surendra Munot Associate Editor all india
Key Line Times
लाडनूं ,जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने सोमवार को प्रातःकालीन मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को आज के निर्धारित विषय ‘ज्ञान सम्पन्नता से क्या मिलेगा?’ को आगम के माध्यम से व्याख्यायित करते हुए कहा कि प्रश्न किया गया कि भंते! ज्ञान सम्पन्नता से जीव क्या प्राप्त करता है? एक आदमी का जीवन अनेक उपलब्धियों से युक्त हो सकता है। किसी में कोई विशेषता हो सकती है तो किसी किसी अन्य प्रकार की विशेषता हो सकती है। कोई रूप सम्पन्न है तो कोई शक्ति सम्पन्न हो सकता है तो कोई सत्ता सम्पन्न हो सकता है। कोई तपस्या से सम्पन्न है तो कोई विशेष रूप से ज्ञान सम्पन्न तो कोई चारित्र सम्पन्न होता है।
प्रश्न में ज्ञान सम्पन्नता की बात की गई कि कोई ज्ञान सम्पन्न होता है तो उससे क्या लाभ मिलता है? उत्तर प्रदान किया गया कि ज्ञान सम्पन्नता से जीव सभी पदार्थों का बोध हो जाता है। ज्ञानी आदमी के पास अनेक प्रकार की जानकारियां होती हैं। वे जानकारियां बहुत लाभदायी हो सकती हैं। कोई पुराना डॉक्टर, कोई पुराना साहित्यकार तो कोई वृद्ध लोग होते हैं, जिन्हें बहुत सामाजिक अनुभव होता है। जिसके पास ज्ञान होता है, वह दूसरों को भी लाभान्वित कर सकता है। जो श्रुत ज्ञान और शास्त्रों से ज्ञान ग्रहण किया हुआ रहता है, वह लोगों अच्छी जानकारी भी प्रदान कर सकता है।
इस संसार को अर्णव कहा गया है। आदमी इस संसार में भटकता रहता है। सम्यक् ज्ञान सम्पन्न आदमी इस संसार में ज्यादा नहीं भटकता है, गुम भी नहीं होता। आदमी के जीवन में सम्यक् ज्ञान का बहुत अधिक महत्त्व है। देव, गुरु और धर्म की अच्छी जानकारी हो गई तो उस पर सम्यक् श्रद्धा हो जाए तो कितनी अच्छी बात हो सकती है। सम्यक् ज्ञान हितावह व हितकर हो सकता है और वह संसार में भटकने से बचाने वाला हो सकता है।
जिस व्यक्ति के भीतर सम्यक् ज्ञान है, वह भवसागर को पार पा सकता है और यथाशीघ्र मोक्ष की भी प्राप्ति हो सकती है। जीवन में ज्ञान होना, बहुत ही महत्त्वपूर्ण और उपयोगी होता है। ज्ञान प्रकाश करने वाला होता है। ग्रन्थों व शास्त्रों का पठन आदि करने का प्रयास करना चाहिए। जिनके पास प्रतिभा और ज्ञान है, वह कितनों को शिक्षित बना सकता है। आदमी को अपने जीवन में ज्ञान के साथ-साथ आचार के विकास पर भी ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को ज्ञान से सम्पन्न बनने का प्रयास करना चाहिए।
मंगल प्रवचन के उपरान्त शासन गौरव साध्वी राजीमतीजी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। आचार्यश्री ने साध्वी कनकश्रीजी (लाडनूं) के दीक्षा दिवस के संदर्भ में मंगल आशीष प्रदान किया। आचार्यश्री ने साध्वी मानकुमारजी की दीक्षा दिवस पर आशीर्वाद प्रदान किया। आचार्यश्री ने सरदारशहर के बैद परिवार को भी आध्यात्मिक संबल प्रदान किया। मंगलचंद भंवरलाल बैद परिवार की ओर से श्री राजू बैद ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तुलसी अमृत निकेतन संस्थान-कानोड़ के अध्यक्ष श्री रणवीर बाबेल ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने संस्थान को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

शेरगढ़ विधायक सेवा केंद्र पर नवनिर्वाचित सरपंचों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन 