surendra Munot Associate Editor all india
Key Line Times
लाडनूं ,जन-जन के मानस को आध्यात्मिक अभिसिंचन प्रदान करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी मंगलवार को अपनी मंगलमयी वाणी से आज के निर्धारित विषय ‘ऋजुता से क्या मिलेगा?’ को आगम के माध्यम से व्याख्यायित करते हुए कहा कि प्रश्न किया गया कि भंते! आर्जव (ऋजुता) से जीव क्या प्राप्त करता है?’ उत्तर प्रदान करते हुए कहा कि ऋजु शब्द का भाववाचक संज्ञा बनाएं तो ऋजुता, ऋजुत्व और आर्जव भी बन सकता है। इस प्रकार आर्जव और ऋजुता एक बात ही होती है।
आदमी के भीतर कषाय का भाव होता है। क्रोध, मान, माया और लोभ- ये चारों भाव असत् हैं, जो आत्मा के लिए अच्छे भी नहीं होते, लेकिन ये सभी प्राणियों के भीतर विद्यमान होते हैं। हां किसी में तीव्र हो सकते तो किसी प्रतनु भी हो सकते हैं। शास्त्र में कहा गया कि इन चारों कषायों को इनके प्रतिपक्ष से जीतने का प्रयास किया जा सकता है।
क्रोध को उपशम के माध्यम से जीतने का प्रयास किया जा सकता है। मान को मार्दव से जीता जा सकता है। माया को आर्जव भाव अर्थात् ऋजुता से जीता जा सकता है। ऋजुता का अर्थ होता है सरलता। जिसमें सरलता होती है, वह माया पर विजय प्राप्त कर सकता है। सरल और कुटिल परस्पर विपरित हैं। कुटिल व्यक्ति जगह-जगह कुटिलता का आचरण करता है, लेकिन सरल व्यक्ति इनसे बच सकता है। सरलता की साधना के लिए बताया गया कि आदमी के मन में यह संकल्प हो कि मुझे किसी भी रूप में छल-कपट नहीं करना है। आदमी को अनुप्रेक्षा करनी चाहिए। सरल आदमी शुद्ध हो सकता है। कभी कोई साधु भी छल आदि का प्रयोग कर सकता है। कोई गलती हो जाए तो उसे सरलता से स्वीकार कर लेना चाहिए। जो सरल होता है, वह सच्चाई के पथ पर भी चलने वाला होता है। जिसके हृदय में सरलता व सच्चाई होते हैं, वहां मानों प्रभु का वास कहा गया है।
सच बोलना कठिन लगता है तो वहां आदमी को मौन रह जाने का प्रयास करना चाहिए। मौन रख लेने से आदमी कम से कम झूठ बोलने से तो बच सकता है। आर्जव से काय ऋजुता, भाव ऋजुता, भाषा ऋजुता और अविषमवादिता से जीव धर्म का आराधक हो जाता है। उसकी कथनी और करनी में समानता होती है। गृहस्थ भी अपने जीवन में जितना संभव हो सके, ऋजुता, सरलता का विकास करने का प्रयास प्रयास करना चाहिए।
आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त आध्यात्मिक अनुष्ठान की सम्पन्नता की घोषणा की। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में उपस्थित चेन्नई ज्ञानशाला के ज्ञानार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। तेरापंथी सभा, चेन्नई के अध्यक्ष श्री महेन्द्र माण्डोत ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तदुपरान्त ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी अनेक प्रस्तुतियां दीं। आचार्यश्री ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

