गुजरात,आहवा-डांग
आहवा: दिनांक 29: डांग जिले के किसान आज बागवानी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। किसानों की निरंतर मेहनत तथा राज्य सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप जिले में बागवानी खेती को पर्याप्त प्रोत्साहन मिल रहा है।
डांग जिले के वघई तालुका स्थित जामलापाड़ा गांव में अंबिका बागायत फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक सहकारी मंडली द्वारा काजू उत्पादन तथा काजू प्रोसेसिंग का कार्य किया जा रहा है। इस मंडली के माध्यम से डांग जिले के लोग काजू की खेती की ओर आकर्षित हुए हैं और घर-आंगन में ही रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। जामलापाड़ा स्थित अंबिका बागायत उत्पादक सहकारी मंडली किसानों के सहयोग से काजू प्रोसेसिंग प्लांट संचालित कर रही है। साथ ही यहां काजू के वैल्यू एडिशन हेतु प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना भी की गई है। वर्ष 2000 में इस मंडली की स्थापना की गई थी।
मंडली के सचिव श्री चिंतुभाई गावित बताते हैं कि जामलापाड़ा क्षेत्र में शुरुआत में बायफ संस्था द्वारा 18 ग्रामीण क्षेत्रों में वाड़ी प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। जिसमें प्रत्येक गांव में एक एकड़ जमीन पर 40 काजू के पौधे लगाए गए थे। इसके बाद मंडली की स्थापना की गई और काजू की बिक्री शुरू की गई। साथ ही यहां काजू प्रोसेसिंग यूनिट भी शुरू की गई।
यह मंडली बाजार के उचित भावों के अनुसार किसानों से कच्चे काजू की खरीद कर उसका प्रोसेसिंग करती है और मंडली के माध्यम से बिक्री करती है। यहां काजू प्रोसेसिंग के दौरान स्थानीय महिलाओं को घर बैठे रोजगार भी उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने आगे बताया कि 8 से 9 महीनों तक लगातार काजू प्रोसेसिंग का कार्य चलता रहता है, जिससे गांव की महिलाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। वे अपने घरेलू कार्यों के साथ गांव में ही रोजगार प्राप्त कर रही हैं। उन्हें बागवानी विभाग से शॉर्टिंग और ग्रेडिंग उपकरणों पर 90 प्रतिशत सब्सिडी मिली है, जबकि प्रोसेसिंग उपकरणों पर 75 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की गई है।
अंबिका बागायत मंडली में कार्यरत श्रीमती उर्मिलाबेन सतीशभाई राठौड़ बताती हैं कि वे पिछले 20 वर्षों से इस मंडली में काम कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलने के कारण उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ता। इसके अलावा वे घर के काम के साथ मंडली में भी कार्य कर रही हैं।
श्रीमती बेबीबेन ठाकरे बताती हैं कि उनके गांव में ही सरकार द्वारा मंडली की स्थापना किए जाने से वे घर-आंगन में ही मंडली में काम करके रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि बागवानी विभाग द्वारा जामलापाड़ा गांव में काजू के वैल्यू एडिशन का यह अनोखा स्टार्टअप शुरू किया गया है। यहां काजू की ग्रेडिंग, पैकिंग, शॉर्टिंग और प्रोसेसिंग करके वघई-सापुतारा आने वाले पर्यटकों तथा अन्य लोगों को काजू की बिक्री की जाती है। साथ ही स्थानीय किसानों को भी बाजार के अनुरूप उचित मूल्य दिया जाता है। मंडली द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख रुपये का टर्नओवर किया जा रहा है।
गौरतलब है कि 1 और 2 मई को गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री Bhupendra Patel की अध्यक्षता में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस Vibrant Gujarat Regional Conference का आयोजन Surat में होने जा रहा है। इससे स्थानीय उद्यमियों को नया मंच मिलेगा और उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार मिलने के अवसर भी खुलेंगे।



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