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रामदेव सजनाणी,राष्ट्रीय संवाददाता
Key Line Times
जोधपुर, चिकित्सा मंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र में ही सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ टूट चुकी है। एक तरफ चाडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रात होते ही तालों में कैद हो जाता है, तो दूसरी तरफ 50 से अधिक गांवों के बीच स्थित आऊ का उपजिला अस्पताल भी रात में सिर्फ एक नर्सिंगकर्मी के भरोसे चल रहा है। आपातकाल में न डॉक्टर मिलते हैं, न समय पर इलाज।
12 घंटे दर्द सहा, फिर भी रेफर कर दिया — आऊ में गर्भवती के साथ हुआ ये सलूक
दो दिन पहले का वाकया पूरे सिस्टम को बेनकाब करता है। एसकेडी निवासी सुनील अपनी गर्भवती बहन को प्रसव पीड़ा होने पर रात करीब 3 बजे आऊ उपजिला अस्पताल लेकर पहुंचे। सुनील बताते हैं, “पूरे अस्पताल में सिर्फ एक महिला नर्सिंगकर्मी थी। रात की ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।”
गंभीर बात यह रही कि नॉर्मल डिलीवरी का केस होने के बावजूद गर्भवती को 12 घंटे तक अस्पताल में भर्ती रखा गया। दूसरे दिन दोपहर 3 बजे उसे फलोदी जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। 60 किमी का सफर तय कर फलोदी पहुंचने पर डॉक्टरों ने तत्काल नॉर्मल डिलीवरी करवा दी।
“अगर आऊ में डॉक्टर होता तो सुनील ने बताया कि मेरी बहन को 12 घंटे असहनीय दर्द नहीं सहना पड़ता। न 60 किमी दूर भागना पड़ता। यह कैसा उपजिला अस्पताल है जहां नॉर्मल केस भी हैंडल नहीं होता?” सुनील ने रोष जताते हुए पूछा।
सवाल लाजमी है— जब चार जिलों के मध्य हाईवे पर स्थित और 50 से अधिक गांवों से घिरे आऊ उपजिला अस्पताल में ही रात को डॉक्टर नहीं मिलेंगे, तो इसे ‘उपजिला अस्पताल’ का दर्जा देने का औचित्य क्या है? एक्सीडेंट के मामलों में भी यहां प्राथमिक उपचार देकर सीधे रेफर कर दिया जाता है।
*चाडी सीएचसी: 13 स्टाफ के बावजूद रात 9:30 बजे लटका मिला ताला*
चाडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति और भी शर्मनाक है। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों पर बुधवार रात 9:30 बजे बीसीएमओ आऊ डॉ. संजय सिंह चम्पावत औचक निरीक्षण पर पहुंचे तो मुख्य गेट पर ताला लटका था। हैरानी की बात यह कि सीएचसी में 3 डॉक्टर समेत कुल 13 कर्मचारी तैनात हैं, फिर भी रात में एक भी कर्मी मौजूद नहीं था। सूचना मिलने पर आनन-फानन में स्टाफ बुलाया गया, तब जाकर ताला खोला गया।
*दो हाईवे के बीच अस्पताल, पर गोल्डन आवर में नहीं मिलता इलाज*
चाडी सीएचसी फलोदी-नागौर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 19 और भारतमाला एक्सप्रेस हाईवे के किनारे स्थित है। दोनों ही सड़कें दुर्घटना के लिहाज से अति संवेदनशील हैं। रात में सड़क हादसा या प्रसव का केस आने पर मरीजों को आऊ, ओसियां या सीधे फलोदी दौड़ना पड़ता है। ‘गोल्डन आवर’ यानी हादसे के बाद का पहला एक घंटा, जिसमें इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है, उसी में मरीज सड़कों पर भटकता रहता है।
*5 साल से धूल फांक रही सीबीसी मशीन, रोज 70 मरीज हो रहे मजबूर*
चाडी सीएचसी में बदइंतजामी का आलम यह है कि पिछले 5 साल से सीबीसी यानी कम्प्लीट ब्लड काउंट मशीन बंद पड़ी है। रोजाना ओपीडी में आने वाले करीब 150 मरीजों में से 70 को खून की साधारण जांच के लिए भी निजी लैबों में 300 से 500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच न मिलने से गरीब और ग्रामीण मरीजों की कमर टूट रही है।
*बीसीएमओ की सख्ती, प्रभारी को थमाया नोटिस*
मौके की नजाकत को देखते हुए बीसीएमओ डॉ. संजय सिंह चम्पावत ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “चाडी सीएचसी को 24 घंटे संचालित रहना अनिवार्य है। रात में ताला लगना आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है। इसे किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने तत्काल प्रभाव से चिकित्सा अधिकारी प्रभारी ओमप्रकाश को कारण बताओ नोटिस जारी कर रात में पूरे स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
*ग्रामीणों में आक्रोश: ‘मंत्रीजी के क्षेत्र में ही ये हाल?’*
आऊ और चाडी क्षेत्र के ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है, “जब चिकित्सा मंत्री के क्षेत्र में उपजिला अस्पताल में रात को डॉक्टर नहीं और सीएचसी पर ताला लटका है, तो प्रदेश के बाकी हिस्सों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मजबूरी में निजी अस्पतालों में लुटना पड़ रहा है।”
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आऊ उपजिला अस्पताल और चाडी सीएचसी दोनों में 24 घंटे डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और जांच सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही लापरवाह कर्मचारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो ताकि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर जनता का भरोसा कायम रह सके।
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*इनसेट: एक नजर में बदहाली*
– *चाडी सीएचसी*: रात को मुख्य गेट पर ताला, 3 डॉक्टर-13 स्टाफ के बावजूद नदारद। सीबीसी मशीन 5 साल से बंद, रोज 70 मरीज निजी लैब में जाने को मजबूर।
– *आऊ उपजिला अस्पताल*: 50+ गांवों के बीच, चार जिलों को जोड़ने वाले हाईवे पर स्थित। रात में सिर्फ नर्सिंगकर्मी, डॉक्टर नदारद। नॉर्मल डिलीवरी केस भी 12 घंटे बाद फलोदी रेफर। एक्सीडेंट केस में सिर्फ प्राथमिक उपचार, फिर रेफर।
– *निर्भर आबादी*: 15-20 गांव सीधे, हाईवे के चलते हजारों यात्रियों का दबाव।
– *कार्रवाई*: चाडी सीएचसी प्रभारी ओमप्रकाश को कारण बताओ नोटिस जारी।
*फोटो कैप्शन-1*: रात 9:30 बजे औचक निरीक्षण के दौरान चाडी सीएचसी के मुख्य गेट पर लटका ताला।
*फोटो कैप्शन-2*: आऊ उपजिला अस्पताल, जहां रात में डॉक्टर की गैर-मौजूदगी में गर्भवती को 12 घंटे बाद रेफर करना पड़ा।

पश्चिम बंगाल में पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित कई कार्यकर्ता चुनाव में जुटे। 