surendra Munot
Associate Editor all india
Key Line Times
लाडनूं ,जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शुक्रवार को सुधर्मा सभा में आयोजित प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु जनता को आज के निर्धारित विषय ‘संयम से क्या मिलेगा?’ को आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि प्रश्न किया गया कि संयम से जीव क्या प्राप्त करता है? आगम में पर्युपासना के लाभ बताए गए हैं। कोई गृहस्थ साधु-संतों की पर्युपासना करता है तो उसे पुण्य का लाभ प्राप्त होता है। जो साधु तन, मन और वचन से अहिंसा के पुजारी होते हैं, वे किसी को दुःख नहीं देते, ऐसे साधुओं के मुखदर्शन करने मात्र से ही वंदनकर्ता का पाप झड़ता है। उसके पाप का हरण हो जाता है। उसके भविष्य के शुभ का हेतु भी बन सकता है। चारित्रात्माओं का दर्शन करना भी निर्जरा का कारण बन सकता है। उनकी पर्युपासना करे, व्याख्यान सुने तो कुछ अच्छा सुनने को भी मिल सकता है। ज्ञान से विशेष ज्ञान की प्राप्ति भी होती है। हेय और उपादेय का ज्ञान होता है।
जीव को संयम से अनाश्रवत्व को प्राप्त करता है। संयम होते ही कर्मों का आगमन बंद हो जाता है। इससे जीव को नया पाप कर्म नहीं लगता। संयम के होने से पाप कर्म का रास्ता बन्द हो जाता है। यह संवर की स्थिति होती है। संयम करना बहुत अच्छी बात होती है। सभी में संयम का विकास हो, ऐसा प्रयास करना चाहिए। ईमानदारी रखना, झूठ बोलने से बचने का प्रयास करना, चोरी नहीं करना, इस प्रकार के अच्छे संस्कार जीवन में आएं, ऐसा प्रयास होना चाहिए। बच्चों को अच्छे संस्कार मिल जाएं तो कितना अच्छा हो सकता है। बच्चों को अच्छे संस्कार देने का प्रयास करना चाहिए। हमारे यहां ज्ञानशाला संचालित हैं, यह मानों संस्कारशाला है। इसके माध्यम से उन्हें अच्छी बातें, धर्म की बातें याद हो जाती हैं। उन्हें लोगस्स, भक्तामर आदि कंठस्थ हो जाते हैं। यह भी कितना अच्छा कार्य है। इतना बहुत बड़ा नेटवर्क है जो जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अंतर्गत संचालित है। कितने-कितने प्रशिक्षण देने वाले देते हैं। प्रशिक्षण देने वालों में बहुलता तो बाइयों की है और व्यवस्था पक्ष के लिए तेरापंथी सभा, युवक परिषद आदि हैं। प्रशिक्षण और व्यवस्था पक्ष दोनों की आवश्यकता होती है तो कार्य अच्छा हो सकता है। कितने बच्चों में मुमुक्षु भाव भी जागृत हो जाए तो उनके जीवन का कल्याण हो सकता है। जिसे संयम का जीवन प्राप्त हो गया है, उसे तेजस्वी बनाने का प्रयास करना चाहिए। संयम व संन्यास का तेज अच्छा हो तो जीवन का कल्याण हो सकता है। श्रावक-श्राविकाओं को भी अपने संयम के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए।
अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में कई महिलाओं को आचार्यश्री ने आयम्बिल का त्याग कराया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में आज बड़ी संख्या में दिल्ली जैन समाज के लोग आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में उपस्थित थे। इस संदर्भ में श्री सुखराज सेठिया, राज्यसभा सांसद श्री लहरसिंह सिरोहिया, दिगम्बर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मनिन्द्र जैन, जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दिनेश जैन, जीतो नॉर्थ जोन के चेयरमेन श्री रमन जैन, आचार्यश्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री बजरंग बोथरा, स्थानकवासी समाज से श्रीे प्रसन्न जैन, श्री अशोक जैन जयचन्दा, तथा श्री के.सी. जैन ने अपनी अभिव्यक्ति दी। इस संदर्भ मंे युवाचार्यश्री महावीरकुमारजी ने उपस्थित लोगों को उद्बोधित किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए अहिंसा, संयम और तप की प्रेरणा प्रदान की।

