
मौहम्मद हयात गैसावत, जिला ब्यूरो चीफ नागौर
Key Line Times
नागौर,जब भी अपने बच्चों—चाहे बेटा हो या बेटी—के लिए रिश्ता देखने निकलो, तो सिर्फ चेहरे, शानो-शौकत या खानदान की चमक मत देखो। असल पहचान तो घर की परवरिश और आदतों में छिपी होती है।अगर लड़की का रिश्ता देख रहे हो, तो उसकी मां को जरूर देखो—वह अपने ससुराल में कैसे रहती है, कैसे निभाती है, यही आपकी बहू के आने वाले कल की झलक होती है।और अगर लड़का का रिश्ता देख रहे हो, तो उसके बाप को गौर से परखो—क्या वह खुद के दम पर खड़ा है या ससुराल की कमाई पर निर्भर? कहीं उसने दूसरों की जिंदगी में जहर तो नहीं घोला? क्योंकि आजकल समाज में ऐसे लुटेरों की कमी नहीं, जो रिश्ते के नाम पर लोगों को बरबाद कर देते हैं।रिश्तों में सिर्फ दादा-नाना की दौलत मत तौलो।असल सवाल यह है: उसके बाप के पास क्या है? वह खुद क्या करता आया है? क्योंकि चरित्र और कर्म ही वह नींव हैं, जिन पर आपके बच्चे का भविष्य खड़ा होगा।अपने बेटे-बेटी की जिंदगी किसी लालच, दिखावे या झूठी इज्जत के आधार पर मत सौंपो। रिश्ता वही अच्छा है, जहां परिवार की नींव सच्चाई, मेहनत और इज्जत पर टिकी हो।

