
Surendra Munot Associate Editor
Key line times
वृक्ष कबहुँ नहीं फल भखै, नदी न संचये नीर।
परमार्थ के कारणे साधुन धरा शरीर॥
*चातुर्मास मंगल कामना*
श्रमण भगवान श्री महावीर स्वामी को विधिवत त्रिवार वंदन।
जन जन के आराध्य आचार्य भगवंत एवं सभी वीतरागी गुरु भगवंत के चरणों में विधिवत् वन्दन तथा सभी चरित्र आत्माओं के शरीर स्वास्थ्य की सुख-साता पूछते है ! सकल जैन साधु-साध्वीजी म.सा. अपने-अपने चातुर्मासिक गंतव्य की ओर पहुंच गये होंगे या पहुंच रहे होंगे !
जिन भाग्यशाली श्री संघों में चार महीने के लिए इन चारित्रात्माओं का पावन चातुर्मास होने जा रहा है, वहां नित्य जिनवाणी का अमृत प्राशन निरंतर त्याग-तप, सामायिक – स्वाध्याय से होगा। निश्चित ही जिनशासन की प्रभावना होगी ! समस्त चारित्रात्माओं के ज्ञान-दर्शन-चारित्र व तप की अभिवृद्धि हो, आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण चातुर्मास धर्म आराधना करते हुए सफलता की ओर अग्रसर रहे…
सुरेन्द्र मुणोत

