Surendra Munot Associate Editor all india Key
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कोलकाता, सान्निध्य: परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3
*विषय: या देवी सर्वभूतेषु…. मेरी शक्ति की कहानी*
*आयोजक: महिला मंडल एवं युवती मंडल*
अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा निर्देशित एवं उत्तर हावड़ा महिला मंडल एवं युवती मंडल के तत्वावधान में *“शक्ति की पहचान, प्रतिभा की उड़ान”* विषयक एक अत्यंत प्रेरणादायी और भव्य विशेष कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। 
। यह कार्यक्रम दो प्रमुख चरणों में संपन्न हुआ, जिसमें युवतियों और महिलाओं ने अपनी प्रतिभा, कला और जीवन के अनुभवों को मंच पर साझा किया।
*कार्यक्रम का शुभारंभ एवं स्वागत* कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ *मुनिश्री जिनेश कुमार जी* के पावन सानिध्य में नमस्कार महामंत्र एवं अर्हम के जाप के साथ हुआ। तत्पश्चात, महिला मंडल की बहनों द्वारा अत्यंत मधुर स्वर में मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। इसके बाद, महिला मंडल की अध्यक्षा सुजाता जी दुगड़ द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। उन्होंने सभी का हार्दिक स्वागत करते हुए इस आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित किया।
*प्रथम चरण: युवती मंडल –*
*या देवी सर्वभूतेषु “YUVTI SHAKTI – THE SHOWCASE”*
कार्यक्रम के पहले चरण का कुशल संयोजन युवती मंडल की संयोजिका शीतल जी हिरावत द्वारा किया गया। इस सत्र में युवतियों ने बढ़-चढ़कर अपनी सोलो प्रस्तुतियां दीं, जिसमें उन्होंने कला, सृजनात्मकता, ओजस्वी वक्ता के रूप में स्पीच और मनमोहक कविताओं के माध्यम से अपनी अनूठी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए नारी शक्ति पर अपने बेबाक और सुंदर विचार व्यक्त किए। इस चरण के अंतर्गत युवतियों की प्रस्तुतियों के आधार पर विजेताओं को सम्मानित किया गया और उन्हें पुरस्कृत किया गया।
*द्वितीय चरण: महिला मंडल – “मेरी शक्ति की कहानी”*
दूसरे चरण का संयोजन महिला मंडल की उपमंत्री सरिता जी पटावरी द्वारा किया गया। यह सत्र महिलाओं के आत्म-संस्मरण और अनुभवों के नाम रहा, जिसमें महिलाओं ने अपने जीवन से जुड़े संघर्ष, चुनौतियों, सीख और बदलाव लाने वाले अनमोल अनुभवों को खुलकर साझा किया तथा *“मेरी शक्ति का आईना”* एवं *“मेरी शक्ति की एक वजह”* जैसी विशेष गतिविधियों के माध्यम से एक-दूसरे की आंतरिक शक्ति को पहचाना और उसकी सराहना की। श्रीमती संध्या जी बोथरा जो रत्नाकर नॉर्थ प्वाइंट स्कूल की वरिष्ठ हिंदी अध्यापिका एवं जो आईसीएसई बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करती है एवं मुख्य पर्यवेक्षक के रूप में कार्यरत है उन्होंने भी अपने अनुभव साझा किया।
*निर्णायक मंडल*
कार्यक्रम की प्रतियोगिताओं और प्रस्तुतियों का मूल्यांकन संध्या जी बोथरा द्वारा निष्पक्ष और सराहनीय रूप से जज के रूप में किया गया।
कार्यक्रम में *मुनिश्री जिनेश कुमार जी* का परम सान्निध्य एवं मंगल उद्बोधन प्राप्त हुआ। मुनिश्री ने अपने आशीर्वाचन में फरमाया कि हर नारी के पास असीम आंतरिक शक्ति होती है। उन्होंने शक्ति को न पहचान पाने के चार मुख्य कारण (अज्ञान, कषाय, मोह और प्रमाद) बताए। मुनिश्री ने स्पष्ट किया कि संकल्प शक्ति मजबूत होने पर सब कुछ संभव है और इसे बढ़ाने के पांच आधारस्तंभ — जप, तप, संयम, ध्यान और स्वाध्याय हैं। उनके इन प्रेरणादायी वचनों ने सभी को आत्म-बल बढ़ाने की नई दृष्टि दी।
*आभार ज्ञापन*
कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्रीमती सरिता जी राखेचा ने सफल आयोजन के लिए मुनिश्री, सभी पदाधिकारियों, संयोजिकाओं, प्रतिभागियों और उपस्थित सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस गरिमामय आयोजन में परामर्शिका नीलम जी चोड़रिया ने भी अपने अनुभवों को साझा किया एवं अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और साथ ही 63 बहनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
यह कार्यक्रम सभी के लिए एक यादगार और ऊर्जावान अनुभव साबित हुआ। कार्यक्रम के अंत में अल्पाहार की व्यवस्था की गई।
अध्यक्ष मंत्री
सुजाता दुगड़ सरिता राखेचा

