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‘आराध्यम’ : अहिंसा और जीव दया की नई आराध्यस्थली तीन दिवसीय भव्य लोकार्पण कार्यक्रम
4 से 6 जुलाई तक होगा 3 दिवसीय लोकार्पण महोत्सव, राजस्थान का सबसे बड़ा पक्षी चिकित्सालय आमजन को समर्पित
रेत के धोरों वाले जोधपुर में अब एक ऐसी आराध्यस्थली आकार ले रही है, जहां मानव, पशु और प्रकृति तीनों एक साथ सांस लेंगे। गुरु कृपा, साधना और सेवा के संकल्प से जन्मे गज शुश्रुषा ट्रस्ट का सपना ‘आराध्यम’ अब साकार होने जा रहा है।
सेखाला-देवातू रोड पर रिनिया बालाजी मंदिर के पास 54 बीघा भूमि पर बने इस परिसर का तीन दिवसीय लोकार्पण महोत्सव 4, 5 और 6 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव में राजस्थान के सबसे बड़े पक्षी चिकित्सालय सहित 5 बड़े प्रकल्पों का लोकार्पण और भूमि पूजन होगा।
‘आराध्यम’ मैं खास क्या क्या ?
आजकल सेवा के नाम पर सिर्फ दान की बात होती है। लेकिन गज शुश्रुषा ट्रस्ट ने दान से एक कदम आगे जाकर ‘दिशा’ देने का काम किया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र सुराणा कहते हैं, “हमारा उद्देश्य सिर्फ भवन बनाना नहीं है। आराध्यम का उद्देश्य प्रकृति की खोई हुई आभा को पुनः जाग्रत करना है। यहां हर जीव के भीतर अध्यात्म, शांति, अभय, व्यसन मुक्ति और अहिंसा स्थापित होगी।”
परम पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से प्रेरित ट्रस्ट के स्वयंसेवकों ने अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया है: ‘शरीर श्रमी, मन संयमी, बुद्धि विवेकवती और अहंकार-शून्य जीवन’। यही भावना आराध्यम के हर कोने में दिखती है।
लोकार्पण होने वाले प्रकल्प:
1. *गज पक्षी चिकित्सालय*: यह राजस्थान का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक पक्षी चिकित्सालय होगा। अब तक ट्रस्ट ने 700 पक्षियों का रेस्क्यू किया है और 400 को स्वस्थ कर उड़ाया है। वर्तमान में 200 घायल पक्षी उपचाराधीन हैं। नए हॉस्पिटल में सर्जरी, आईसीयू और रिकवरी वार्ड की सुविधा होगी। सचिव पायल चोपड़ा बताती हैं, “इससे हजारों बेजुबानों का जीवन बचेगा। यही हमारी जीव दया और अहिंसा की परिभाषा है।”
2. *पुष्प कोठार*: चारा एवं अनाज गोदाम का भी लोकार्पण होगा। यह गौशाला और पक्षी चिकित्सालय के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
*भूमि पूजन होने वाले प्रकल्प:*
1. *श्री जीव राज सिंह गोगा देव दिवाकर गौशाला*: देसी गौ माता की नस्ल सुधार और संरक्षण के लिए वृहद गौशाला बनेगी।
2. *आत्मपुर ध्यान योग हॉल*: तनाव, व्यसन मुक्ति और आध्यात्मिक शांति के लिए आधुनिक ध्यान केंद्र।
3. *मंदिर*: आस्था का केंद्र, जहां नित्य पूजन और सामूहिक प्रार्थना होगी।
*दीवस* 1 – 04 जुलाई 2026: ऊर्जा का दिन*
सूर्योदय से सूर्यास्त तक गायत्री परिवार द्वारा गायत्री मंत्र जाप और यज्ञ होगा। वैदिक मंत्रों से पूरा परिसर गुंजायमान होगा। रात्रि 8:00 बजे से भजन संध्या का आयोजन है, जिसमें भक्तिभाव से सराबोर होकर दिन का समापन होगा।
*दीवस 2 – 05 जुलाई 2026: शांति का दिन*
दूसरा दिन नवकार महामंत्र को समर्पित है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक जाप चलेगा। शाम 7:00 बजे से भक्ति संध्या होगी। इसके साथ ही “कुटुंब प्रबोधन” और “जिंदगी ऐसी जियो” विषय पर संबोधन होगा। इसका उद्देश्य परिवारों में प्रेम, समरसता और व्यसन मुक्ति का संदेश देना है।
*दीवस 3 – 06 जुलाई 2026: समर्पण का दिन*
दोपहर 9:30 बजे से मुख्य लोकार्पण समारोह। संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और आमजन की उपस्थिति में 5 प्रकल्प जनता को समर्पित होंगे।
महाप्रसादी का आयोजन
1:00 से महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। समस्त गांव आमंत्रित है
पर्यावरण और आत्मनिर्भरता का मॉडल
आराध्यम को ट्रस्ट ने ‘हरित परिसर’ के रूप में विकसित किया है। अब तक 200 वृक्ष लग चुके हैं और 10000 वृक्ष लगाने का लक्ष्य है। जल संचय, प्राकृतिक खेती और नेपियर-धामन चारागाह विकास पर जोर है।
सचिव पायल ज्योति के अनुसार, “गौशाला से निकलने वाले गोबर और गोमूत्र से हम वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक कीटनाशक बनाएंगे। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिलेगा और परिसर आत्मनिर्भर होगा।” यही महिला सशक्तिकरण का ट्रस्ट का मॉडल है।
पूरी तरह नशा मुक्त परिसर
ट्रस्ट की एक और खास बात है। आराध्यम परिसर में किसी भी प्रकार के नशे का सेवन पूर्णतः वर्जित है। यह ट्रस्ट के ‘व्यसन मुक्ति’ अभियान का ही विस्तार है।
*स्थान*: आराध्यम्, रिनिया बालाजी मंदिर के पास, सेखाला – देवातू रोड, जोधपुर, राजस्थान 342025
*तारीख*: 4, 5, 6 जुलाई 2026
अध्यक्ष नरेंद्र सुराणा के शब्दों में, “आराध्यम कोई इमारत नहीं, एक विचार है। और हम चाहते हैं कि यह विचार हर घर तक पहुंचे।”

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