




🌸 ज्ञान और तर्कशक्ति से नास्तिक भी बन सकता है आस्तिक : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण 🌸
-मुनि कुमारश्रमणजीकेशी व राजा प्रदेशी के आख्यान जनता हुई लाभान्वित
-तीसरे दिन भी मुम्बईवासियों ने अपनी मंगलभावनाएं श्रीचरणों में की समर्पित
-साध्वीवर्याजी ने भी उपस्थित श्रद्धालु जनता को किया उद्बोधित
27.11.2023, सोमवार, घोड़बंदर रोड, मुम्बई (महाराष्ट्र) : 68 वर्षों के इंतजार के उपरान्त भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई महानगर में आध्यात्मिकता की ज्योति जलाने को अपनी धवल सेना के साथ जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी पधारे। लम्बा इंतजार था तो सौभाग्य से पांच के चतुर्मास का अवसर भी मुम्बईवासियों को प्राप्त हो गया। उस भी गुरुकृपा की बरसात हुई तो मुम्बईवासियों को चतुर्मास की सम्पन्नता के बाद भी मर्यादा महोत्सव सहित तीन महीने का विहार और प्रवास का सौभाग्य भी प्राप्त हो गया। कुल मिलाकर जितनी लम्बी प्रतीक्षा रही, उसका प्रसाद भी मुम्बईवासियों को भर-भर के मिला। इस सौभाग्यशाली अवसर में अब पंचमासिक चतुर्मासकाल सम्पन्न होने जा रहा है। नन्दनवन में विराजमान आचार्यश्री महाश्रमणजी 28 नवम्बर नन्दनवन में स्थित प्रवास स्थल से 10.15 बजे विहार कर मायानगरी के भीतरी भाग की ओर गतिमान होेंगेे। इन पांच महीनों में प्राकृतिक सुषमा से सम्पन्न वातावरण से ज्ञानगंगा प्रवाहित करने वाले महातपस्वी मायानगरी के विभिन्न उपनगरों को पावन बनाएंगे। चतुर्मास की सम्पन्नता से पूर्व तीर्थंकर समवसरण में तीसरे दिन भी मुम्बईवासियों ने अपनी आस्थासिक्त मंगलभावनाएं अपने आराध्य के श्रीचरणों में अर्पित कीं। सभी की भावनाएं ऐसी थीं कि यह पांच महीनों का समय मानों कितना अल्प निकला। ऐसा लगा पलक झपकते ही समय बीत गया। सबकी एक ही भावना थी कि अब भविष्य में हमें सात दशकों तक इंतजार न करना पड़े। तीर्थंकर समवसरण से तीर्थंकर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि कुमारश्रमणकेशी विशिष्ट ज्ञानी संत थे। जिन्होंने अपने ज्ञान और तार्किक शक्ति से नास्तिक राजा प्रदेशी को आस्तिक बना दिया। मृगवन उद्यान में विराजमान संत के सामने मानों युक्तिपूर्वक राजा प्रदेशी को लाया गया और वहां संत कुमारश्रमणकेशी और राजा प्रदेशी में चर्चा-परिचर्चा का क्रम आरम्भ हुआ। शरीर और आत्मा की भिन्नता पर प्रारम्भ हुई इस चर्चा में मुनि कुमारश्रमणकेशी के सामने राजा प्रदेशी नम हो गए। आचार्यश्री ने आगे कहा कि आज चतुर्मास की अंतिम पक्खी है। आज बीस लोग्गस का ध्यान कर चतुर्मास को उपहार देना है। सभी का कल्याण हो। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने भी उपस्थित जनता को उद्बोधित किया। मंगलभावना समारोह में सोमवार को सर्वप्रथम मुम्बई महिला मण्डल की सदस्याओं ने गीत का संगान किया। भोजनशाला व्यवस्था टीम, श्रीमती रेणु कोठारी, श्री रवि जैन, श्री निर्मल जैन, श्रीमती प्रेमलता कच्छारा, श्रीमती तारा मुणोत, श्रीमती सीमा लोढ़ा, बालक पार्थ दूगड़, श्रीमती पुष्पा लोढ़ा पृथक्-पृथक् गीत का संगान किया। चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री मदनलाल तातेड़, महामंत्री श्री महेश बाफना, बर्तन भण्डार संयोजक श्री भगवतीलाल बागरेचा, संगठन मंत्री श्री कुलदीप बैद, श्री संदीप बाफना, प्रेक्षा इण्टरनेशनल के मंत्री श्री गौरव कोठारी, भोजनशाला संयोजक श्री बाबूलाल समदड़िया, उपाध्यक्ष श्री नरेश मेहता, जैन विश्व भारती के मंत्री श्री सलिल लोढ़ा, अमृतवाणी के अध्यक्ष श्री रूपचंद दूगड़, वरिष्ठ श्रावक श्री ख्यालीलाल तातेड़, श्री राजेन्द्र मुणोत, श्री ललित चपलोत, श्री मुदित भंसाली, श्री जीतूभाई भाभेरा, श्री सुरेश बैद, श्री प्यारचंद मेहता व श्री छतरसिंह खटेड़ ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के प्रबंधक श्री मनोहर गोखरू ने समस्त मुम्बईवासियों के साथ आचार्यश्री से सामूहिक क्षमायाचना की गई। अडानी इलेक्ट्रिसिटी से संबंधित लोगों ने भी आचार्यश्री के दर्शन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री श्री सुरेन्द्र कोठारी ने किया।







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