मंत्रियों सहित अनेक संत-महंत, पदाधिकारी, स्वयंसेवक एवं भाविक भक्त शोभायात्रा में शामिल हुए।
गुजरात,आहवा-डांग
आहवा, ता. 14: रामायण जैसे महाकाव्य की रचना सहित संपूर्ण रामकथा में आदिवासी समाज के योगदान का उल्लेख करते हुए कैबिनेट मंत्री श्री नरेशभाई पटेल ने शबरीधाम और पंपा सरोवर के महत्व का वर्णन किया। प्रभु श्री राम और शबरी के मिलन की गाथा बताते हुए मंत्रीश्री ने रामायण, महाभारत जैसे महाकाव्यों एवं पुराणों में वर्णित आदिवासी पात्रों की क्षमताओं का परिचय दिया।
मकर संक्रांति के पावन पर्व पर शबरीधाम में आदिवासी समाज को हजारों वर्षों की परंपरा के अनुसार समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं, ऐसा मंत्रीश्री ने कहा। उन्होंने बताया कि चालू वर्ष में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर सरकार द्वारा ‘जनजातीय गौरव यात्रा’ का आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी समाज के लिए सरकार की योजनाओं को उजागर किया गया। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी द्वारा आदिवासी समाज के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ उठाने की अपील भी मंत्रीश्री ने की।
गुजरात और दंडकारण्य की पावन भूमि की महिमा का वर्णन करते हुए डांग के प्रभारी मंत्री डॉ. जयारामभाई गामित ने कहा कि शबरीधाम के विकास में वनवासी कल्याण ट्रस्ट द्वारा आदिवासियों के सर्वांगीण विकास हेतु सराहनीय कार्य किया गया है। उन्होंने वर्ष 2006 में शबरीधाम में आयोजित कुंभमेले का भी उल्लेख किया। साथ ही, तीर्थस्थल के विकास के साथ-साथ आदिवासी प्राकृतिक आहार ‘नागली’ को प्रोत्साहित करने तथा स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आह्वान किया।
डांग के विधायक एवं गुजरात विधानसभा के उप मुख्य दंडक श्री विजयभाई पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति में ‘राम’ रचे-बसे हैं। उन्होंने सनातन संस्कृति में आस्था रखने वाले आदिवासी समाज से अपील की कि वे उन्हें गुमराह करने वाली भ्रामक बातों से दूर रहें और सनातन संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए माता शबरी के वंशज आगे आएं।
मां शबरी के वंशजों का वंदन-अभिनंदन करते हुए राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री कुबेरभाई डिंडोर ने दंडकारण्य की पावन भूमि की अस्मिता, विरासत और सनातन संस्कृति की शक्ति का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि अनेक आक्रांताओं ने सनातन हिंदू संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया, फिर भी यह संस्कृति अपने सिद्धांतों के साथ अडिग रही।
इस अवसर पर संस्कृति, संस्कार और सत्संग के प्रचार का आह्वान करते हुए स्वामी श्री दत्तनाथजी महाराज ने भगवान श्री राम के जीवन प्रसंगों से प्रेरणा लेकर अमूल्य मानव जीवन को सार्थक बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति की पूजा करने वाले सभी लोग हिंदू हैं और गुजरात, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश के लोगों से श्री राम आगमन महोत्सव में शामिल होने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री अतुलजी जोगे ने आदिवासी समाज की संस्कृति की सराहना करते हुए “श्री राम आगमन महोत्सव” के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी से अयोध्या में प्रभु श्री राम मंदिर के दर्शन करने का आह्वान किया।
शबरीधाम के स्वामी श्री असीमानंदजी ने महाराष्ट्र से आए भाविक भक्तों का विशेष स्वागत करते हुए कहा कि देशभर में गूंज रहे प्रभु श्री राम नाम की महिमा के साथ दंडकारण्य से अयोध्या तक जागृत भक्ति भावना में डांग की मां शबरी के वंशज भी श्रद्धा और भक्ति अर्पित कर रहे हैं। उन्होंने डांग जिले में धर्मजागरण के कार्य और शबरीधाम की स्थापना के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर पंपा सरोवर से शबरीधाम तक निकाली गई शोभायात्रा में भी अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
शबरीधाम में आयोजित “श्री राम आगमन महोत्सव” में अध्यक्ष श्री अतुलजी जोगे, परम पूज्य स्वामी श्री दत्तनाथजी महाराज, स्वामी श्री आत्मारामजी, स्वामी श्री असीमानंदजी, श्री पी. पी. स्वामीजी, आदिवासी विकास, कुटीर, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री नरेशभाई पटेल, खेलकूद विभाग के राज्य मंत्री एवं डांग के प्रभारी मंत्री डॉ. जयरामभाई गामित, गुजरात विधानसभा के उप मुख्य दंडक एवं डांग के विधायक श्री विजयभाई पटेल, पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री कुबेरभाई डिंडोर, वासुर्णा के राजवी श्री धनराजसिंह सूर्यवंशी, शबरीधाम मंदिर के ट्रस्टी, भाजपा अध्यक्ष श्री किशोरभाई गवित सहित अनेक पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में भाविक भक्त उपस्थित रहे।


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