
सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर
Key Line Times
लाडनूं ,जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी वर्तमान समय में लाडनूं में स्थित जैन विश्व भारती परिसर में योगक्षेम वर्ष सम्पन्न कर रहे हैं। आचार्यश्री का मंगल प्रवचन प्रतिदिन के निर्धारित विषयों के अनुसार हो रहा है। जिसका लाभ साधु, साध्वियों, समणियों, मुमुक्षुओं आदि के साथ-साथ उपस्थित श्रद्धालुओं को भी प्राप्त हो रहा है। इतना ही नहीं प्रतिदिन प्रवचन के साथ-साथ आचार्यश्री प्रतिदिन चारित्रात्माओं को अपनी जिज्ञासाओं को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। चारित्रात्माओं की जिज्ञासा व आचार्यश्री से प्राप्त समाधान कितने-कितने श्रावक-श्राविकाओं के संशयों का भी निराकरण करने वाला सिद्ध हो रहा है।
बुधवार को सुधर्मा सभा में प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने प्रज्ञागीत का संगान किया। आचार्यश्री ने कुछ समय तक सभी को ध्यान का प्रयोग कराया।
तत्पश्चात महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आज के निर्धारित विषय ‘थोड़े के लिए बहुत मत खोओ’ को व्याख्यायित करते हुए कहा कि थोड़े के लिए बहुत को छोड़ देना नासमझी वाली बात हो जाती है। आदमी को जीवन में यह चातुर्य रखना चाहिए कि जिस काम से लाभ ही लाभ हो अथवा लाभ ज्यादा हो और थोड़ा-सा नुक्सान हो तो भी ये बातें उसके लिए हितावह हो सकती हैं और उसके लिए करणीय भी हो सकती हैं, लेकिन जहां लाभ हो ही नहीं, और नुक्सान ज्यादा हो तो वैसा काम करने वाला नासमझ आदमी ही हो सकता है। जिस कार्य में लाभ ही लाभ हो, वह कार्य तो बहुत उत्तम ही होता है।
आदमी को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में यह देख लेना चाहिए कि उसे लगाना कितना पड़ेगा और प्राप्त कितना होगा। इसका ध्यान रखकर जिस कार्य अथवा जिस क्षेत्र में कम लागत में ज्यादा लाभ कमाया जा सकता है, उसे वैसा कार्य करने का प्रयास करना चाहिए। जहां केवल लागत ही लागत हो और कोई लाभ मिले ही नहीं, उस कार्य को करने से बचने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को समझदारी और बुद्धि रखते हुए आदमी को थोड़े भौतिक लाभ के लिए आध्यात्मिक थाति खोने न पाए, इसका प्रयास होना चाहिए।
मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने आज भी अणुव्रत के संदर्भ में समुपस्थित जनता को उद्बोधित किया। इसके उपरान्त अणुव्रत से संदर्भित जिज्ञासाओं को भी आचार्यश्री ने समाहित किया।

पश्चिम बंगाल में पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित कई कार्यकर्ता चुनाव में जुटे। 