
सुरेंंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर
Key Line Times
कंटालिया, पाली (राजस्थान) ,जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में तथा जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता महामना भिक्षु स्वामी की जन्मभूमि कंटालिया में महामना की जन्म त्रिशताब्दी वर्ष ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ के महाचरण का आयोजन भव्य समायोजन गतिमान है।
मंगलवार को ‘भिक्षु समवसरण’ में आयोजित महाचरण के नौवें दिन का कार्यक्रम शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार से हुआ। साध्वी वैभवप्रभाजी ने गीत का संगान किया। आज के दिन के निर्धारित विषय ‘आचार्य भिक्षु की ज्ञान संपदा’ पर साध्वी श्रुतयशाजी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तदुपरान्त अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि चार अंगों वाला मोक्ष मार्ग है। मोक्ष की प्राप्ति के लिए धर्म की साधना आवश्यक है। मोक्ष के मार्ग के अंगों में एक ज्ञान भी है। धर्म की साधना में ज्ञान भी सहयोगी बनता है। सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन, सम्यक् चारित्र और तप होता है तो मोक्ष की दिशा में गति हो सकती है।
ज्ञान की आराधना स्वाध्याय से हो सकती है और ज्ञानाराधना से कर्म निर्जरा की बात भी हो सकती है। इससे मार्गदर्शन की प्राप्ति भी हो सकती है। आदमी को श्रुतधर होना बहुत अच्छी बात होती है। ज्ञान के संदर्भ में तीन बातें होती हैं- पहला है बुद्धि, दूसरा है ज्ञान और तीसरा है प्रस्तुति की कला। आदमी को ज्ञान के विकास के लिए बुद्धि, प्रतिभा और प्रज्ञा हो तो ज्ञान का विकास हो सकता है। ज्ञान के विकास के लिए बुद्धि का होना बहुत अच्छी बात है। तीक्ष्ण बुद्धि होती है तो अज्ञान को काटकर ज्ञान का विकास करने में सहायक बनती है।
परम पूजनीय, परम वंदनीय आचार्यश्री भिक्षु को देखता हूं तो मुझे अनुमान होता है कि उनमें बुद्धि भी थी, उनमें ज्ञान भी था और फिर उसकी प्रस्तुति की कला भी बहुत अच्छी थी। तीनों बातों का योग उनके भीतर प्रतीत हो रही है। आचार्यश्री भिक्षु की ज्ञान संपदा भी विलक्षण थी। उनका बाहुश्रुत्य बहुत विशाल था। भिक्षु दृष्टांत ग्रंथ को देखें तो उनमें उनकी प्रतिपादन की कला दिखाई देती है। दूसरों को समझाने व बताने की बहुत कला थी। उन्होंने आगमों का कितना अध्ययन किया होगा। आचार्यश्री भिक्षु की ज्ञान संपदा बहुत उत्कृष्ट थी। उनके बहुआयामी व्यक्तित्व का एक अंग है उनके ज्ञान की संपदा। उनके इतने ग्रंथ भी उनकी ज्ञान संपदा को दर्शाने वाले हैं।
इन दिनों में गुरुदर्शन करने वाली साध्वियों ने आचार्यश्री की आज्ञा से उपस्थित संत समाज को सविधि वंदन कर खमतखामणा की विधा सम्पन्न करते हुए सुखपृच्छा की। मुनि दिनेशकुमारजी ने संत समाज की ओर खमतखामणा की। श्री अभिनव सेठिया ने आचार्यश्री से 13 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। कंटालिया की बेटियों ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने बेटियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में श्री एसएस हायर सेकेण्ड्री स्कूल-हरियामाली के बच्चे भी उपस्थित थे। स्कूल के निदेशक श्री गजेन्द्रसिंह ने अपनी अभिव्यक्ति दी। छात्रा निकिता बंजारा ने आचार्यश्री भिक्षु के विषय में अपनी प्रस्तुति दी। छात्रा गुंजन राठौड़, गुंजन जेतावत व छात्र भरत भाटोतरा ने भी अपनी प्रस्तुति दी। आचार्यश्री ने बच्चों के जिज्ञासाओं को भी समाहित करने के उपरान्त मंगल प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री के आह्वान पर उपस्थित विद्यार्थियों ने आचार्यश्री से सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का संकल्प स्वीकार किया।

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