
मौहम्मद हयात गैसावत, जिला ब्यूरो चीफ नागौर
Key Line Times
राजस्थान,आज हमारे समाज में एक अजीब-सी बीमारी पनप रही है। कुछ युवा अपनी बदमाशियों, शोर-शराबे और गलत हरकतों को अपनी शान समझ बैठे हैं। पटाखे फोड़ना, रातभर हल्ला-गुल्ला करना, सड़कें जाम करना, और दूसरे लोगों की शांति भंग करना—यह सब अब मज़े का हिस्सा माना जा रहा है।लेकिन सच यह है कि समाज की बर्बादी यहीं से शुरू होती है।हम अपने बच्चों को इतना भी नहीं सिखा पा रहे कि बड़े बुजुर्गों से कैसे बात की जाती है। जिस घर में शादी होती है, उसके दोस्त बनना गलत नहीं है, पर उसकी वजह से पूरे खानदान की इज्ज़त को सड़क पर नीलाम करना कहां से सही हो गया? शादी की खुशियों में शरीक होना अच्छी बात है, लेकिन आजकल खुशियों के नाम पर जो तमाशा किया जा रहा है।वह समाज के लिए कलंक से कम नहीं।सबसे बड़ा सवाल: हमारे बुजुर्ग कहां हैं? जिनके अपने बच्चे सड़क पर फूहड़ हरकतें कर रहे हैं, पटाखों से लोगों को परेशान कर रहे हैं,क्या वे पिता उन्हें रोकने की हिम्मत रखते हैं?अगर नहीं रखते,तो फिर खुद को समाज का हमदर्द कहना छोड़ दें,और सच मानें कि यह कायरता समाज को बर्बादी की तरफ धकेल रही है।शोर-शराबा ही समाज की बर्बादी का पहला कदम हैशादियों में फूटता हुआ हर पटाखा सिर्फ आवाज़ नहीं करता,
वह समाज की शांत संस्कृति को तोड़ता है,बड़ों का सम्मान मिटाता है,और नई पीढ़ी को गलत दिशा देता है।आज ज़रूरत है कि हम अपनी जिम्मेदारी समझें।बच्चों को संस्कार दें,न कि शोर-शराबे और दिखावे का ज़हर। साथ ही मेरी प्रशासन से अपील है कि ऐसे शोर शराबा करने वाले सड़के जाम करने वाले सड़कों पर पटाखा फोड़ने वालों के खिलाफ शांति भंग में मामला दर्ज होना चाहिए फिर चाहे कोई भी उन्हें छुड़ाने आए तो उन्हें भी वहीं पर बैठा लिया जाना चाहिए क्योंकि किसी भी बेहूदा इंसान कोई अधिकार नहीं कि वो दूसरों की शांति भग करें करें।
✍️मोहम्मद हयात गैसावत,
जिला ब्यूरो चीफ की लाइन टाइम्स दिल्ली मकराना
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