
सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर
Key Line Times
रतनगढ,रतनगढ़ की पावन भूमि परखेल, संस्कार और भविष्य निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया।सेठ श्री भँवरलाल–बुद्धमल दुगड़ राजकीय नेहरू स्टेडियम परिसर में नवनिर्मित भव्य इंडोर स्टेडियम का
लोकार्पण दिनांक 25 जनवरी को
गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। माननीय मंत्री महोदय
श्री झाबर सिंह जी खर्रा, राजस्थान सरकार की सम्माननीय उपस्थिति एवं कर-कमलों से और साथ ही
इस अवसर पर विशिष्ट मुख्य अथिति रूप से उपस्थित रहे—
▪️ माननीय श्री पूसाराम राम जी गोधरा, विधायक, रतनगढ़
▪️ माननीय श्री अभिनेश जी महर्षि, पूर्व विधायक, रतनगढ़
▪️ माननीय श्री पंकज जी गुप्ता
▪️ माननीय श्री रफीक जी मंडेलिया
कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय श्रीमती अर्चना जी सारस्वत,
अध्यक्ष, नगर पालिका रतनगढ़ द्वारा की गई।यह इंडोर स्टेडियम केवल एक संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने का एक सशक्त माध्यम है। जहाँ खेल अनुशासन बनेगा,आत्मविश्वास पनपेगा और भविष्य आकार लेगा।आज इस स्टेडियम में विविध गतिविधियाँ नियमित रूप से संचालित हो रही हैं, 400 मीटर का आधुनिक रेस ट्रैक ग्रामीण युवाओं के लिए नई संभावनाओं और नए सपनों का मार्ग खोल रहा है। अब इस इंडोर स्टेडियम में
🔹 बैडमिंटन,
🔹 टेबल टेनिस,
🔹 बास्केटबॉल,
🔹 जिम्नास्टिक्स एवं शारीरिक प्रशिक्षण,
🔹 योग, ध्यान एवं फिटनेस गतिविधियाँ,
🔹 खेलों से जुड़ी शारीरिक एवं मानसिक अनुशासनात्मक ट्रेनिंग जैसी विविध इंडोर खेल गतिविधियाँ नियमित रूप से संचालित होंगी, जिससे गाँव और आसपास के क्षेत्र के
बच्चों व युवाओं को और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और प्रेरणादायी खेल वातावरण प्राप्त होगा। यह इंडोर स्टेडियम
केवल खेल अभ्यास का स्थान नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व गुणों के विकास का एक सशक्त केंद्र बनेगा।आज हृदय गर्व और कृतज्ञता से भर उठा कि
हमारी जन्मभूमि के बच्चों और युवाओं को
एक और उत्कृष्ट खेल-सुविधा प्राप्त हुई। यह स्टेडियम
दुगड़ परिवार और राजस्थान सरकार के बीच
एक आदर्श सहभागिता का जीवंत उदाहरण है—
और उन सभी परिवारों के लिए एक मौन प्रेरणा भी,
जो गाँव से दूर, देश या विदेश में रहते हुए भी
अपनी मातृभूमि से जुड़ाव बनाए रखते हैं।यह स्मरण कराता है कि कर्तव्य और निष्ठा कभी दूरी नहीं देखते।
“कर्तव्यं योगमित्याहुः।” जहाँ मातृ कृपा, पितृ आशीर्वाद
और जन्मभूमि का संस्कार साथ हो वहाँ मातृभूमि के लिए किया गया समर्पित कार्य इतिहास बन जाता है
और भावी पीढ़ियों के लिए आदर्श।

