरात राज्य के डायमण्ड सिटि सूरत में चतुर्मास कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में महावीर समवसरण में शुक्रवार को भी आचार्यश्री के साथ उपस्थित जनता ने मंगल प्रवचन से पूर्व आध्यात्मिक अनुष्ठान से जुड़ी। लगभग आधे घंटे के आध्यात्मिक अनुष्ठान के उपरान्त जनता को आचार्यश्री ने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराया। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को आयारो आगम के माध्यम से पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि हमारे जीवन में आत्मा और शरीर दो तत्त्व हैं। आत्मा चैतन्यमय है तो शरीर पुद्गल है। चेतन और अचेतन दोनों का योग होना ही जीवन है। आत्मा और शरीर का अलग हो जाना ही मृत्यु है। चेतन का अचेतन के साथ वियोग हो जाना मृत्यु हो जाती है। आत्मा हमेशा के लिए शरीर से मुक्त हो जाए, वह मोक्ष हो जाता है। स्थूल शरीर के सिवाय दो शरीर और होते हैं। उनमें एक होता है तैजस शरीर है। उससे भी सूक्ष्मतर शरीर है कार्मण शरीर उसे कर्म शरीर भी कहा जाता है। आयारो में कहा गया है कि कर्म शरीर को प्रकंपित करो। ज्ञातव्य है कि यह कार्मण शरीर ही जन्म-मरण का कारण है। आदमी के जीवन में होने वाले प्रत्येक सुख-दुःख हर्ष-विसाद आदि का मूल कारण कार्मण शरीर होता है। इसलिए इसे कारण शरीर भी कहा जाता है। आदमी ज्ञान और संयम के द्वारा इसे कमजोर कर सकते हैं। आदमी के पास सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र है तो इस कारण शरीर को प्रकंपित किया जा सकता है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तीसरे दिन को पर्यावरण शुद्धि दिवस के रूप में समायोजित किया गया। इस कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. दयांजलि ठक्कर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन का सौभाग्य मिल रहा है। हम सभी को पर्यावरण को प्रदूषित नहीं, जितना हो संभव हो सके, उसके शुद्धिकरण का प्रयास करें। जितना संभव हो सके पेड़-पौधों को लगाने का प्रयास करें। अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तीसरे दिन पर्यावरण शुद्धि दिवस के संदर्भ में पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में अहिंसा और संयम-ये दो तत्त्व रहते हैं तो अनेक समस्याओं का समाधान अपने आप हो सकता है। यह मानव जीवन के व्यवहार के साथ जुड़ा रहे। वृक्षों को अनावश्यक न काटा जाए, इसके लिए आगम में जागरूक किया गया है। वनस्पति और मानव में समानता की बात भी बताई गई है। वनस्पति भी प्राणी है, उसके प्रति संयम रखने का प्रयास हो। बिजली, पानी आदि का जितना संयम किया जा सके, करने का प्रयास करना चाहिए। अहिंसा और संयम के द्वारा पर्यावरण को ही नहीं, अपनी आत्मा को भी शुद्ध बनाया जा सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश गौतम ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने चौबीसी के गीत को प्रस्तुति दी। तेरापंथी सभा-चेन्नई केे अध्यक्ष श्री अशोक खंतग ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। चेन्नई ज्ञानशालाओं के ज्ञानार्थियों व प्रशिक्षिकाओं ने संयुक्त रूप से गीत को प्रस्तुति दी। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने पावन आशीर्वाद प्रदान किया। बालक हर्षिल बरड़िया बालसुलभ गीत को प्रस्तुति दी।

डॉ. मोहन भागवत ने प्यारेराम प्राचीन मंदिर के किए दर्शन…सतीश चंद लुणावत, जिला संवाददाता अजमेर राजस्थान, Key Line Times. सरसंघचालक ने शाखा के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर आंवला,बिल्वपत्र तथा पीपल आदि के 51 पौधों का किया पौधारोपण नित्य शाखा से ही समाज के लिए योग्य व्यक्ति निर्मित होंगे – मोहन भागवत बारां / 4 अक्टूबर: सतीशचंद लुणावत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत अपने चार दिवसीय बारां प्रवास के दूसरे दिन प्रातः बारां शहर के मांगरोल रोड स्थित प्राचीन प्यारेराम जी मंदिर के देवदर्शन के लिए पहुंचे वहां उन्होंने मंदिर दर्शन के पश्चात इस ऐतिहासिक मंदिर के इतिहास के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त की । तीन शताब्दी पुराना है प्यारेराम जी मंदिर का इतिहास जहां महंत श्री प्यारेराम जी ने अनंत भगवान की प्रतिमा स्थापित कर तीन परकोटे वाले विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था । देव दर्शन के पश्चात् परिसर में नित्य लगने वाली शिव मंदिर तरुण व्यवसायी शाखा में स्वयंसेवकों के साथ एक घंटे के निश्चित कार्यक्रमों में भाग लिया । शाखा के सभी स्वयंसेवकों ने शारीरिक कार्यक्रम यथा व्यायाम योग, प्रहार, सूर्य नमस्कार , खेल के पश्चात बौद्धिक कार्यक्रमों में सांघिक सुभाषित ,अमृतवचन तथा गीत का गायन किया । जिज्ञासा समाधान में शाखा के स्वयंसेवकों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उतर देते हुए उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है , उसको और उन्नत तथा सामर्थ्यवान, बलशाली बनाना है । शाखा से समाज को जोड़ने के विषय में भागवत जी ने सूत्र बताते हुए कहा कि अपरिचित से परिचय बढ़ाना, परिचित को मित्र बनाना, मित्र को स्वयंसेवक बनाना चाहिए । नित्य शाखा से ही समाज के लिए योग्य स्वयंसेवक निर्मित होंगे। शाखा के पश्चात मंदिर परिसर के बाहर स्वयंसेवकों के साथ मिलकर पौधारोपण किया गया । आंवला, बिल्वपत्र तथा पीपल आदि प्रजाति के 51 पौधे लगाए गए । शाखा के स्वयंसेवकों ने पौधों की सार संभाल का संकल्प भी लिया । इसके पश्चात् शाखा टोली के साथ बैठक हुई । उन्होंने टोली बैठक में शाखा के विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त की । शाखा में होने वाले एक घण्टे के नियमित कार्यक्रमों के विषय पर विस्तृत चर्चा भी की ।

डॉ. मोहन भागवत ने प्यारेराम प्राचीन मंदिर के किए दर्शन…सतीश चंद लुणावत, जिला संवाददाता अजमेर राजस्थान, Key Line Times. सरसंघचालक ने शाखा के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर आंवला,बिल्वपत्र तथा पीपल आदि के 51 पौधों का किया पौधारोपण नित्य शाखा से ही समाज के लिए योग्य व्यक्ति निर्मित होंगे – मोहन भागवत बारां / 4 अक्टूबर: सतीशचंद लुणावत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत अपने चार दिवसीय बारां प्रवास के दूसरे दिन प्रातः बारां शहर के मांगरोल रोड स्थित प्राचीन प्यारेराम जी मंदिर के देवदर्शन के लिए पहुंचे वहां उन्होंने मंदिर दर्शन के पश्चात इस ऐतिहासिक मंदिर के इतिहास के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त की । तीन शताब्दी पुराना है प्यारेराम जी मंदिर का इतिहास जहां महंत श्री प्यारेराम जी ने अनंत भगवान की प्रतिमा स्थापित कर तीन परकोटे वाले विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था । देव दर्शन के पश्चात् परिसर में नित्य लगने वाली शिव मंदिर तरुण व्यवसायी शाखा में स्वयंसेवकों के साथ एक घंटे के निश्चित कार्यक्रमों में भाग लिया । शाखा के सभी स्वयंसेवकों ने शारीरिक कार्यक्रम यथा व्यायाम योग, प्रहार, सूर्य नमस्कार , खेल के पश्चात बौद्धिक कार्यक्रमों में सांघिक सुभाषित ,अमृतवचन तथा गीत का गायन किया । जिज्ञासा समाधान में शाखा के स्वयंसेवकों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उतर देते हुए उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है , उसको और उन्नत तथा सामर्थ्यवान, बलशाली बनाना है । शाखा से समाज को जोड़ने के विषय में भागवत जी ने सूत्र बताते हुए कहा कि अपरिचित से परिचय बढ़ाना, परिचित को मित्र बनाना, मित्र को स्वयंसेवक बनाना चाहिए । नित्य शाखा से ही समाज के लिए योग्य स्वयंसेवक निर्मित होंगे। शाखा के पश्चात मंदिर परिसर के बाहर स्वयंसेवकों के साथ मिलकर पौधारोपण किया गया । आंवला, बिल्वपत्र तथा पीपल आदि प्रजाति के 51 पौधे लगाए गए । शाखा के स्वयंसेवकों ने पौधों की सार संभाल का संकल्प भी लिया । इसके पश्चात् शाखा टोली के साथ बैठक हुई । उन्होंने टोली बैठक में शाखा के विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त की । शाखा में होने वाले एक घण्टे के नियमित कार्यक्रमों के विषय पर विस्तृत चर्चा भी की ।

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पालिकाध्यक्ष अनिता मेवाड़ा ने दुर्गा वाहिनी शक्ति साधना केंद्र का किया अवलोकन … सतीशचंद लुणावत, जिला संवाददाता अजमेर, Key Line Times बिजयनगर,दुर्गा वाहिनी शक्ति साधना केंद्र का पालिकाध्यक्ष अनिता मेवाड़ा ने अवलोकन कर केंद्र में प्रशिक्षण ले रही बालिकाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक रहकर प्रशिक्षण लेने पर जोर दिया। बालिकाओं को स्वयं की सुरक्षा स्वयं करने का अनुरोध किया। दुर्गा वाहिनी अजमेर विभाग संयोजिका पूजा साहू के सानिध्य में संचालित दुर्गा वाहिनी शक्ति साधना केंद्र पर आसपास की क्षेत्र की बालिकाएं आत्म रक्षा का प्रशिक्षण हेतु काफी उत्साहित नजर आई। इस दौरान बाड़ी माताजी तीर्थ धाम की मुख्य उपासिका कृष्णा टाक सहित दुर्गा वाहिनी की सदस्याओं ने भी हिस्सा लिया। 1 min read

पालिकाध्यक्ष अनिता मेवाड़ा ने दुर्गा वाहिनी शक्ति साधना केंद्र का किया अवलोकन … सतीशचंद लुणावत, जिला संवाददाता अजमेर, Key Line Times बिजयनगर,दुर्गा वाहिनी शक्ति साधना केंद्र का पालिकाध्यक्ष अनिता मेवाड़ा ने अवलोकन कर केंद्र में प्रशिक्षण ले रही बालिकाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक रहकर प्रशिक्षण लेने पर जोर दिया। बालिकाओं को स्वयं की सुरक्षा स्वयं करने का अनुरोध किया। दुर्गा वाहिनी अजमेर विभाग संयोजिका पूजा साहू के सानिध्य में संचालित दुर्गा वाहिनी शक्ति साधना केंद्र पर आसपास की क्षेत्र की बालिकाएं आत्म रक्षा का प्रशिक्षण हेतु काफी उत्साहित नजर आई। इस दौरान बाड़ी माताजी तीर्थ धाम की मुख्य उपासिका कृष्णा टाक सहित दुर्गा वाहिनी की सदस्याओं ने भी हिस्सा लिया।

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का दूसरा दिन अहिंसा दिवस के रूप में हुआ समायोजित….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का शुभारम्भ हो चुका है। इस सप्ताह के दूसरे दिन अर्थात् बुधवार को अहिंसा दिवस के रूप में समायोजित किया गया। महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को अहिंसा यात्रास के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि अनासक्त साधक शब्द और स्पर्श को सहन करता है। सहिष्णुता मानवता का एक गुण है और वह साधना भी होती है। मन अथवा शरीर के विपरित स्थिति आने पर भी सम भाव रखते हुए उसे सहन कर लेना एक अच्छी साधना होती है। शब्द भी कई बार ऐसे आते हैं, जो कटु होते हैं, अपमानकारक होते हैं। साधु को भी कटु शब्द सुनने को मिल सकते हैं। वहां साधु को शब्दों को सहन करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में बातचीत का काम पड़ता रहता है। बातचीत में कटु शब्द भी प्रयोग हो सकता है, हो सकता है कोई झूठा आरोप भी लगा सकता है। साधु को वैसे शब्दों और उसे सहने का प्रयास करना चाहिए। आज दो अक्टूबर है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का दूसरा दिन अहिंसा दिवस के रूप में समायोजित है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का यह सात दिन अणुव्रत के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। अणुव्रत से जुड़ी हुई संस्थाएं अहिंसा, नैतिकता व नशामुक्ति का यथासंभव प्रचार-प्रसार करती रहें। आदमी यह प्रयास करे कि उसके जीवन में अहिंसा का प्रभाव बना रहे। आदमी की भाषा में, विचार में, व्यवहार में अहिंसा का भाव बना रहे। आज का दिन महात्मा गांधी से भी जुड़ा हुआ है। अहिंसा एक प्रकार की भगवती है, माता है, जीवनदाता है। अहिंसा मानों सभी प्राणियों को अभय बना देती है। अहिंसा शौर्य, वीर्य और बलवती हो, इसका प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने नवरात्र में नौ दिनों होने वाले आध्यात्मिक अनुष्ठान की जानकारी देने के उपरान्त प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष के संदर्भ में उपस्थित जनता को प्रेक्षाध्यान का प्रयोग भी कराया। ‘सादर स्मरण शासनमाता भाग-2’ शासनश्री साध्वी कल्पलताजी द्वारा लिखित पुस्तक को जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों द्वारा आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में पावन आशीर्वाद प्रदान किया। मुनि उदितकुमारजी ने आयम्बिल अनुष्ठान के विषय में जानकारी दी। अहिंसा दिवस के संदर्भ में सूरत के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। मुम्बई के घाटकोपर उपाश्रय के ट्रस्टी श्री मुकेशभाई ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का दूसरा दिन अहिंसा दिवस के रूप में हुआ समायोजित….सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर, Key Line Times वेसु, सूरत (गुजरात) , जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का शुभारम्भ हो चुका है। इस सप्ताह के दूसरे दिन अर्थात् बुधवार को अहिंसा दिवस के रूप में समायोजित किया गया। महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को अहिंसा यात्रास के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि अनासक्त साधक शब्द और स्पर्श को सहन करता है। सहिष्णुता मानवता का एक गुण है और वह साधना भी होती है। मन अथवा शरीर के विपरित स्थिति आने पर भी सम भाव रखते हुए उसे सहन कर लेना एक अच्छी साधना होती है। शब्द भी कई बार ऐसे आते हैं, जो कटु होते हैं, अपमानकारक होते हैं। साधु को भी कटु शब्द सुनने को मिल सकते हैं। वहां साधु को शब्दों को सहन करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में बातचीत का काम पड़ता रहता है। बातचीत में कटु शब्द भी प्रयोग हो सकता है, हो सकता है कोई झूठा आरोप भी लगा सकता है। साधु को वैसे शब्दों और उसे सहने का प्रयास करना चाहिए। आज दो अक्टूबर है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का दूसरा दिन अहिंसा दिवस के रूप में समायोजित है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का यह सात दिन अणुव्रत के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। अणुव्रत से जुड़ी हुई संस्थाएं अहिंसा, नैतिकता व नशामुक्ति का यथासंभव प्रचार-प्रसार करती रहें। आदमी यह प्रयास करे कि उसके जीवन में अहिंसा का प्रभाव बना रहे। आदमी की भाषा में, विचार में, व्यवहार में अहिंसा का भाव बना रहे। आज का दिन महात्मा गांधी से भी जुड़ा हुआ है। अहिंसा एक प्रकार की भगवती है, माता है, जीवनदाता है। अहिंसा मानों सभी प्राणियों को अभय बना देती है। अहिंसा शौर्य, वीर्य और बलवती हो, इसका प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने नवरात्र में नौ दिनों होने वाले आध्यात्मिक अनुष्ठान की जानकारी देने के उपरान्त प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष के संदर्भ में उपस्थित जनता को प्रेक्षाध्यान का प्रयोग भी कराया। ‘सादर स्मरण शासनमाता भाग-2’ शासनश्री साध्वी कल्पलताजी द्वारा लिखित पुस्तक को जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों द्वारा आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में पावन आशीर्वाद प्रदान किया। मुनि उदितकुमारजी ने आयम्बिल अनुष्ठान के विषय में जानकारी दी। अहिंसा दिवस के संदर्भ में सूरत के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। मुम्बई के घाटकोपर उपाश्रय के ट्रस्टी श्री मुकेशभाई ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।

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