गुजरात,आहवा-डांग
आहवा : बच्चे के जीवन में पहले 1000 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। अति गंभीर कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान और उपचार से बच्चों में होने वाली चिकित्सीय जटिलताओं को रोका जा सकता है। ऐसे बच्चों को चिकित्सा उपचार, दवाएं तथा सूक्ष्म पोषक तत्व समुदाय स्तर पर उपलब्ध कराकर उन्हें कुपोषण से बाहर निकालने के लिए राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नए दृष्टिकोण के साथ “पोषण संगम” कार्यक्रम लागू किया गया है।
C-MAM (समुदाय आधारित पोषण प्रबंधन) कार्यक्रम 10 चरणों पर आधारित है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है तथा अति गंभीर कुपोषित (SAM) और मध्यम गंभीर कुपोषित (MAM) बच्चों को आवश्यकता अनुसार संस्थागत स्तर (CMTC, NRC) या समुदाय स्तर (आंगनवाड़ी) पर उपचार और निगरानी प्रदान की जाती है। समुदाय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चों को आंगनवाड़ी में ही सरकार द्वारा निर्धारित पूरक पोषण समय पर मिले तथा योजना के सभी लाभ प्राप्त हों।
डांग जिले में बच्चों के कुपोषण के प्रतिशत में मार्च 2025 की तुलना में फरवरी 2026 में कमी दर्ज की गई है। मार्च 2025 में अति गंभीर कुपोषित बच्चों का प्रतिशत 1.91% था, जो घटकर फरवरी 2026 में 0.79% हो गया है। मध्यम गंभीर कुपोषित बच्चों का प्रतिशत 8.66% से घटकर 3.96% हो गया है तथा अत्यंत कुपोषित बच्चों का प्रतिशत 6.54% से घटकर 2.85% हो गया है। इस प्रकार कुल (SAM, MAM, SUW, MUW) 2451 बच्चों की संख्या में कमी आई है।
ICDS योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी बच्चा पूरक पोषण से वंचित न रहे, “पोषण संगम” कार्यक्रम की सघन निगरानी की जा रही है। इस संदर्भ में माननीय जिला विकास अधिकारी द्वारा नियमित रूप से ICDS एवं स्वास्थ्य विभाग की मासिक बैठकों में समीक्षा की जाती है तथा आंगनवाड़ियों का स्थल निरीक्षण भी किया जाता है, जिसमें योजनाओं से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जाती है।
आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ता बहनों द्वारा मंगल दिवस का आयोजन, बच्चों का नियमित वजन एवं ऊंचाई मापन, प्री-स्कूल शिक्षा, खेलकूद, नियमित पूरक पोषण, THR तथा स्थानीय खाद्य पदार्थों से व्यंजन प्रदर्शन, लाभार्थियों की होम विजिट आदि गतिविधियों के माध्यम से “पोषण संगम” कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा अभिभावकों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
डांग जिला ICDS टीम के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा भी आंगनवाड़ियों का नियमित निरीक्षण कर जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। संपूर्ण प्रशासनिक टीम, ICDS विभाग और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से कुपोषण में कमी लाने में सफलता प्राप्त हुई है। साथ ही, कुपोषण को समाप्त करने हेतु ICDS टीम द्वारा निरंतर प्रयास जारी हैं।



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