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सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर
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भगवान ऋषभ अध्यात्म विद्या के आद्य प्रवर्तक
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में अक्षय तृतीया एवं वर्षीतप पारणा महोत्सव का भव्य आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा साल्टलेक द्वारा ई.जे.सी.सी. ऑडिटोरियम में हुआ। वर्षीतप करने वाले 11 भाई-बहन :
श्री संजय बांठिया लंदन, श्री कमल सुराणा इंदौर, श्रीमती लक्ष्मीदेवी बैद, उत्तरपाड़ा, श्रीमती हंसा देवी सुराणा लेकटाउन, श्रीमती बेला पोरवाल लिलुआ, श्रीमती सम्पत देवी दूगड़ साउथ हावड़ा, श्रीमती नेहा जैन लेकटाउन, श्रीमती रतनी देवी श्यामसुखा साउथ कोलकात्ता, श्रीमती बबीता दूगड़ उत्तर कोलकाता, श्रीमती मंजू देवी जैन सिंघी साउथ हावड़ा, श्रीमती पूनम सिंघी उत्तर हावड़ा थे।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण उपस्थित रहे।
*अक्षय तृतीया एवं वर्षीतप के महत्व को* रेखांकित करते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा- भगवान ऋषभ अध्यात्म विद्या के आद्य प्रवर्तक थे। भगवान ऋषभ सभ्यता और संस्कृति की विलक्षण यात्रा के पुरोधा थे। वे कर्म युग के प्रवर्तक व धर्म युग के प्रणेता थे। वे असि, मसि, कृषि के मंत्रद्रष्टा थे। उनका युग युगबोध, युग निर्माण, युग विकास व सभ्यता के जन्म का युग था। उन्होंने जीवन के अंतिम भाग में संयम को स्वीकार किया। दीक्षा के बाद वे मौन होकर साधना में लग गए। वे पारणे के लिए घर-घर में घूमते रहे, किन्तु अन्तराय कर्म के उदय के कारण उन्हें एक वर्ष से अधिक समय तक आहार-पानी नहीं मिला। वैशाख शुक्ला तृतीया के दिन कुमार श्रेयांस के हाथों इक्षुरस से उनके वर्षीतप का पारणा हुआ। उनकी याद में आज भी हजारों-हजारों जैन धर्मानुयायी वर्षीतप की आराधना..करते हैं। आज अक्षय तृतीया के दिन तप की पूर्णाहुति कर पारणा करते हैं। और आगे के तप के लिए संकल्पित होते हैं।
तप आत्मशुद्धि का उज्ज्वल अवसर है। वर्षीतप की आराधना करने वाले सभी साधुवाद के पात्र हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में साल्टलेक सभा का योगदान एवं भावना सराहनीय है।
मुनि परमानंद जी ने तपस्वियों का परिचय प्रस्तुत किया। मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर मंगल संगान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल साल्टलेक के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, साल्टलेक के अध्यक्ष जयसिंह जी डागा ने दिया। तेरापंथी सभा, साल्टलेक, टीपीएफ, तेयुप के सदस्यों ने सुमधुर गीत द्वारा स्वागत किया। वर्षीतप आराधिका श्रीमती बबीता दूगङ ने अपने अनुभव प्रस्तुत किये। वर्षीतप अनुमोदना में श्री संदीप बांठिया, श्रीमती खुशबू डागा, श्रीमती कमला श्यामसुखा, संजय जी सिंघी, कर्नल रोहित पोरवाल, हर्षिता चल्लाणी, रितिका सिंघी ने अपने गीत व विचारों के माध्यम से व्यक्त किये। आभार ज्ञापन सभा मंत्री अशोक जी भुतोङिया ने किया। तपस्वियों का साल्टलेक सभा द्वारा सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद ने व सम्मान उपक्रम का संचालन विनोद संचेती ने किया। इस अवसर पर श्रीमती सायर सुराणा के 33 आयंबिल तप की अनुमोदना भी की गई। मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कई तपस्वियों को अग्रिम वर्षीतप का प्रत्याख्यान भी कराया। तप अनुमोदना में अनेक भाई-बहिनों ने सप्ताह में एक दिन रात्रि भोजन का त्याग किया। तपस्वियों ने इक्षुरस का सुपात्र दान देकर धन्य का अनुभव किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

